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Black Hole Kya Hai: ब्लैक होल में गिरने पर इंसान के साथ क्या होगा, आखिरी कुछ सेकंड में क्या दिखेगा?
Black Hole Explained in Hindi: अगर कोई इंसान ब्लैक होल में गिर जाए तो क्या होगा? जानिए आखिरी कुछ सेकंड में क्या दिखाई देगा, इवेंट होराइजन पार करने पर शरीर के साथ क्या होगा, स्पैगेटीफिकेशन कैसे होता है और बाहर खड़ा व्यक्ति क्या देखेगा।
Black Hole Ke Bare Me Information
Black Hole Ke Bare Me Information: ब्लैक होल अंतरिक्ष की उन चीजों में से है जिसके बारे में सोचते ही सबसे पहले एक सवाल आता है कि अगर कोई इंसान इसके अंदर गिर जाए तो उसके साथ आखिर क्या होगा? क्या वह ब्लैक होल के किनारे पहुंचते ही गायब हो जाएगा? क्या उसे बाहर की दुनिया आखिरी बार दिखाई देगी? क्या समय उसके लिए रुक जाएगा? और क्या शरीर सचमुच किसी धागे की तरह खिंचकर टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा?
इन सवालों के जवाब हमारी रोजमर्रा की समझ से काफी अलग हैं। ब्लैक होल के पास गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत होता है कि वहां अंतरिक्ष और समय का व्यवहार ही बदल जाता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ब्लैक होल में गिरने वाला व्यक्ति और उसे दूर से देखने वाला व्यक्ति एक ही घटना को बिल्कुल अलग तरह से देख सकते हैं।
ब्लैक होल आखिर है क्या?
ब्लैक होल को सिर्फ अंतरिक्ष में मौजूद एक बहुत बड़ा गड्ढा समझना ठीक नहीं है। यह अंतरिक्ष का ऐसा क्षेत्र है जहां पदार्थ बहुत ज्यादा सघन हो गया है और उसका गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत है कि एक सीमा के अंदर से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता। इस सीमा को इवेंट होराइजन कहा जाता है।
इवेंट होराइजन कोई ठोस सतह या दीवार नहीं है। वहां ऐसा नहीं होता कि अंतरिक्ष यात्री किसी काली दीवार से टकरा जाए। यह एक ऐसी सीमा है जिसके पार जाने के बाद वापस बाहर निकलने के लिए प्रकाश से भी तेज गति चाहिए होती और भौतिकी के मौजूदा नियमों के मुताबिक ऐसा संभव नहीं है। यही वजह है कि बाहर से देखने पर ब्लैक होल “काला” दिखाई देता है।
अगर इंसान ब्लैक होल की तरफ गिरने लगे तो सबसे पहले क्या होगा?
मान लीजिए कोई व्यक्ति किसी ब्लैक होल के बहुत पास पहुंच गया और उसका अंतरिक्षयान अपना नियंत्रण खो बैठा। अब वह धीरे-धीरे ब्लैक होल की ओर गिर रहा है। शुरुआत में उसे जरूरी नहीं कि कुछ असाधारण महसूस हो। यह बात ब्लैक होल के आकार पर बहुत निर्भर करती है। अगर ब्लैक होल बहुत बड़ा है, तो इवेंट होराइजन के पास गुरुत्वाकर्षण में स्थानीय अंतर ज्यादा तेज नहीं हो सकता। यानी व्यक्ति उस सीमा को पार करते समय अपने आसपास कोई खास “दीवार” या झटका महसूस न करे। लेकिन जैसे-जैसे वह अंदर जाता जाएगा, स्थिति बेहद खतरनाक होती जाएगी।
ब्लैक होल के पास आसमान कैसा दिखेगा?
यह शायद पूरे अनुभव का सबसे अजीब हिस्सा होगा। ब्लैक होल के आसपास का गुरुत्वाकर्षण सिर्फ आपको अपनी ओर नहीं खींचता, बल्कि प्रकाश के रास्ते को भी मोड़ देता है। इसका मतलब है कि दूर के तारे आपको अपनी सामान्य जगह पर दिखाई नहीं देंगे। ब्लैक होल के आसपास का प्रकाश मुड़ सकता है और आपको आकाश का ऐसा दृश्य दिखाई दे सकता है जिसे आपने कभी पहले नहीं देखा होगा। आपको ऐसा लग सकता है कि सामने एक बड़ा काला क्षेत्र है और उसके आसपास तारों तथा गैस की रोशनी अजीब तरीके से मुड़ी हुई है।
अगर ब्लैक होल के चारों तरफ गर्म गैस और धूल की डिस्क हो, तो वह पदार्थ बेहद चमकीला हो सकता है। ब्लैक होल खुद प्रकाश नहीं छोड़ता, लेकिन उसके आसपास घूमता पदार्थ अत्यधिक गर्म होकर एक्स-रे और दूसरी विकिरण पैदा कर सकता है। यानी किसी सक्रिय ब्लैक होल के पास जाने का अनुभव सिर्फ “काले अंधेरे” में जाने जैसा नहीं होगा। आसपास का दृश्य बेहद चमकीला और विकृत हो सकता है।
क्या ब्लैक होल आपको तुरंत खींचकर खत्म कर देगा?
ऐसा जरूरी नहीं है क्योंकि यह बात ब्लैक होल के आकार पर निर्भर करती है। अगर ब्लैक होल बहुत छोटा या तारकीय द्रव्यमान वाला है, तो उसके पास गुरुत्वाकर्षण का अंतर बहुत तेजी से बढ़ सकता है। आपके शरीर के पैरों और सिर पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण अलग-अलग होगा। इस अंतर को टाइडल फोर्स कहा जाता है। यही ताकत शरीर को लंबाई में खींच सकती है और चौड़ाई में दबा सकती है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक मजाकिया लेकिन डरावने नाम स्पैगेटीफिकेशन (Spaghettification) देते हैं।
स्पैगेटीफिकेशन क्या होता है?
मान लीजिए आपके पैर ब्लैक होल की ओर ज्यादा नीचे हैं और सिर थोड़ा ऊपर है। आपके पैरों पर ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण सिर के मुकाबले ज्यादा होगा। इसलिए पैर ज्यादा तेजी से खिंचेंगे। शरीर का हर हिस्सा दूसरे हिस्से की तुलना में अलग गुरुत्वाकर्षण महसूस करेगा। जैसे-जैसे यह अंतर बढ़ेगा, शरीर लंबा और पतला खिंच सकता है। अंत में यह बल शरीर के ऊतकों, अंगों और कोशिकाओं को भी अलग-अलग दिशाओं में खींचने लगेगा। यही स्पैगेटीफिकेशन है। लेकिन यहां फिर एक महत्वपूर्ण बात है कि यह जरूरी नहीं कि हर ब्लैक होल के इवेंट होराइजन पर ही स्पैगेटीफिकेशन शुरू हो जाए। बहुत बड़े, यानी सुपरमैसिव ब्लैक होल के मामले में इवेंट होराइजन के पास टाइडल फोर्स काफी कम हो सकती है। ऐसे ब्लैक होल में कोई व्यक्ति सैद्धांतिक रूप से इवेंट होराइजन पार कर सकता है और उस क्षण उसे कुछ खास महसूस न हो। खतरा बाद में बढ़ेगा, जैसे-जैसे वह ब्लैक होल के अंदर आगे जाता जाएगा।
इवेंट होराइजन पार करते समय क्या दिखाई देगा?
गिरने वाले व्यक्ति के अपने नजरिए से वह इवेंट होराइजन को पार कर सकता है। उसे वहां कोई ठोस सतह नहीं मिलेगी। अगर ब्लैक होल पर्याप्त बड़ा है और वहां आसपास कोई तेज विकिरण या दूसरी खतरनाक चीज नहीं है, तो वह उस क्षण कोई खास बदलाव महसूस भी नहीं कर सकता। लेकिन बाहर खड़ा व्यक्ति इसे अलग तरह से देखेगा। दूर का पर्यवेक्षक उस व्यक्ति को ब्लैक होल के पास पहुंचते हुए देखेगा, लेकिन जैसे-जैसे वह इवेंट होराइजन के करीब जाएगा, उसकी घड़ी की गति बाहर वाले व्यक्ति को धीमी होती हुई दिखाई देगी। उसके प्रकाश में गुरुत्वाकर्षणीय रेडशिफ्ट बढ़ता जाएगा। वह व्यक्ति धीरे-धीरे धुंधला और लाल दिखाई दे सकता है और उसकी रोशनी इतनी कमजोर हो जाएगी कि वह व्यावहारिक रूप से दिखाई देना बंद कर देगा। यानी बाहर वाले व्यक्ति को ऐसा लग सकता है कि वह इवेंट होराइजन पर “रुक गया” है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गिरने वाला व्यक्ति सचमुच रुक गया।
गिरने वाले व्यक्ति की अपनी घड़ी क्या कहेगी?
उस व्यक्ति के लिए समय सामान्य तरीके से आगे बढ़ेगा। वह इवेंट होराइजन पार कर सकता है और उसके बाद भी उसकी घड़ी चलती रहेगी। यहां आइंस्टीन की सामान्य सापेक्षता का एक बेहद महत्वपूर्ण प्रभाव सामने आता है - समय हर जगह एक ही गति से नहीं चलता। बहुत मजबूत गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र में दूर के पर्यवेक्षक के मुकाबले समय की गति अलग दिखाई दे सकती है। इसलिए बाहर से देखने वाला व्यक्ति कह सकता है, वह इवेंट होराइजन पार नहीं कर पाया जबकि गिरने वाला व्यक्ति अपने अनुभव में उसे पार कर चुका होगा। दोनों अपने-अपने संदर्भ में सही हैं।
आखिरी कुछ सेकंड में इंसान को क्या दिखाई देगा?
आखिरी कुछ सेकंड ब्लैक होल के आकार और गिरने की दिशा पर निर्भर करेंगे। जैसे-जैसे व्यक्ति ब्लैक होल के अंदर जाएगा, बाहर के ब्रह्मांड से आने वाला प्रकाश उसके लिए विकृत दिखाई दे सकता है। ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रकाश के रास्ते बदलेंगे और दूर की वस्तुओं की तस्वीर असामान्य हो सकती है। एक दिलचस्प प्रभाव यह भी हो सकता है कि सामने का आकाश एक सामान्य गोल दृश्य की तरह न दिखे। अलग-अलग दिशाओं से आने वाली रोशनी गुरुत्वाकर्षण के कारण अलग-अलग रास्तों से उसके पास पहुंच सकती है। लेकिन फिल्मों में दिखाया जाने वाला सामने सिर्फ पूरी तरह काला अंधेरा और चारों तरफ कुछ नहीं वाला दृश्य जरूरी नहीं कि सही हो। अगर ब्लैक होल के आसपास चमकीली गैस या तारों की रोशनी मौजूद है तो दृश्य बहुत जटिल हो सकता है। और जैसे-जैसे व्यक्ति अंदर जाता जाएगा, बाहर की दुनिया से मिलने वाली जानकारी भी बेहद विकृत हो जाएगी।
क्या वह भविष्य को तेजी से गुजरते हुए देख सकता है?
यह विज्ञान-कथा में बहुत लोकप्रिय विचार है कि ब्लैक होल के पास जाने वाला व्यक्ति बाहर के ब्रह्मांड का पूरा भविष्य कुछ सेकंड में देख सकता है। लेकिन वास्तविक भौतिकी में इसे इतनी सरलता से नहीं कहा जा सकता। गुरुत्वाकर्षणीय समय-विस्तार के कारण अलग-अलग पर्यवेक्षकों की घड़ियों की तुलना अजीब हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ब्लैक होल में गिरते हुए व्यक्ति को ब्रह्मांड के अरबों साल का भविष्य किसी फिल्म की तरह दिखाई देगा। इवेंट होराइजन के अंदर जाने के बाद बाहर की घटनाओं से मिलने वाली जानकारी पर भी महत्वपूर्ण सीमाएं लग जाती हैं। इसलिए “ब्लैक होल में गिरकर भविष्य देखना” एक आकर्षक विज्ञान-कथा विचार है, लेकिन इसे वास्तविक भौतिकी का स्थापित परिणाम नहीं मानना चाहिए।
ब्लैक होल के अंदर जाने के बाद क्या होगा?
यहां हमारी वैज्ञानिक जानकारी की सीमा सामने आती है। सामान्य सापेक्षता के अनुसार, एक साधारण गैर-घूर्णन ब्लैक होल के अंदर गिरने वाला पदार्थ अंततः उस क्षेत्र की ओर बढ़ता है जिसे सिद्धांत में सिंगुलैरिटी कहा जाता है। सिंगुलैरिटी वह जगह है जहां सामान्य सापेक्षता के समीकरण ऐसी स्थिति की ओर इशारा करते हैं जहां घनत्व और स्पेसटाइम की वक्रता अनंत जैसी हो जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वैज्ञानिकों को पता है कि वास्तव में वहां क्या होता है। बल्कि यह संकेत है कि हमारी मौजूदा भौतिकी वहां अधूरी पड़ जाती है। क्वांटम मैकेनिक्स और गुरुत्वाकर्षण को एक साथ समझाने वाली पूरी क्वांटम ग्रैविटी अभी हमारे पास नहीं है। इसलिए ब्लैक होल के सबसे अंदरूनी हिस्से में वास्तविकता कैसी है, इसका पक्का जवाब विज्ञान के पास अभी नहीं है।
अगर ब्लैक होल बहुत बड़ा हो तो क्या इंसान बच सकता है?
इवेंट होराइजन पार करने के बाद आखिरकार बचने का कोई रास्ता नहीं होगा। इवेंट होराइजन के अंदर से बाहर निकलने के लिए ऐसा रास्ता चाहिए जो प्रकाश से भी तेज हो, जो मौजूदा भौतिकी के अनुसार संभव नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इवेंट होराइजन पार करते ही शरीर तुरंत नष्ट हो जाएगा। सुपरमैसिव ब्लैक होल में व्यक्ति इवेंट होराइजन पार करते समय शायद जीवित रह सकता है। उसके बाद ब्लैक होल के अंदर जाते-जाते टाइडल फोर्स बढ़ती जाएगी और अंततः शरीर को नष्ट कर देगी। छोटे ब्लैक होल में यह विनाश इवेंट होराइजन के बाहर या उसके बहुत पास ही शुरू हो सकता है।
बाहर खड़ा व्यक्ति आखिर क्या देखेगा?
दूर खड़ा पर्यवेक्षक व्यक्ति को ब्लैक होल के पास जाते हुए देखेगा। जैसे-जैसे वह इवेंट होराइजन के करीब पहुंचेगा, उसकी गतिविधियां धीमी होती हुई दिखाई देंगी। उससे आने वाली रोशनी लाल होती जाएगी और कमजोर पड़ती जाएगी। कुछ समय बाद वह व्यक्ति दिखाई देना बंद हो जाएगा। लेकिन बाहर वाला पर्यवेक्षक उस व्यक्ति को ब्लैक होल के अंदर गिरते हुए सीधे नहीं देख पाएगा। यह सुनने में अजीब है, लेकिन यह सापेक्षता के कारण होने वाला एक महत्वपूर्ण प्रभाव है।
क्या ब्लैक होल सब कुछ अपने अंदर खींच लेता है?
यह भी एक बहुत आम गलतफहमी है। ब्लैक होल कोई अंतरिक्ष का वैक्यूम क्लीनर नहीं है जो आसपास की हर चीज को दूर से खींचता रहता है। अगर सूर्य की जगह उसी द्रव्यमान का ब्लैक होल रख दिया जाए, तो पृथ्वी अचानक उसमें नहीं गिर जाएगी। उसकी कक्षा लगभग वैसी ही रहेगी, क्योंकि दूर से गुरुत्वाकर्षण मुख्य रूप से द्रव्यमान पर निर्भर करता है। खतरा तब बढ़ता है जब कोई वस्तु ब्लैक होल के बहुत करीब पहुंचती है। यानी ब्लैक होल की असली ताकत उसका “खींचना” नहीं, बल्कि उसके बेहद करीब जाने पर स्पेसटाइम का अत्यधिक मुड़ जाना है।
ब्लैक होल में गिरने का सबसे डरावना हिस्सा क्या है?
शायद यह नहीं कि इंसान तुरंत गायब हो जाएगा। सबसे अजीब बात यह है कि गिरने वाला व्यक्ति और बाहर खड़ा व्यक्ति एक ही घटना को अलग तरह से देखेंगे। गिरने वाले के लिए उसकी घड़ी चलती रहेगी। वह इवेंट होराइजन पार कर सकता है और उसके बाद भी कुछ समय तक अपनी यात्रा महसूस कर सकता है। बाहर वाले के लिए वही व्यक्ति इवेंट होराइजन के पास धीमा होता, लाल पड़ता और धीरे-धीरे गायब होता दिखाई देगा। और एक बार इवेंट होराइजन पार करने के बाद वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा। आखिर में गुरुत्वाकर्षण की टाइडल ताकतें शरीर को तोड़ देंगी, हालांकि यह कब होगा, यह ब्लैक होल के आकार और उसकी दूसरी विशेषताओं पर निर्भर करता है। और इसके बाद? वहां विज्ञान के पास अभी अंतिम जवाब नहीं है।
यही ब्लैक होल को ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमय चीजों में से एक बनाता है। हम जानते हैं कि इवेंट होराइजन क्या है, गुरुत्वाकर्षण प्रकाश को कैसे मोड़ता है और सापेक्षता के अनुसार अंदर गिरती वस्तु के साथ क्या होना चाहिए। लेकिन ब्लैक होल के सबसे अंदरूनी हिस्से में वास्तव में क्या होता है, वहां पहुंचकर हमारे मौजूदा सिद्धांतों की सीमा शुरू हो जाती है। यानी ब्लैक होल में गिरने की कहानी का सबसे बड़ा रहस्य मौत नहीं, बल्कि वह जगह है जहां हमारी मौजूदा भौतिकी जवाब देना बंद कर देती है।


