रेलवे टिकट पर GNWL, RLWL, PQWL, RSWL, TQWL और RAC का क्या मतलब है?

GNWL vs RLWL Kya Hai: रेलवे टिकट पर GNWL, RLWL, PQWL, RSWL, TQWL और RAC का क्या मतलब होता है? जानिए कौन-सी वेटिंग जल्दी कन्फर्म होती है और टिकट बुक करते समय किन बातों का ध्यान रखें।

Yogesh Mishra
Published on: 16 Aug 2026 9:23 PM IST
Railway Waiting Ticket GNWL vs RLWL
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Railway Waiting Ticket GNWL vs RLWL 

GNWL vs RLWL Kya Hai: भारतीय रेलवे में टिकट बुक करते समय अक्सर यात्रियों का पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि टिकट कन्फर्म है या वेटिंग। यदि टिकट वेटिंग में है तो अगला सवाल होता है—वेटिंग कितनी है? लेकिन केवल वेटिंग नंबर जान लेना पर्याप्त नहीं है। WL 20 का मतलब हर स्थिति में एक जैसा नहीं होता। GNWL 20, RLWL 20, PQWL 20 और TQWL 20—चारों की कन्फर्म होने की संभावना अलग-अलग हो सकती है। यही कारण है कि कई बार 30 या 40 की वेटिंग वाला टिकट कन्फर्म हो जाता है, जबकि दूसरी ट्रेन में 10 या 15 की वेटिंग वाला टिकट आखिरी समय तक प्रतीक्षा सूची में रह जाता है।

इसका कारण भारतीय रेलवे की कोटा व्यवस्था है। किसी ट्रेन की सभी आरक्षित सीटें एक ही प्रतीक्षा सूची से नहीं जुड़ी होतीं। ट्रेन कहाँ से शुरू होती है, यात्री कहाँ से चढ़ेगा, कहाँ तक जाएगा, किस स्टेशन के लिए कितना कोटा निर्धारित है और टिकट सामान्य कोटे में लिया गया है या तत्काल में—इन सबके आधार पर प्रतीक्षा सूची बदल जाती है। इसीलिए रेलवे टिकट पर GNWL, RLWL, PQWL, RSWL और TQWL जैसे संकेत दिखाई देते हैं। इनके अलावा RAC एक ऐसी महत्वपूर्ण स्थिति है जिसमें टिकट पूरी तरह कन्फर्म न होने के बावजूद यात्री को आरक्षित डिब्बे में यात्रा करने का अधिकार मिल जाता है।

इन संकेतों को समझ लिया जाए तो टिकट बुक करते समय यह अनुमान लगाना काफी आसान हो जाता है कि उपलब्ध विकल्पों में कौन-सा टिकट अपेक्षाकृत बेहतर है और किस प्रतीक्षा सूची के कन्फर्म होने की संभावना अधिक है।

GNWL — General Waiting List

GNWL का पूरा नाम General Waiting List यानी सामान्य प्रतीक्षा सूची है। रेलवे में मिलने वाली विभिन्न प्रतीक्षा सूचियों में यह सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण श्रेणी है। यह प्रायः उस स्थिति में मिलती है जब यात्री ट्रेन के प्रारंभिक स्टेशन या उसके आसपास के प्रमुख स्टेशन से ऐसे गंतव्य तक यात्रा कर रहा हो जिसके लिए सामान्य कोटा उपलब्ध है।

GNWL का सबसे बड़ा लाभ यह है कि सामान्य कोटे में प्रायः सीटों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है। इस कोटे के कन्फर्म यात्रियों द्वारा टिकट रद्द किए जाने पर प्रतीक्षा सूची आगे बढ़ती जाती है। यही कारण है कि समान वेटिंग संख्या होने पर सामान्यतः GNWL के कन्फर्म होने की संभावना दूसरी कई प्रतीक्षा सूचियों की तुलना में बेहतर होती है।

मसलन किसी ट्रेन में एक विकल्प GNWL 25 और दूसरा RLWL 15 दिखाई दे रहा है तो केवल 15 और 25 देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि RLWL 15 निश्चित रूप से बेहतर है। सामान्य कोटा बड़ा होने और उसमें टिकट रद्द होने की संख्या अधिक होने के कारण कई परिस्थितियों में GNWL 25 भी RLWL 15 से पहले कन्फर्म हो सकता है।

RLWL — Remote Location Waiting List

RLWL का पूरा नाम Remote Location Waiting List है। इसे दूरस्थ स्थान प्रतीक्षा सूची कहा जा सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों में रेलवे मार्ग के कुछ महत्वपूर्ण मध्यवर्ती स्टेशनों के लिए अलग कोटा निर्धारित करता है। ऐसे स्टेशन ट्रेन के शुरुआती स्टेशन नहीं होते, लेकिन वहाँ से बड़ी संख्या में यात्री चढ़ते या उतरते हैं।

मान लीजिए कोई ट्रेन दिल्ली से पटना जा रही है और उसके रास्ते में कानपुर, प्रयागराज या किसी दूसरे प्रमुख स्टेशन से बड़ी संख्या में यात्री यात्रा करते हैं। रेलवे ऐसे महत्वपूर्ण मध्यवर्ती स्थानों के लिए अलग आरक्षण कोटा रख सकता है। उस कोटे की सीटें भर जाने पर संबंधित यात्रियों को RLWL मिल सकता है।

RLWL में समस्या यह है कि इसका कोटा सामान्य कोटे की तुलना में छोटा हो सकता है। इसके कन्फर्म होने की संभावना मुख्यतः संबंधित कोटे में सीट खाली होने पर निर्भर करती है। इसलिए RLWL की वेटिंग संख्या छोटी दिखाई देने के बावजूद उसकी कन्फर्मेशन संभावना GNWL की समान संख्या से कम हो सकती है।

PQWL — Pooled Quota Waiting List

PQWL का पूरा नाम Pooled Quota Waiting List है। इसे सरल भाषा में साझा कोटा प्रतीक्षा सूची कहा जा सकता है। यह प्रायः ऐसी यात्राओं में दिखाई देती है जिनमें कई मध्यवर्ती स्टेशन या यात्रा-खंड एक सीमित कोटा साझा करते हैं।

मान लीजिए कोई ट्रेन A से F तक जाती है और बीच में B, C, D तथा E महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। रेलवे कुछ मध्यवर्ती स्टेशनों और उनके बीच की यात्राओं के लिए एक साझा कोटा निर्धारित कर सकता है। इस कोटे की सीटें भर जाने के बाद मिलने वाली प्रतीक्षा स्थिति PQWL हो सकती है।

चूँकि एक ही सीमित कोटा कई स्टेशन-युग्मों के यात्रियों के लिए इस्तेमाल हो सकता है, इसलिए इसकी प्रतीक्षा सूची का आगे बढ़ना सामान्य कोटे जितना तेज होना जरूरी नहीं है। PQWL का नंबर कम होने का अर्थ यह नहीं है कि वह GNWL के अधिक नंबर से निश्चित रूप से पहले कन्फर्म हो जाएगा।

RSWL — Roadside Station Waiting List

RSWL का पूरा नाम Roadside Station Waiting List है। यह ट्रेन के मार्ग में आने वाले कुछ ऐसे स्टेशनों से संबंधित प्रतीक्षा सूची है जिनके लिए रेलवे की आरक्षण व्यवस्था में अलग कोटा निर्धारित हो सकता है।

यह GNWL या RLWL की तुलना में यात्रियों को कम दिखाई देती है। संबंधित कोटा सीमित होने के कारण इसमें सीट मिलने की संभावना उस विशेष मार्ग, स्टेशन और कोटे में होने वाले रद्दीकरण पर निर्भर करती है। सामान्यतः RSWL की कन्फर्मेशन संभावना GNWL की तुलना में कम मानी जाती है, हालांकि वास्तविक स्थिति ट्रेन और यात्रा-खंड के अनुसार बदल सकती है।

TQWL — Tatkal Quota Waiting List

TQWL का पूरा नाम Tatkal Quota Waiting List यानी तत्काल कोटा प्रतीक्षा सूची है। जब तत्काल आरक्षण खुलने के बाद उस कोटे की उपलब्ध सीटें भर जाती हैं तो आगे बुकिंग करने वाले यात्रियों को TQWL मिल सकता है।

तत्काल कोटे की सीटों की संख्या सीमित होती है और इसकी प्रतीक्षा सूची का आगे बढ़ना उस कोटे की उपलब्धता तथा रद्दीकरण पर निर्भर करता है। इसलिए TQWL को केवल उसका छोटा नंबर देखकर सुरक्षित टिकट नहीं समझना चाहिए।

उदाहरण के लिए GNWL 25 और TQWL 10 उपलब्ध हों तो केवल यह देखकर कि तत्काल वेटिंग 10 है, यह निष्कर्ष निकालना गलत हो सकता है कि TQWL निश्चित रूप से पहले कन्फर्म होगा। सामान्य कोटे में होने वाले अधिक रद्दीकरण के कारण कई मामलों में GNWL अधिक तेजी से आगे बढ़ सकता है।

RAC — वेटिंग और कन्फर्म टिकट के बीच की महत्वपूर्ण स्थिति

RAC का पूरा नाम Reservation Against Cancellation है। यह सामान्य वेटिंग टिकट से काफी बेहतर स्थिति है। RAC मिलने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यात्री को आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने का अधिकार मिल जाता है, भले ही प्रारंभ में उसे पूरी बर्थ न मिली हो।

RAC यात्रियों को सामान्यतः बैठने की आरक्षित जगह उपलब्ध कराई जाती है और कई स्थितियों में साइड लोअर बर्थ दो RAC यात्रियों के बीच साझा होती है। इसके बाद जैसे-जैसे कन्फर्म टिकट रद्द होते हैं अथवा चार्ट तैयार करते समय अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध होती हैं, RAC यात्रियों को उनके क्रम के अनुसार पूरी बर्थ मिल सकती है।

इसलिए RAC को सामान्य वेटिंग सूची के बराबर नहीं समझना चाहिए। यदि आपके पास RAC टिकट है तो यात्रा का अधिकार सुरक्षित रहता है; प्रश्न मुख्यतः यह रह जाता है कि पूरी बर्थ मिलेगी या साझा व्यवस्था में यात्रा करनी पड़ेगी।

WL, RAC और Confirmed में क्या अंतर है?

इसे सबसे सरल तरीके से इस प्रकार समझा जा सकता है—

Waiting List → RAC → Confirmed Berth

वेटिंग टिकट में अभी यात्रा के लिए आरक्षित स्थान सुनिश्चित नहीं है। RAC में आरक्षित डिब्बे में यात्रा सुनिश्चित हो जाती है। लेकिन पूरी बर्थ सुनिश्चित नहीं होती। Confirmed टिकट में निर्धारित बर्थ उपलब्ध होती है। ई-टिकट के मामले में यह अंतर और महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि चार्ट तैयार होने के बाद किसी पीएनआर के सभी यात्री पूरी तरह प्रतीक्षा सूची में ही रह जाते हैं, तो ऐसा ई-टिकट स्वतः रद्द हो जाता है और उस टिकट के आधार पर आरक्षित डिब्बे में यात्रा नहीं की जा सकती। इसके विपरीत RAC टिकट पर यात्रा की जा सकती है।

Booking Status और Current Status भी समझना जरूरी

रेलवे टिकट पर कई बार दो अलग स्थितियाँ दिखाई देती हैं—Booking Status और Current Status। Booking Status बताता है कि टिकट लेते समय आपकी स्थिति क्या थी, जबकि Current Status बताता है कि अब आपकी स्थिति कहाँ पहुँच चुकी है। उदाहरण के लिए टिकट लेते समय स्थिति GNWL 80 थी और कुछ दिनों बाद Current Status GNWL 25 हो गई। इसका अर्थ है कि प्रतीक्षा सूची में आपके आगे के काफी स्थान साफ हो चुके हैं। यदि यात्रा में अभी कई दिन शेष हैं तो इसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। लेकिन इससे यह गारंटी नहीं होती कि टिकट अंततः कन्फर्म ही हो जाएगा।

कौन-सी वेटिंग सबसे जल्दी कन्फर्म होती है?

यही इस पूरी व्यवस्था का सबसे उपयोगी प्रश्न है। इसका कोई ऐसा स्थायी नियम नहीं है जो हर ट्रेन और हर मार्ग पर समान रूप से लागू हो। टिकट कन्फर्म होने की संभावना ट्रेन की लोकप्रियता, यात्रा की तारीख, मौसम, त्योहार, मार्ग, श्रेणी, कोटा, स्टेशन और कन्फर्म यात्रियों द्वारा टिकट रद्द किए जाने की संख्या पर निर्भर करती है। फिर भी सामान्य व्यावहारिक दृष्टि से GNWL को सबसे मजबूत प्रतीक्षा श्रेणियों में माना जाता है। RLWL, PQWL और RSWL अपेक्षाकृत छोटे या विशेष कोटों से जुड़ी होती हैं, इसलिए समान वेटिंग संख्या पर इनके कन्फर्म होने की संभावना GNWL से कम हो सकती है। TQWL तत्काल कोटे से जुड़ी होने के कारण अलग प्रकृति की प्रतीक्षा सूची है और इसमें भी अनिश्चितता अधिक हो सकती है।लेकिन RAC इन सबसे अलग है। RAC उपलब्ध हो तो यात्रा सुनिश्चित करने की दृष्टि से वह किसी भी सामान्य वेटिंग टिकट से बेहतर विकल्प है।

केवल वेटिंग नंबर देखकर टिकट न चुनें

यही वह बात है जिसे अधिकांश यात्री नजरअंदाज कर देते हैं। मान लीजिए एक ट्रेन में GNWL 30, दूसरी में RLWL 12, तीसरी में PQWL 8 और चौथी में RAC 45 उपलब्ध है। पहली नजर में PQWL 8 सबसे अच्छा विकल्प दिखाई देगा, लेकिन वास्तविकता इतनी सीधी नहीं है। RAC 45 में कम-से-कम यात्रा का अधिकार सुरक्षित है। GNWL 30 बड़े सामान्य कोटे और अधिक रद्दीकरण के कारण तेजी से आगे बढ़ सकता है। दूसरी ओर PQWL 8 या RLWL 12 छोटे कोटे के कारण अपेक्षाकृत धीमे आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए छोटी वेटिंग संख्या हमेशा बेहतर टिकट की निशानी नहीं है।

रेल टिकट लेते समय चार बातों को एक साथ देखना चाहिए—वेटिंग किस प्रकार की है, वर्तमान वेटिंग संख्या कितनी है, यात्रा में कितने दिन शेष हैं और टिकट किस कोटे से जुड़ा है। यही चार बातें मिलकर कन्फर्मेशन की वास्तविक संभावना का बेहतर अनुमान देती हैं।

याद रखने का सबसे आसान तरीका

यदि इसे एक छोटे से सूत्र में समझना हो तो इतना याद रखिए—RAC मिल रहा है तो यात्रा की दृष्टि से वह सबसे सुरक्षित स्थिति है। वेटिंग में GNWL सामान्यतः सबसे बेहतर संभावना देता है। RLWL, PQWL और RSWL में केवल छोटा वेटिंग नंबर देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए और TQWL को भी कम संख्या के कारण स्वतः सुरक्षित नहीं मानना चाहिए।

यानी रेलवे टिकट पर लिखा GNWL, RLWL, PQWL या TQWL कोई मामूली तकनीकी संकेत नहीं है। कई बार यही तीन-चार अक्षर तय करते हैं कि आपकी 20 की वेटिंग तेजी से कन्फर्म होगी या 10 की वेटिंग भी आखिरी समय तक अटकी रह सकती है। इसलिए अगली बार टिकट बुक करते समय केवल यह न देखें कि वेटिंग कितनी है—यह भी जरूर देखें कि वेटिंग है कौन-सी।

Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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