MP News: इंदौर के SGSITS ने किया बड़ा ऐलान! हिंदी में इंजीनियरिंग, पढ़ाई छोड़ने पर भी मिलेगा फायदा

MP News: इंदौर के SGSITS ने हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग शिक्षा शुरू करने का ऐलान किया। पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों को भी नई शिक्षा नीति के तहत लाभ मिलेगा। जानें पूरी जानकारी।

Priya Singh Bisen
Published on: 8 July 2026 12:26 PM IST
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MP News(Photo-Social Media)

MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। नए शैक्षणिक सत्र से संस्थान पहली बार हिंदी माध्यम में बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) की पढ़ाई शुरू करने जा रहा है। यह कदम खासतौर पर हिंदी माध्यम और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छात्रों को लगातार चार साल तक पढ़ाई करने की बाध्यता नहीं होगी। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत इसमें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा भी दी गई है।

हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग की नई शुरुआत

अब तक देश के अधिकांश इंजीनियरिंग संस्थानों में तकनीकी शिक्षा अंग्रेजी माध्यम में ही उपलब्ध थी, जिससे हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले कई छात्र इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने से हिचकिचाते थे। इसी चुनौती को देखते हुए SGSITS ने हिंदी भाषा में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग शुरू करने का फैसला लिया है। संस्थान का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों से पढ़कर आने वाले विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने में काफी सुविधा मिलेगी। साथ ही वे विषयों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर पाएंगे।

4 साल लगातार पढ़ना जरूरी नहीं

इस नए कोर्स को नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें छात्रों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई जारी रखने या बीच में छोड़ने की सुविधा मिलेगी।

पहला वर्ष पूरा करने पर छात्र आईटीआई ड्राफ्ट्समैन स्तर के कार्यों के लिए योग्य माना जाएगा।

दूसरा वर्ष पूरा करने पर वह साइट सुपरविजन जैसे कार्य कर सकेगा।

तीन वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर छात्र को सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा मिलेगा।

चार वर्ष पूरे करने पर उसे बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) की डिग्री प्रदान की जाएगी।

इस व्यवस्था से आर्थिक या व्यक्तिगत कारणों से पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों का शैक्षणिक नुकसान नहीं होगा।

मजदूर और इंजीनियर के बीच कम होगी भाषा की दूरी

संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्यों में अधिकांश मजदूर हिंदी या स्थानीय भाषा में ही संवाद करते हैं। कई बार अंग्रेजी माध्यम से पढ़े इंजीनियरों को तकनीकी निर्देश और सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रभावी ढंग से समझाने में कठिनाई होती है। हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग शिक्षा मिलने से इंजीनियर और कार्यस्थल पर काम करने वाले श्रमिकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होगा। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता में भी सुधार आने की उम्मीद है।

AICTE से मिली मंजूरी, 60 सीटों पर होंगे प्रवेश

इस कोर्स को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल इसमें 60 सीटें निर्धारित की गई हैं। पहले चरण की काउंसलिंग में 35 सीटें आवंटित हुई थीं, हालांकि अभी तक केवल दो छात्रों ने प्रवेश लिया है। संस्थान का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है और आने वाले चरणों में अधिक छात्रों के जुड़ने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के लिए हिंदी भाषा में अध्ययन सामग्री, तकनीकी पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न हो।

नई शिक्षा नीति को मिलेगा बढ़ावा

यह कोर्स पूरी तरह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के सिद्धांतों पर आधारित होगा। इसमें छात्रों को क्रेडिट आधारित प्रणाली के तहत पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। यदि कोई छात्र किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोड़ देता है, तो वह बाद में उसी क्रेडिट के आधार पर दोबारा प्रवेश लेकर अपनी शिक्षा पूरी कर सकेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल न केवल छात्रों को अधिक लचीलापन देगा, बल्कि तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा में बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले समय में यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो अन्य तकनीकी संस्थान भी हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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