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MP में 100% MSP की मांग पर भोपाल में किसानों का 'महाजुटान'! 7 दिन का राशन लेकर डाला डेरा, अब CM आवास मार्च की तैयारी
MP Farmer Protest: राजधानी के बाहरी इलाके में सावरकर सेतु के पास किसानों ने डेरा डाल दिया है और अब मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है और कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
MP Farmer Protest
MP Farmer Protest: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मूंग (Moong) की 100% न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नज़र आ रहा है। हजारों किसान अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और पूरे 7 दिन का राशन-पानी लेकर भोपाल (Bhopal) पहुंच गए हैं।
राजधानी के बाहरी इलाके में सावरकर सेतु के पास किसानों ने डेरा डाल दिया है और अब मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है और कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वहीं, प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में छुट्टी का बड़ा ऐलान कर दिया गया है।
मूंग की 100% MSP खरीद को लेकर तेज हुआ आंदोलन
मध्य प्रदेश के किसान लंबे वक़्त से मूंग की पूरी फसल MSP पर खरीदे जाने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर अब आंदोलन तेज हो गया है। किसान बड़ी संख्या में राजधानी भोपाल पहुंचे हैं और स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वह पीछे किसी भी हाल में नहीं हटेंगे।
आंदोलन में शामिल किसान अपने साथ सिर्फ आवश्यक सामान ही नहीं बल्कि एक सप्ताह तक रुकने के लिए राशन और रहने का पूरा इंतजाम भी लेकर आए हैं। इससे यह स्पष्ट है कि किसान लंबी लड़ाई लड़ने के इरादे से राजधानी पहुंचे हैं।
CM Mohan Yadav सरकार ने केंद्र से मांगा हस्तक्षेप
किसानों के बढ़ते आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) सरकार की तरफ से राज्य के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना (Aidal Singh Kansana) ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) को पत्र लिखा है।
इस पत्र में बताया गया है कि राज्य में 14 मई से 3 जुलाई 2026 के बीच लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ है। इसके मुकाबले अब तक केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार का कहना है कि इस स्थिति में बड़ी संख्या में किसान MSP का फायदा नहीं ले पाएंगे। इसी कारण से केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के सामने रखी मांग
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले 19 किसान संगठनों के प्रतिनिधि इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। किसान संगठनों ने स्पष्ट ऐलान कर दिया है कि जब तक सरकार राज्य की 100% मूंग की फसल MSP पर खरीदने और खाद वितरण से जुड़ी पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं करती, तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
किसानों का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ मूंग खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती से जुड़े कई लंबे वक़्त से चले आ रहे मुद्दों को लेकर भी है।
Bhopal पहुंचने से पहले कई जगह रोका गया किसान मार्च
मंगलवार रात किसान भोपाल के बाहरी जिलों तक पहुंच गए, जहां पहले से भारी पुलिस बल तैनात था। प्रशासन ने किसानों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए कई परतों वाली बैरिकेडिंग की व्यवस्था की थी।
हालांकि, किसान तेजी से आगे बढ़ते रहे और अब सावरकर सेतु के पास डेरा डाल चुके हैं। प्रशासन ने कई स्थानों पर किसानों को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
आखिर... किसानों में नारजगी क्यों ?
किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अरहर (Tur), उड़द (Urad) और मसूर (Masoor) की 100% MSP पर खरीद का ऐलान किया है, लेकिन मूंग की खरीद अभी भी प्राइस सपोर्ट स्कीम (Price Support Scheme) के अंतर्गत की जाती है।
इस योजना के आधार पर खरीद किसी राज्य के अनुमानित उत्पादन के सिर्फ 25% तक सीमित रहती है। किसानों का कहना है कि इस कारण से उनकी बड़ी मात्रा में उपज खुले बाजार में बेचनी पड़ती है, जहां उन्हें 2026-27 सीजन के लिए तय 8,768 रुपये प्रति क्विंटल के MSP से काफी कम कीमत मिलती है।
यही सबसे बड़ा कारण है कि किसान अब पूरी मूंग फसल की MSP पर खरीद की मांग कर रहे हैं।
किसान नेता ने बताया आंदोलन का कारण
किसान नेता संतोष पटवारी (Santosh Patwari) का कहना है कि पिछले 20 दिनों से किसान निरंतर इस आंदोलन की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सरकार तक कई बार अपनी बात पहुंचाई गई, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत की फसल का उचित दाम नहीं पा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
नर्मदापुरम से शुरू हुआ आंदोलन
यह आंदोलन नर्मदापुरम (Narmadapuram) से शुरू हुआ था। किसान पहले सेठाणी घाट (Sethani Ghat) पर एकत्र हुए और वहीं से भोपाल की तरफ मार्च शुरू किया। शुरुआत में प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए। बाद में तनाव बढ़ने पर अधिकारियों ने बैरिकेड हटा दिए और किसान आगे बढ़ सके।
इसके बाद यह काफिला ओबैदुल्लागंज (Obaidullaganj) और रायसेन (Raisen) जिले से होते हुए भोपाल की तरफ तेजी से बढ़ा। रास्ते में पुलिस ने टोल प्लाजा और मंडीदीप बॉर्डर (Mandideep Border) सहित कई जगहों पर फिर से बैरिकेड लगाए। अधिकारियों ने किसान नेताओं से राजधानी में आगे बढ़ने के बजाय ज्ञापन सौंपने की अपील भी की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर कायम रहे।
ग्रामीण इलाकों की नाराजगी भी आई सामने
गौर किया जाए तो... यह आंदोलन सिर्फ मूंग खरीद का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में तेजी बढ़ते असंतोष की तस्वीर भी सामने ला रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि पिछले कई फसल सीजन से खरीद में देरी, सीमित खरीद, रजिस्ट्रेशन की समस्याएं और खाद की लगातार कमी किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में फसलों के दाम अनिश्चित बने हुए हैं। अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसानों को मजबूरी में अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
यही वजह है कि अब किसान 100% MSP खरीद की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए भोपाल पहुंच चुके हैं और उनकी नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।


