चप्पल हाथ में लेकर नंगे पैर दौड़ी मां, जीती रेस, अब बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार

Maharashtra News: बीड की रमाबाई रणवीर चप्पल हाथ में लेकर नंगे पैर मैराथन दौड़ीं और पहला स्थान हासिल किया। अब सरकार उनकी बेटियों की पढ़ाई में मदद करेगी।

Jyotsana Singh
Published on: 3 Sept 2026 2:22 PM IST
Maharashtra News: Mother Wins Race Barefoot, Government to Support Daughters’ Education
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Maharashtra News: Mother Wins Race Barefoot, Government to Support Daughters’ Education

Maharashtra News: बेटियों की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने के इरादे से मैराथन में उतरीं रमाबाई ने चप्पल हाथ में लेकर नंगे पैर दौड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। महाराष्ट्र के बीड जिले की रमाबाई रणवीर की इस कहानी ने हर किसी को भावुक कर दिया है।

अब उनकी इस हिम्मत को महाराष्ट्र सरकार का सहारा मिलने जा रहा है। सरकार ने उनकी बेटियों की पढ़ाई और परिवार की आर्थिक मदद करने का भरोसा दिया है।

मां अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए किस हद तक संघर्ष कर सकती है, महाराष्ट्र के बीड जिले की रमाबाई रणवीर इसकी मिसाल बन गई हैं। अंबाजोगाई की रहने वाली रमाबाई ने हाल ही में आयोजित एक मैराथन में हिस्सा लिया था। उनके पास महंगे स्पोर्ट्स शूज नहीं थे। वह चप्पल पहनकर ही दौड़ में शामिल हुईं, लेकिन दौड़ के दौरान जब चप्पलें बार-बार फिसलने लगीं तो उन्होंने उन्हें हाथ में उठा लिया और नंगे पैर दौड़ना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और युवा धावकों को पीछे छोड़ते हुए रेस जीत ली।

बेटियों की पढ़ाई के लिए लगाई पूरी ताकत

रमाबाई के लिए यह सिर्फ एक मैराथन नहीं थी, बल्कि अपनी बेटियों के भविष्य के लिए जुटाई जा रही मदद की एक कोशिश थी। रेस में पहला स्थान हासिल करने पर उन्हें 3 हजार रुपये की पुरस्कार राशि मिली। रमाबाई इस रकम का इस्तेमाल अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए करना चाहती हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी बेटियों की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और अपनी कमाई से उनके सपनों को पूरा करने की कोशिश करती रही हैं।

पति की मौत के बाद अकेले संभाली बेटियों की जिम्मेदारी

रमाबाई के जीवन में मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके पति की मुंबई में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी रमाबाई के कंधों पर आ गई। दोनों बेटियों की परवरिश से लेकर उनकी पढ़ाई तक का खर्च उन्हें खुद उठाना पड़ा। अंबाजोगाई में वह एक अकादमी में रसोइया के तौर पर काम करती हैं और इसी कमाई से परिवार चलाती हैं।

कम आमदनी के बावजूद रमाबाई ने बेटियों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया। उनकी बड़ी बेटी पूजा पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही है, जबकि छोटी बेटी बैंकिंग परीक्षा की तैयारी में जुटी है। रमाबाई चाहती हैं कि उनकी बेटियां पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हों और उन्हें वह संघर्ष न करना पड़े, जो उनकी मां ने जिंदगी में देखा है।

चप्पल फिसली तो हाथ में उठाकर दौड़ती रहीं

अंबाजोगाई में आयोजित मैराथन में रमाबाई की शुरुआत चप्पल पहनकर हुई थी। लेकिन दौड़ते समय चप्पल बार-बार फिसलने लगी। ऐसे में उन्होंने समय गंवाने के बजाय चप्पल अपने हाथ में ले ली और नंगे पैर ही आगे बढ़ती रहीं। सड़क पर दौड़ते हुए उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी रफ्तार कम नहीं होने दी। देखते ही देखते वह बाकी प्रतिभागियों से आगे निकल गईं और फिनिश लाइन सबसे पहले पार कर दी। उनकी जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उनके सामने कई युवा प्रतिभागी थे, जो दौड़ के लिए बेहतर तैयारी और स्पोर्ट्स शूज के साथ आए थे। रमाबाई के पास सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन उनका हौसला किसी से कम नहीं था।

वीडियो सामने आने के बाद देशभर में हुई तारीफ

रमाबाई के नंगे पैर दौड़ने का वीडियो और उनकी कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनकी जमकर तारीफ करने लगे। लोगों ने उनकी मेहनत को सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता की जीत नहीं, बल्कि मां के उस संघर्ष के रूप में देखा, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर मुश्किल से लड़ती है। उनकी कहानी मीडिया के जरिए सामने आने के बाद उन्हें देशभर से सराहना मिली। यही नहीं उनके साथ ही

उनकी बेटी पूजा ने भी इसी मैराथन में हिस्सा लिया और दूसरा स्थान हासिल किया। इस तरह मां और बेटी दोनों ने प्रतियोगिता में अपनी जगह बनाई। रमाबाई के लिए यह पल इसलिए भी खास था क्योंकि जिस बेटी की पढ़ाई के लिए वह संघर्ष कर रही हैं, वही बेटी उनके साथ दौड़ में भी शामिल थी।

महाराष्ट्र सरकार ने मदद का किया ऐलान

रमाबाई की कहानी सामने आने के बाद महाराष्ट्र सरकार भी उनकी मदद के लिए आगे आई है। महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने पुष्टि की है कि सरकार रमाबाई के परिवार की आर्थिक मदद करेगी। सरकार उनकी बेटियों की पढ़ाई और परिवार के पालन-पोषण में सहायता देने की तैयारी कर रही है।

रमाबाई के लिए सरकार की यह मदद बड़ी राहत साबित हो सकती है। अब उनकी बेटियों की शिक्षा का बोझ कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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