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OK Word History: ओके शब्द की शुरुआत कैसे हुई? जानिए दुनिया में सबसे लोकप्रिय शब्द का इतिहास
OK Word History: OK शब्द दुनिया की सबसे लोकप्रिय अभिव्यक्तियों में कैसे शामिल हुआ? जानिए 1839 के ‘Oll Korrect’ से लेकर आज के इंटरनेट और मोबाइल तक OK की पूरी दिलचस्प कहानी।
Why is OK Understood Worldwide
OK Word History: दुनिया में हजारों भाषाएँ बोली जाती हैं और हर भाषा में ‘ठीक है’, ‘हाँ’, ‘सही’, ‘मंजूर’ या ‘समझ गया’ कहने के अलग-अलग शब्द हैं। फिर भी एक छोटा-सा शब्द ऐसा है जिसे दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में लोग बिना अनुवाद के समझ लेते हैं - ‘OK’। भारत में कोई कहता है ‘ओके’, जापान में ‘ओके’, ब्राजील में ‘ओके’ और यूरोप-अफ्रीका के कई देशों में भी यही शब्द रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा है। लेकिन इसकी कहानी किसी प्राचीन भाषा से नहीं, बल्कि 1839 के अमेरिका में चल रहे एक अखबारी मजाक से शुरू हुई थी।
‘OK’ की शुरुआत एक गलत वर्तनी से हुई
‘OK’ का सबसे पुराना व्यापक रूप से स्वीकार किया गया छपा सबूत 23 मार्च 1839 को बोस्टन के Boston Morning Post अखबार में मिलता है। उस दौर में अमेरिकी अखबारों में जानबूझकर शब्दों की गलत वर्तनी बनाकर उनके शुरुआती अक्षरों से मजेदार संक्षेप बनाने का चलन था। इसी खेल में ‘All Correct’ को मजाकिया अंदाज में ‘Oll Korrect’ लिखा गया और इसके पहले अक्षरों से O.K. बना।
यानी आज जिस शब्द का अर्थ ‘सब ठीक है’ माना जाता है, उसकी शुरुआत ही ‘All Correct’ की गलत वर्तनी से हुई थी। भाषाविद् Allen Walker Read ने 20वीं सदी में पुराने अखबारों की खोज के जरिए इस इतिहास को व्यवस्थित रूप से सामने रखा। इससे पहले ‘OK’ की उत्पत्ति को लेकर कई दूसरी कहानियाँ भी प्रचलित थीं, लेकिन ‘Oll Korrect’ वाला प्रमाण सबसे मजबूत माना जाता है।
‘OK’ अमेरिका भर में कैसे फैल गया?
सिर्फ अखबार का मजाक किसी शब्द को दो शताब्दियों तक जिंदा नहीं रख सकता। ‘OK’ के इतिहास में अगला बड़ा मोड़ 1840 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में आया। उस समय राष्ट्रपति Martin Van Buren दोबारा चुनाव लड़ रहे थे। उनका जन्म न्यूयॉर्क के Kinderhook में हुआ था और समर्थक उन्हें ‘Old Kinderhook’ कहते थे। इसके शुरुआती अक्षर भी O.K. थे। उनके समर्थकों ने पहले से प्रचलित ‘OK’ को चुनाव प्रचार से जोड़ दिया और ‘OK Club’ जैसे नारों का इस्तेमाल किया। Van Buren चुनाव हार गए, लेकिन ‘OK’ जीत गया। इस चुनाव ने उस छोटे-से शब्द को अखबारों के मजाक से निकालकर अमेरिकी सार्वजनिक भाषा में पहुँचा दिया। इसलिए यह कहना गलत है कि ‘OK’ का जन्म ‘Old Kinderhook’ से हुआ। ‘Oll Korrect’ वाला इस्तेमाल 1839 में ही मिल जाता है। Van Buren के अभियान ने इस शब्द को पैदा नहीं किया, बल्कि उसकी लोकप्रियता बढ़ा दी।
‘OK’ की दूसरी कहानियाँ भी खूब चलीं
‘OK’ को लेकर कई दूसरी व्युत्पत्तियाँ भी बताई जाती रही हैं। किसी ने इसे स्कॉटिश अभिव्यक्ति से जोड़ा, किसी ने यूनानी शब्द से और किसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति Andrew Jackson की कथित गलत वर्तनी से। Choctaw भाषा के ‘okeh’ से इसका संबंध जोड़ने वाली कहानी भी सामने आई। लेकिन पुराने अखबारों में मिला प्रमाण सबसे पहले ‘Oll Korrect’ वाले इस्तेमाल की ओर इशारा करता है। इसलिए आज भाषावैज्ञानिक दृष्टि से यही व्याख्या सबसे ज्यादा स्वीकार की जाती है।
दो अक्षरों का शब्द टेलीग्राफ के दौर में काम का क्यों था?
‘OK’ के टिके रहने की सबसे बड़ी वजहों में से एक इसकी छोटी लंबाई और साफ अर्थ था। 19वीं सदी में टेलीग्राफ के विस्तार के साथ कम शब्दों में संदेश भेजना उपयोगी था। ‘सब ठीक है’, ‘संदेश मिल गया’ या ‘काम मंजूर है’ जैसी लंबी अभिव्यक्तियों की जगह दो अक्षरों का ‘OK’ बहुत सुविधाजनक था। रेलवे, व्यापार, सेना, जहाजरानी और प्रशासन में भी किसी काम की पुष्टि करने के लिए छोटे संकेतों की जरूरत थी। धीरे-धीरे टेलीफोन, रेडियो और अंतरराष्ट्रीय व्यापार ने इसे और फैलाया। यानी ‘OK’ सिर्फ बोलचाल का शब्द नहीं रहा। वह कन्फर्म करने का छोटा अंतरराष्ट्रीय संकेत बन गया।
एक शब्द, कई अर्थ
‘OK’ के वैश्विक होने की सबसे खास वजह इसकी अर्थगत लचक है। बातचीत में इसका मतलब संदर्भ के हिसाब से बदल सकता है। ‘कल दस बजे आ जाना।’ — ‘OK।’ यानी ठीक है, आ जाऊँगा। ‘रिपोर्ट सामान्य है।’ ‘OK।’ यानी समझ गया। ‘यह डिजाइन कैसा है?’ ‘OK।’ यानी ठीक-ठाक या स्वीकार्य। ‘Are you OK?’ यानी क्या आप ठीक हैं? ‘इसे आगे भेज दूँ?’ ‘OK।’ यानी मंजूर है।
इस एक शब्द में सहमति, अनुमति, पुष्टि, समझ, स्थिति और स्वीकार्यता जैसे कई अर्थ आ सकते हैं। यही लचीलापन इसे अलग-अलग भाषाओं और परिस्थितियों में उपयोगी बनाता है।
‘OK’ का उच्चारण भी आसान है
‘OK’ को दुनिया भर में अपनाने का एक कारण इसका आसान उच्चारण भी है। इसमें सिर्फ दो स्पष्ट ध्वनियाँ हैं - ‘ओ’ और ‘के’। किसी दूसरी भाषा के व्यक्ति को इसे बोलने के लिए जटिल अंग्रेजी उच्चारण सीखने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा यह लगभग व्याकरण से स्वतंत्र शब्द बन गया है। हिंदी में हम कहते हैं -‘ओके है’, ‘ओके कर दो’, ‘मैंने ओके कर दिया’, ‘सब ओके है।’ स्थानीय भाषा अपना व्याकरण बदलती रहती है, लेकिन ‘OK’ लगभग उसी रूप में बना रहता है।
अमेरिकी संस्कृति ने इसे दुनिया तक पहुँचाया
20वीं सदी में अमेरिका का आर्थिक, सैन्य और सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ा। दो विश्वयुद्धों, अमेरिकी सेना, अंतरराष्ट्रीय विमानन, व्यापार, रेडियो, हॉलीवुड, टेलीविजन और बाद में इंटरनेट ने अमेरिकी अंग्रेजी के कई शब्द दुनिया तक पहुँचाए। लेकिन ‘OK’ की खासियत यह थी कि उसे समझने के लिए अमेरिकी संस्कृति को जानना जरूरी नहीं था। इसका अर्थ बहुत सामान्य था और इसे लगभग किसी भी बातचीत में इस्तेमाल किया जा सकता था।
कंप्यूटर ने ‘OK’ को दुनिया की स्क्रीन पर पहुँचा दिया
अगर टेलीग्राफ ने ‘OK’ को संचार की दुनिया में मजबूत किया, तो कंप्यूटर ने इसे वैश्विक बना दिया। सॉफ्टवेयर में किसी काम की पुष्टि करनी हो, चेतावनी बंद करनी हो या कोई बदलाव स्वीकार करना हो, स्क्रीन पर अक्सर ‘OK’ बटन दिखाई देता था। धीरे-धीरे करोड़ों लोगों ने मशीनों के साथ बातचीत करते हुए इसका अर्थ सीख लिया। यहाँ एक दिलचस्प बदलाव हुआ, पहले इंसान मशीन को ‘OK’ कहते थे, फिर मशीनों ने इंसानों को ‘OK’ सिखाना शुरू कर दिया। मोबाइल फोन, एटीएम, वेबसाइट, कंप्यूटर और दूसरे डिजिटल उपकरणों ने इसे एक तरह के वैश्विक बटन में बदल दिया - ‘ठीक है, आगे बढ़ो।’
इंटरनेट ने ‘OK’ को बातचीत का हिस्सा बना दिया
एसएमएस और इंटरनेट चैट के दौर में ‘OK’ और भी उपयोगी हो गया। लंबा जवाब लिखने की जरूरत नहीं। सिर्फ दो अक्षर काफी थे। बाद में इसके कई रूप सामने आए -‘ok’, ‘Okay’, ‘O.K.’, ‘k’, ‘kk’ आदि। हालांकि डिजिटल बातचीत ने इनके भाव भी अलग कर दिए। मसलन, सिर्फ ‘K’ कई बार रूखा या नाराजगी भरा लग सकता है, जबकि ‘OK’ अपेक्षाकृत सामान्य और संतुलित लगता है।
भारत में ‘ओके’ इतना आम कैसे हुआ?
भारत में ‘ठीक है’, ‘अच्छा’, ‘हाँ’, ‘सही’ जैसे अपने शब्द पहले से मौजूद हैं। फिर भी ‘ओके’ रोजमर्रा की हिंदी में इतनी गहराई से घुल चुका है कि इसे समझने के लिए अंग्रेजी जानना जरूरी नहीं रह गया। ‘ओके साहब’, ‘ओके मम्मी’, ‘सब ओके है’, ‘ओके कर दो’ जैसे प्रयोग अब सामान्य बातचीत का हिस्सा हैं। यही स्थिति दुनिया की कई दूसरी भाषाओं में भी है। लोग ‘OK’ को अपनी भाषा के व्याकरण और उच्चारण के अनुसार इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मूल शब्द वही रहता है। हालांकि यह कहना कि दुनिया की हर भाषा का हर व्यक्ति ‘OK’ समझता है, अतिशयोक्ति होगी। ज्यादा सही यह है कि ‘OK’ दुनिया के सबसे व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले अंतरराष्ट्रीय शब्दों में से एक है।
‘OK’ का मतलब हर जगह बिल्कुल एक जैसा भी नहीं
‘OK’ का अर्थ हमेशा ‘बहुत अच्छा’ नहीं होता। अंग्रेजी में ‘The food was OK’ का अर्थ कई बार सिर्फ इतना होता है कि खाना ठीक था, लेकिन शानदार नहीं। इसी तरह अलग-अलग संस्कृतियों में इसका भाव थोड़ा बदल सकता है। लिखित या बोला गया ‘OK’ आमतौर पर सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय संकेत है, लेकिन हाथ से बनाया जाने वाला ‘OK’ इशारा हर संस्कृति में एक जैसा अर्थ नहीं रखता। कुछ जगह इसका अलग या आपत्तिजनक अर्थ भी हो सकता है।
‘OK’ और ‘Okay’ में क्या फर्क है?
दोनों मूल रूप से एक ही शब्द के रूप हैं। ‘Okay’ बाद में विकसित हुई पूर्ण वर्तनी है, जबकि ‘OK’ छोटा रूप है। ‘O.K.’ भी इसका पुराना लिखित रूप रहा है।हिंदी का ‘ओके’ इसी शब्द का देवनागरी उच्चारण है।
आखिर ‘OK’ ही क्यों बचा, बाकी संक्षेप क्यों गायब हो गए?
यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। 1830 के दशक में ‘OK’ अकेला मजाकिया संक्षेप नहीं था। कई दूसरे संक्षेप भी बनाए गए, लेकिन वे इतिहास में खो गए। ‘OK’ इसलिए बचा क्योंकि उसे एक साथ कई फायदे मिल गए - छोटा आकार, आसान उच्चारण, सरल अर्थ, कई संदर्भों में इस्तेमाल और 1840 के चुनाव से मिली लोकप्रियता। इसके बाद टेलीग्राफ, व्यापार, अमेरिकी संस्कृति, कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल ने हर दौर में इसे आगे बढ़ाया। यानी इसकी सफलता किसी एक घटना का परिणाम नहीं थी। हर नई संचार तकनीक ने इसे एक नया इस्तेमाल दे दिया।
एक अखबारी मजाक से वैश्विक शब्द तक
‘OK’ की करीब दो सौ साल की यात्रा को देखें तो कहानी बेहद दिलचस्प है। 1839 में बोस्टन के एक अखबार में ‘All Correct’ को मजाक में ‘Oll Korrect’ लिखा गया। इससे O.K. बना। 1840 के अमेरिकी चुनाव ने इसे लोकप्रिय बनाया। टेलीग्राफ ने इसे छोटे संदेश के रूप में अपनाया। अमेरिकी संस्कृति ने इसे दुनिया तक पहुँचाया। कंप्यूटर ने इसे स्क्रीन पर स्थायी जगह दी और इंटरनेट-मोबाइल ने इसे रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बना दिया। आज दो लोग एक-दूसरे की भाषा न जानते हों, फिर भी किसी काम की पुष्टि के लिए ‘OK?’ और ‘OK’ कहकर बातचीत पूरी कर सकते हैं। यही ‘OK’ की सबसे बड़ी खासियत है, यह अब सिर्फ अंग्रेजी का शब्द नहीं रह गया है। यह सहमति, पुष्टि और ‘सब ठीक है’ का एक छोटा-सा वैश्विक संकेत बन चुका है। और सबसे मजेदार बात यह है कि दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले इस शब्द की शुरुआत ही एक जानबूझकर की गई गलत वर्तनी से हुई थी।


