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Arjuna Award 2025: यूपी के 4 सितारों की चमकी किस्मत, जानें संघर्ष की कहानी
Arjuna Award 2025 के लिए यूपी के प्रियंका गोस्वामी, राजकुमार पाल, अरविंद सिंह और अखिल श्योराण चुने गए हैं। जानें चारों खिलाड़ियों की संघर्ष और सफलता की कहानी।
Arjuna Award 2025: Meet 4 UP Stars Who Turned Struggles Into Sporting Glory
Arjuna Award 2025: किसी ने किसान परिवार से निकलकर देश के लिए रोइंग में तिरंगा लहराया, किसी ने निशानेबाजी में विश्व रिकॉर्ड बनाया, किसी ने रेस वॉकिंग में ओलिंपिक तक का सफर तय किया तो किसी ने बेहद मुश्किल आर्थिक हालात के बीच हॉकी की स्टिक थामकर देश को ओलिंपिक पदक दिलाया। उत्तर प्रदेश के इन चार खिलाड़ियों की कहानियां सिर्फ खेल उपलब्धियों की कहानी नहीं हैं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और हार न मानने के जज्बे की मिसाल भी हैं। अब अरविंद सिंह, अखिल श्योराण, प्रियंका गोस्वामी और राजकुमार पाल को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 के लिए अर्जुन अवॉर्ड पाने वाले 17 खिलाड़ियों के नाम घोषित किए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के चार खिलाड़ी शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार अर्जुन पुरस्कार लगातार बेहतर प्रदर्शन के साथ नेतृत्व, खेल भावना और अनुशासन जैसे गुणों को भी ध्यान में रखकर दिया जाता है।
अरविंद सिंह, किसान के बेटे ने रोइंग में रचा इतिहास
बुलंदशहर के गांव खबरा के रहने वाले ओलिंपियन अरविंद सिंह का सफर एक किसान परिवार से शुरू हुआ। उनके पिता विजय सिंह खेती करते हैं। वर्ष 2016 में सेना में भर्ती होने के बाद अरविंद का रुझान रोइंग की ओर बढ़ा और देखते ही देखते उन्होंने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना ली। अरविंद टोक्यो ओलिंपिक 2020 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा एशियाई प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नाम कई अहम पदक हैं। 2019 एशियन रोइंग चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता। 2021 एशिया ओलिंपिक क्वालीफिकेशन में भी रजत पदक हासिल किया। इसी साल एशियन रोइंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी क्षमता साबित की। 2022 में भी एशियन रोइंग चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2023 एशियन गेम्स में रजत पदक उनके खाते में आया। अर्जुन अवॉर्ड की खबर मिलने पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है। अरविंद फिलहाल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटे हैं। उन्होंने इस सम्मान को अपने और परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया है।
अखिल श्योराण, निशानेबाजी में विश्व रिकॉर्ड से अर्जुन अवॉर्ड तक
बागपत के अंगदपुर जौहड़ी गांव से आने वाले अखिल श्योराण ने निशानेबाजी में भारत का नाम दुनिया तक पहुंचाया है। किसान परिवार में जन्मे अखिल ने स्कूल के दिनों से ही शूटिंग शुरू की थी। अलग पहचान बनाने की चाह और लगातार मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का निशानेबाज बना दिया।
अखिल अब तक 39 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और 32 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। 19वें एशियन गेम्स में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। आईएसएसएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी उनके खाते में स्वर्ण और कांस्य पदक हैं।
50 मीटर थ्री पोजीशन पुरुष स्पर्धा में विश्व चैंपियनशिप का व्यक्तिगत पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय रहे हैं। वह एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में दोहरे स्वर्ण पदक विजेता भी हैं। अखिल ने वर्ल्ड कप में भी स्वर्ण और कांस्य पदक जीते हैं। वह पूर्व विश्व नंबर एक और एशिया नंबर एक निशानेबाज रह चुके हैं।
खास बात यह है कि अखिल ने अर्जुन अवॉर्ड के लिए दो बार आवेदन किया था। इस बार उनका चयन हुआ। उन्होंने इस सम्मान को अपने लिए गर्व का पल बताया।
प्रियंका गोस्वामी :वॉकिंग में लगातार दो ओलिंपिक
मेरठ की प्रियंका गोस्वामी भारतीय एथलेटिक्स की प्रमुख रेस वॉकर्स में शामिल हैं। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में उन्होंने 10,000 मीटर रेस वॉक में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था। इसके बाद 2023 में बैंकॉक एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 20 किलोमीटर रेस वॉक में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किया।
प्रियंका टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलिंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। लगातार दो ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लंबे और निरंतर अंतरराष्ट्रीय करियर का प्रमाण है। प्रियंका फिलहाल आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों में जुटी हैं। उन्हें इस बार अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल मेरठ के कुछ खिलाड़ियों को सम्मान मिलने के बाद उनकी भी उम्मीद बढ़ी थी, लेकिन तब चयन नहीं हुआ। इस बार सम्मान मिलने पर उन्होंने खुशी जताई।
राजकुमार पाल: तंगहाली से ओलिंपिक पदक तक
गाजीपुर के करमपुर गांव के राजकुमार पाल की कहानी इन चारों खिलाड़ियों में सबसे भावुक कर देने वाली है। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। मां मनराजी देवी ने बेहद मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में तीन बेटों जोखन, राजू और राजकुमार की परवरिश की। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि खेलों पर बड़ा खर्च किया जा सके। इसके बावजूद मां ने बेटों के हॉकी के सपने को टूटने नहीं दिया। करमपुर स्थित मेघबरन सिंह हॉकी स्टेडियम ने इस परिवार के संघर्ष को समझा और बेटों को हॉकी सीखने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। मेहनत रंग लाई और राजकुमार पाल भारतीय हॉकी टीम तक पहुंचे। वह पेरिस ओलिंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। हॉकी इंडिया के अनुसार वह 2024 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम का भी हिस्सा थे और चीन में आयोजित प्रतियोगिता में मलेशिया के खिलाफ यादगार हैट्रिक भी लगाई थी। 2025 एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम में भी उन्होंने योगदान दिया।
राजकुमार वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर हैं। अर्जुन अवॉर्ड की खबर उनके गांव और परिवार के लिए बेहद गर्व का विषय बन गई है। क्योंकि यह सम्मान राजकुमार पाल के इस गांव के लिए उस संघर्ष का फल है जिसने तंगहाली से जूझ रहे एक साधारण परिवार के बेटे को ओलिंपिक मंच तक पहुंचाया।


