महाकाल मंदिर में अब नहीं चलेगा 'नकली' सोना! 30 सेकंड में मशीन खोल देगी पूरा राज, दान व्यवस्था हुई हाईटेक

Mahakaleshwar Temple: इस नई व्यवस्था से दान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और विश्वसनीय बनने की उम्मीद है।

Priya Singh Bisen
Published on: 22 July 2026 1:16 PM IST (Updated on: 22 July 2026 1:16 PM IST)
Mahakaleshwar Temple
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Mahakaleshwar Temple: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर (Shri Mahakaleshwar Temple) में दान व्यवस्था को पहले से ज्यादा पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब बाबा महाकाल को श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता महज 30 सेकंड में जांची जा सकेगी। इसके लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने करीब 15 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक करेटोमीटर (Karatometer) मशीन स्थापित की है। इस नई व्यवस्था से दान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और विश्वसनीय बनने की उम्मीद है।

अब तकनीक से होगी आभूषणों की जांच

अब तक मंदिर में दान की सुरक्षा के लिए CCTV निगरानी और डिजिटल भुगतान (Digital Payment) के लिए क्यूआर कोड (QR Code) जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध थीं। अब इस व्यवस्था में एक और तकनीकी सुविधा जुड़ गई है। नई करेटोमीटर मशीन की मदद से मंदिर में दान किए जाने वाले सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता की तत्काल जांच की जा सकेगी।

मशीन यह भी बताएगी कि आभूषण में सोना या चांदी कितने प्रतिशत शुद्ध है और उसमें दूसरी धातुओं की कितनी मिलावट है। इससे दान की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकेगी।

XRF तकनीक से 30 सेकंड में मिलेगी रिपोर्ट

श्री महाकालेश्वर मंदिर की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव (Simmi Yadav) ने बताया कि दान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के मकसद से यह नई मशीन खरीदी गई है। उन्होंने बताया कि करेटोमीटर एक्स-रे फ्लोरोसेंस (X-Ray Fluorescence-XRF) तकनीक पर आधारित है।

जैसे ही सोने या चांदी का कोई आभूषण मशीन में रखा जाएगा, यह खास ऊर्जा तरंगों की साहयता से उसकी धातु संरचना का विश्लेषण करेगी। लगभग 30 सेकंड के अंदर मशीन यह बता देगी कि आभूषण कितना शुद्ध है और उसमें अन्य धातुओं की कितनी मात्रा मौजूद है।

सिम्मी यादव ने बताया कि अब सबसे पहले आभूषण की शुद्धता की जांच की जाएगी और उसी रिपोर्ट के आधार पर मंदिर प्रबंध समिति दान की आधिकारिक रसीद जारी करेगी। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता दोनों सुनिश्चित होंगी।

पहले 3 सदस्यीय समिति करती थी जांच

नई मशीन आने से पहले मंदिर में दान किए गए आभूषणों की जांच तीन सदस्यीय समिति द्वारा की जाती थी। यह समिति रोस्टर के आधार पर अपनी सेवाएं देती थी और अनुभव के आधार पर आभूषणों की शुद्धता का आकलन करती थी।

समिति के सदस्य रविंद्र सोनी (Ravindra Soni) ने बताया कि समिति के सभी सदस्य निशुल्क सेवाएं देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई मशीन आने के बाद जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सटीक हो गई है। हालांकि नई तकनीक लागू होने के बाद भी समिति अपनी भूमिका निभाती रहेगी और जरूरत पड़ने पर तकनीकी जांच के साथ मदद भी करेगी।

श्रद्धालुओं ने नई व्यवस्था का किया स्वागत

महाकाल मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस नई व्यवस्था का स्वागत किया है। वाराणसी (Varanasi) से दर्शन के लिए आए श्रद्धालु शुभम पटेल (Shubham Patel) ने कहा कि दान व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए यह एक सराहनीय पहल है। उनका मानना है कि इससे श्रद्धालुओं का मंदिर प्रबंधन पर भरोसा और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि कई श्रद्धालु अपने पारिवारिक या कीमती आभूषण भगवान को अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि उन्हें तुरंत यह जानकारी मिल जाए कि उनका आभूषण कितना शुद्ध है, तो इससे उन्हें भी संतोष मिलेगा।

मंदिर प्रशासन का भी मानना है कि अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और आधुनिक बनेगी। इससे न केवल जांच प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि श्रद्धालुओं का मंदिर प्रबंधन पर विश्वास भी पहले से अधिक मजबूत होगा।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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