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बस 3 करोड़ की सैलरी..., पार्थिव पटेल के BCCI चीफ सेलेक्टर की रेस से पीछे हटने की सामने आई वजह
बीसीसीआई के चीफ सेलेक्टर पद के लिए पार्थिव पटेल के पीछे हटने की अब एक बहुत बड़ी वजह सामने आई है, जिसके चलते पार्थिव ने इस पद से दूरी बना ली।
टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी पार्थिव पटेल का नाम बीसीसीआई चीफ सेलेक्टर को लेकर काफी चर्चा में चल रहा था। ये भी दावा किया जा रहा था कि पार्थिव पटेल अगर आवेदन करते तो बोर्ड की तरफ से उन्हें एक तरफा समर्थन मिल जाता, लेकिन इसके लिए पार्थिव पटेल ने फार्म ही नहीं भरा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पार्थिव पटेल ने चीफ सेलेक्टर की रेस से अपने आप को बाहर रखने के पीछे बहुत बड़ी वजह बताई है।
बीसीसीआई के इस प्रतिष्ठित पद से दूरी बनाना पार्टी पटेल के लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें इसके लिए दी जाने वाली सैलरी काफी कम लग रही थी जिस कारण उन्हें अपने अन्य पेशेवर कमिट्मेंट छोड़ने पड़ते, जिसकी कुल कमाई बीसीसीआई के इस ऑफर से काफी ज्यादा थी।
इस कारण पार्थिव पटेल चीफ सेलेक्टर रेस से पीछे हटे
अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने के बाद नए चीफ सेलेक्टर के रूप में पार्थिव पटेल का नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने इस जिम्मेदारी से पीछे हटने का निर्णय लिया। वजह यह थी कि बीसीसीआई उन्हें इसके लिए 3 करोड रुपए सैलरी सालाना दे रही थी, लेकिन उन्हें यह सौदा घाटे का लगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस जिम्मेदारी को संभालने के साथ ही उन्हें अपने अन्य पेशेवर कमिटमेंट्स जिसमें गुजरात टाइटंस के साथ उनकी कोचिंग की भूमिका और कई अलग-अलग मंचों पर उनके कमेंट्री शामिल है, जो उन्हे छोड़ना पड़ता।
उनके इन सभी कामों से होने वाली कुल कमाई बीसीसीआई के इस सालाना ऑफर से काफी अधिक थी। यही वजह है कि पटेल ने यह घाटे का सौदा नहीं किया।
प्रज्ञान ओझा को मिली है जिम्मेदारी
अजीत अगरकर के पद छोड़ने के बाद दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता के रूप में प्रज्ञान ओझा को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र के लिए एक नए चयनकर्ता बहुत जल्द ही बीसीसीआई के साथ जुड़ सकते हैं। इसी बीच रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर चयन कर्ताओं के लिए तय की गई सैलरी पर चर्चा करते हुए कहा है कि देश के सबसे बड़े बोर्ड के हिसाब से यह पर्याप्त नहीं है।
अश्विन का कहना है कि चयनकर्ता के पद का पारिश्रमिक पुरुष टीम के मुख्य कोच के बराबर होना चाहिए। यानी कि जब तक इस पद को आर्थिक रूप से बेहद आकर्षक नहीं बनाया जाएगा तब तक सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ या अनिल कुंबले जैसे दिग्गज और बड़े कद के पूर्व खिलाड़ी इस भूमिका की ओर आकर्षित नहीं होंगे।


