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पतंजलि के गाय के घी में क्या मिला? एक बैच वापस मंगाने का आदेश, जानें पूरा मामला
Patanjali Cow Ghee: मध्य प्रदेश में पतंजलि गाय के घी के 200 एमएल के एक बैच को जांच में असुरक्षित पाया गया। जानें बैच नंबर, रिकॉल आदेश और कंपनी के अन्य उत्पादों से जुड़े पुराने मामले।
Patanjali Cow Ghee
Patanjali Cow Ghee: त्योहारों के बीच बाजार से घी खरीद रहे हैं, तो पैकेट पर बैच नंबर (Batch Number) जरूर देख लें। मध्य प्रदेश में पतंजलि गाय के घी (Patanjali Cow Ghee) के 200 एमएल के एक खास बैच को जांच में असुरक्षित (Unsafe) पाया गया है। इसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) ने इस बैच को बाजार से वापस मंगाने (Product Recall) के निर्देश दिए हैं। मामला छिंदवाड़ा जिले (Chhindwara District) के तामिया क्षेत्र का है, जहां एक किराना दुकान से घी का नमूना (Sample) लिया गया था। यह कार्रवाई संबंधित बैच के खिलाफ की गई है, न कि कंपनी के सभी उत्पादों (Products) पर।
अप्रैल 2026 में बना था घी का बैच (Manufacturing Batch)
खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) की जानकारी के मुताबिक, 10 अगस्त 2026 को तामिया क्षेत्र की अनिल किराना दुकान से पतंजलि गाय के घी का 200 एमएल पैक जांच (Testing) के लिए लिया गया था। इस उत्पाद का बैच नंबर FAWB260017 है और इसकी पैकिंग अप्रैल 2026 की बताई गई है।
भोपाल की प्रयोगशाला (Bhopal Laboratory) में जांच के बाद नमूने को असुरक्षित (Unsafe) घोषित किया गया। इसके बाद 8 अक्टूबर 2026 को खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने संबंधित बैच को बाजार से वापस लेने के निर्देश जारी किए। आदेश के तहत मध्य प्रदेश में इस बैच की बिक्री (Sale), वितरण (Distribution) और आपूर्ति (Supply) रोकने के साथ बाजार में मौजूद स्टॉक वापस लिया जाना है। निर्माता कंपनी पतंजलि फूड्स लिमिटेड (Patanjali Foods Limited) को रिकॉल (Recall) की कार्रवाई करनी है। विभाग ने इस प्रक्रिया की निगरानी (Monitoring) के निर्देश भी दिए हैं।
लैब रिपोर्ट में कौन-सा तत्व मिला, कितना खतरनाक है? (Laboratory Report)
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि घी को असुरक्षित घोषित करने की वजह क्या रही। उपलब्ध प्रशासनिक सूचना में प्रयोगशाला की रिपोर्ट (Laboratory Report) का विस्तृत तकनीकी निष्कर्ष (Technical Findings), संबंधित तत्व का नाम और उसकी मात्रा (Quantity) सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल यह दावा करना सही नहीं होगा कि घी में सीसा (Lead), किसी कीटनाशक (Pesticide) या किसी दूसरे खास पदार्थ की मिलावट (Adulteration) मिली है।
खाद्य पदार्थों की जांच (Food Testing) में अलग-अलग मानकों (Standards) को परखा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी खाद्य पदार्थ में सीसा जैसी भारी धातु (Heavy Metal) निर्धारित सीमा से अधिक मिले, तो लंबे समय तक उसके संपर्क में रहने से तंत्रिका तंत्र (Nervous System), गुर्दे (Kidneys) और बच्चों के विकास (Child Development) पर असर पड़ सकता है। वहीं, कुछ कीटनाशकों के अधिक संपर्क से तंत्रिका तंत्र सहित शरीर के दूसरे अंग प्रभावित हो सकते हैं।
पतंजलि के दूसरे उत्पाद भी जांच के दायरे में आए (Patanjali Products)
पतंजलि से जुड़े उत्पादों पर गुणवत्ता संबंधी सवाल (Quality Concerns) पहले भी उठ चुके हैं। हालांकि, हर मामले का उत्पाद, जांच का आधार और कार्रवाई अलग रही है।
जून 2026 में केरल के कन्नूर जिले में पतंजलि फूड्स के ज्वार के आटे (Sorghum Flour) के एक बैच की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उसमें क्लोरपाइरीफॉस (Chlorpyrifos) नामक कीटनाशक का अवशेष (Pesticide Residue) निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया था।
भारत सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 2024-25 में मसालों की जांच (Spice Testing) के दौरान पतंजलि फूड्स की उत्तराखंड स्थित इकाई के लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder) का एक नमूना भी असुरक्षित पाया गया था। उसमें कीटनाशक अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा (Maximum Residue Limit) से अधिक थे। संबंधित उत्पाद को बाजार से वापस लेने की कार्रवाई की गई थी।
नेपाल में भी छह आयुर्वेदिक उत्पादों पर हुई थी कार्रवाई (Ayurvedic Products)
पतंजलि के उत्पादों पर भारत के बाहर भी गुणवत्ता संबंधी कार्रवाई (Quality Action) हो चुकी है। जून 2017 में नेपाल के औषधि प्रशासन विभाग (Department of Drug Administration) ने पतंजलि से जुड़े छह आयुर्वेदिक उत्पादों के नमूनों को माइक्रोबियल जांच (Microbial Testing) में मानकों से नीचे पाए जाने के बाद उन्हें वापस लेने के निर्देश दिए थे। इन उत्पादों में आंवला चूर्ण (Amla Powder), दिव्य गशर चूर्ण (Divya Gashar Churna), बाहुची चूर्ण (Bakuchi Churna), त्रिफला चूर्ण (Triphala Churna), अश्वगंधा (Ashwagandha) और अद्विया चूर्ण (Adviya Churna) शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, जांच में रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया (Pathogenic Bacteria) की मौजूदगी की बात सामने आई थी।
बाबा रामदेव ने पतंजलि की शुरुआत कब और क्यों की?
योग गुरु बाबा रामदेव (Baba Ramdev) और आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) ने वर्ष 2006 में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (Patanjali Ayurved Limited) की स्थापना की थी। कंपनी शुरू करने के पीछे आयुर्वेद (Ayurveda) और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति (Traditional Indian Medicine) को बढ़ावा देना, स्वदेशी उत्पादों (Swadeshi Products) को बाजार में उपलब्ध कराना और आम लोगों तक अपेक्षाकृत किफायती स्वास्थ्य एवं दैनिक उपयोग के उत्पाद (Affordable Healthcare and Daily-Use Products) पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य बताए गए थे।
समय के साथ पतंजलि का कारोबार आयुर्वेदिक उत्पादों से आगे बढ़कर खाद्य पदार्थों (Food Products), व्यक्तिगत देखभाल के सामान (Personal Care Products) और घरेलू उपयोग के उत्पादों (Household Products) तक पहुंचा। इसी व्यापक कारोबार के कारण किसी उत्पाद की गुणवत्ता से जुड़ा मामला उपभोक्ताओं (Consumers) का ध्यान खींचता है।
उपभोक्ता क्या सावधानी बरतें?
फिलहाल मध्य प्रदेश में जारी आदेश का संबंध बैच नंबर FAWB260017 वाले 200 एमएल पतंजलि गाय के घी से है। उपभोक्ताओं को पैकेट पर बैच नंबर देखकर संबंधित उत्पाद की पहचान करनी चाहिए। यदि उनके पास यही बैच है, तो उसके इस्तेमाल के बारे में खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) या कंपनी से आधिकारिक जानकारी (Official Information) लेना उचित होगा।


