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रमेश पोवार ही क्यों..., वसीम जाफर ने भी किया था आवेदन; इस कारण नहीं मिली सेलेक्शन कमेटी में जगह
अजीत अगरकर के बाद बीसीसीआई ने भारतीय क्रिकेट टीम के सीनियर सेलेक्शन कमिटी में रमेश पोवार को शामिल किया, जबकि कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसके लिए आवेदन दिया था, जिसमें एक नाम वसीम जाफर का भी था।
अजीत आगरकर का कार्यकाल खत्म होने के बाद जब बीसीसीआई ने टीम इंडिया के नए चीफ सेलेक्टर और नए सेलेक्शन कमिटी का ऐलान किया तो इसमें एक नाम सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था और वह है रमेश पोवार..। अजीत अगरकर के बाद वेस्ट जोन का पद खाली हो गया था जिसके लिए बीसीसीआई ने कई पूर्व खिलाड़ियों से आवेदन मांगे थे। इसमें एक नाम वसीम जाफर का भी है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण माना जा रहा है, जिस कारण बोर्ड ने रमेश पोवार को चुना।
वसीम जाफर को इस कारण नहीं मिली जगह
दरअसल टीम इंडिया के सेलेक्शन पैनल में हर 1 जून का सेलेक्टर होता है। साउथ जोन से प्रज्ञान ओझा है। वही सेंट्रल जोन से आरपी सिंह है। अजय यात्रा को नॉर्थ जोन की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि ईस्ट जोन की कमान शिव सुंदर दास के हाथों में है। इन चारों के अलावा वेस्ट जोन से अजीत अगरकर शामिल थे, जिनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद जब आवेदन मांगे गए तो वसीम जाफर ने भी आवेदन किया था।
माना जा रहा था कि अगर जाफर का चयन होता तो फिर बीसीसीआई के नियम के अनुसार प्रज्ञान ओझा चीफ सेलेक्टर नहीं बन पाते और जाफर को यह पद मिलता। जबकि बोर्ड ने पहले से ही प्रज्ञान ओझा को प्रमोशन देकर चीफ सेलेक्टर बनाने का मन कर लिया था। यही वजह है कि अनुभव होने के बावजूद भी वसीम जाफर को साइड लाइन करते हुए पोवार के नाम पर अंतिम मोहर लगी।
चयन को लेकर क्या कहता है बीसीसीआई का नियम?
बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक सेलेक्शन पैनल में शामिल सभी सेलेक्टर में जिस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले होंगे, वहीं मुखिया होता है। अजीत अगरकर के जाने के बाद बीसीसीआई ने पहले ही ओझा को अंतरिम टीम सेलेक्टर बना दिया था। ऐसे में पोवार के आने से वह आधिकारिक तौर पर चीफ सेलेक्टर बन गए। वही रमेश पोवार को चुनने की 1 बड़ी वजह यह भी है कि वह कई सालों से बीसीसीआई से जुड़े हुए हैं और महिला टीम इंडिया के हेड कोच भी रह चुके हैं। पोवार का माइंडसेट सेलेक्शन पैनल में शामिल चीफ सेलेक्टर प्रज्ञान ओझा से काफी मिलता जुलता है। यही वजह है कि दोनों की जोड़ी पर अंतिम मोहर लगी।


