दिमाग में गाना बार-बार क्यों बजता है? जानिए ‘ईयरवर्म’ का विज्ञान

What is an Earworm: सुना हुआ गाना घंटों दिमाग में क्यों घूमता रहता है? जानिए ईयरवर्म क्या है, दिमाग एक ही धुन को बार-बार क्यों दोहराता है और याददाश्त, ध्यान व मूड का इससे क्या संबंध है।

Neel Mani Lal
Published on: 13 Aug 2026 6:14 PM IST
why does a song get stuck in your head
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why does a song get stuck in your head 

कभी ऐसा हुआ है कि सुबह आपने बस कुछ सेकंड के लिए कोई गाना सुना और उसके बाद वह पूरे दिन दिमाग में घूमता रहा? आप काम कर रहे हैं, गाड़ी चला रहे हैं, खाना बना रहे हैं या सोने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दिमाग में वही दो-चार लाइन या धुन बार-बार चलती रहती है। मजेदार बात यह है कि कई बार वह गाना आपको पसंद भी नहीं होता, फिर भी उससे छुटकारा नहीं मिलता। आप दूसरे गाने सुन लेते हैं, फोन चला लेते हैं, किसी से बात करने लगते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद वही धुन फिर लौट आती है।

इस अनुभव को मनोविज्ञान में इनवॉलंटरी म्यूजिकल इमेजरी (Involuntary Musical Imagery) यानी अनचाहे तरीके से दिमाग में संगीत बजते रहने के रूप में समझा जाता है। आम बोलचाल में इसे ईयरवर्म (earworm) कहा जाता है। इसका मतलब कान में सचमुच कोई आवाज सुनाई देना नहीं है। आवाज बाहर नहीं होती; दिमाग अपने भीतर उस गाने की धुन या कुछ शब्दों को दोहराता रहता है। यही वजह है कि ईयरवर्म को समझना हमारे दिमाग की याददाश्त, ध्यान और संगीत के बीच संबंध को समझने का एक दिलचस्प तरीका है।

ईयरवर्म आखिर होता क्या है?

ईयरवर्म (earworm) का वैज्ञानिक नाम इनवॉलंटरी म्यूजिकल इमेजरी है। यानी बिना कोशिश किए किसी गाने का कोई हिस्सा दिमाग में अपने आप चलने लगना। यह जरूरी नहीं कि पूरा गाना दिमाग में बजे। अक्सर सिर्फ मुखड़ा, कोई खास लाइन या कुछ सेकंड की धुन बार-बार लौटती रहती है। यह अनुभव बहुत आम है। अलग-अलग अध्ययनों में लोगों से उनकी रोजमर्रा की मानसिक गतिविधियों के बारे में पूछा गया और बड़ी संख्या में लोगों ने माना कि उन्हें समय-समय पर अनचाही धुनें दिमाग में सुनाई देती हैं। हालांकि इसकी सटीक दर बताना मुश्किल है, क्योंकि लोग ईयरवर्म को अलग-अलग तरह से महसूस करते हैं और शोधों में इसकी परिभाषा और सवाल पूछने का तरीका अलग रहा है। सबसे जरूरी बात यह है कि ईयरवर्म कोई बीमारी नहीं है। सामान्य स्थिति में यह दिमाग की एक आम और अक्सर मजेदार विशेषता है।

कान नहीं, दिमाग में बजता है गाना

नाम सुनकर लगता है कि शायद कोई धुन हमारे कान में फंस जाती है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। होता ये है कि जब हम कोई गाना सुनते हैं तो कान ध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर दिमाग तक पहुंचाता है। दिमाग उन संकेतों को संगीत, आवाज, ताल और शब्दों के रूप में पहचानता है। लेकिन किसी गाने की याद इतनी मजबूत हो सकती है कि बाद में बिना उस गाने की बाहरी आवाज के भी दिमाग उसका एक हिस्सा दोबारा सक्रिय कर दे। यानी ईयरवर्म में कमरे में कोई संगीत नहीं बज रहा होता। संगीत का अनुभव दिमाग के भीतर बन रहा होता है। यही कारण है कि कभी-कभी आप दिमाग में गाने की धुन इतनी स्पष्ट महसूस कर सकते हैं कि कुछ सेकंड के लिए आपको लगता है जैसे सच में कहीं वह गाना बज रहा हो।

दिमाग एक ही धुन को बार-बार क्यों दोहराता है?

इसके पीछे एक ही कारण नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कई चीजें मिलकर ईयरवर्म पैदा कर सकती हैं - गाने की खासियत, आपकी याददाश्त, हाल में सुना गया संगीत, आपका मूड, आसपास का माहौल और उस समय आपका दिमाग कितना व्यस्त या खाली है। सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है दोहराव। जिस गाने को आपने हाल में कई बार सुना है, उसके दिमाग में सक्रिय होने की संभावना ज्यादा हो सकती है। गाना जितना परिचित होगा, दिमाग के लिए उसकी धुन और शब्दों को दोबारा सक्रिय करना उतना आसान हो सकता है। यही वजह है कि कोई गाना सोशल मीडिया पर बार-बार सुनाई दे, विज्ञापन में लगातार चले या किसी फिल्म में बार-बार इस्तेमाल हो तो उसके दिमाग में अटकने की संभावना बढ़ सकती है।

कुछ गाने ही क्यों अटकते हैं?

अगर हर गाना बराबर आसानी से दिमाग में अटकता तो हर दिन हमारे सिर में दर्जनों गाने घूम रहे होते। लेकिन ऐसा नहीं होता। कुछ गानों की संरचना ही ऐसी होती है जो दिमाग के लिए आसानी से याद रहने वाली होती है। तेज और स्पष्ट ताल, छोटा और दोहराव वाला मुखड़ा, आसानी से गुनगुनाई जा सकने वाली धुन और अचानक बदलता हुआ कोई खास संगीत हिस्सा गाने को यादगार बना सकता है।

2011 में ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ गोल्डस्मिथ्स के शोधकर्ताओं ने ईयरवर्म से जुड़े गानों की विशेषताओं का अध्ययन किया। शोध में सामने आया कि लोकप्रिय गानों के अलावा कुछ खास संगीत पैटर्न भी ईयरवर्म बनने की संभावना बढ़ा सकते हैं। इनमें ऐसी धुनें शामिल थीं जिनमें सामान्य पॉप संगीत से अलग कुछ खास उठाव-पतन या अप्रत्याशित सुरों का इस्तेमाल होता था। यानी केवल गाना लोकप्रिय होना ही पर्याप्त नहीं है। धुन का डिजाइन भी मायने रखता है।

गाने का अधूरा रह जाना भी दिमाग को परेशान करता है

ईयरवर्म को समझने की एक दिलचस्प अवधारणा है गोल्डनहॉर्न प्रभाव (goldenhorn effect) और संगीत के अधूरेपन से जुड़ी मानसिक प्रक्रिया, लेकिन इसे सीधे किसी एक सिद्धांत से समझना सही नहीं होगा। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह जरूर देखा है कि हमारा दिमाग अधूरी जानकारी को पूरा करने की कोशिश करता है। अगर किसी गाने की धुन का एक छोटा हिस्सा बार-बार सुनाई देता है और वहीं रुक जाता है, तो दिमाग उस पैटर्न को पूरा करने की कोशिश कर सकता है। यही कारण है कि कभी-कभी आपको गाने की सिर्फ एक लाइन याद रहती है और दिमाग उसी लाइन को बार-बार दोहराता रहता है।

दिमाग गाने को “लूप” में क्यों डाल देता है?

यहां वर्किंग मेमोरी (working memory) यानी थोड़े समय के लिए जानकारी को दिमाग में सक्रिय रखने वाली प्रणाली महत्वपूर्ण हो सकती है। जब हम कोई गाना सुनते हैं तो उसका एक हिस्सा थोड़े समय के लिए सक्रिय रहता है। अगर उस हिस्से को दोहराया जाए या उस पर हमारा ध्यान बना रहे तो वह और मजबूत हो सकता है। कुछ वैज्ञानिकों ने ईयरवर्म को एक तरह के मानसिक “लूप” (loop) से जोड़कर देखा है। गाने का छोटा हिस्सा दिमाग में सक्रिय होता है, फिर उसी हिस्से को दिमाग दोबारा सक्रिय करता है और यह प्रक्रिया कुछ समय तक चल सकती है। हालांकि इसे यह कह देना कि दिमाग में सचमुच कोई “लूप बटन” दब जाता है, बहुत सरल व्याख्या होगी। असल प्रक्रिया में याददाश्त, ध्यान और संगीत से जुड़े कई मस्तिष्क नेटवर्क एक साथ काम करते हैं।

खाली दिमाग में ईयरवर्म ज्यादा क्यों आता है?

यह अनुभव अक्सर तब होता है जब आपका दिमाग पूरी तरह व्यस्त नहीं होता। आप नहाते समय, सफर करते समय, बर्तन साफ करते हुए या सोने से पहले कोई गाना याद कर सकते हैं। उस समय आपका ध्यान किसी मुश्किल समस्या पर नहीं लगा होता। ऐसी स्थिति में दिमाग की अंदरूनी गतिविधियों के लिए ज्यादा जगह होती है। हाल में सुना गया कोई गाना या पुरानी याद अचानक सक्रिय हो सकती है। इसलिए अगर आपको लगता है कि “जब काम करने बैठता हूं तो गाना याद नहीं आता, लेकिन रात को सोने जाऊं तो वही गाना बजने लगता है”, तो इसमें कुछ अजीब नहीं है। होता ये है कि शांत वातावरण में हमारा ध्यान बाहरी दुनिया से थोड़ा हटकर अंदर की मानसिक गतिविधियों पर जा सकता है।

तनाव में भी गाने क्यों अटकते हैं?

मूड भी ईयरवर्म को प्रभावित कर सकता है। अगर आप तनाव में हैं तो दिमाग किसी परिचित और बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न की तरफ जा सकता है। संगीत भावनाओं से बहुत गहराई से जुड़ा होता है, इसलिए कोई गाना किसी खास समय, व्यक्ति या घटना की याद से जुड़ा हो तो वह अचानक दिमाग में लौट सकता है। कभी गाना इसलिए याद नहीं आता कि आपने उसे अभी सुना था, बल्कि इसलिए कि उससे जुड़ी कोई भावना या याद वर्तमान स्थिति से मिलती-जुलती है। उदाहरण के लिए किसी पुराने दोस्त की याद आई और उसी समय स्कूल या कॉलेज के दिनों का कोई गाना दिमाग में चलने लगा।

दरअसल, संगीत और भावनाओं का संबंध दिमाग में काफी गहरा है। संगीत सुनते समय सिर्फ धुन की पहचान नहीं होती; उससे जुड़ी भावनात्मक और व्यक्तिगत यादें भी सक्रिय हो सकती हैं। यही वजह है कि कुछ गाने सुनते ही हमें किसी खास जगह, व्यक्ति या समय की याद आ जाती है। ईयरवर्म में भी यही प्रक्रिया काम कर सकती है। कोई गाना सिर्फ संगीत नहीं रह जाता, बल्कि उसके साथ जुड़ी यादों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इसलिए कभी दिमाग में गाना अटकता है और हमें समझ नहीं आता कि अचानक वही गाना क्यों याद आया।

क्या पसंदीदा गाने ज्यादा अटकते हैं?

ऐसा जरूरी नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि ईयरवर्म बनने वाले गाने हमेशा हमारे पसंदीदा गाने नहीं होते। कभी कोई ऐसा विज्ञापन जिंगल या गाना दिमाग में फंस जाता है जिसे हम पसंद भी नहीं करते। क्योंकि ईयरवर्म का संबंध सिर्फ पसंद से नहीं है। परिचितता, दोहराव, धुन की संरचना और हाल की सुनाई गई जानकारी भी महत्वपूर्ण हैं। इसीलिए कोई बेहद साधारण विज्ञापन की लाइन भी पूरे दिन दिमाग में घूम सकती है।

विज्ञापन वाले जिंगल इतने आसानी से क्यों याद हो जाते हैं?

विज्ञापन बनाने वाले इसे अच्छी तरह जानते हैं। छोटे जिंगल में कुछ शब्द, सरल धुन और बार-बार दोहराया जाने वाला पैटर्न होता है। उसका उद्देश्य ही यह होता है कि वह आपके दिमाग में टिक जाए। आप विज्ञापन कुछ सेकंड के लिए देखते हैं, लेकिन वही धुन बाद में अपने आप याद आ सकती है। यही ईयरवर्म की ताकत है कि दिमाग को बार-बार याद कराने की जरूरत नहीं पड़ती; धुन खुद वापस आ सकती है।

कई न्यूरोइमेजिंग अध्ययनों से पता चला है कि जब लोग संगीत को मन में कल्पना करते हैं तो संगीत की प्रोसेसिंग से जुड़े कुछ मस्तिष्क क्षेत्र सक्रिय हो सकते हैं, हालांकि बाहरी संगीत सुनने और मन में संगीत सुनने की प्रक्रिया बिल्कुल समान नहीं होती। यानी जब आप बिना ईयरफोन के किसी गाने की धुन “सुन” रहे होते हैं, तब भी दिमाग संगीत से जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा होता है। इसीलिए मानसिक रूप से गाना सुनना कई बार काफी वास्तविक अनुभव लगता है।

क्या ईयरवर्म याददाश्त का अच्छा संकेत है?

किसी हद तक यह दिखाता है कि हमारा दिमाग संगीत के पैटर्न को बहुत मजबूती से स्टोर कर सकता है। संगीत में ताल, धुन और शब्द एक साथ होते हैं, इसलिए यह कई तरह की यादों को जोड़ देता है। इसी कारण कई साल पहले सुना हुआ गाना अचानक याद आ सकता है, जबकि उसी समय की कई दूसरी बातें हमें याद नहीं रहतीं। आपको शायद पांच साल पहले की किसी तारीख याद न हो, लेकिन उस दिन बजा गाना आज भी याद हो सकता है।

गाना दिमाग से निकालें कैसे?

यहां एक मजेदार उल्टा तरीका सामने आता है। अगर आप खुद से लगातार कह रहे हैं, “यह गाना दिमाग से निकलना चाहिए, यह गाना नहीं सोचना है”, तो कई बार आप उसी गाने पर और ज्यादा ध्यान दे रहे होते हैं। दिमाग को किसी विचार को दबाने का आदेश देना कभी-कभी उसी विचार को और सक्रिय कर सकता है। इसलिए गाने को जबरदस्ती रोकने के बजाय कोई दूसरा काम करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। किसी दूसरे गाने को पूरा सुनना, बातचीत करना, पढ़ने या किसी ऐसे काम में लगना जिसमें ध्यान लगाना पड़े, मानसिक लूप को तोड़ने में मदद कर सकता है। कुछ शोधों में यह भी सुझाव दिया गया है कि अगर गाना बार-बार अटक रहा है तो उसे पूरा सुन लेना मदद कर सकता है। इससे दिमाग को गीत का पूरा पैटर्न मिल जाता है और अधूरापन कम हो सकता है। लेकिन हर व्यक्ति में एक ही तरीका काम करे, यह जरूरी नहीं।

अगर आपने पहले गाने की जगह दूसरा बेहद catchy गाना लगा लिया तो वह नया गाना पुराने की जगह ले सकता है। यानी ईयरवर्म को हटाने के चक्कर में आप एक गाने से निकलकर दूसरे गाने में फंस सकते हैं। इसलिए कई बार संगीत के बजाय ऐसा काम ज्यादा उपयोगी हो सकता है जिसमें आपका ध्यान सक्रिय रूप से लगे—जैसे किसी से बातचीत करना, पढ़ना, पहेली हल करना या कोई ऐसा काम जिसमें लगातार ध्यान देना पड़े।

क्या ईयरवर्म से डरने की जरूरत है?

कभी-कभार किसी गाने का दिमाग में अटक जाना सामान्य मानसिक अनुभव है। यह इस बात का संकेत नहीं है कि आपके दिमाग में कोई खराबी है। हां, अगर कोई व्यक्ति लगातार ऐसी आवाजें सुनता है जो उसे वास्तविक बाहरी आवाज जैसी लगती हैं और उसे पता नहीं चलता कि वे उसके दिमाग की गतिविधि हैं या बाहर से आ रही हैं, तो यह ईयरवर्म से अलग मामला हो सकता है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। सामान्य ईयरवर्म में व्यक्ति आम तौर पर जानता है कि गाना वास्तव में कमरे में नहीं बज रहा है।

आखिर गाना ही क्यों, कोई और चीज क्यों नहीं?

इसका जवाब ये है कि संगीत दिमाग के लिए बेहद संरचित जानकारी है। उसमें ताल है, दोहराव है, सुर हैं, शब्द हैं और भावनाएं हैं। दिमाग पैटर्न को पहचानने में बहुत अच्छा है और संगीत पैटर्न से भरा हुआ है। एक बार जब किसी धुन का ढांचा दिमाग में मजबूत हो जाता है तो उसका छोटा-सा हिस्सा भी पूरे गाने की याद को सक्रिय कर सकता है। यही वजह है कि कोई सिर्फ दो सेकंड की धुन सुनकर पूरा गाना पहचान लेता है। और यही वजह है कि वही दो सेकंड कभी-कभी पूरे दिन दिमाग में घूमते रहते हैं।

हमें लगता है कि दिमाग में गाना अटक जाना परेशान करने वाली समस्या है। लेकिन इसके पीछे वही क्षमता काम कर रही है जो हमें संगीत याद रखने, गाने के बोल पहचानने, पुराने गानों को वर्षों बाद गुनगुनाने और संगीत से जुड़ी भावनात्मक यादें वापस लाने में मदद करती है। दिमाग संगीत को सिर्फ सुनता नहीं है, उसे पैटर्न के रूप में पकड़ता है और जरूरत पड़ने पर दोबारा बना सकता है। कभी यही क्षमता हमारे काम आती है और कभी हमें परेशान करती है।

इसलिए अगली बार जब सुबह सुना हुआ कोई गाना रात तक दिमाग में घूमता रहे तो परेशान होने से पहले एक बात याद रखिए, गाना आपके कान में नहीं फंसा है, वह आपकी याददाश्त और ध्यान के बीच चल रहे एक छोटे से मानसिक लूप में फंसा है और सबसे मजेदार बात यह है कि जितना ज्यादा आप सोचेंगे, यह गाना मेरे दिमाग से निकल क्यों नहीं रहा?, उतनी देर तक दिमाग शायद उसी गाने को दोहराता रहेगा।

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