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Lionel Messi Biography: फुटबॉल के महानायक, जादूगर मेसी, जिसकी कला से दुनिया हिली
Lionel Messi Biography: लियोनेल मेसी की प्रेरक कहानी पढ़िए। ग्रोथ हार्मोन की बीमारी से जूझने वाले रोसारियो के एक बच्चे ने कैसे फुटबॉल की दुनिया पर राज किया...
Famous Footballer Lionel Messi Biography (Photo - Newstrack AI)
Lionel Messi Biography: कुछ खिलाड़ी सिर्फ गोल और ट्रॉफियों से नहीं नापे जा सकते। वे खेल की भाषा ही बदल देते हैं। लियोनेल मेसी (Lionel Messi) इस श्रेणी में आते हैं। पेले ने फुटबॉल को दुनिया भर में पहचान दी। माराडोना ने उसे विद्रोह का चेहरा दिया। मेसी ने उसे कला का नया रूप दिया। यह कहानी सिर्फ एक महान खिलाड़ी की नहीं है। यह उस बच्चे की कहानी है जिसके बारे में डॉक्टरों ने कहा था कि उसका शरीर ठीक से बढ़ नहीं पाएगा। और उसी बच्चे ने उसी शरीर के साथ फुटबॉल की सबसे बड़ी ऊंचाई छू ली।
रोसारियो का शांत बच्चा
लियोनेल आंद्रेस मेसी का जन्म 24 जून 1987 को हुआ। जगह थी अर्जेंटीना का शहर रोसारियो, जो फुटबॉल के जुनून के लिए मशहूर है। पिता जॉर्ज एक इस्पात कारखाने में काम करते थे, साथ में स्थानीय क्लब से भी जुड़े थे। मां सेलिया कारखाने में नौकरी करती थीं। परिवार मध्यमवर्गीय था। गुज़ारा चलता था, पर बड़े मेडिकल खर्च उठाना आसान नहीं था।
मेसी तीन भाई-बहनों के साथ साधारण घर में बड़े हुए। बचपन से ही बहुत शांत और कम बोलने वाले थे। यह स्वभाव बाद में भी नहीं बदला। एक यादगार बात उनकी नानी सेलिया से जुड़ी है। नानी ही उन्हें पहली बार हाथ पकड़कर मैदान पर ले गई थीं। आज भी जब मेसी गोल करते हैं, दोनों उंगलियां आसमान की ओर उठाते हैं। यह उनकी नानी को याद करने का तरीका है।
वह बीमारी जो सपना तोड़ सकती थी
पढ़ाई में मेसी औसत से ऊपर थे पर असली प्यार फुटबॉल से था। छोटी उम्र से ही गेंद के साथ घंटों बिताते। घरवालों को जल्दी समझ आ गया कि यह बच्चा आम नहीं है। बड़े भाई के दोस्तों के साथ खेलने की ज़िद करते। उम्र में बड़े बच्चों के बीच भी सबसे असरदार खिलाड़ी बन जाते। स्थानीय क्लब 'ग्रांडोली' से करियर शुरू हुआ।
फिर दस साल की उम्र में एक झटका लगा। डॉक्टरों ने पाया कि उन्हें 'ग्रोथ हार्मोन डेफिशिएंसी' है। मतलब, शरीर सामान्य रफ़्तार से नहीं बढ़ रहा था। इलाज मुमकिन था, पर बहुत महंगा। हर महीने करीब 900 डॉलर का खर्च। परिवार की जेब इतनी गहरी नहीं थी। उनका क्लब नेवेल्स ओल्ड बॉयज़ भी अर्जेंटीना के आर्थिक संकट के चलते यह खर्च नहीं उठा सका। परिवार पूरी तरह हताश हो गया था।
एक टिशू पेपर पर लिखा भविष्य
Newell's Old Boys के लिए खेलते हुए मेसी ने ऐसा असर छोड़ा कि बात यूरोप तक पहुंच गई। FC Barcelona के अधिकारियों ने उन्हें देखने का फैसला किया। एक ट्रायल मैच के बाद क्लब के खेल निदेशक कार्लोस रेक्साच इतने प्रभावित हुए कि कानूनी कागज़ का इंतज़ार भी नहीं किया। पास के रेस्तरां में रखे टिशू पेपर पर ही उन्होंने मेसी का पहला अनुबंध लिख दिया। क्लब ने सिर्फ खिलाड़ी नहीं लिया बल्कि उसके इलाज का पूरा खर्च भी अपने सिर ले लिया। यह फैसला फुटबॉल इतिहास के सबसे अहम फैसलों में गिना जाता है।
ला मासिया: जहां गेंद पैरों का हिस्सा बन गई
तेरह साल की उम्र में मेसी परिवार के साथ स्पेन पहुंच गए। नया देश, नई भाषा, परिवार से दूरी का अहसास, सब कुछ एक साथ। पर फुटबॉल उनका सहारा बना। बार्सिलोना की मशहूर अकादमी 'ला मासिया' में ट्रेनिंग शुरू हुई जहां उनका खेल और व्यक्तित्व दोनों परवान चढ़ते गए। कोचों को जल्दी समझ आ गया कि यह असाधारण प्रतिभा है। गेंद उनके पैरों से ऐसे चिपकी रहती जैसे उसका शरीर का हिस्सा हो।
2004 में सीनियर टीम में डेब्यू हुआ। उस वक्त टीम में Ronaldinho जैसे बड़े नाम मौजूद थे। रोनाल्डिन्हो ने खुद कहा था, एक दिन यह लड़का मुझसे भी बड़ा खिलाड़ी बनेगा। बात बड़ी लग रही थी, पर सच साबित हुई। 1 मई 2005 को अल्बासेते के खिलाफ मेसी ने पहला सीनियर गोल किया। पास खुद रोनाल्डिन्हो ने दिया था। गोल होते ही उन्होंने मेसी को खुशी से अपनी पीठ पर उठा लिया।
एक खिलाड़ी जिसे किसी एक भूमिका में बांधा नहीं जा सकता
मेसी को समझना आसान नहीं है। वे पारंपरिक स्ट्राइकर नहीं हैं। सिर्फ विंगर भी नहीं हैं। वे प्लेमेकर भी हैं, गोलस्कोरर भी। सबसे बड़ी खूबी उनकी ड्रिब्लिंग है। कम ऊंचाई और नीचा गुरुत्वाकर्षण केंद्र उन्हें अद्भुत संतुलन देता है। विरोधी रोकने की कोशिश करते हैं, पर गेंद उनके पैरों से चिपकी रहती है। दिशा बदलने की कला, तंग जगहों से निकल जाने की समझ, खेल को पढ़ने की बुद्धि, यही उन्हें अलग बनाता है।
2007 में गेटाफे के खिलाफ किया गया गोल इसका सबसे बड़ा सबूत है। आधे मैदान से दौड़ते हुए कई खिलाड़ियों को छकाकर गोल किया। लोगों को माराडोना का 1986 वाला गोल याद आ गया। आगे ऐसे कई पल आए जो फुटबॉल इतिहास का हिस्सा बन गए।
बार्सिलोना में एक साम्राज्य
बार्सिलोना के साथ करियर अद्भुत रहा। सैकड़ों गोल, कई लीग खिताब, कई चैंपियंस लीग खिताब। लगभग हर रिकॉर्ड को चुनौती दी। इसी दौर में Cristiano Ronaldo के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता फुटबॉल की सबसे बड़ी कहानी बन गई। दोनों ने एक-दूसरे को आगे बढ़ने पर मजबूर किया। 2012 में मेसी ने क्लब और देश के लिए कुल 91 गोल किए। गर्ड म्यूलर का 40 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया था।
विश्वकप की कमी, और उससे जूझना
पर मेसी की कहानी सिर्फ क्लब फुटबॉल की नहीं है। बरसों आलोचक कहते रहे कि वे राष्ट्रीय टीम के लिए वह नहीं कर पाए जो माराडोना ने किया था। 2014 का विश्वकप फाइनल हाथ से निकला। 2015 और 2016 के कोपा अमेरिका फाइनल भी हारे। यह दौर मानसिक रूप से बहुत भारी था। एक बार उन्होंने राष्ट्रीय टीम से संन्यास की बात भी कह दी। पर फिर लौट आए। यही उनकी कहानी का सबसे बड़ा मोड़ था। हार स्वीकार की, खुद को फिर से तैयार किया, और फिर कोशिश की।
2022: छत्तीस साल का इंतज़ार खत्म
यह धैर्य आखिर रंग लाया। 2021 में अर्जेंटीना ने कोपा अमेरिका जीता, मेसी का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब। फिर आया 2022 का विश्वकप। कतर में वह उपलब्धि मिली जिसका इंतज़ार करोड़ों फैंस बरसों से कर रहे थे। विश्वकप जीतने के बाद पेले और माराडोना के साथ उनकी तुलना नए स्तर पर पहुंच गई। बहुत से जानकार उन्हें इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी मानने लगे। मेसी इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने रिकॉर्ड 8 बार बैलन डी'ओर जीता है। फाइनल में उनके दो गोलों ने देश का 36 साल का सूखा खत्म कर दिया था।
मैदान के बाहर, एक आर्थिक साम्राज्य
आर्थिक तौर पर भी मेसी आधुनिक खेल इतिहास के सबसे सफल नामों में हैं। लंबे समय तक Adidas का वैश्विक चेहरा रहे। पेय पदार्थ, तकनीक, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, हर क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े। कई सालों तक दुनिया के सबसे ज़्यादा कमाने वाले खिलाड़ियों में रहे। होटल कारोबार में भी निवेश किया।
शोर नहीं, सिर्फ शांत महानता
फिर भी मेसी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतनी शोहरत के बावजूद वे निजी ज़िंदगी पसंद करते हैं। एंटोनेला रोक्कुज़ो से शादी की, जिन्हें वे बचपन से जानते थे। दोनों की कहानी खेल जगत की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में गिनी जाती है। तीन बेटे हैं और वे अक्सर कहते हैं, परिवार ही उनकी सबसे बड़ी ताक़त है।
करियर के शुरुआती सालों में चोटें परेशान करती रहीं। बाद में पोषण और फिटनेस विशेषज्ञों की मदद से खान-पान और ट्रेनिंग बदली। संतुलित आहार, पानी का सही सेवन, वैज्ञानिक ट्रेनिंग, इन सबने उन्हें लंबे समय तक शिखर पर बनाए रखा।
स्पेन में कर से जुड़े कुछ कानूनी मामले भी सामने आए और काफी चर्चा में रहे। पर इसका असर उनके खेल पर कभी नहीं पड़ा। मैदान पर वे वही खिलाड़ी बने रहे जिनकी पहचान ही उत्कृष्टता है।
आज मेसी सिर्फ फुटबॉलर नहीं हैं। वे एक वैश्विक सांस्कृतिक प्रतीक बन गए हैं। उनकी जर्सी हर महाद्वीप में बिकती है। उनके गोलों के वीडियो अरबों बार देखे जाते हैं। उनकी विनम्रता और शांत स्वभाव ने उन्हें उन लोगों में भी पसंदीदा बनाया जो फुटबॉल नियमित रूप से नहीं देखते।
मेसी की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि उनकी महानता शोर से नहीं बनी। उन्होंने प्रचार से नहीं, प्रदर्शन से अपनी जगह बनाई। उन्हें कभी सबसे ताकतवर नहीं कहा गया। कभी सबसे तेज़ नहीं कहा गया। पर वे लगातार बेहतर होते गए। उन्होंने साबित किया कि प्रतिभा, अनुशासन, धैर्य और निरंतरता मिलकर असंभव को भी मुमकिन बना सकते हैं।
रोसारियो का वह छोटा बच्चा, जिसके शरीर के बढ़ने पर सवाल उठे थे, आखिर फुटबॉल के शिखर पर पहुंच गया। यही वजह है कि मेसी की कहानी सिर्फ खेल की कहानी नहीं है। यह विश्वास, धैर्य और आत्मविश्वास की कहानी भी है।


