जेल में कैसे फैला डेंगू? 3 कैदी पॉजिटिव, 1 की मौत

Indore Central Jail Dengue: इंदौर सेंट्रल जेल में कैदियों के बीमार पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच और रोकथाम की कार्रवाई तेज कर दी है। जानिए क्या है पूरा मामला।

Shalni Kumari
Published on: 9 Oct 2026 3:21 PM IST (Updated on: 9 Oct 2026 3:22 PM IST)
Dengue Cases in Jail
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Indore Central Jail Dengue

Indore Central Jail Dengue: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित सेंट्रल जेल में बुखार के मामले सामने आने के बाद कैदियों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। जेल में 50 से ज्यादा कैदी बीमार हुए हैं। इनमें से तीन कैदियों में डेंगू (Dengue) की पुष्टि हुई है, जबकि ज्यादातर कैदियों को टायफाइड (Typhoid) हुआ है। बीमार कैदियों को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल (MY Hospital) भेजा गया। पिछले 15 दिनों में 32 कैदियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से फिलहाल 18 का उपचार चल रहा है।

इससे पहले 2 अक्टूबर को बुखार आने के बाद एक कैदी की मौत हो गई थी। हालांकि, उसकी रिपोर्ट में डेंगू से मौत की पुष्टि नहीं हुई। मौत की वजह सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) बताई गई। इसके बाद जेल में कई कैदियों को बुखार आने पर प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। जांच में तीन कैदियों के डेंगू संक्रमित होने की पुष्टि हुई।

हजारों बर्तनों में मिला डेंगू का लार्वा

कैदियों के बीमार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और मलेरिया विभाग की टीम ने जेल परिसर में जांच शुरू की। इस दौरान करीब तीन से चार हजार कंटेनरों में डेंगू के मच्छरों का लार्वा (Mosquito Larvae) मिला। टीम ने इन स्थानों पर दवाइयां डालकर लार्वा नष्ट किया।

जेल में प्रत्येक कैदी के पास पानी रखने के लिए एक बर्तन और एक बाल्टी होती है। इनका इस्तेमाल नहाने और टॉयलेट के लिए पानी जमा करने में किया जाता है। जांच के दौरान इन्हीं बर्तनों में लार्वा मिला। इससे जेल परिसर में पानी जमा रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई और निगरानी की जरूरत सामने आई है।

सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी के मुताबिक, जेल प्रशासन से सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल टीम भेजी। जेल परिसर बड़ा होने के कारण 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अभियान चलाकर लार्वा नष्ट किया गया और दवाइयों का छिड़काव किया गया।

50 से ज्यादा कैदी बीमार, ज्यादातर को टायफाइड

सेंट्रल जेल में बुखार फैलने के बाद 50 से ज्यादा कैदी इसकी चपेट में आए। जेल अधीक्षक दिनेश नरगांवे ने बताया कि करीब 20 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि बाकी का उपचार चल रहा है। जांच में तीन कैदियों में डेंगू की पुष्टि हुई है और ज्यादातर बीमार कैदियों को टायफाइड हुआ है।

इस स्थिति में डेंगू और टायफाइड के मामलों को अलग-अलग समझना जरूरी है। दोनों बीमारियों में बुखार हो सकता है, लेकिन इनके फैलने के तरीके अलग हैं। डेंगू संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है, जबकि टायफाइड आमतौर पर दूषित भोजन या पानी के जरिए फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है।

डेंगू कैसे फैलता है और क्यों बढ़ता है खतरा?

डेंगू एक वायरल संक्रमण (Viral Infection) है, जो मुख्य रूप से संक्रमित मादा एडीज मच्छर (Aedes Mosquito) के काटने से फैलता है। यह मच्छर घरों और इंसानी आबादी के आसपास जमा पानी में पनप सकता है। पानी की बाल्टियां, खुले कंटेनर, पुराने टायर, बोतलें, गमलों की ट्रे और पानी जमा करने वाले दूसरे बर्तन इसके प्रजनन स्थल बन सकते हैं।

डेंगू का वायरस सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सामान्य संपर्क से नहीं फैलता। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर वायरस लेकर दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। इसलिए किसी जेल, हॉस्टल या अन्य बंद परिसर में पानी जमा होने और मच्छरों की मौजूदगी से संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू से बचाव का प्रमुख तरीका मच्छरों के काटने से बचना और उनके प्रजनन स्थलों को खत्म करना है।

डेंगू के लक्षण क्या हैं?

डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के चार से दस दिन बाद दिखाई दे सकते हैं। प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। कुछ लोगों में संक्रमण के बावजूद स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते।

डेंगू के गंभीर रूप (Severe Dengue) में तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, तेजी से सांस चलना, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी, खून की उल्टी या मल में खून और त्वचा का ठंडा पड़ना जैसे संकेत मिल सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है। बुखार उतरने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि मरीज खतरे से बाहर है।

डेंगू का कोई विशिष्ट एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। उपचार में मरीज की स्थिति की निगरानी, पर्याप्त तरल पदार्थ और लक्षणों के अनुसार चिकित्सकीय देखभाल शामिल होती है। बुखार में दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। डेंगू की आशंका में एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि उनसे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है।

बचाव के लिए क्या करना जरूरी?

डेंगू की रोकथाम के लिए पानी जमा होने वाले बर्तनों को ढककर रखना, उन्हें नियमित रूप से खाली करके साफ करना और आसपास पानी रुकने नहीं देना जरूरी है। मच्छरों से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े, उपयुक्त मच्छररोधी साधन और दरवाजों-खिड़कियों पर जाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। जेल जैसे बड़े परिसरों में पानी रखने वाले सभी बर्तनों की नियमित जांच, लार्वा की पहचान और समय पर उसे नष्ट करना खास तौर पर महत्वपूर्ण है।

राज्य और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी क्या है?

इंदौर सेंट्रल जेल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 4 से 8 अक्टूबर के बीच लार्वा नष्ट करने और दवाइयों के छिड़काव का अभियान चलाया। अब स्थिति पर नजर रखने के लिए बीमार कैदियों की जांच, उपचार और पानी जमा होने वाले स्थानों की निगरानी महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है। केंद्र की वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 2025 तक देश में डेंगू की जांच के लिए 869 सेंटिनल सर्विलांस अस्पताल (Sentinel Surveillance Hospitals) और उनसे जुड़े 27 एपेक्स रेफरल लैब (Apex Referral Laboratories) उपलब्ध थे। राज्यों की जिम्मेदारी में जांच सुविधाओं और किट की उपलब्धता, बीमारी की निगरानी और समय पर रोकथाम के कदम शामिल हैं।

पहले भी जेलों में सामने आ चुके हैं डेंगू के मामले

जेलों में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का जोखिम पहले भी सामने आया है। अगस्त 2026 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद स्थित केंद्रीय कारागार में पांच कैदियों में डेंगू की पुष्टि की खबर सामने आई थी। उस मामले में भी जेल परिसर में साफ-सफाई और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को लेकर चिंता जताई गई थी।

इंदौर की मौजूदा स्थिति में सबसे अहम बात यह है कि तीन कैदियों में डेंगू की पुष्टि के साथ बड़ी संख्या में अन्य कैदी भी बीमार हुए हैं और हजारों बर्तनों में लार्वा मिला है।

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