Thane Pani Se Nahane Ke Fayde: क्या ठंडे पानी से नहाना सच में फायदेमंद है?

Thane Pani Se Nahane Ke Fayde: जानिए ठंडे पानी से नहाने से इम्युनिटी, वजन, मानसिक स्वास्थ्य और मांसपेशियों पर असर, फायदे और जोखिम।

Yogesh Mishra
Published on: 15 Aug 2026 5:10 PM IST
Cold Shower Benefits in Hindi
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Cold Shower Benefits in Hindi 

Thane Pani Se Nahane Ke Fayde: ठंडे पानी से नहाना आज सोशल मीडिया, फिटनेस संस्कृति और तथाकथित ‘बायोहैकिंग’ की दुनिया में बहुत लोकप्रिय हो गया है। कोई दावा करता है कि सुबह बर्फ जैसा ठंडा पानी शरीर पर डालने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।कोई इसे तेजी से वजन घटाने का तरीका बताता है।कोई कहता है कि इससे टेस्टोस्टेरोन बढ़ता है। कोई इसे अवसाद का प्राकृतिक इलाज बताता है। दूसरी तरफ कई लोग इसे केवल फैशन और मानसिक साहस दिखाने का तरीका मानते हैं। विज्ञान की वर्तमान स्थिति इन दोनों अतियों के बीच है। ठंडे पानी के संपर्क से शरीर में वास्तविक और मापे जा सकने वाले शारीरिक परिवर्तन होते हैं। कुछ परिस्थितियों में इससे ताजगी, व्यायाम के बाद दर्द में कमी और संभवतः स्वास्थ्य के कुछ सीमित लाभ मिल सकते हैं। लेकिन रोज ठंडे पानी से नहाना कोई सिद्ध चमत्कारी चिकित्सा नहीं है। इसके बहुत-से लोकप्रिय दावों के पीछे अभी पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। 2025 की एक व्यवस्थित वैज्ञानिक समीक्षा ने भी यही निष्कर्ष निकाला कि ठंडे पानी के संपर्क से तनाव, सूजन, नींद, जीवन-गुणवत्ता और प्रतिरक्षा से जुड़े कुछ प्रभाव दिखाई देते हैं। लेकिन उपलब्ध शोध अभी कम अध्ययनों, छोटे नमूनों और सीमित आबादी के कारण निर्णायक नहीं है।

बर्फीला पानी और कोल्ड शावर एक ही चीज नहीं

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘कोल्ड शावर’ और ‘बर्फ के पानी में डुबकी’ एक ही चीज नहीं हैं। सामान्य ठंडे शावर में शरीर पर कुछ मिनट ठंडा पानी पड़ता है, जबकि खेल विज्ञान में किए गए बहुत-से अध्ययन cold-water immersion पर हैं। जिसमें व्यक्ति शरीर का बड़ा हिस्सा 10–15 डिग्री सेल्सियस जैसे ठंडे पानी में कई मिनट तक डुबोता है। बर्फ वाले पानी में उतरना इससे भी अधिक तीव्र अनुभव हो सकता है। इसलिए बर्फ के टब पर हुए अध्ययन का परिणाम सीधे दो मिनट के ठंडे शावर पर लागू कर देना, वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। उपलब्ध शोध का बड़ा हिस्सा immersion पर है। साधारण घरेलू ठंडे शावर पर प्रत्यक्ष अध्ययन अपेक्षाकृत कम हैं।

ठंडा पानी पड़ते ही क्या होता है?

ठंडा पानी शरीर पर पड़ते ही सबसे पहले त्वचा के ताप-संवेदक मस्तिष्क को संकेत देते हैं कि शरीर अचानक ठंडे वातावरण में चला गया है। इसके जवाब में सहानुभूति तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है। त्वचा की रक्तवाहिकाएँ सिकुड़ती हैं। ताकि गर्म रक्त शरीर की सतह पर कम जाए और भीतर के महत्वपूर्ण अंगों की गर्मी बची रहे। हृदय की धड़कन और रक्तचाप बदल सकते हैं। सांस अचानक तेज हो सकती है। शरीर तनाव-संबंधी हार्मोन तथा न्यूरो-रसायनों की प्रतिक्रिया शुरू करता है। बहुत ठंडे पानी में अचानक उतरने पर यह प्रतिक्रिया इतनी तीव्र हो सकती है कि इसे वैज्ञानिक साहित्य में cold shock response कहा जाता है। इसमें अनैच्छिक तेज सांस, हृदय पर अचानक दबाव और कुछ परिस्थितियों में हृदय-ताल गड़बड़ाने का जोखिम भी हो सकता है।

यही तीव्र प्रतिक्रिया यह भी समझाती है कि ठंडे शावर के बाद बहुत से लोगों को तुरंत ‘जाग जाने’, अधिक सतर्क और ऊर्जावान महसूस होने का अनुभव क्यों होता है। शरीर इसे एक हल्के तीव्र तनाव की तरह लेता है। सांस तेज होती है। तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है। व्यक्ति को कुछ समय के लिए अधिक चौकन्नापन महसूस हो सकता है। यह अनुभव वास्तविक हो सकता है। लेकिन इसे दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार समझ लेना अलग बात है। किसी चीज से पांच मिनट ताजगी मिलना और उससे बीमारी का जोखिम वर्षों के लिए कम होना अलग वैज्ञानिक दावे हैं।

ठंडे पानी से जुड़ा सबसे चर्चित अध्ययन 2016 में नीदरलैंड में हुआ था। लगभग 3,000 स्वस्थ वयस्कों को सामान्य गर्म शावर के अंत में 30, 60 या 90 सेकंड ठंडे पानी का प्रयोग करने अथवा सामान्य शावर जारी रखने के समूहों में बाँटा गया। अध्ययन में ठंडे शावर वाले लोगों ने काम से बीमारी के कारण छुट्टी लगभग 29 प्रतिशत कम ली। सुनने में यह बहुत प्रभावशाली परिणाम लगता है। लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनके वास्तविक बीमारी वाले दिनों में महत्वपूर्ण कमी नहीं मिली। यानी ठंडे शावर वाले लोग बीमारी के कारण काम से कम अनुपस्थित रहे। लेकिन यह सिद्ध नहीं हुआ कि वे वास्तव में कम बीमार हुए। इसीलिए इस अध्ययन को “ठंडे पानी से प्रतिरक्षा 29 प्रतिशत बढ़ती है” कहना गलत होगा।

यहीं ‘इम्युनिटी बढ़ती है’ वाले लोकप्रिय दावे की वास्तविक स्थिति समझ आती है। ठंडा संपर्क शरीर की तनाव और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को अस्थायी रूप से बदल सकता है। लेकिन अभी ऐसा मजबूत प्रमाण नहीं है कि रोज ठंडे शावर लेने से सामान्य व्यक्ति वायरल संक्रमण से विश्वसनीय रूप से सुरक्षित हो जाता है। 2025 की व्यवस्थित समीक्षा में प्रतिरक्षा से जुड़े कुछ संकेत मिले। लेकिन लेखकों ने स्वयं उपलब्ध प्रमाण की सीमाओं पर जोर दिया। इसलिए ठंडा शावर टीका, पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन, व्यायाम और संक्रमण से बचाव जैसी स्थापित स्वास्थ्य आदतों का विकल्प नहीं है।

वजन घटाने का दावा कितना सही?

अब वजन घटाने वाले दावे को देखें। ठंडे वातावरण में शरीर को अपना तापमान बनाए रखने के लिए अतिरिक्त गर्मी पैदा करनी पड़ती है। मनुष्यों में भूरी वसा नामक ऊतक इस प्रक्रिया में भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों ने दिखाया है कि ठंड के संपर्क से भूरी वसा सक्रिय हो सकती है और ऊर्जा खर्च कुछ बढ़ सकता है। 2009 के एक प्रसिद्ध मानव अध्ययन में स्वस्थ पुरुषों में ठंड के संपर्क के दौरान सक्रिय भूरी वसा दिखाई गई थी। बाद के अध्ययनों और समीक्षाओं ने भी पाया कि ठंड ऊर्जा खर्च और भूरी वसा की सक्रियता बढ़ा सकती है।

लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना कि “दो मिनट ठंडे शावर से चर्बी पिघल जाएगी” बहुत बड़ी छलांग है। प्रयोगों में इस्तेमाल की गई ठंड की मात्रा कई बार काफी लंबी और नियंत्रित होती है। थोड़े समय के घरेलू शावर से बढ़ी ऊर्जा खपत इतनी बड़ी सिद्ध नहीं हुई है कि उसे वजन घटाने की प्रभावी चिकित्सा कहा जा सके। 2023 की समीक्षा ने भी बताया कि ठंड से भूरी वसा में बदलाव के प्रमाण मौजूद हैं। लेकिन शोध का बड़ा हिस्सा पशुओं या ऐसे ठंड-प्रयोगों पर आधारित है, जो सामान्य घरेलू व्यवहार से बहुत अलग हैं।

इसलिए वजन घटाने के लिए ठंडे शावर को मुख्य रणनीति मानना उचित नहीं। भोजन, कुल ऊर्जा संतुलन, नियमित शारीरिक गतिविधि, नींद और दीर्घकालिक व्यवहार इसकी तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध उपाय हैं। अब खिलाड़ियों की बात करें तो यहाँ प्रमाण अपेक्षाकृत बेहतर हैं। कठोर व्यायाम या प्रतियोगिता के बाद ठंडे पानी में शरीर डुबोने से मांसपेशियों में देर से आने वाला दर्द कुछ कम हो सकता है। अल्पकालिक रिकवरी में मदद मिल सकती है। 2023 की एक व्यवस्थित समीक्षा और विश्लेषण में strenuous exercise के बाद cold-water immersion को दर्द और कुछ प्रदर्शन संबंधी रिकवरी के लिए उपयोगी पाया गया। दूसरे विश्लेषणों में भी मांसपेशी दर्द कम होने का लाभ दिखा है।

वेट लिफ्टिंग और कोल्ड शावर

यहाँ भी एक रोचक उलटा पक्ष है। यदि कोई व्यक्ति मांसपेशी और ताकत बढ़ाने के लिए नियमित भार-प्रशिक्षण करता है और हर सत्र के तुरंत बाद बहुत ठंडे पानी में लंबे समय तक डूबता है, तो वही ठंड कुछ प्रशिक्षण-अनुकूलनों को कम कर सकती है। शोध में नियमित post-exercise cold-water immersion से मांसपेशी वृद्धि और शक्ति-अनुकूलन कुछ घटने के संकेत मिले हैं। 2023 के एक विश्लेषण में पुरुषों में प्रतिरोध प्रशिक्षण के बाद नियमित ठंडे पानी के उपयोग को शक्ति वृद्धि कम करने से जोड़ा गया। इसका कारण संभवतः यह है कि व्यायाम के बाद होने वाली स्थानीय सूजन और कोशिकीय संकेत केवल ‘बुरी चीज’ नहीं हैं।वे शरीर को प्रशिक्षण के अनुरूप ढलने का संदेश भी देते हैं। यदि हर बार उस प्रतिक्रिया को बहुत तेजी से दबा दिया जाए तो मांसपेशियों के अनुकूलन का कुछ हिस्सा कम हो सकता है। इसलिए प्रतियोगिता के बीच जल्दी रिकवरी चाहने वाले खिलाड़ी और दीर्घकाल में अधिक मांसपेशी बनाना चाहने वाले व्यक्ति के लिए ठंडे पानी का उपयोग एक जैसा नहीं होना चाहिए।

मेंटल हेल्थ पर क्या असर होता है?

अब मानसिक स्वास्थ्य का दावा। बहुत-से लोग कहते हैं कि ठंडे शावर से मूड सुधरता है। चिंता कम होती है। मन मजबूत होता है। इसके पीछे कुछ संभावित जैविक तंत्र जरूर हैं। वह यह कि ठंड अचानक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करती है। व्यक्ति की सांस और ध्यान वर्तमान क्षण पर आ जाता है। चुनौती को पूरा करने से मनोवैज्ञानिक उपलब्धि का अनुभव हो सकता है। कुछ छोटे अध्ययन और अवलोकन बेहतर मनोदशा तथा कल्याण के संकेत देते हैं। 2025 की व्यवस्थित समीक्षा में तनाव में कुछ समयबद्ध परिवर्तन और बाद में जीवन-गुणवत्ता तथा नींद के कुछ लाभ के संकेत मिले, लेकिन निष्कर्ष अभी मजबूत नहीं हैं। इसलिए यह कहना उचित है कि किसी व्यक्ति को ठंडे शावर से व्यक्तिगत रूप से ताजगी या मानसिक ऊर्जा मिल सकती है। लेकिन इसे अवसाद या चिंता का प्रमाणित इलाज कहना उचित नहीं। मानसिक स्वास्थ्य की बीमारी होने पर ठंडा पानी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है।

एक और लोकप्रिय दावा है कि ठंडे शावर से टेस्टोस्टेरोन बहुत बढ़ जाता है। इसके लिए ठोस मानव प्रमाण बहुत कमजोर हैं। कभी-कभी इंटरनेट पर पशु अध्ययन, अंडकोष के तापमान और पुरुष प्रजनन से जुड़े अलग-अलग शोधों को मिलाकर यह निष्कर्ष बना दिया जाता है कि सुबह बर्फ जैसा शावर लेने से पुरुष हार्मोन बढ़ जाएगा। ऐसा विश्वसनीय नैदानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि सामान्य ठंडा शावर स्वस्थ पुरुष में दीर्घकालिक रूप से टेस्टोस्टेरोन को अर्थपूर्ण मात्रा में बढ़ाता है। इसलिए इसे वैज्ञानिक लाभों की सूची में रखना उचित नहीं।

इसी प्रकार ‘डोपामिन 250 प्रतिशत बढ़ता है’ जैसा लोकप्रिय दावा भी बहुत सावधानी से देखना चाहिए। लंबे ठंडे जल संपर्क और शरीर के तनाव-हार्मोन पर पुराने प्रयोगों से कुछ न्यूरो-रासायनिक परिवर्तन पाए गए हैं।लेकिन किसी विशेष लंबे ठंडे immersion अध्ययन की संख्या को दो मिनट के घरेलू शावर पर लागू करना उचित नहीं है। विज्ञान में किस तापमान पर, कितनी देर, शरीर का कितना हिस्सा और किस तरह के व्यक्ति पर प्रयोग हुआ—ये बातें निर्णायक होती हैं।

स्किन और बालों पर असर

अब त्वचा और बालों की बात करें। कहा जाता है कि ठंडा पानी ‘रोमछिद्र बंद कर देता है।’ रोमछिद्र छोटे दरवाजे नहीं हैं, जो गर्म पानी से खुलें और ठंडे से बंद हो जाएँ। त्वचा का तापमान, रक्त प्रवाह और सतही बनावट जरूर बदल सकती है। लेकिन ‘पोर्स सील हो गए’ वैज्ञानिक रूप से अच्छा वर्णन नहीं है। बहुत गर्म पानी त्वचा के प्राकृतिक तेलों को अधिक हटा सकता है। कुछ लोगों में रूखापन बढ़ा सकता है। इसलिए गुनगुना पानी त्वचा के लिए कई बार अधिक आरामदायक हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि बर्फ जैसा पानी त्वचा को विशेष रूप से युवा बना देता है।

ठंडे पानी का एक वास्तविक प्रभाव रक्तवाहिकाओं का सिकुड़ना है। त्वचा की सतह पर रक्त प्रवाह घटता है ताकि शरीर गर्मी बचाए। शावर बंद होने और शरीर गर्म होने पर रक्त प्रवाह फिर बदलता है। इसी शारीरिक घटना को कभी लोकप्रिय भाषा में ‘रक्त संचार कई गुना बढ़ जाता है’ कहा जाता है।लेकिन ऐसा कहना बहुत सरल है। शरीर रक्त प्रवाह को अलग क्षेत्रों में पुनर्वितरित करता है; यह कोई जादुई ‘सर्कुलेशन सफाई’ नहीं है।

सुरक्षा का पहलु है महत्वपूर्ण

अब सुरक्षा का सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। स्वस्थ युवा व्यक्ति के लिए कुछ सेकंड या थोड़े समय का ठंडा शावर सामान्यतः गंभीर समस्या नहीं बनता। लेकिन अचानक अत्यधिक ठंड शरीर के लिए तीव्र तनाव है। बहुत ठंडे पानी में पूरे शरीर का immersion अचानक हांफने, सांस की गति बढ़ने और हृदय पर दबाव पैदा कर सकता है। वैज्ञानिक समीक्षा इसे संभावित रूप से जीवन-घातक cold shock response तक बताती है, विशेषकर खुले पानी में जहाँ अचानक सांस लेने से पानी फेफड़ों में जा सकता है।

इसलिए हृदय रोग, महत्वपूर्ण हृदय-ताल विकार, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप या ऐसी दूसरी स्थिति वाले व्यक्ति को अचानक बर्फ जैसे पानी में उतरने का प्रयोग चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। ठंड से त्वचा की रक्तवाहिकाएँ सिकुड़ने पर रक्तचाप और हृदय पर भार अचानक बदल सकता है। ‘जितना ठंडा उतना अच्छा’ विज्ञान का नियम नहीं है।

यही अंतर सामान्य ठंडे शावर और ice bath में बहुत महत्वपूर्ण है। गर्मियों में नल के अपेक्षाकृत ठंडे पानी से 30 सेकंड नहाना और 4 डिग्री सेल्सियस बर्फ के पानी में दस मिनट गर्दन तक बैठना एक जैसे जोखिम वाले प्रयोग नहीं हैं। सोशल मीडिया अक्सर इन दोनों को एक ही cold exposure श्रेणी में रख देता है, जबकि शरीर पर उनकी तीव्रता बिल्कुल अलग हो सकती है। क्या ठंडा पानी आपको सामान्य सर्दी-जुकाम कर देता है? सीधे तौर पर नहीं। सामान्य जुकाम वायरस के कारण होता है, केवल शरीर पर ठंडा पानी पड़ने से rhinovirus उत्पन्न नहीं हो जाता। CDC के अनुसार सामान्य सर्दी ऊपरी श्वसन मार्ग का वायरल संक्रमण है। लेकिन इसका उलटा दावा भी नहीं करना चाहिए कि ठंडे शावर से आप वायरस से सुरक्षित हो जाएँगे। संक्रमण होने के लिए वायरस चाहिए और उससे बचाव में प्रतिरक्षा, संपर्क तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवहार अधिक महत्वपूर्ण हैं।

रोज ठंडा शावर लेने से शरीर इसकी आदत भी कुछ हद तक डाल सकता है। दोहराए गए cold-water immersion अध्ययनों में शुरुआती cold shock response में habituation दिखी है—लगभग कुछ exposures के बाद अनैच्छिक सांस और तनाव प्रतिक्रिया कुछ कम हो सकती है। लेकिन हर व्यक्ति में अनुकूलन समान नहीं होता और इसका अर्थ यह नहीं कि अनुभवी व्यक्ति अत्यधिक ठंड से सुरक्षित हो गया। यहीं ‘मानसिक अनुशासन’ का पक्ष आता है। यदि कोई व्यक्ति रोज ऐसी छोटी असुविधा स्वेच्छा से स्वीकार करता है तो उसे आत्मनियंत्रण या चुनौती पूरी करने का अनुभव मिल सकता है। यह मनोवैज्ञानिक लाभ वास्तविक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन इसे रक्त परीक्षण या दीर्घायु के सिद्ध वैज्ञानिक लाभ के समान स्तर पर नहीं रखा जाना चाहिए।

आपको क्या करना चाहिए?

अब सवाल है कि यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इसे आजमाना चाहे तो क्या करना चाहिए। इसे प्रतियोगिता बनाने की जरूरत नहीं है। सामान्य गर्म या गुनगुने शावर के अंत में लगभग 30 सेकंड ठंडे पानी से शुरुआत करना उस 2016 के बड़े शावर अध्ययन में इस्तेमाल किए गए तरीकों में से एक था। उस अध्ययन में 30, 60 और 90 सेकंड के समूहों के बीच बीमारी के कारण अनुपस्थिति के परिणाम में स्पष्ट dose-response नहीं मिला। अर्थात् 90 सेकंड आवश्यक रूप से 30 सेकंड से बेहतर सिद्ध नहीं हुआ।

इससे एक महत्वपूर्ण संदेश निकलता है—ठंडे शावर में स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए वीरता दिखाते हुए पाँच या दस मिनट काँपना वैज्ञानिक आवश्यकता नहीं है। और बर्फ डालकर पानी को शून्य के करीब पहुँचाना भी सामान्य स्वास्थ्य के लिए सिद्ध रूप से अधिक लाभदायक नहीं है। खिलाड़ी रिकवरी अध्ययनों में भी विभिन्न तापमान और अवधि के परिणाम मिश्रित हैं। एक पुराने विश्लेषण ने 11–15 डिग्री सेल्सियस तथा लगभग 11–15 मिनट immersion को व्यायाम के बाद दर्द के लिए प्रभावी क्षेत्र बताया था। लेकिन वह खेल रिकवरी की बात थी, सुबह के स्वास्थ्य शावर की नहीं।

इसलिए यदि उद्देश्य सुबह ताजगी है तो कुछ सेकंड का ठंडा अंत पर्याप्त महसूस हो सकता है। यदि उद्देश्य खेल के बाद रिकवरी है तो वह अलग प्रोटोकॉल है। यदि उद्देश्य वजन घटाना है तो ठंडे शावर पर निर्भर करना सही रणनीति नहीं। यदि उद्देश्य मानसिक बीमारी का उपचार है तो चिकित्सकीय उपचार की जगह इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। एक और बात अक्सर अनदेखी रहती है—क्या आपको यह पसंद भी है? स्वास्थ्य की अच्छी आदत वह है जिसे वर्षों तक निभाया जा सके। कोई व्यक्ति ठंडे शावर से ऊर्जा महसूस करता है तो वह जारी रख सकता है। दूसरा व्यक्ति सुबह गुनगुने पानी से नहाकर नियमित व्यायाम करता है, अच्छी नींद लेता है और पौष्टिक भोजन करता है। उसे केवल सोशल मीडिया के दबाव में ठंडे पानी से खुद को परेशान करने की कोई चिकित्सा आवश्यकता नहीं है।

स्वास्थ्य विज्ञान में प्राथमिकताओं का क्रम महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी, संतुलित भोजन, स्वस्थ रक्तचाप और टीकाकरण के प्रमाण ठंडे शावर की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हैं। यदि कोई व्यक्ति इन सबकी उपेक्षा करके केवल रोज बर्फ के पानी में उतर रहा है तो उसने स्वास्थ्य की सबसे आसान लेकिन अपेक्षाकृत कम प्रमाणित चीज को सबसे महत्वपूर्ण बना दिया है।और यदि कोई खिलाड़ी रोज ताकत और मांसपेशी बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण करता है तो उसे विशेष सावधानी चाहिए। प्रत्येक भार-प्रशिक्षण सत्र के तुरंत बाद नियमित ठंडे immersion को आदत बना लेना उसकी hypertrophy और strength adaptation के कुछ हिस्से को कम कर सकता है। इसलिए प्रतियोगिता के बाद soreness कम करना और रोज जिम के बाद muscle-building recovery करना एक ही उद्देश्य नहीं हैं।

पूरी वैज्ञानिक तस्वीर को यदि बहुत सरल भाषा में रखा जाए तो ठंडे शावर के सबसे विश्वसनीय प्रभाव तत्काल हैं—शरीर की तीव्र ठंड प्रतिक्रिया, सतर्कता का अनुभव, रक्तवाहिकाओं में परिवर्तन और कुछ संदर्भों में व्यायाम के बाद दर्द/रिकवरी में लाभ। दीर्घकालीन प्रतिरक्षा, वजन घटाना, मानसिक स्वास्थ्य, चयापचय और दूसरी चीजों के बारे में रोचक संकेत जरूर हैं। लेकिन अभी उतना मजबूत प्रमाण नहीं कि डॉक्टर सभी स्वस्थ लोगों को रोज ठंडे शावर की सार्वभौमिक सलाह देने लगें। 2025 की सबसे व्यापक हालिया समीक्षा का निष्कर्ष भी यही है कि संभावनाएँ हैं। लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले बड़े परीक्षण अभी कम हैं।

इसलिए इसे ‘सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड’ कहना भी गलत होगा। ठंड का मानव शरीर पर वास्तविक विज्ञान है, खेल चिकित्सा में इसका वास्तविक उपयोग है और ताप-नियमन तथा भूरी वसा पर गंभीर शोध मौजूद है। लेकिन उस वास्तविक विज्ञान के ऊपर इंटरनेट ने चमत्कारी दावों की कई परतें चढ़ा दी हैं। सबसे सही निष्कर्ष यह है—स्वस्थ व्यक्ति को यदि ठंडा शावर अच्छा लगता है तो थोड़े समय के लिए लेना एक उचित व्यक्तिगत आदत हो सकती है। उससे ताजगी और मानसिक सक्रियता महसूस हो सकती है और कुछ स्वास्थ्य प्रभाव संभव हैं। लेकिन इससे वजन तेजी से कम होने, रोग प्रतिरोधक क्षमता असाधारण रूप से बढ़ने, टेस्टोस्टेरोन बढ़ने या बीमारी दूर होने की अपेक्षा करना वर्तमान प्रमाण से समर्थित नहीं है।

और इस विषय का सबसे उपयोगी सूत्र शायद यही है—ठंडा शावर स्वास्थ्य का बोनस हो सकता है, उसकी बुनियाद नहीं। व्यायाम, नींद, संतुलित भोजन और चिकित्सा देखभाल के ऊपर यदि आपको 30–60 सेकंड का ठंडा पानी अच्छा लगता है तो ठीक। लेकिन बर्फ के पानी को स्वास्थ्य का कोई अनिवार्य संस्कार मानने की विज्ञान में अभी कोई आवश्यकता नहीं है।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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