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भोपाल समेत अलग-अलग शहरों में दिवाली का उत्साह, रोशनी से सज गए बाजार; जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त
Diwali Celebration: भोपाल में दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही घरों और बाजारों में दीपोत्सव की तैयारियां देखने को मिल रही हैं। बाजारों में मिठाइयों, फूलों, सजावटी सामान, दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों की दुकानों पर रौनक है।
Diwali Celebration : दीपावली का त्योहार राजधानी भोपाल समेत अलग-अलग शहरों में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत प्रदेश के अलग-अलग शहरों में दीपोत्सव को लेकर खास उत्साह है। बाजारों में दीये, मिठाइयों, फूल-मालाओं, रंगोली और सजावटी लाइटों की दुकानों पर रौनक देखने को मिल रही है। शाम होते ही घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाएंगे और मां लक्ष्मी-भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6:03 बजे से रात 8:01 बजे तक बताया गया है।
दिवाली की धूम, बाजारों में उमड़ी भीड़
दीपावली को लेकर प्रदेश के प्रमुख शहरों के बाजारों में रौनक है। भोपाल के न्यू मार्केट, चौक बाजार और दस नंबर मार्केट से लेकर इंदौर के राजवाड़ा और आसपास के बाजारों तक खरीदारी का उत्साह देखने को मिल रहा है। दुकानों पर मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा सामग्री, फूल-मालाएं, रंगोली और आकर्षक लाइटें उपलब्ध हैं। मिठाई और ड्राई फ्रूट की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ है। लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों को सजाने के लिए जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बाजारों में दीपावली की सजावट और रोशनी त्योहार के उत्साह को और बढ़ा रही है।
शाम 6:03 से 8:01 बजे तक महालक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है। भोपाल के लिए उपलब्ध मुहूर्त विवरण के अनुसार महालक्ष्मी पूजन का समय शाम 6:03 बजे से रात 8:01 बजे तक है। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे। पूजा के लिए घरों और दुकानों की साफ-सफाई की जाती है। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है और दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
पटाखे जलाते समय बरतें ये सावधानियां
दीपावली पर आतिशबाजी का भी खास उत्साह रहता है। हालांकि, पटाखों के कारण आग लगने और जलने की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में त्योहार मनाते समय सुरक्षा के नियमों का पालन करना जरूरी है।
• पटाखे हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर जलाएं।
• बच्चों को अकेले आतिशबाजी न करने दें।
• पटाखे जलाते समय सूती और शरीर से फिट कपड़े पहनें।
• पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं।
• फुस्स पटाखों को दोबारा जलाने की कोशिश न करें।
• आतिशबाजी के दौरान पानी और रेत की बाल्टी पास रखें।
• पटाखों को ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
• तेज आवाज वाले पटाखों से बचें।
• पटाखे जलाने के बाद उनके अवशेषों को पानी से अच्छी तरह बुझाएं।
• किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत दमकल या आपातकालीन सेवा को सूचना दें।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें खास ध्यान
पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज बच्चों, बुजुर्गों तथा सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए आतिशबाजी के दौरान विशेष सावधानी बरतें। पालतू जानवरों को भी पटाखों की तेज आवाज से परेशानी हो सकती है।घर में दीये और मोमबत्तियां जलाते समय उन्हें पर्दों और अन्य ज्वलनशील सामान से दूर रखें। सोने से पहले सभी दीपक और मोमबत्तियां बुझाना न भूलें।
खुशियों और रोशनी का त्योहार है दीपावली
दीपावली का पर्व अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को दीपों से सजाते हैं, परिवार के साथ पूजा करते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर शुभकामनाएं देते हैं। मध्य प्रदेश में भी दीपोत्सव को लेकर खास उत्साह है। ऐसे में इस बार सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तरीके से दिवाली मनाकर त्योहार की खुशियों को दोगुना किया जा सकता है।


