YouTube कब बना, किस इरादे से शुरू हुआ? 20 साल बाद भी इसका कोई असली प्रतिद्वंद्वी क्यों नहीं?

YouTube कब और क्यों शुरू हुआ? जानिए चैड हर्ली, स्टीव चेन और जावेद करीम की कहानी, पहला वीडियो, Google की 1.65 अरब डॉलर की डील और क्यों TikTok, Instagram Reels जैसे प्लेटफॉर्म के बावजूद YouTube का दबदबा कायम है।

Neel Mani Lal
Published on: 17 Aug 2026 6:32 PM IST
YouTube कब बना, किस इरादे से शुरू हुआ? 20 साल बाद भी इसका कोई असली प्रतिद्वंद्वी क्यों नहीं?
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YouTube History in Hindi: आज अगर इंटरनेट पर वीडियो देखने की बात हो तो सबसे पहले या एकमात्र नाम जो ज़ेहन में आता है, वह है YouTube का। गाना सुनना हो, फिल्म का ट्रेलर देखना हो, किसी बीमारी के बारे में जानकारी चाहिए, खाना बनाना सीखना हो, मोबाइल ठीक करना हो या किसी बड़ी खबर का वीडियो देखना हो - YouTube लगभग हर तरह के वीडियो का ठिकाना बन चुका है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि YouTube की शुरुआत आज के इस विशाल वीडियो साम्राज्य के रूप में हुई ही नहीं थी। इसकी शुरुआती सोच तो कुछ और थी।

YouTube फरवरी 2005 में शुरू हुआ था। इसे अमेरिका में चैड हर्ली, स्टीव चेन और जावेद करीम ने बनाया था। तीनों पहले पे-पाल (PayPal) में काम कर चुके थे। YouTube का डोमेन 14 फरवरी 2005 को रजिस्टर हुआ और 23 अप्रैल 2005 को जावेद करीम ने पहला वीडियो अपलोड किया। उस वीडियो का नाम था “Me at the zoo”, जिसमें वह सैन डिएगो चिड़ियाघर में हाथियों के सामने खड़े दिखाई देते हैं। लेकिन YouTube की असली कहानी इससे भी ज्यादा दिलचस्प है, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म वीडियो वेबसाइट बनने के इरादे से शुरू ही नहीं हुआ था।

YouTube का पहला आइडिया वीडियो नहीं, ऑनलाइन डेटिंग था

आज यह बात सुनकर अजीब लगती है, लेकिन YouTube के संस्थापकों का शुरुआती विचार एक तरह की वीडियो डेटिंग वेबसाइट बनाने का था। उनका सोचना था कि लोग अपने बारे में वीडियो बनाकर अपलोड करेंगे और दूसरे लोग उन वीडियो को देखकर संभावित पार्टनर चुन सकेंगे। इसके लिए शुरुआती नारा भी “Tune In, Hook Up” रखा गया था। लेकिन यह आइडिया चल नहीं पाया। संस्थापकों को ऐसे लोग ही नहीं मिल रहे थे जो डेटिंग के लिए अपने वीडियो बनाकर वेबसाइट पर डालें। यहां तक कि उन्होंने Craigslist साईट पर विज्ञापन देकर महिलाओं को वीडियो अपलोड करने के लिए पैसे देने की कोशिश की, लेकिन उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। यहीं से YouTube की दिशा बदल गई।

तीनों दोस्तों ने सोचा कि अगर लोग डेटिंग के लिए वीडियो नहीं डाल रहे हैं तो क्यों न वेबसाइट पर किसी भी तरह का वीडियो अपलोड करने की सुविधा दे दी जाए। यही छोटा-सा बदलाव आगे चलकर इंटरनेट की दुनिया की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बन गया।

वीडियो शेयरिंग का आइडिया आया कहां से?

इसकी कहानी का एक दूसरा संस्करण भी है, जो खास तौर पर YouTube के सह-संस्थापक जावेद करीम से जुड़ा है। करीम ने बाद में बताया था कि 2004 के Super Bowl इवेंट के दौरान जेनेट जैक्सन और जस्टिन टिम्बरलेक से जुड़ी घटना का वीडियो इंटरनेट पर ढूंढना मुश्किल था। इसी तरह 2004 की हिंद महासागर सुनामी के वीडियो भी आसानी से नहीं मिल रहे थे। उस समय इंटरनेट पर तस्वीरें साझा करना आसान हो रहा था, लेकिन वीडियो अपलोड करके लोगों तक पहुंचाना अभी भी मुश्किल था। यही समस्या उन्हें परेशान कर रही थी कि अगर किसी घटना का वीडियो आपके पास है तो उसे दुनिया के दूसरे लोगों तक आसानी से पहुंचाया कैसे जाए? बस, YouTube ने इसी समस्या को हल करने की कोशिश की। इसलिए YouTube की कहानी में दो शुरुआती विचार दिखाई देते हैं, एक वीडियो डेटिंग वेबसाइट का और दूसरा इंटरनेट पर वीडियो आसानी से साझा करने का। बाद में दूसरा विचार ही असली YouTube बना।

उस समय YouTube की सबसे बड़ी खासियत क्या थी?

आज YouTube पर वीडियो अपलोड करना बहुत सामान्य लगता है, लेकिन 2005 में इंटरनेट की स्थिति बिल्कुल अलग थी। वीडियो फाइलें भारी होती थीं। इंटरनेट की स्पीड आज के मुकाबले बहुत कम थी। वीडियो को होस्ट करना महंगा था और उसे बिना डाउनलोड कराए सीधे ब्राउजर में चलाना भी आसान काम नहीं था। YouTube ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया। कोई व्यक्ति वीडियो रिकॉर्ड करे, वेबसाइट पर जाए, वीडियो अपलोड करे और फिर उसका लिंक दूसरे व्यक्ति को भेज दे, यह अनुभव उस समय काफी नया और सुविधाजनक था। वेंचर कैपिटल कंपनी Sequoia Capital, जिसने YouTube में शुरुआती निवेश किया था, के मुताबिक कंपनी का लक्ष्य शुरू से ही इंटरनेट पर यूजर द्वारा बनाए गए वीडियो के लिए एक प्रमुख जगह बनना था। यानी YouTube ने सिर्फ वीडियो होस्ट नहीं किए। उसने वीडियो बनाने वाले आम लोगों को भी इंटरनेट पर अपना दर्शक वर्ग बनाने का मौका दिया।

पहला वीडियो सिर्फ 18 सेकंड का था

YouTube का पहला वीडियो आज इंटरनेट इतिहास का हिस्सा है। 23 अप्रैल 2005 को जावेद करीम ने सैन डिएगो जू से लगभग 18 सेकंड का वीडियो अपलोड किया। उसमें वह हाथियों के बाड़े के सामने खड़े होकर कुछ बातें करते हैं। वीडियो में न कोई बड़ा प्रोडक्शन था, न स्क्रिप्ट, न शानदार कैमरा। लेकिन उस छोटे वीडियो ने एक ऐसी वेबसाइट की शुरुआत की जिस पर आने वाले वर्षों में अरबों घंटे का वीडियो देखा जाना था। यह भी दिलचस्प है कि YouTube पर अपलोड होने वाला पहला वीडियो किसी फिल्म स्टार, बड़े समाचार चैनल या मशहूर गायक का नहीं था। वह खुद संस्थापक का बनाया हुआ एक साधारण वीडियो था। यही YouTube की शुरुआती भावना थी - कोई भी बना सकता है, कोई भी अपलोड कर सकता है।

YouTube इतना तेजी से क्यों बढ़ा?

YouTube ने बहुत जल्दी एक महत्वपूर्ण समस्या हल कर दी थी, वीडियो बनाने वाले और वीडियो देखने वाले दोनों को एक ही जगह मिल गई। एक व्यक्ति वीडियो डालता था। दूसरा उसे देखता था। फिर वह तीसरे को भेजता था। तीसरा अपना वीडियो डाल देता था। इससे एक चक्र बन गया। जितने ज्यादा वीडियो आए, उतने ज्यादा दर्शक आए। जितने ज्यादा दर्शक आए, उतने ज्यादा लोग वीडियो बनाने लगे। जितने ज्यादा निर्माता आए, उतनी ज्यादा सामग्री उपलब्ध हुई। यही वह ताकत है जिसे आज तकनीकी भाषा में नेटवर्क इफेक्ट कहा जाता है।

Google ने YouTube को 1.65 अरब डॉलर में क्यों खरीदा?

YouTube शुरू होने के सिर्फ करीब डेढ़ साल बाद ही Google ने इसकी क्षमता पहचान ली। 9 अक्टूबर 2006 को Google ने घोषणा की कि वह YouTube को 1.65 अरब डॉलर के शेयर सौदे में खरीदेगा। सौदा 13 नवंबर 2006 को पूरा हुआ। Google ने कहा था कि YouTube और Google का मेल वीडियो, खोज, विज्ञापन और कंटेंट के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा कर सकता है। उस समय YouTube अभी मुनाफे का विशाल कारोबार नहीं था। लेकिन उसके पास एक ऐसी चीज थी जो Google के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी और वह थी - लोग। लाखों लोग YouTube पर वीडियो देखने आ रहे थे और हजारों लोग लगातार नए वीडियो अपलोड कर रहे थे। Google के पास दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन और मजबूत विज्ञापन कारोबार था। YouTube के पास तेजी से बढ़ती वीडियो ऑडियंस थी। दोनों का मेल बेहद ताकतवर साबित हुआ।

Google के आने के बाद YouTube को क्या मिला?

Google ने YouTube को सिर्फ पैसा नहीं दिया। उसे दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट इकोसिस्टम का हिस्सा बना दिया। सर्च, विज्ञापन, सर्वर, डेटा सेंटर, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, एंड्रॉयड और बाद में स्मार्ट टीवी जैसे कई रास्तों से YouTube को दर्शकों तक पहुंचने के नए माध्यम मिले। इसके साथ ही YouTube ने धीरे-धीरे ऐसा मॉडल बनाया जिसमें वीडियो बनाने वाला व्यक्ति भी पैसा कमा सकता था। यहीं से YouTube सिर्फ वीडियो देखने की वेबसाइट नहीं रहा। वह क्रिएटर की कमाई का प्लेटफॉर्म बन गया। एक व्यक्ति अपने घर से वीडियो बना सकता था, चैनल बना सकता था, दर्शक जुटा सकता था और विज्ञापन या दूसरे माध्यमों से कमाई कर सकता था। इसने YouTube को टीवी से अलग बना दिया।

YouTube का सबसे बड़ा हथियार

यही वह सवाल है जो समझाता है कि इतने सालों में YouTube का कोई दूसरा प्लेटफॉर्म उसकी पूरी जगह क्यों नहीं ले पाया। कई कंपनियों ने वीडियो प्लेटफॉर्म बनाए। कुछ बहुत सफल भी हुए। लेकिन YouTube जैसा पूरा इकोसिस्टम बनाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। आज YouTube पर एक तरफ 15-20 सेकंड के छोटे वीडियो हैं तो दूसरी तरफ कई घंटे लंबे लेक्चर, डॉक्यूमेंट्री, पॉडकास्ट, लाइव स्ट्रीम, म्यूजिक, न्यूज, शिक्षा, गेमिंग और मनोरंजन है। यानी YouTube ने वीडियो की एक पूरी दुनिया बना दी। अगर कोई नया प्लेटफॉर्म YouTube को टक्कर देना चाहता है तो उसे सिर्फ अच्छा वीडियो प्लेयर नहीं बनाना होगा। उसे दर्शक, निर्माता, विज्ञापनदाता, सर्च, रिकमेंडेशन, कमाई, कॉपीराइट सिस्टम, लाइव स्ट्रीमिंग, म्यूजिक, मोबाइल ऐप और अरबों वीडियो की लाइब्रेरी, सब कुछ साथ में खड़ा करना होगा। यही बहुत बड़ी चुनौती और बाधा है।

दूसरा बड़ा कारण है, YouTube की वीडियो लाइब्रेरी

मान लीजिए कोई नया वीडियो प्लेटफॉर्म आज शुरू होता है। उसके पास शानदार तकनीक हो सकती है। ऐप खूबसूरत हो सकता है। वीडियो की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है। लेकिन उसके पास वह चीज नहीं होगी जो YouTube के पास वर्षों से जमा हो रही है, वीडियो का विशाल संग्रह। आप 2008 का कोई पुराना गाना ढूंढ रहे हैं, किसी पुराने टीवी कार्यक्रम का हिस्सा देखना चाहते हैं, किसी कैमरे की मरम्मत सीखना चाहते हैं या दस साल पहले का कोई भाषण खोज रहे हैं, YouTube पर मिलने की संभावना काफी ज्यादा है। यह विशाल संग्रह खुद एक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बन जाता है।

तीसरा हथियार है Google Search

YouTube के पास एक और असाधारण फायदा है Google का। लोग Google पर कुछ खोजते हैं और कई सवालों के जवाब में उन्हें YouTube वीडियो मिल जाता है। दूसरी तरफ YouTube खुद भी दुनिया का एक बड़ा खोज मंच बन चुका है। यानी YouTube को केवल अपने ऐप के अंदर से दर्शक नहीं मिलते। उसे सर्च से भी दर्शक मिलते हैं। इससे नए वीडियो को दर्शक मिलने की संभावना बढ़ती है और पुराने वीडियो भी लंबे समय तक खोजे जाते रहते हैं।

चौथा कारण: क्रिएटर यहां पहले से मौजूद हैं

किसी वीडियो प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी संपत्ति उसके वीडियो नहीं, बल्कि वीडियो बनाने वाले लोग भी होते हैं। YouTube पर लाखों क्रिएटर वर्षों से अपने चैनल बना रहे हैं। उनके पास पुराने वीडियो हैं, सब्सक्राइबर हैं, कमाई का इतिहास है और दर्शकों के साथ संबंध है। अगर कोई नया प्लेटफॉर्म आता है तो उसे क्रिएटर से कहना होगा कि “अपना पूरा काम यहां दोबारा शुरू करो।” यह कतई आसान नहीं है। यह चक्र नए खिलाड़ी के लिए तोड़ना मुश्किल है।

क्या YouTube का कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है?

यूट्यूब के प्रतिद्वंद्वी हैं और काफी ताकतवर भी हैं। लेकिन समस्या यह है कि इनमें से ज्यादातर YouTube के एक हिस्से को चुनौती देते हैं, पूरे YouTube इकोसिस्टम को नहीं। जैसे कि TikTok। TikTok ने छोटे और बेहद तेज वीडियो के क्षेत्र में YouTube को कड़ी चुनौती दी है। उसका सबसे बड़ा हथियार उसका रिकमंडेशन अल्गोरिद्म और शार्ट विडियो फॉर्मेट है। लेकिन TikTok का मेन फोकस छोटे वीडियो पर आधारित है, जबकि YouTube का दायरा कहीं बड़ा है।

इसके बाद नाम आता है Instagram Reels का। मेटा (Meta) का इन्स्टाग्राम रील्स (Instagram Reels) भी छोटे विडियो (short-video) क्षेत्र में यूट्यूब शॉर्ट्स (YouTube Shorts) का बड़ा प्रतिद्वंद्वी है। खासकर युवा दर्शकों और सोशल मीडिया क्रिएटर्स के बीच इसका प्रभाव काफी मजबूत है। लेकिन Instagram का मूल ढांचा सोशल नेटवर्क है। जबकि YouTube का मूल ढांचा वीडियो प्लेटफॉर्म और वीडियो खोज है। ये बड़ा अंतर है।

वहीं फेसबुक (Facebook) पर वीडियो, लाइव और रील्स (Reels) का बड़ा इकोसिस्टम है। उसके पास दुनिया भर में बहुत बड़ा यूजर बेस है। फिर भी Facebook और YouTube का इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह समान नहीं है।

विमियो (Vimeo) तो यूट्यूब (YouTube) से भी पुराना है। उसकी शुरुआत नवंबर 2004 में हुई थी। लेकिन उसने खुद को बड़े पैमाने के आम उपभोक्ता वीडियो प्लेटफॉर्म के बजाय ज्यादा पेशेवर और क्रिएटर केंद्रित दिशा में विकसित किया। इसलिए Vimeo YouTube का सीधा विकल्प बनने के बजाय एक अलग बाजार में मजबूत हुआ है। वो यूट्यूब का प्रतिद्वंद्वी नहीं है।

इसी प्रकार, ट्वीच (Twitch) खास तौर पर लाइव स्ट्रीमिंग और गेमिंग में बड़ा नाम है। लेकिन कोई व्यक्ति वहां वही पूरा वीडियो इकोसिस्टम नहीं पाता जो YouTube पर उपलब्ध है। डेली मोशन (Dailymotion) लंबे समय से YouTube के करीब माने जाने वाले वीडियो प्लेटफॉर्म में रहा है, लेकिन वह YouTube जैसी वैश्विक पहुंच और क्रिएटर इकोसिस्टम नहीं बना पाया। ऐसे ही रम्बल (Rumble) ने खास तौर पर कुछ खास दर्शक वर्गों और क्रिएटरों के बीच अपनी जगह बनाई है, लेकिन उसका पैमाना और कंटेंट इकोसिस्टम YouTube जितना व्यापक नहीं है।

कुल मिला कर, YouTube के प्रतिद्वंद्वी बहुत हैं, लेकिन YouTube का पूरा विकल्प कोई एक प्लेटफॉर्म नहीं बन पाया है।

YouTube को सबसे बड़ी चुनौती आखिर किससे मिल रही है?

दिलचस्प बात यह है कि YouTube के लिए सबसे बड़ी चुनौती शायद कोई एक “YouTube Killer” नहीं है। बल्कि अलग-अलग कंपनियां YouTube के अलग-अलग हिस्से पर हमला कर रही हैं। TikTok छोटे वीडियो पर। Instagram Reels सोशल वीडियो पर। Twitch लाइव स्ट्रीमिंग पर। Spotify म्यूजिक और पॉडकास्ट के कुछ हिस्सों पर। Netflix प्रीमियम और लंबे मनोरंजन कंटेंट पर। Vimeo पेशेवर वीडियो पर। लेकिन YouTube इन सभी क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में मौजूद है। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

YouTube को हराना इतना मुश्किल क्यों है?

किसी नए प्लेटफॉर्म को YouTube को पछाड़ने के लिए सिर्फ बेहतर ऐप बनाना काफी नहीं होगा। उसे ऐसा सिस्टम बनाना होगा जहां करोड़ों लोग वीडियो देखें, लाखों लोग वीडियो बनाएं, विज्ञापनदाता पैसा खर्च करें, क्रिएटर लगातार कमाई कर सकें और नए वीडियो खोजने के लिए मजबूत रिकमंडेशन और सर्च सिस्टम मौजूद हो। फिर उसे अरबों वीडियो स्टोर करने, कॉपीराइट विवाद संभालने, लाइव स्ट्रीमिंग चलाने, मोबाइल और टीवी पर वीडियो दिखाने और दुनिया के अलग-अलग देशों की जरूरतों को समझने की क्षमता भी चाहिए। यही कारण है कि YouTube को चुनौती देना और YouTube की किसी एक खासियत को चुनौती देना दो बिल्कुल अलग बातें हैं।

20 साल बाद भी YouTube क्यों खास है?

YouTube की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यह नहीं है कि उसने इंटरनेट पर वीडियो देखने का तरीका बदल दिया। उसने वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की पहचान बदल दी। 2005 में वीडियो बनाना और उसे दुनिया तक पहुंचाना तकनीकी काम था। YouTube ने इसे सामान्य इंटरनेट गतिविधि बना दिया। आज कोई शिक्षक घर से पढ़ा सकता है, कोई डॉक्टर स्वास्थ्य की जानकारी दे सकता है, कोई पत्रकार ग्राउंड रिपोर्ट कर सकता है, कोई संगीतकार अपना गाना जारी कर सकता है, कोई गेमर लाइव स्ट्रीम कर सकता है और कोई आम व्यक्ति सिर्फ अपने अनुभव का वीडियो बनाकर लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि YouTube सिर्फ एक वेबसाइट नहीं रहा। यह सर्च इंजन, टीवी, सोशल नेटवर्क, क्रिएटर प्लेटफॉर्म, म्यूजिक प्लेटफॉर्म, शिक्षा मंच और विज्ञापन कारोबार, इन सबका मिला-जुला रूप बन चुका है। और शायद यही सबसे बड़ा कारण है कि 2005 में एक असफल वीडियो-डेटिंग आइडिया से शुरू हुई कंपनी को आज तक कोई एक प्रतिद्वंद्वी पूरी तरह पछाड़ नहीं पाया।

यूट्यूब के संस्थापक अब क्या कर रहे हैं?

YouTube की स्थापना फरवरी 2005 में PayPal के तीन पूर्व कर्मचारियों - चैड हर्ले, स्टीव चेन और जावेद करीम - ने की थी। चैड हर्ले ने 2010 तक YouTube के सीईओ के तौर पर काम किया। उन्होंने डिजिटल वीडियो ऐप मिक्स बिट (MixBit) की स्थापना की। वे स्पोर्ट्स इन्वेस्टर बने और Golden State Warriors और Los Angeles FC के हिस्सेदार बने।

स्टीव चेन ने YouTube के सीटीओ (CTO) के तौर पर काम किया। उन्होंने गूगल वेंचर (Google Ventures) के साथ काम किया और अवोस सिस्टम्स (AVOS Systems) नाम का एक इंटरनेट इनक्यूबेटर को-फ़ाउंड किया। वे फ़ूड टेक और लाइव-स्ट्रीमिंग कम्युनिटी प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए ताइवान चले गए।

तीसरे दोस्त, जावेद करीम ने स्टैनफोर्ड में ग्रेजुएट की पढ़ाई की और शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने के लिए Youniversity Ventures (YV) नाम का एक वेंचर फ़ंड शुरू किया। वे एक पैसिव टेक इन्वेस्टर बने हुए हैं और सार्वजानिक जीवन से दूर रहते हैं।

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