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मास्टरजी की नई ड्यूटी! घाट पर संभालेंगे भीड़, भोपाल में आदेश पर बवाल
Bhopal Teachers Duty: भोपाल में 16 सरकारी शिक्षकों की खटलापुरा घाट पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए ड्यूटी लगाई गई है। शाम 4 से रात 12 बजे तक की तैनाती पर शिक्षक संघ ने नाराजगी जताई।
Durga Idol Immersion
Bhopal Teachers Duty: स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक (Government Teachers) अब घाट पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ संभालते नजर आएंगे। भोपाल (Bhopal) में जिला शिक्षा अधिकारी (District Education Officer) कार्यालय के एक आदेश ने गैर-शैक्षणिक कार्यों (Non-Teaching Duties) में शिक्षकों की तैनाती को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आदेश के तहत 16 सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी खटलापुरा घाट (Khatlapura Ghat) पर प्रतिमा विसर्जन के दौरान व्यवस्था संभालने के लिए लगाई गई है। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया है कि आखिर पढ़ाई से जुड़े कर्मचारियों को बार-बार ऐसे कामों में क्यों लगाया जाता है।
शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक रहेगी ड्यूटी
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 19 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, 20 से 23 अक्टूबर तक हर दिन चार शिक्षकों को खटलापुरा घाट पर तैनात किया जाना है। उनकी ड्यूटी शाम 4 बजे से आधी रात तक निर्धारित की गई है। इस जिम्मेदारी में प्रिंसिपल (Principal), वाइस-प्रिंसिपल (Vice-Principal) और माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षक शामिल हैं।
इन शिक्षकों को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन (Durga Idol Immersion) के दौरान घाट पर जुटने वाली भीड़ को संभालने और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना होगा। त्योहार के दौरान घाट पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने यह व्यवस्था की है।
शिक्षक संघ ने उठाए गैर-शैक्षणिक ड्यूटी पर सवाल
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकारी शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों में लगाया जाना शिक्षा व्यवस्था (Education System) के लिए ठीक नहीं है। उनके मुताबिक, प्रशासन बड़े आयोजनों में अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ने पर स्कूलों के शिक्षकों को तैनात कर देता है। इससे शिक्षकों के मूल काम और विद्यार्थियों की पढ़ाई (Students' Education) पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
गुरुजी शिक्षक संघ, मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राकेश पटेल ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन ने पहले भरोसा दिलाया था कि शिक्षकों को मुख्य रूप से जनगणना (Census) और मतदाता सूची संशोधन (Voter List Revision) जैसे जरूरी कार्यों में ही लगाया जाएगा। ऐसे में दुर्गा विसर्जन के दौरान, खासकर सार्वजनिक अवकाश पर, उनकी ड्यूटी लगाना उचित नहीं है।
प्रशासन ने आदेश को बताया सामान्य
शिक्षक संघों का तर्क है कि भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) और सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग तथा स्वयंसेवकों जैसे संबंधित कर्मियों की होनी चाहिए। वहीं, भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य ने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। उनके मुताबिक, शिक्षकों को पहले भी अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं।
फिलहाल इस मामले में शिक्षक संगठनों की नाराजगी और प्रशासन के रुख के बीच बहस तेज हो गई है। बड़ा सवाल यही है कि सार्वजनिक आयोजनों की व्यवस्था और शिक्षकों की शैक्षणिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।


