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मात्र 60 सेकंड में सब खत्म! पायलट ने बताया बरगी डैम क्रूज हादसे का 'दिल दहला' देने वाला सच... खुलासे से बढ़ा सस्पेंस
Bargi Dam Cruise Tragedy: इस हादसे के बीच इस वक़्त सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर उस शाम ऐसा हुआ क्या था? क्या यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा थी या फिर किसी गंभीर लापरवाही का नतीजा?
Bargi Dam Cruise Tragedy (photo: social media)
Bargi Dam Cruise Tragedy: बरगी डैम में हुए बेहद दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे देश को अंदर से हिलाकर रख दिया है। एकदम शांत और खूबसूरत माने जाने वाले इस जलाशय में एक ही पल में लोगों की खुशियां मातम में बदल गयीं। 30 अप्रैल की शाम हुए इस हादसे में अब तक 11 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, 2 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में NDRF, SDRF और सेना की गोताखोर टीमें निरंतर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
इस हादसे के बीच इस वक़्त सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर उस शाम ऐसा हुआ क्या था? क्या यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा थी या फिर किसी गंभीर लापरवाही का नतीजा? इसी सवाल का जवाब देते हुए क्रूज के पायलट महेश पटेल ने अपनी आपबीती बताई है, जो अब इस मामले के केंद्र में आ गई है।
20 साल का अनुभव, फिर भी एक झटके में सब बदल गया
45 साल के महेश पटेल, जो बरगी डैम के घुल्लापाट गांव के रहने वाले हैं, उन्होंने बताया कि वह पिछले दो दशकों से पानी में नाव और क्रूज संचालन का काम कर रहे हैं। उन्होंने साल 2012 में गोवा से पायलटिंग का लाइसेंस प्राप्त किया था और तब से पेशेवर के तौर पर इस काम में जुड़े हुए हैं।
महेश के मुताबिक, हादसे वाले दिन शाम करीब 5:16 बजे तक सब कुछ ठीक था। क्रूज पर्यटक मौज-मस्ती कर रहे थे और मौसम भी स्थिर बना हुआ था। लेकिन शाम 5:45 बजे के आसपास अचानक स्थिति बदल गई। उनके अनुसार, क्रूज किनारे से लगभग 50 मीटर की दूरी पर था, जब अचानक एक जोरदार झटका महसूस हुआ और देखते ही देखते नाव असंतुलित होने लगी।
'60 सेकंड में सब खत्म' - पायलट का दर्दनाक बयान
हादसे की सबसे भयावह दृश्य को बताया। उनके अनुसार, पूरा घटनाक्रम मात्र 60 सेकंड के अंदर खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि जैसे ही पहली बड़ी लहर ने क्रूज को टक्कर मारी, स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। “मैं पायलट केबिन में था और नीचे ज़बरदस्त अफरा-तफरी मच गई थी। चीख-पुकार सुनाई दे रही थी, लेकिन मैं तुरंत कुछ नहीं कर पाया। अगले ही पल क्रूज पलट गया,” उन्होंने बताया।
महेश का दावा है कि उन्होंने उस दौरान कुछ बच्चों को सुरक्षित निकालने का पूरा प्रयास भी किया, लेकिन तेज लहरों और भंवर ने हालात और बिगाड़ दिए। किसी तरह लाइफ जैकेट की सहायता से वह खुद तैरकर किनारे तक पहुंचे, हालांकि इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं।
लाइफ जैकेट को लेकर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद सामने आए वीडियो में कई पर्यटक बिना लाइफ जैकेट के नजर आ रहे हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इस पर सफाई देते हुए महेश पटेल ने कहा कि सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट उपलब्ध थी और उन्हें पहनने के आदेश भी दिए जाते हैं। उन्होंने कहा, “लोग अक्सर मस्ती के दौरान इसे पहनने से बचते हैं। कई बार बच्चे और युवा इसे बोझ समझकर उतार देते हैं।” हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र जांच अभी जारी है और प्रशासन भी सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर रहा है।
तकनीकी खराबी का भी खुलासा
हादसे को लेकर पायलट ने एक और भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसने जांच को और गंभीर बना दिया है। महेश के मुताबिक, क्रूज के दो इंजनों में से एक इंजन पहले से ही खराब चल रहा था।
उन्होंने बताया कि इस तकनीकी समस्या की जानकारी संबंधित विभाग को 3 महीने पहले दी गई थी। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि एक इंजन के सहारे क्रूज को चलाया जा सकता था, लेकिन संकट के समय वह पर्याप्त साबित नहीं हुआ। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में तेजी से लगी हुई हैं कि क्या तकनीकी खामी ने हादसे को और गंभीर बना दिया।
जांच के घेरे में हादसा, कई सवाल बाकी
इस दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या क्रूज संचालन में लापरवाही हुई? क्या मौसम की सही जानकारी नहीं ली गई? या फिर तकनीकी खराबी को वक़्त रहते अनदेखा किया गया?
फिलहाल, इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि बरगी डैम का यह हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया है।
बता दे, अभी भी लापता लोगों की तलाश जारी है और प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।


