"उठ जा राजा बेटा…" दिल को चीर देने वाला मंजर आया सामने! मां की लाश से चिपका मिला मासूम, पिता की चीख से रो पड़ा देश...

Bargi Dam Cruise Tragedy: इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई, लेकिन दिल्ली के एक परिवार की कहानी ने हर किसी को रोने पर मजबूर कर दिया।

Priya Singh Bisen
Published on: 2 May 2026 1:22 PM IST (Updated on: 2 May 2026 1:22 PM IST)
Bargi Dam Cruise Tragedy
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Bargi Dam Cruise Tragedy (PHOTO: AI)

Bargi Dam Cruise Tragedy: मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित बरगी डैम में अंदर से झकझोट देने वाले वाले बेहद दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई, लेकिन दिल्ली के एक परिवार की कहानी ने हर किसी को रोने पर मजबूर कर दिया। यह कहानी है एक मां की, जिसने अपनी अंतिम सांसे चलने तक अपने 4 साल के बेटे को सीने से लगाए रखा, और एक पिता की, जिसकी दुनिया एक झटके में उजड़ गई।

एक झटके में उजड़ गयी दुनिया

दिल्ली के रहने वाले प्रदीप मेसी अपनी पत्नी मरीना और 4 साल के बेटे त्रिशान के साथ छुट्टियां मनाने जबलपुर पहुंचे थे। बेटे गुरुवार की शाम परिवार खुशियों से भरा हुआ था। तीनों बरगी डैम में क्रूज की सवारी कर रहे थे और नर्मदा की लहरों का पूरी तरह से आनंद ले रहे थे। लेकिन किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह खुशियों भरा पल कुछ ही देर में मातम में बदल जाएगा।

एकाएक मौसम के करवट लेने से मातम में बदला गया खुशी भरा माहौल

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एकाएक मौसम ने करवट ली और तेज हवाएं चलने लगीं। कुछ ही पल में हालात बिगड़ गए। क्रूज के चालक ने यात्रियों को नीचे जाने और खिड़कियां बंद करने के आदेश दिए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ ही मिनटों में 8-10 फीट ऊंची लहरें उठना शुरू हो गयीं और पानी के दबाव से क्रूज की खिड़कियां टूट गईं। देखते ही देखते पानी तेजी से अंदर भरने लगा और क्रूज पूरा पलट गया।

घटना से चारों तरफ चीख-पुकार

इस भयावह मंजर के बीच चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए जूझ रहे थे। उसी अफरा-तफरी के बीच मरीना ने जो किया, वह ममता की मिसाल बन गया। जैसे ही उन्हें खतरे का अहसास हुआ, उन्होंने अपने बेटे त्रिशान को कसकर सीने से लगा लिया। उन्होंने अपनी लाइफ जैकेट के अंदर बेटे को सुरक्षित रखने का पूरा प्रयास किया और आखिरी पल तक उसे नहीं छोड़ा।

हर व्यक्ति को भावुक कर गया यह दृश्य


लगभग 14 घंटे बाद जब सेना की डाइविंग टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, तो मलबे के अंदर का दृश्य देखकर सभी के रोंगटे खड़े हो गए। गोताखोरों ने देखा कि मरीना का शव पानी की गहराई में था, लेकिन उनके सीने से त्रिशान उसी तरह से लिपटा हुआ था। मां की पकड़ इतनी मजबूत थी कि दोनों को अलग करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।

दिल को चीर देने वाला मंजर देख कांप उठे लोग

शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद जब दोनों के शव परिवार वालों को सौंपे गए, तो माहौल और भी पूरी तरह से गमगीन हो गया। जैसे ही प्रदीप मेसी ने अपनी पत्नी और बेटे का चेहरा देखा, वे खुद को संभाल नहीं पाए। उन्होंने बेटे का हाथ पकड़कर बार-बार कहा "राजा बेटा उठ जा… यूं चुप मत रह… देख पापा आए हैं…"। अस्पताल के गलियारे में गूंजती उनकी चीखें हर किसी के दिल को चीर देने वाली थीं। वे कभी पत्नी को पुकारते, तो कभी बेटे को जगाने का प्रयास करते।

सिस्टम की लापरवाही पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस दर्दनाक घटना ने जहां एक मां के बलिदान को सामने लाया है, वहीं सिस्टम की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों और चश्मदीदों का आरोप है कि क्रूज पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। लाइफ जैकेट्स केवल दिखावे के लिए रखी गई थीं और आवश्यकता के वक़्त यात्रियों तक नहीं पहुंच सकीं। इसके अलावा, मौसम खराब होने के बावजूद क्रूज को बीच नदी में ले जाया गया, जो एक बड़ा सवाल है।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का यह भी कहना है कि क्रूज पर निर्धारित क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई। चालक भी हालात को संभालने में नाकाम रहा। इन सभी लापरवाहियों ने मिलकर एक बड़े हादसे को जन्म दिया, जिसमें कई मासूम जिंदगियां एक झटके में ख़त्म हो गईं।

रह गयीं केवल यादें

अब प्रदीप मेसी के पास केवल यादें बची हैं। वे अपनी बेटी के साथ अकेले दिल्ली लौटेंगे। उनकी जिंदगी में जो खालीपन आया है, उसे शायद अब कभी भी भरा नहीं जा सकेगा। मरीना की बहादुरी और त्रिशान की मासूमियत हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेगी।

बरगी डैम की लहरें अब भले ही शांत हो चुकी हैं, लेकिन इस हादसे की गूंज लंबे वक़्त तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक मां के अद्भुत साहस और एक पिता के टूटे हुए दिल की कहानी है।

क्या सरकार उठाएगी कोई कदम ?

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्थाएं इतनी कमजोर हैं कि एक छोटी सी लापरवाही इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाए? अब देखना यह है कि प्रशासन इस हादसे से कैसा सबक लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Priya Singh Bisen

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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