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Women Opinion on Marriage: शादी से क्यों भाग रही हैं आज की लड़कियां? सामने आई ये वजह, जानकर हो जाएंगे हैरान
Women Opinion on Marriage: आज की जनरेशन की सोच में बड़ा बदलाव आया है। महिलाएं अब अपनी आजादी, आत्मनिर्भरता और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं।
Women Opinion on Marriage (social media)
Women Opinion on Marriage: आज के समय में शादी को लेकर युवाओं में खासकर लड़कियों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां शादी को जिंदगी का जरूरी हिस्सा माना जाता था, वहीं अब कई लड़कियां इसे एक 'चॉइस' की तरह देख रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक महिला द्वारा पूछे गए सवाल ने इस विषय पर एक नई बहस छेड़ दी है।
महिला का सवाल था कि 'क्या शादी महिलाओं के लिए फायदेमंद है भी या नहीं?'। महिला का यह सवाल इसलिए भी अहम बन जाता है क्योंकि इसमें उसने उन मुद्दों को उठाया है, जिनका सामना अधिकतर महिलाएं शादी के बाद करती हैं।
क्या बदल जाता है शादी के बाद?
महिला का कहना है कि अगर कोई महिला आजाद है, कमाती है और अकेले अपनी जिंदगी सुकून से जी रही है, तो शादी के बाद उसकी पूरी लाइफस्टाइल ही बदल जाती है। उस पर न केवल खुद की, बल्कि पति, बच्चों और पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ जाती है। खाना बनाना, कपड़े धोना, सफाई करना, और कई बार रिश्तेदारों की देखभाल भी उसी के हिस्से में आती है। अगर वह नौकरी करती है और कामवाली रखती है, तो उसका खर्च भी उसी की सैलरी से निकलता है। ऐसे में सवाल उठता है कि उसे शादी से आखिर क्या फायदा हो रहा है?
क्या करियर पर भी पड़ता है असर?
शादी के बाद कई महिलाएं अपने करियर से समझौता कर लेती हैं। बच्चे, घर की जिम्मेदारी और पारिवारिक दबाव के चलते बहुत सी महिलाओं को नौकरी छोड़नी पड़ती है। दूसरी ओर, पुरुषों के करियर में अक्सर शादी के बाद तेजी से ग्रोथ देखने को मिलती है, क्योंकि उन्हें घरेलू कामों की उतनी जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़ती। यही असमानता महिलाओं को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या शादी उनके लिए सही फैसला है?
नई सोच और पुरानी परंपरा
महिलाओं के इन्हीं सवालों का जवाब देते हुए सीनियर साइकोलॉजिस्ट ने बताया है कि, आज की पीढ़ी एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां वह न तो पूरी तरह पुरानी परंपराओं से जुड़ी हैं और न ही पूरी तरह मॉडर्न सोच को अपना पाई हैं। ऐसे में उनमें एक तरह की उलझन बनी रहती है। घर के कामों को अब भी सिर्फ महिला की जिम्मेदारी माना जाता है और जब कोई पुरुष इसमें हाथ बंटाता है, तो समाज या परिवार में उसे ‘कमजोर’ समझा जाता है या मजाक उड़ाया जाता है। इससे भी लड़कियों को लगता है कि शादी करने का मतलब है खुद के सपनों से समझौता करना।
क्या सभी लड़कियां शादी से दूर भाग रही हैं?
सीनियर साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि ऐसा नहीं है कि सभी लड़कियां शादी को गलत मानती हैं या इससे दूर भाग रही हैं। कुछ लड़कियां शादी और करियर दोनों को साथ लेकर चलना चाहती हैं। वे चाहती हैं कि उनका पार्टनर उनके सपनों को भी उतनी ही अहमियत दे, जितनी वह खुद देता है। लेकिन आज की पीढ़ी की कई लड़कियां अब यह समझने लगी हैं कि शादी करना जरूरी नहीं है बल्कि यह एक ऑप्शन है।
आज की जनरेशन की सोच में बड़ा बदलाव आया है। महिलाएं अब अपनी आजादी, आत्मनिर्भरता और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं। वे अब शादी को एक सामाजिक दबाव के रूप में नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिए गए फैसले के रूप में देखती हैं। समाज को भी चाहिए कि वह इस नई सोच को स्वीकार करे और पुरुषों को भी घर की जिम्मेदारियों में बराबरी से भागीदारी करने के लिए प्रेरित करे। तभी एक संतुलित और सम्मानजनक वैवाहिक जीवन संभव है।


