ग्लासगो में इतिहास रचने वाले पैरा स्टार्स विवाद में, स्टाफ पर लगाए दुर्व्यवहार के आरोप

Glasgow Para Games Controversy: ऐतिहासिक पदक जीत के बाद IOA स्टाफ पर दुर्व्यवहार के आरोप, खिलाड़ियों ने की शिकायत।

Jyotsana Singh
Published on: 7 Aug 2026 2:57 PM IST
Glasgow Para Games Controversy 2026
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Glasgow Para Games Controversy

Glasgow Para Games Controversy: हर बार की तरह साल 2026 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पैरा एथलीटों ने देश को गर्व करने के कई मौके दिए। सात पदकों के साथ भारतीय पैरा दल ने 20 साल का इंतजार खत्म किया और कई स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन इन ऐतिहासिक उपलब्धियों के कुछ ही दिन बाद पैरा एथलेटिक्स दल से जुड़ा एक विवाद सामने आ चुका है। पुरुषों की T47 100 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले दिलीप महादु गावित और रजत पदक विजेता मोहम्मद बेसिल समेत दल से जुड़े कुछ लोगों ने भारतीय ओलंपिक संघ यानी IOA की मीडिया समिति के एक सदस्य के कथित व्यवहार को लेकर शिकायत की है। शिकायत खेल मंत्रालय और IOA के सामने रखी गई है।

20 साल बाद पैरा एथलेटिक्स ने रचा बड़ा इतिहास

ग्लासगो में भारतीय पैरा एथलीटों का प्रदर्शन लंबे समय तक याद रखा जाएगा। भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा स्पर्धाओं में कुल सात पदक जीते। इस प्रदर्शन के साथ भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने करीब दो दशक बाद राष्ट्रमंडल खेलों में फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में पोडियम फिनिश हासिल की और दिखाया कि भारतीय पैरा खेल लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी शानदार अभियान का सबसे खास पल पुरुषों की T47 100 मीटर दौड़ में देखने को मिला। जहां भारत ने एक ही स्पर्धा में स्वर्ण और रजत दोनों पदक अपने नाम किए।

गावित ने रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण, बेसिल ने भी मारी बाजी

दिलीप महादु गावित ने 100 मीटर की दौड़ महज 10.71 सेकंड में पूरी की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं मोहम्मद बेसिल ने 10.83 सेकंड के सीजन के सर्वश्रेष्ठ समय के साथ रजत पदक जीता। गावित की जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि वह राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी बने। एक ही दौड़ में दो भारतीय खिलाड़ियों के पोडियम पर पहुंचने से भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए यह पल और यादगार हो गया।

पदक जीतने के तुरंत बाद सामने आया विवाद

इतिहास रचने वाली इस जीत के कुछ ही समय बाद कथित विवाद ने सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दीं। रिपोर्ट के अनुसार, गावित और बेसिल ने IOA मीडिया समिति के सदस्य सर्वेश केडिया के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। पैरा एथलेटिक्स कोच पुष्पा एनपी ने भी शिकायत की है। जबकि भारतीय पैरालंपिक समिति यानी PCI के सीईओ राहुल स्वामी की ओर से भी इसी मामले में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है।

शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि पैरा एथलीटों और कोचों के साथ कथित तौर पर अभद्र और अपमानजनक व्यवहार किया गया। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।

डोपिंग टेस्ट को लेकर शुरू हुई थी कथित बहस

रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद की शुरुआत खिलाड़ियों के मीडिया से बातचीत करने को लेकर हुई। प्रतियोगिता के बाद खिलाड़ियों को अनिवार्य डोपिंग नियंत्रण प्रक्रिया से गुजरना था। इसी बीच कथित तौर पर इस बात को लेकर असहमति हुई कि डोपिंग प्रक्रिया पूरी होने से पहले खिलाड़ियों को मीडिया से बातचीत करनी चाहिए या नहीं।

बताया गया है कि बातचीत के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौखिक बहस कथित तौर पर हाथापाई जैसी स्थिति तक पहुंच गई। खिलाड़ियों और कोचों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किए जाने की बात कही गई है।

कोच ने भी शिकायत में लगाए गंभीर आरोप

पैरा एथलेटिक्स कोच पुष्पा एनपी की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सर्वेश केडिया ने पदक विजेता दिलीप गावित, मोहम्मद बेसिल और कोचों से कथित तौर पर ऊंची आवाज में बात की। शिकायत के अनुसार, इस दौरान पैरा एथलेटिक्स के मुख्य कोच सत्यनारायण भी मौके पर मौजूद थे।

पुष्पा ने अधिकारियों से मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि संबंधित अधिकारी को भविष्य में पैरा एथलेटिक्स से जुड़े मीडिया इंटरैक्शन से दूर रखा जाए। शिकायतों के सामने आने के बाद अब मामले में IOA और खेल मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

खिलाड़ियों की उपलब्धि के बीच प्रशासन पर उठे सवाल

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारतीय पैरा खेल तेजी से मजबूत हो रहे हैं। ग्लासगो में पैरा स्पर्धाओं का कार्यक्रम भी पहले की तुलना में सराहनीय रहा और भारतीय खिलाड़ियों ने इसका फायदा उठाते हुए कई यादगार प्रदर्शन किए। ऐसे में खिलाड़ियों और खेल प्रशासन से जुड़े लोगों के बीच बेहतर तालमेल और संवेदनशील व्यवहार बेहद जरूरी माना जाता है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि, खासकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को प्रतियोगिता, डोपिंग नियंत्रण, मीडिया बातचीत और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इन प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्ट संवाद न होने पर ऐसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिससे न केवल मौजूदा विवाद की स्थिति साफ होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में भी मदद भी मिलेगी।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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