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Madhya Pradesh News: 2300 करोड़ की 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' पर बवाल! तकनीकी खामी का दावा, CBI तक पहुंचा मामला
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर स्थित 2300 करोड़ रुपये की 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' तकनीकी खामी के आरोपों को लेकर विवादों में है। पिलर में संरचनात्मक कमी का दावा करते हुए CBI, मुख्य सचिव और लोकायुक्त से शिकायत की गई है। मामले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है।
Adi Guru Shankaracharya Statue (Image Credit-Social Media)
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर (Omkareshwar) में नर्मदा (Narmada) किनारे बनी आदि गुरु शंकराचार्य (Adi Guru Shankaracharya) की 108 फीट ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' (Statue of Oneness) अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रतिमा के पिलर में तकनीकी खामी सामने आने का दावा किया गया है और इसकी शिकायत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और लोकायुक्त (Lokayukta) तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि जिस अधिकारी ने इस तकनीकी खामी की ओर ध्यान दिलाया, उन्हें ही उनके पद से हटा दिया गया।
अप्रैल से शुरू हुआ शिकायतों का सिलसिला
इस पूरे मामले में शिकायत का सिलसिला 30 अप्रैल से शुरू हुआ। इसके बाद 13 मई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और लोकायुक्त को शिकायत भेजी गई। शिकायत में कहा गया कि वर्ष 2023 में करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना में सुरक्षा और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है।
यह शिकायत इस परियोजना से जुड़े तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (Project Management Consultant-PMC) के फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी (Biswajit Banerjee) ने की है।
इंटरनेशनल रिपोर्ट में स्ट्रक्चर डिजाइन पर उठे सवाल
फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने 12 मई को इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस रिपोर्ट (International Structural Analysis Report) का हवाला देते हुए प्रतिमा के स्ट्रक्चर डिजाइन (Structure Design) में एसएस316एल (SS316L) के एक प्राइमरी मेंबर के फेल होने की जानकारी दी।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भोपाल (Bhopal) स्थित न्यास कार्यालय में चार और पांच अप्रैल 2026 को हुई डिजाइन रिव्यू मीटिंग (Design Review Meeting) के दौरान ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर (EPC Contractor) की स्ट्रक्चरल टीम ने प्रतिमा के अंदरूनी हिस्से का ईटैब्स कम्पोजिट मॉडल (ETABS Composite Model) प्रस्तुत किया। इस मॉडल में एसएस316एल स्ट्रक्चरल एलिमेंट, कंक्रीट पेडस्टल और फाउंडेशन शामिल थे।
समीक्षा में सामने आया प्राइमरी मेंबर फेल होने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार ईडीआरसी (EDRC) टीम के साथ ईपीसी-1 (EPC-1) द्वारा प्रस्तुत प्रतिमा के कम्पोजिट मॉडल की समीक्षा के दौरान पाया गया कि प्राइमरी मेंबर आरएचएस 1000 x 1050 x 36 x 45, एलिमेंट नंबर सी12 (Element C12) लोड केस 102 (Load Case 102) के तहत 1.244 के स्ट्रेस रेश्यो (Stress Ratio) के साथ फेल हो रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस विषय पर पहले भी चर्चा हो चुकी थी और प्रतिमा के स्ट्रक्चर में इस प्राइमरी मेंबर के फेल होने का कारण जानने के लिए पहले ही एक आरएफसी (RFC) जारी किया गया था।
छह महीने से जताई जा रही थी चिंता
बिश्वजीत बनर्जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले छह महीनों से प्रतिमा के स्ट्रक्चर की हेल्थ एनालिसिस (Health Analysis) को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही थी। इसके बावजूद ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर ने इस मामले को उतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितनी जरूरत थी।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जरूरी कदम उठाने और आवश्यक सावधानियां बरतने में भी देरी की गई। उन्होंने ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर से कम्पोजिट मॉडल, स्ट्रेस रेश्यो, ईटैब्स एनालिसिस (ETABS Analysis) के नतीजों और उस आधार की विस्तृत जानकारी मांगी, जिस पर ईडीआरसी टीम ने आगे विचार के लिए डिजाइन को स्वीकार किया था।
रिपोर्ट में इसे गंभीर मामला बताते हुए ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर से दो कार्य दिवस के भीतर जवाब देने और इस समस्या को दूर करने के लिए प्रस्तावित उपायों की जानकारी देने का अनुरोध भी किया गया, ताकि प्रतिमा की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
शिकायत करने वाले अधिकारी को पद से हटाया गया
इस पूरे मामले की सबसे अहम बात यह रही कि प्रतिमा के पिलर में तकनीकी खामी की ओर ध्यान दिलाने वाले तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी को ही उनके पद से हटा दिया गया। इसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के पिलर में खामी के मुद्दे पर मध्य प्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी हैं। उनका आरोप है कि इन लोगों ने राम मंदिर (Ram Mandir), महाकाल (Mahakal) और बंगलामुखी (Baglamukhi) जैसे धार्मिक स्थलों को भी नहीं छोड़ा।
जीतू पटवारी ने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से शंकराचार्य जी की प्रतिमा टेढ़ी हुई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस कंपनी को इस परियोजना का ठेका दिया गया था, क्या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी।


