Lover Fantasies: Ex को याद कर ‘आत्मरति’ करना कितना फायदेमंद? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Lover Fantasies: आत्मरति के दौरान अपने एक्स को याद करना न शर्म की बात है और न ही गलत, जब तक कि यह आपके मौजूदा रिश्ते को प्रभावित न कर रहा हो।

Ragini Sinha
Published on: 23 Jun 2025 5:07 PM IST
Ex lover fantasies
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Ex lover fantasies (Social Media)

Lover fantasies: आत्मरति एक नॉर्मल और नेचुरल प्रक्रिया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप खुद को संतुष्ट कर रहे होते हैं, तो आपके दिमाग में किसका ख्याल आता है? क्या वह कोई काल्पनिक व्यक्ति होता है, कोई सेलेब्रिटी या फिर आपका कोई पुराना प्यार ? अगर आप भी इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं, तो आइए जानते हैं इस मामले मैं एक्सपर्ट क्या कहते हैं।

इस मामले को लेकर हाल ही में, एक सर्वे ने सबको चौंका दिया। इस सर्वे के मुताबिक, 76% पुरुष और 59% महिलाएं आत्मरति करते समय अपने एक्स को सोचते हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि भले ही आपके रिश्ते खत्म हो जाते हों, लेकिन उनकी यादें कहीं न कहीं हमारे अंदर जिंदा रहती हैं।


अकेले हैं तो यादें बन सकती हैं ताकत

अगर आप सिंगल हैं और अपने पुराने प्यार को याद करते हुए आत्मरति कर रहे हैं, तो इसे नकारात्मक रूप में लेने की जरूरत नहीं है। डॉ. क्रिस्टी ओवरस्ट्रीट कहती हैं कि पुराने रिश्ते की अच्छी यादों को दोहराना आत्म-सुख का एक हेल्दी तरीका हो सकता है। इससे व्यक्ति खुद को पहले से बेहतर समझ सकता है और अपने इमोशन्स को बेहतर तरीके से प्रोसेस कर सकता है।

रिश्ते में रहते हुए एक्स को याद करना खतरे की घंटी या फायदा?

कभी-कभी लोगों के मन में सवाल आता है कि, किसी रिश्ते में होते हुए भी अगर आप अपने एक्स के बारे में सोचते हैं, तो क्या यह धोखा है? इसको लेकर डॉ. ओवरस्ट्रीट कहती हैं कि यह जरूरी नहीं कि ऐसा सोचने का मतलब है कि आपका रिश्ता कमजोर है। कई बार यह केवल पुराने एक्सपीरियंस से प्रेरणा लेने का तरीका होता है, ताकि वर्तमान रिश्ते में भी आनंद बढ़ाया जा सके। वह एक्सपीरियंस जो दोबारा नहीं हो सकता, वह अक्सर ज्यादा उत्तेजक लगते हैं। हस्तमैथुन के दौरान ऐसे पल याद आना बहुत लोगों के लिए नॉर्मल है।


जब आत्मरति रोमांस पर भारी पड़ जाए

आत्मरति की आदत सिर्फ यादों तक ही सीमित नहीं है। सर्वे में यह भी सामने आया है कि 29% लोग आत्म-सुख को असली रोमांस से बेहतर मानते हैं। इसमें 31% पुरुष और 26% महिलाएं शामिल थीं। इसको लेकर रोमांस कोच जेम्मा नाइस बताती हैं कि जब कोई व्यक्ति खुद को संतुष्ट करता है, तो उसे पूरी आजादी होती है। उसे पता होता है कि उसे क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं। यही वजह है कि कई लोग इसे ज्यादा सुखद अनुभव मानते हैं।

महिलाएं भी पीछे नहीं

एक अध्ययन में सामने आया है कि महिलाएं औसतन 30 दिनों में 9 बार हस्तमैथुन करती हैं, यानी हर हफ्ते करीब दो बार। जब कोई अपने शरीर और इच्छाओं को खुद बेहतर समझता है, तो वह स्वाभाविक रूप से इस प्रक्रिया की ओर आकर्षित होता है।

खतरे की घंटी कब बजती है?

अगर आप सिर्फ हस्तमैथुन से संतुष्ट होने लगते हैं और अपने पार्टनर से दूरी बढ़ने लगे, तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है। बहुत ज्यादा आत्म-सुख की आदत व्यक्ति को पार्टनर का छूना अच्छा नहीं लगता। अगर आपको लगता है कि आप अपने रिश्ते में अब फिजीकल या इमोशनल कनेक्शन नहीं महसूस कर रहे, तो खुलकर बातचीत करें। पार्टनर से अपनी इच्छाओं, जरूरतों और फैंटेसीज के बारे में बात करें। यह रोमांस को बेहतर बना सकता है और रिश्ते को भी मजबूत कर सकता है।


आत्मरति के दौरान अपने एक्स को याद करना न शर्म की बात है और न ही गलत, जब तक कि यह आपके मौजूदा रिश्ते को प्रभावित न कर रहा हो। खुद को समझना और अपनी इच्छाओं को पहचानना एक हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा है, लेकिन अगर आत्म-सुख आपकी प्राथमिकता बन जाए और आप रिश्ते से दूर हो जाएं, तो यह विचार करने का समय है कि क्या बदलाव की जरूरत है।

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