Contagious Yawning: जम्हाई लेना संक्रामक क्यों होता है? क्या ज्यादा जम्हाई बीमारी का संकेत है?

Why Is Yawning Contagious: जम्हाई देखकर हमें भी जम्हाई क्यों आती है? जानिए मिरर न्यूरॉन्स, दिमाग, सहानुभूति और संक्रामक जम्हाई का विज्ञान और कब ज्यादा जम्हाई बीमारी का संकेत हो सकती है।

Neel Mani Lal
Published on: 15 Aug 2026 6:23 PM IST
Contagious Yawning: जम्हाई लेना संक्रामक क्यों होता है? क्या ज्यादा जम्हाई बीमारी का संकेत है?
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Why Is Yawning Contagious: आप किसी मीटिंग में बैठे हों और सामने बैठा कोई शख्स जम्हाई ले ले। अगले कुछ ही सेकंड में आपका जबड़ा भी अनायास खुल जाता है और आप पूरी तरह फ्रेश होने के बावजूद हवा निगलते नज़र आते हैं। यह कोई इत्तेफाक या बोरियत नहीं है बल्कि यह आपके दिमाग के उस हिस्से का काम है जो अनजाने में लगातार दूसरों की नकल करता रहता है।

जम्हाई हर किसी को क्यों नहीं आती?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि जम्हाई का संक्रामक होना हर किसी पर एक जैसा असर नहीं डालता। कुछ अध्ययनों में, आमतौर पर करीब 40% से 60% लोग किसी और को वीडियो में जम्हाई लेते देखकर खुद भी जम्हाई ले बैठे। संक्रामक जम्हाई करीब 60 से 70 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है।

'मिरर न्यूरॉन्स' नाम का दिमागी सिस्टम

इस पूरी घटना के पीछे दिमाग की एक खास सेल सिस्टम जिम्मेदार है। मिरर न्यूरॉन्स (दर्पण-कोशिकाएं) उन हरकतों पर प्रतिक्रिया देती हैं जो हम दूसरों में देखते हैं। जब आप किसी को जम्हाई लेते देखते हैं, तो ये न्यूरॉन्स सक्रिय हो जाते हैं।

एक एमआरआई अध्ययन में पाया गया कि जब लोग जम्हाई लेते चेहरे देखते हैं तो उनके दिमाग के दाहिने इनफीरियर फ्रंटल गाइरस के 'ब्रॉडमैन एरिया 9' हिस्से में एकतरफा सक्रियता दिखी। यह हिस्सा मिरर न्यूरॉन सिस्टम का ही एक भाग है। MRI के जरिए यह भी दिखाया गया कि किसी को जम्हाई लेते देखना पोस्टीरियर सिंगुलेट और प्रीक्यूनियस नाम के दिमागी हिस्सों में खास न्यूरॉन एक्टिविटी पैदा करता है। चूंकि ये हिस्से 'सेल्फ-प्रोसेसिंग' (आत्म-चिंतन, थ्योरी ऑफ माइंड, आत्मकथात्मक स्मृति) में भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह निष्कर्ष इस विचार को और मजबूती देता है कि संक्रामक जम्हाई एम्पैथी से जुड़े एक तंत्रिका-नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है।

क्या यह सच में सहानुभूति (एम्पैथी) से जुड़ा है

यह सवाल वैज्ञानिकों के बीच सबसे ज्यादा बहस का विषय रहा है। कुछ सबूत बताते हैं कि यह सर्केडियन रिदम (शरीर की जैविक घड़ी) और ध्यान नियमन से भी जुड़ा हो सकता है। मुख्यतः इंसानों में पाई जाने वाली संक्रामक जम्हाई को गैर-मौखिक संवाद (non-verbal communication) का एक रूप माना जाता है, जो समूह के व्यवहार को समकालिक (synchronize) करने में मदद करता है।

ऑटिज़्म या स्किज़ोफ्रेनिया जैसी अवस्थाओं से पीड़ित लोग दूसरों से जम्हाई 'पकड़ने' में अपेक्षाकृत कम संवेदनशील पाए गए हैं। इंसानों और प्राइमेट्स (वानर ग्रुप) में संक्रामक जम्हाई करीब 4 साल की उम्र में उभरती है, जो 'थ्योरी ऑफ माइंड' (यह समझने की क्षमता कि दूसरों के अपने अलग विचार और भावनाएं होती हैं) के विकास के साथ मेल खाती है।

अपनों से ज्यादा जम्हाई 'पकड़ती' है

एक बेहद दिलचस्प पैटर्न सामने आया है कि हम किसी अजनबी के मुकाबले किसी करीबी की जम्हाई से ज्यादा प्रभावित होते हैं। शोध से यह भी पता चला है कि लोग और जानवर, दोनों ही परिचित व्यक्तियों की जम्हाई पर अजनबियों या सामान्य परिचितों के मुकाबले ज्यादा जम्हाई लेते हैं। उदाहरण के लिए, 2013 के एक अध्ययन में कुत्ते अपने मालिक को जम्हाई लेते देखकर, किसी अजनबी को जम्हाई लेते देखने के मुकाबले कहीं ज्यादा बार जम्हाई लेते पाए गए। इसे 'फैमिलियरिटी बायस' (familiarity bias) कहा जाता है, जो संभवतः इसलिए होता है क्योंकि हम स्वाभाविक रूप से अपने सामाजिक दायरे के लोगों पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

यह सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं

संक्रामक जम्हाई इंसानों के अलावा कुत्तों, चिंपैंज़ी, बोनोबो, मकाक, गेलाडा बबून और यहां तक कि तोतों जैसी कई प्रजातियों में भी देखी गई है। शेरों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जो शेर किसी दूसरे शेर से जम्हाई 'पकड़ते' थे, वे उस जम्हाई देने वाले शेर की बाकी हरकतों की भी नकल करने की संभावना 11 गुना ज्यादा रखते थे। यह दिखाता है कि जम्हाई किसी समूह के भीतर सामूहिक व्यवहार को तालमेल बिठाने का एक तरीका हो सकती है।

क्या जम्हाई को दबाया जा सकता है

यहां जवाब ज्यादातर लोगों के अनुभव से मेल खाता है। एक औसत वयस्क दिन में करीब 20 बार जम्हाई लेता है। और जब जम्हाई आने ही वाली हो तो उसे दबाना लगभग असंभव हो सकता है। यह इसलिए है क्योंकि जम्हाई एक अनैच्छिक (involuntary) क्रिया है। यह उसी श्रेणी में आती है जिसमें छींकना, पलक झपकना जैसी क्रियाएं आती हैं, जिन पर हमारा सीधा, पूरा नियंत्रण नहीं होता।

यह 'सोशल मिररिंग' नाम की एक व्यापक श्रेणी का हिस्सा है, जहां जीव एक-दूसरे की हरकतों की नकल करते हैं। इसी श्रेणी में खुजलाना, पैर मोड़कर बैठना और हंसना जैसी दूसरी क्रियाएं भी आती हैं। यही वजह है कि किसी को जम्हाई लेते देखकर उसे रोकना उतना ही मुश्किल है जितना किसी को हंसते देखकर मुस्कुराहट रोकना। दोनों ही दिमाग के उसी अनैच्छिक 'नकल तंत्र' से चलते हैं।

भले ही जम्हाई को पूरी तरह रोकना मुश्किल हो, इसकी तीव्रता को थोड़ा कम किया जा सकता है। गहरी सांस लेकर, ठंडा पानी पीकर, या ध्यान किसी दूसरी चीज़ पर केंद्रित करके इसे टाला या हल्का किया जा सकता है, हालांकि यह गारंटी नहीं देता कि जम्हाई पूरी तरह रुक ही जाएगी।

जम्हाई का असली मकसद क्या है?

दिलचस्प बात यह है कि जम्हाई क्यों आती है, इस पर भी वैज्ञानिकों के बीच पूर्ण सहमति नहीं। एक सिद्धांत कहता है कि जब इंसान थके होते हैं, तो वे गहरी सांसें लेना बंद कर देते हैं, जिससे शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड जमा होने लगती है, और जम्हाई इस असंतुलन को ठीक करने की कोशिश करती है। जम्हाई एक सामान्य, अनैच्छिक प्रतिक्रिया है जो दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने, सजगता बढ़ाने और चेहरे की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने में मदद करती है।

अब सबसे जरूरी सवाल — क्या ज्यादा जम्हाई आना बीमारी का संकेत है

यहां थोड़ी सावधानी से समझने की जरूरत है — सामान्य जम्हाई (दिन में करीब 20 बार) पूरी तरह सामान्य है, लेकिन बार-बार, बहुत ज्यादा जम्हाई आना कभी-कभी किसी गहरी समस्या का इशारा भी हो सकता है।

दिल से जुड़ा कनेक्शन: कभी-कभी बहुत ज्यादा जम्हाई आना दिल के दौरे या दिल से जुड़ी दूसरी समस्याओं की एक चेतावनी हो सकती है। यह वेगस नर्व (vagus nerve) से जुड़ा होता है, जो दिमाग से दिल और पेट तक जाती है, और अगर यह प्रभावित हो, तो जम्हाई को ट्रिगर कर सकती है। अगर जम्हाई ज्यादा आने के साथ सीने में दर्द या धड़कन अनियमित होना भी शामिल हो, तो यह दिल की किसी स्थिति का संकेत हो सकता है।

दिमाग से जुड़ी स्थितियां: जिन लोगों को स्ट्रोक (लकवा) हुआ हो, वे अक्सर ज्यादा जम्हाई लेते देखे जाते हैं — डॉक्टरों का मानना है कि यह इसलिए होता है क्योंकि जम्हाई दिमागी चोट के बाद दिमाग और शरीर के मूल तापमान को नियमित और कम करने में मदद कर सकती है। यह मिर्गी (epilepsy) या पार्किंसन जैसी कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में भी देखी जाती है।

दूसरी संभावित वजहें: बहुत ज्यादा जम्हाई किसी नींद संबंधी विकार (जैसे स्लीप एपनिया) का संकेत हो सकती है, जो पूरी नींद न मिल पाने की वजह से होती है। डिप्रेशन (अवसाद) से जूझ रहे लोगों में भी ज्यादा जम्हाई देखी जा सकती है, खासकर अगर वे SSRI जैसी एंटीडिप्रेसेंट दवाएं ले रहे हों — यह इन दवाओं का एक ज्ञात साइड-इफेक्ट है। लीवर फेलियर की आखिरी अवस्था में भी लोग ज्यादा बार जम्हाई ले सकते हैं, जो आमतौर पर उस स्थिति में होने वाली भारी थकान की वजह से होता है।

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है: अगर जम्हाई शारीरिक, भावनात्मक या दूसरे गंभीर लक्षणों के साथ आ रही हो, तो यह ध्यान देने लायक है — खासकर अगर इसके साथ सीने में दर्द या अनियमित धड़कन (दिल की स्थिति का संकेत), अचानक और तेज़ जम्हाई (स्ट्रोक की आशंका का संकेत), या दुर्लभ मामलों में यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण भी हो सकता है।

सामान्य बनाम चिंताजनक जम्हाई में फर्क कैसे करें: 'ज्यादा जम्हाई' का मतलब आमतौर पर सामान्य से ज्यादा बार जम्हाई लेना है — यानी अक्सर मिनट में कई बार से ज्यादा। अगर आप बहुत ज्यादा जम्हाई ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करना बेहतर है, क्योंकि यह किसी गंभीर स्थिति का लक्षण हो सकता है।

निष्कर्ष

जम्हाई एक बेहद सामान्य, अनैच्छिक क्रिया लगती है, लेकिन इसके पीछे दिमाग का पूरा एक सामाजिक-भावनात्मक तंत्र काम करता है — जो हमें बिना जाने ही अपनों से जुड़ा रखता है। यह संक्रामक इसलिए होती है क्योंकि हमारा दिमाग स्वाभाविक रूप से दूसरों की हरकतों और भावनाओं को "मिरर" (प्रतिबिंबित) करता है, और यह प्रक्रिया परिचित लोगों के साथ और भी मजबूत हो जाती है। यह ज्यादातर वक्त पूरी तरह हानिरहित है — बस याद रखें, अगर यह असामान्य रूप से बार-बार आने लगे, खासकर किसी और लक्षण के साथ, तो यह शरीर का एक ऐसा इशारा हो सकता है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

यह एक सामान्य जानकारी वाला लेख है। अगर आपको लगातार असामान्य रूप से ज्यादा जम्हाई आ रही हो, खासकर किसी और लक्षण के साथ, तो कृपया किसी योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

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