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Asian Games 2026 Shooting: तीन बेटियों ने साधा ऐसा निशाना कि एशियन गेम्स में रच गया इतिहास, कौन हैं राइजा, माहेश्वरी और परिनाज?
Asian Games 2026 Shooting: राइजा ढिल्लों, माहेश्वरी चौहान और परिनाज धालीवाल ने महिला स्कीट टीम में भारत को ऐतिहासिक कांस्य दिलाया। जानें तीनों की कहानी।
Asian Games 2026 Shooting: Meet Raiza, Maheshwari and Parinaaz Who Made History
Asian Games 2026 Shooting: नागोया में एशियन गेम्स 2026 का मंच था, सामने निशानेबाजी की कठिन स्कीट स्पर्धा और दांव पर थी देश वासियों की उम्मीद। तीन दिन तक लगातार निशाना साधने के बाद बुधवार को वह पल आया, जिसका इंतजार भारतीय शूटिंग प्रेमियों को लंबे समय से था। राइजा ढिल्लों, माहेश्वरी चौहान और परिनाज धालीवाल की भारतीय महिला स्कीट टीम ने कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। यह सिर्फ एक और पदक नहीं था। महिला स्कीट टीम इवेंट में भारत का यह एशियन गेम्स का पहला पदक है। भारतीय तिकड़ी ने कुल 331 अंक बनाए। राइजा और परिनाज ने 125 में से 111-111 अंक जुटाए, जबकि माहेश्वरी ने 109 अंक का योगदान दिया।
इसी दिन भारतीय पुरुष स्कीट टीम ने भी कांस्य पदक जीता। अनंतजीत सिंह नारूका, मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह गिल की टीम ने 346 अंक के साथ पोडियम पर जगह बनाई। इस तरह स्कीट टीम स्पर्धा में भारत के खाते में एक ही दिन दो कांस्य पदक आए।
लेकिन महिला टीम की कहानी थोड़ी अलग है। इन तीनों खिलाड़ियों ने केवल मेडल नहीं जीता, बल्कि भारत के लिए एक ऐसी राह खोली है, जिस पर आने वाली निशानेबाजों की पीढ़ी आगे बढ़ सकती है।
तीन दिन की परीक्षा और आखिरी निशाने तक कायम रहा दबाव
स्कीट में खिलाड़ी को उड़ते हुए लक्ष्यों पर निशाना लगाना होता है। एशियन गेम्स की इस स्पर्धा में भारतीय महिला टीम के तीनों निशानेबाजों को पांच राउंड की क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। हर निशानेबाज अधिकतम 125 अंक हासिल कर सकता था।
भारत की शुरुआत से ही पदक की दौड़ में मौजूदगी बनी रही। आखिरी दौर में भी टीम ने अपना संयम बनाए रखा और कुल 331 अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। चीन ने स्वर्ण और कजाकिस्तान ने रजत पदक जीता।
टीम के लिए सबसे खास बात यह रही कि तीनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने स्तर पर शानदार योगदान दिया। राइजा और परिनाज के 111-111 अंक और माहेश्वरी के 109 अंक ने भारत को पोडियम तक पहुंचाया।
कौन हैं माहेश्वरी चौहान, जिन्होंने बनाया शूटिंग को अपना जुनून?
4 जुलाई 1996 को राजस्थान के सियाना में जन्मीं माहेश्वरी चौहान भारतीय स्कीट शूटिंग का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने किशोरावस्था में ही शूटिंग शुरू कर दी थी। परिवार में खेल के प्रति माहौल और खासकर उनके दादाजी की प्रेरणा ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
माहेश्वरी ने जूनियर स्तर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और धीरे-धीरे सीनियर स्तर पर अपनी जगह मजबूत की। स्कीट में उनकी तकनीक और निरंतरता ने उन्हें भारतीय टीम का अहम हिस्सा बनाया। 2017 में वह एशियन शॉटगन चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली भारतीय महिला स्कीट निशानेबाजों में अग्रणी नाम बनीं। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार भारत का प्रतिनिधित्व किया।
उनके करियर का एक बड़ा पड़ाव पेरिस ओलंपिक 2024 रहा। माहेश्वरी ने भारत की पहली महिला स्कीट टीम का हिस्सा बनकर इतिहास बनाया। मिश्रित स्कीट स्पर्धा में वह कांस्य पदक से महज एक अंक दूर रहकर चौथे स्थान पर रही थीं। महिला व्यक्तिगत स्कीट में भी उन्होंने हिस्सा लिया था। अब एशियन गेम्स का कांस्य उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ चुका है।
राइजा ढिल्लों की कहानी, पिता से मिली प्रेरणा और कम उम्र में बड़ा मुकाम
20 अप्रैल 2004 को जन्मीं राइजा ढिल्लों हरियाणा से आती हैं और महिला स्कीट में भारत की युवा प्रतिभाओं में शामिल हैं। उन्होंने करीब 16 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की। उनके पिता रविजीत सिंह ढिल्लों के खेल के प्रति जुनून ने राइजा को भी इस खेल की ओर खींचा।
राइजा ने जूनियर स्तर से ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। 2021 में लीमा, पेरू में हुई ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। बाद में जूनियर और सीनियर दोनों स्तरों पर उनका प्रदर्शन लगातार चर्चा में रहा।
उनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर 122 का जूनियर रिकॉर्ड भी दर्ज रहा है। 2024 में उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए महिला स्कीट में भारत का कोटा हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। राइजा की उपलब्धियों में एशियन चैंपियनशिप के पदक और ISSF जूनियर विश्व कप के पदक भी शामिल हैं।
एशियन गेम्स 2026 में भी उनकी भूमिका बेहद अहम रही। टीम स्पर्धा में 111 अंक बनाने के बाद वह व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में भी पहुंचीं।
राइजा की उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त
राइजा ने जूनियर स्तर से लेकर सीनियर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक लगातार पदक जीते हैं। 2021 में लीमा की ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में महिला स्कीट टीम के साथ स्वर्ण उनके शुरुआती बड़े पदकों में शामिल है। 2023 में चांगवोन में ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा का रजत जीता। उसी साल एशियन चैंपियनशिप में मिश्रित टीम स्वर्ण और महिला जूनियर स्कीट में रजत भी उनके खाते में आया। 2024 में कुवैत में हुई एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने महिला स्कीट का रजत और मिश्रित टीम का कांस्य जीता। 2025 में ISSF जूनियर वर्ल्ड कप में सुहल और नई दिल्ली में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किए। इस रिकॉर्ड को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि नागोया का कांस्य उनके लिए अचानक मिली कामयाबी नहीं है, बल्कि कई वर्षों की मेहनत का नतीजा है।
परिनाज धालीवाल ने ट्रैप से शुरू किया था सफर, फिर स्कीट को बनाया अपना खेल
30 नवंबर 2001 को पटियाला में जन्मीं परिनाज धालीवाल की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। उन्होंने 2015 में न्यू मोती बाग गन क्लब में शूटिंग शुरू की। शुरुआत में उन्होंने ट्रैप आजमाया, लेकिन बाद में स्कीट उन्हें ज्यादा चुनौतीपूर्ण और दिलचस्प लगा। यहीं से उनके करियर की दिशा बदल गई। परिनाज ने जूनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाने के बाद ISSF विश्व कप, जूनियर विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप और एशियन गेम्स जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2019 में वह जूनियर नेशनल चैंपियन भी बनी थीं। 2021 में नई दिल्ली में हुए ISSF विश्व कप में महिला स्कीट टीम के साथ उन्होंने रजत पदक जीता। 2022 में सुहल में ISSF जूनियर विश्व कप में महिला स्कीट टीम के साथ कांस्य उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के अहम पदकों में शामिल रहा। अब एशियन गेम्स का कांस्य उनके पदक संग्रह में सबसे खास उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
एशियन गेम्स में भी पहले दिखा चुकी हैं दम
परिनाज के लिए एशियन गेम्स का अनुभव नया नहीं है। उन्होंने 2022 के हांग्जो एशियन गेम्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उस समय भारतीय महिला स्कीट टीम चौथे स्थान पर रही थी। यानी चार साल के अंतराल में भारतीय महिला स्कीट टीम ने चौथे स्थान से पोडियम तक का सफर तय किया और इस बार इतिहास रच दिया।
इस बदलाव में टीम की तीनों खिलाड़ियों का योगदान रहा है। राइजा और माहेश्वरी का अंतरराष्ट्रीय अनुभव तथा परिनाज की निरंतरता ने भारतीय टीम को मजबूत बनाया।
टीम मेडल के बाद व्यक्तिगत फाइनल में भी पहुंचीं राइजा और परिनाज
टीम कांस्य जीतने के बाद कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल ने महिला व्यक्तिगत स्कीट के फाइनल में भी जगह बनाई। दोनों ने क्वालिफिकेशन में 111 अंक बनाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार राइजा आठवें और परिनाज नौवें स्थान पर रहीं, जबकि माहेश्वरी 109 अंक के साथ कट से बाहर रहीं।
बाद में व्यक्तिगत फाइनल में राइजा चौथे स्थान पर रहीं, जबकि परिनाज आठवें स्थान पर बाहर हुईं। राइजा ने फाइनल में 23 हिट दर्ज किए और कांस्य से चूक गईं।
इस तरह टीम पदक के साथ-साथ दोनों भारतीय निशानेबाजों ने व्यक्तिगत स्पर्धा में भी अंतिम चरण तक पहुंचकर अपना प्रभाव छोड़ा।
स्कीट शूटिंग आखिर है क्या?
स्कीट शूटिंग में निशानेबाज हवा में तेजी से उड़ने वाली गोल प्लेट जैसी वस्तुओं, जिन्हें क्ले टारगेट या क्ले पिजन कहा जाता है, पर निशाना लगाते हैं। इस खेल में दो अलग-अलग जगहों से क्ले टारगेट हवा में छोड़े जाते हैं। निशानेबाज को बेहद कम समय में उनकी दिशा और गति का अंदाजा लगाकर गोली चलानी होती है। हर सफल हिट पर एक अंक मिलता है।
स्कीट शूटिंग में खिलाड़ी की एकाग्रता, प्रतिक्रिया की गति, आंख और हाथ के तालमेल और सटीक निशाने की बड़ी भूमिका होती है। प्रतियोगिता में निशानेबाज को कई राउंड में बड़ी संख्या में टारगेट पर निशाना लगाना पड़ता है और सबसे ज्यादा हिट करने वाला खिलाड़ी आगे रहता है।
यही वजह है कि कुछ ही सेकंड का ध्यान भटकना स्कोर पर असर डाल सकता है। टीम स्पर्धा में तीनों खिलाड़ियों के स्कोर को मिलाकर टीम का कुल स्कोर तैयार होता है। भारत के लिए इस बार तीनों के प्रदर्शन का संतुलन पदक तक पहुंचने में निर्णायक रहा।
पुरुष टीम ने भी दिलाया कांस्य
महिला टीम के ऐतिहासिक पदक के साथ भारतीय पुरुष स्कीट टीम ने भी कांस्य जीता। अनंतजीत सिंह नारूका, मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह गिल ने कुल 346 अंक बनाए। अनंतजीत ने 119, मैराज ने 116 और भवतेघ ने 111 अंक जुटाए। अनंतजीत व्यक्तिगत फाइनल में भी पहुंचे। इस तरह 23 सितंबर भारतीय स्कीट शूटिंग के लिए यादगार दिन बन गया। महिला और पुरुष दोनों टीमों ने पोडियम पर जगह बनाई।


