TRENDING TAGS :
Newstrack Special: सुक्रोज, फ्रक्टोज और ग्लूकोज में फर्क क्या है? ज्यादा चीनी से Diabetes का खतरा
Sucrose, Fructose & Glucose: सुक्रोज, फ्रक्टोज और ग्लूकोज में क्या अंतर है? जानिए चीनी शरीर में कैसे काम करती है, ज्यादा चीनी से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा क्यों बढ़ सकता है और फल व फलों के जूस में क्या फर्क है।
Sucrose Fructose and Glucose Explained in Hindi
Sucrose Fructose and Glucose Explained: चीनी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में सफेद दाने वाली चीनी आती है। चाय में डालने वाली चीनी, मिठाई में इस्तेमाल होने वाली चीनी या बाजार में मिलने वाली मीठी चीजें। लेकिन विज्ञान की भाषा में “चीनी” सिर्फ एक चीज का नाम नहीं है। ग्लूकोज, फ्रक्टोज और सुक्रोज भी चीनी के ही अलग-अलग रूप हैं। इनके नाम सुनने में भले ही एक जैसे लगें, लेकिन शरीर में इनका काम और इनका पचने का तरीका एक जैसा नहीं है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस सफेद चीनी को हम रोज खाते हैं, वह असल में ‘सुक्रोज’ है। और सुक्रोज अपने आप में ग्लूकोज और फ्रक्टोज से मिलकर बना होता है। यानी चाय की एक चम्मच चीनी खाने के बाद शरीर को आखिरकार ग्लूकोज और फ्रक्टोज ही मिलते हैं।
यहीं से कई सवाल उठते हैं। अगर ग्लूकोज शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है तो फिर इसे खराब क्यों कहा जाता है? फ्रक्टोज फलों में पाया जाता है, तो क्या ज्यादा फल खाने से भी नुकसान हो सकता है? सुक्रोज और फ्रक्टोज में आखिर फर्क क्या है? और सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या एक बिल्कुल स्वस्थ व्यक्ति अगर बहुत ज्यादा चीनी खाता रहे तो वह डायबिटिक बन सकता है? इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें चीनी के इन तीनों रूपों को थोड़ा करीब से समझना होगा।
सबसे पहले समझिए कि सुक्रोज क्या है
हम घर में जिस सामान्य सफेद चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वह मुख्य रूप से ‘सुक्रोज’ होती है। यह एक तरह की डबल शुगर है। विज्ञान की भाषा में इसे डिसैकराइड कहा जाता है। सुक्रोज के अंदर दो छोटी शर्कराएं जुड़ी होती हैं - एक ग्लूकोज और दूसरी फ्रक्टोज। जब हम चीनी खाते हैं तो पाचन तंत्र सुक्रोज को तोड़कर इन दोनों को अलग कर देता है। इसके बाद शरीर इन्हें अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल करता है। यानी अगर आपने चाय में एक चम्मच चीनी डाली तो शरीर उस सफेद चीनी को उसी रूप में इस्तेमाल नहीं करता। वह उसे तोड़ता है और उससे मिलने वाले ग्लूकोज और फ्रक्टोज को आगे प्रोसेस करता है।
इसे बहुत आसान भाषा में ऐसे समझिए कि सुक्रोज एक पैकेट है, जिसके अंदर ग्लूकोज और फ्रक्टोज दोनों पैक हैं।
ग्लूकोज क्या है और शरीर को इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?
ग्लूकोज को शरीर की ऊर्जा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण ईंधन समझ सकते हैं। हमारी कोशिकाएं ग्लूकोज का इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए करती हैं। खासकर दिमाग के लिए ग्लूकोज एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। लेकिन यहां एक गलतफहमी दूर करना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर को चम्मच से अलग से ग्लूकोज खाने की जरूरत है। हम जो रोटी, चावल, आलू, फल, दाल और दूसरे कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ खाते हैं, उनके पचने के बाद शरीर को ग्लूकोज मिल सकता है। इसलिए स्वस्थ व्यक्ति को ऊर्जा के लिए रोज सफेद चीनी खाने की कोई खास जरूरत नहीं है। जब हम कार्बोहाइड्रेट खाते हैं तो पाचन के दौरान उनसे मिलने वाला ग्लूकोज खून में पहुंचता है। खून में ग्लूकोज बढ़ने पर शरीर इंसुलिन का इस्तेमाल करता है, ताकि ग्लूकोज कोशिकाओं तक पहुंच सके और ऊर्जा के काम आ सके। यही वजह है कि ब्लड शुगर यानी रक्त में ग्लूकोज की मात्रा डायबिटीज की कहानी में इतनी महत्वपूर्ण है।
फ्रक्टोज क्या है?
फ्रक्टोज को अक्सर “फ्रूट शुगर” कहा जाता है क्योंकि यह फलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। शहद में भी फ्रक्टोज होता है। इसके अलावा कई पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में यह अलग-अलग मात्रा में मौजूद हो सकता है। फ्रक्टोज भी एक साधारण शर्करा है, यानी यह ग्लूकोज की तरह मोनोसैकराइड है। लेकिन शरीर इसे ग्लूकोज की तरह बिल्कुल उसी तरीके से नहीं संभालता। ग्लूकोज का बड़ा हिस्सा शरीर के अलग-अलग ऊतकों द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि फ्रक्टोज का एक बड़ा हिस्सा आंत और खासकर लिवर में प्रोसेस होता है। शरीर फ्रक्टोज को आगे ग्लूकोज, लैक्टेट और दूसरे यौगिकों में बदल सकता है। यही वजह है कि फ्रक्टोज का नाम सुनते ही इसे “खराब चीनी” कहना भी सही नहीं है। असली सवाल है कि फ्रक्टोज किस भोजन से, कितनी मात्रा में और किस रूप में लिया जा रहा है।
फिर सुक्रोज, ग्लूकोज और फ्रक्टोज में सीधा फर्क क्या है?
ग्लूकोज एक साधारण शर्करा है और शरीर के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। फ्रक्टोज भी साधारण शर्करा है, लेकिन शरीर इसे खास तौर पर आंत और लिवर में प्रोसेस करता है। यह फलों और शहद जैसी चीजों में प्राकृतिक रूप से मिलता है। सुक्रोज वह चीनी है जिसे हम आम तौर पर घर में खाते हैं। यह ग्लूकोज और फ्रक्टोज से मिलकर बनी होती है। यानी तीनों के नाम अलग हैं, लेकिन इनका आपस में सीधा संबंध है।
क्या फल खाने से शरीर में फ्रक्टोज बढ़ता है?
हां, लेकिन यहां फल और मीठे पेय के बीच का फर्क बहुत महत्वपूर्ण है। एक पूरा सेब, केला या संतरा सिर्फ फ्रक्टोज का पैकेट नहीं है। फल में पानी, फाइबर, विटामिन, खनिज और दूसरे पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व भी होते हैं। जब आप पूरा फल खाते हैं तो उसे चबाने में समय लगता है और उसमें मौजूद फाइबर पाचन की गति को प्रभावित करता है। दूसरी तरफ अगर उसी फल का रस निकालकर पी लिया जाए तो आप कम समय में काफी ज्यादा फल से मिलने वाली शर्करा ले सकते हैं और फाइबर की भूमिका भी कम हो जाती है। यही वजह है कि “फ्रक्टोज फल में है, इसलिए फ्रक्टोज खराब है” कहना बहुत अधूरा निष्कर्ष होगा। WHO भी फलों में प्राकृतिक रूप से मौजूद शर्करा को उस “फ्री शुगर” की श्रेणी में नहीं रखता जो मुख्य रूप से कम करने की सलाह दी जाती है। WHO की चिंता खास तौर पर भोजन और पेय में जोड़ी गई शर्करा तथा शहद, सिरप और फलों के रस में मौजूद मुक्त शर्करा को लेकर है।
फलों का जूस अलग कहानी क्यों है?
यह फर्क समझना बहुत जरूरी है। मान लीजिए आप एक संतरा खाते हैं। आपको उसे छीलना, चबाना और खाना पड़ता है। लेकिन संतरे का रस पीना बहुत आसान है। कुछ ही मिनट में कई संतरे का रस पी लिया जा सकता है। इससे एक समस्या पैदा हो सकती है कि आप फल के मुकाबले ज्यादा शर्करा जल्दी ले सकते हैं और पेट भरने का एहसास भी अलग हो सकता है। इसीलिए “फल स्वस्थ हैं” और “फलों का जूस भी उतना ही स्वस्थ है” दोनों बातों को एक नहीं माना जा सकता।
क्या ग्लूकोज खुद नुकसानदायक है?
ग्लूकोज अपने आप में कोई जहरीली चीज नहीं है। शरीर को ऊर्जा के लिए इसकी जरूरत होती है। समस्या तब पैदा होती है जब लंबे समय तक शरीर में ऊर्जा और खासकर कुल कैलोरी की मात्रा जरूरत से ज्यादा रहती है, शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल होने लगता है। यानी यह कहना कि “ग्लूकोज खाया और डायबिटीज हो गई” वैज्ञानिक रूप से बहुत सरल और गलत निष्कर्ष होगा।
डायबिटीज एक जटिल बीमारी है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज में शरीर का इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होना, अग्न्याशय की क्षमता, शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधि, आनुवंशिक कारण और खान-पान जैसी कई चीजें भूमिका निभाती हैं।
क्या ज्यादा चीनी खाने से स्वस्थ इंसान डायबिटिक बन सकता है?
सिर्फ एक-दो बार ज्यादा मिठाई खाने से कोई स्वस्थ व्यक्ति डायबिटिक नहीं हो जाता। लेकिन लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा अतिरिक्त चीनी और कुल कैलोरी लेना वजन बढ़ने और मोटापे में योगदान कर सकता है। मोटापा और इंसुलिन प्रतिरोध टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाते हैं। अतिरिक्त चीनी के सेवन को वजन बढ़ने, मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान देने वाला कारक बताया जाता है। इसलिए ये सही बात नहीं है कि चीनी सीधे डायबिटीज बनाती है। ज्यादा सही बात यह है कि लगातार ज्यादा चीनी वाला, ज्यादा कैलोरी वाला खान-पान वजन बढ़ाने और शरीर के मेटाबॉलिज्म पर खराब असर डाल सकता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
सिर्फ फ्रक्टोज खाने से क्या डायबिटीज हो जाएगी?
यह दावा भी सही नहीं है कि फ्रक्टोज अपने आप किसी स्वस्थ व्यक्ति को डायबिटिक बना देता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में फ्रक्टोज और ग्लूकोज के शरीर में अलग-अलग असर देखे गए हैं। फ्रक्टोज का बड़ा हिस्सा लिवर में प्रोसेस होता है और ज्यादा मात्रा में लेने पर लिवर के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। लेकिन इंसानों में यह कहना कि फ्रक्टोज अकेले ही डायबिटीज का कारण है, उपलब्ध सबूतों से ज्यादा बड़ा दावा होगा। खास तौर पर जब फ्रक्टोज जरूरत से ज्यादा कैलोरी के साथ लिया जाता है, तब तस्वीर ज्यादा चिंताजनक हो सकती है। यानी समस्या सिर्फ “फ्रक्टोज” शब्द में नहीं है। मात्रा, कैलोरी और पूरा खान-पान बहुत मायने रखता है।
फ्रक्टोज को लेकर इतनी बदनामी क्यों है?
इसका एक कारण यह है कि शरीर फ्रक्टोज को ग्लूकोज से अलग तरीके से प्रोसेस करता है। फ्रक्टोज का बड़ा हिस्सा आंत और लिवर में जाता है। जब इसकी मात्रा बहुत ज्यादा होती है, तो लिवर पर इसका मेटाबॉलिक बोझ बढ़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में वसा बनने की प्रक्रिया बढ़ सकती है। शोध में अत्यधिक कैलोरी वाले फ्रक्टोज सेवन और लिवर में वसा बढ़ने के बीच संबंध देखा गया है, हालांकि इंसानों में फ्रक्टोज को अकेले दोषी ठहराने के लिए सबूत पूरी तरह निर्णायक नहीं हैं।
सुक्रोज और फ्रक्टोज में कौन ज्यादा खतरनाक है?
सुक्रोज टूटकर ग्लूकोज और फ्रक्टोज देता है। इसलिए जब आप सामान्य चीनी खाते हैं तो आपको दोनों मिलते हैं। फ्रक्टोज अलग से भी लिया जा सकता है और कई मीठे खाद्य पदार्थों तथा पेय में मौजूद हो सकता है। अगर समान मात्रा और समान कैलोरी की तुलना की जाए तो वैज्ञानिक शोध में यह तस्वीर इतनी सीधी नहीं है कि ‘फ्रक्टोज हमेशा ग्लूकोज से ज्यादा खराब है।‘ एक बड़े व्यवस्थित विश्लेषण में समान कैलोरी की स्थिति में फ्रक्टोज को ग्लूकोज या सुक्रोज की जगह लेने से ब्लड शुगर पर कुछ छोटे बदलाव मिले, लेकिन कुल मिलाकर फ्रक्टोज को स्पष्ट रूप से ज्यादा फायदेमंद या ज्यादा नुकसानदायक साबित करने के लिए मजबूत आधार नहीं मिला। इसलिए इंटरनेट पर मिलने वाली यह लाइन कि “फ्रक्टोज सबसे खतरनाक चीनी है” जरूरत से ज्यादा सरल निष्कर्ष है।
असली समस्या अक्सर चीनी नहीं, उसका रूप और मात्रा है
एक व्यक्ति रोज फल खाता है। दूसरे व्यक्ति को मीठे पेय, मिठाई, बिस्किट और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से काफी अतिरिक्त चीनी मिलती है। दोनों के शरीर में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पहुंच रहे होंगे, लेकिन दोनों का पूरा भोजन एक जैसा नहीं है। WHO मुक्त शर्करा को कुल दैनिक ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम रखने की सलाह देता है और 5 प्रतिशत या उससे कम रखने से अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। लगभग 2,000 कैलोरी के आहार में 10 प्रतिशत करीब 50 ग्राम या 12 छोटी चम्मच के बराबर होता है। इसमें सिर्फ चाय की चीनी नहीं गिनी जाती। मिठाई, मीठे पेय, शहद, सिरप और दूसरे स्रोतों से मिलने वाली मुक्त शर्करा भी मायने रखती है।
पैकेट पर शुगर देखकर क्या समझें?
यहीं उपभोक्ता सबसे ज्यादा भ्रमित होता है। किसी पैकेट पर ‘Total Sugars’ लिखा है तो उसमें प्राकृतिक और जोड़ी गई शर्करा दोनों शामिल हो सकती हैं। ‘Added Sugars’ अलग से यह बताने की कोशिश करता है कि निर्माण या पकाने के दौरान कितनी शर्करा जोड़ी गई है। CDC के मुताबिक पोषण लेबल पर कुल शर्करा और अतिरिक्त शर्करा को अलग-अलग समझना उपयोगी है। इसलिए किसी पैकेट पर सिर्फ ‘शुगर 20 ग्राम’ देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि पूरी 20 ग्राम अतिरिक्त चीनी है। यह देखना जरूरी है कि उसमें कितनी प्राकृतिक है और कितनी जोड़ी गई है। दूसरी तरफ अगर सामग्री की सूची में शुरुआत में ही चीनी, सिरप, ग्लूकोज सिरप, फ्रक्टोज, हाई-फ्रक्टोज कॉर्न सिरप या इसी तरह की चीजें दिखाई दे रही हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि उत्पाद में मीठा काफी ज्यादा है।
क्या ब्राउन शुगर या गुड़ ज्यादा सुरक्षित हैं?
गुड़, शहद, ब्राउन शुगर और सफेद चीनी में कुछ पोषण संबंधी अंतर हो सकते हैं, लेकिन अगर बात अतिरिक्त शर्करा की मात्रा और कैलोरी की है तो सिर्फ नाम बदल देने से चीनी अचानक स्वास्थ्यवर्धक नहीं बन जाती। शहद और सिरप में भी मुक्त शर्करा होती है। WHO इन्हें भी फ्री शुगर की गणना में शामिल करता है। इसलिए चाय में दो चम्मच सफेद चीनी की जगह दो चम्मच किसी और मीठी चीज का इस्तेमाल करने से यह मान लेना ठीक नहीं कि अब शरीर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
तो क्या मीठा बिल्कुल छोड़ देना चाहिए?
स्वस्थ खान-पान का मतलब यह नहीं है कि जिंदगी भर मिठाई देखकर डरते रहें। असली मुद्दा रोज की आदत है। अगर कोई व्यक्ति कभी-कभार मिठाई खाता है, बाकी भोजन संतुलित है, शारीरिक गतिविधि अच्छी है और कुल कैलोरी जरूरत के मुताबिक है तो इसे उसी तरह नहीं देखा जा सकता जैसे रोज कई मीठे पेय, मिठाइयां और पैकेज्ड खाद्य पदार्थ बड़ी मात्रा में लेने को देखा जाएगा। समस्या तब बढ़ती है जब मीठा खाना रोज की आदत और बड़ी मात्रा बन जाता है।
आखिर ग्लूकोज, फ्रक्टोज और सुक्रोज को कैसे याद रखें?
तीनों को याद रखने का सबसे आसान तरीका है। ग्लूकोज शरीर का प्रमुख ऊर्जा ईंधन है। फ्रक्टोज एक अलग तरह की सरल शर्करा है, जो फलों और कई मीठे खाद्य पदार्थों में मिलती है और जिसका बड़ा हिस्सा आंत तथा लिवर में प्रोसेस होता है। सुक्रोज हमारी सामान्य टेबल शुगर है, जो ग्लूकोज और फ्रक्टोज से मिलकर बनी होती है। और सबसे महत्वपूर्ण बात - इन तीनों में से किसी एक का नाम सुनकर उसे तुरंत ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ घोषित करना सही नहीं है। शरीर के लिए असली सवाल है कि कितनी मात्रा ली जा रही है, वह किस भोजन से आ रही है, उसके साथ कितना फाइबर और पोषण मिल रहा है और पूरे दिन की कुल कैलोरी कितनी है।
क्या चीनी एक स्वस्थ इंसान को डायबिटिक बना सकती है?
सीधा जवाब है, चीनी अकेले कोई ऐसा स्विच नहीं है जिसे दबाते ही डायबिटीज हो जाए। लेकिन लंबे समय तक बहुत ज्यादा अतिरिक्त चीनी और कुल कैलोरी वाला खान-पान वजन बढ़ने, मोटापे और मेटाबॉलिक गड़बड़ियों में योगदान कर सकता है, और इससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए मैं स्वस्थ हूं, मुझे डायबिटीज नहीं है, इसलिए जितनी चाहूं चीनी खा सकता हूं - यह सोच सुरक्षित नहीं है। और दूसरी तरफ फ्रक्टोज फल में होता है, इसलिए फल भी छोड़ दो, यह भी सही नहीं है। चीनी की असली कहानी उसके नाम में नहीं, उसकी मात्रा और उसके स्रोत में छिपी है। चाय की चीनी, मिठाई, मीठा पेय और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से मिलने वाली अतिरिक्त शर्करा को सीमित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। वहीं पूरे फल जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को उसी नजर से देखना सही नहीं है। आखिर में एक लाइन में समझें तो ग्लूकोज शरीर का जरूरी ईंधन है, फ्रक्टोज एक अलग तरह की शर्करा है जिसे शरीर खास तरीके से प्रोसेस करता है और सुक्रोज वह सामान्य चीनी है जो ग्लूकोज और फ्रक्टोज से मिलकर बनी होती है। इनमें से कोई भी अकेले “जहर” नहीं है, लेकिन इनकी ज्यादा मात्रा, खासकर अतिरिक्त चीनी के रूप में, लंबे समय में शरीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।


