Action Camera Explained: एक्शन कैमरा क्या होता है? GoPro इतना अलग क्यों है और इसे कौन खरीदता है?

Action Camera Explained: एक्शन कैमरा क्या होता है और GoPro इतना लोकप्रिय क्यों है? जानिए GoPro की खासियत, HyperSmooth स्टेबिलाइजेशन, वॉटरप्रूफ डिजाइन, वाइड एंगल, माउंटिंग सिस्टम और इसके इस्तेमाल के बारे में। साथ ही समझिए कि GoPro किसके लिए उपयोगी है और किसे इसे खरीदने की जरूरत नहीं है।

Yogesh Mishra
Published on: 19 Aug 2026 7:29 PM IST
Action Camera GoPro Explained in Hindi
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Action Camera GoPro Explained in Hindi

Action Camera Explained: अपने तमाम व्लागर्स को नन्हा सा कैमरा से कर रिकॉर्डिंग करते देखा होगा या यूट्यूब विडियो में किसी बाइकर के हेलमेट में लगे कैमरे से शूट हुए चारों ओर के नज़ारे देखे होंगे या फिर पानी के भीतर कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी होगी। ये सब शूटिंग सामान्य मोबाइल कैमरे या पारंपरिक कैमरे से अलग होती है क्योंकि ये एक्शन कैमरों से की हुई शूटिंग होती है। एक्शन कैमरा मूलतः ऐसा छोटा, मजबूत और हल्का कैमरा होता है, जिसे इस तरह बनाया जाता है कि वह आपके हाथ में स्थिर रखकर फोटो लेने के बजाय आपके साथ चलते हुए, दौड़ते हुए, बाइक चलाते हुए, तैरते हुए, पर्वतारोहण करते हुए या किसी खेल के बीच वीडियो रिकॉर्ड कर सके। सामान्य कैमरा यह मानकर बनाया जाता है कि आप उसे संभालकर चलाएँगे। एक्शन कैमरा यह मानकर बनाया जाता है कि उसे हेलमेट, बाइक, कार, सर्फबोर्ड, छाती, कंधे या किसी दूसरे उपकरण पर बाँधा जाएगा और रास्ते में धूल, पानी, वाइब्रेशन और झटके भी मिलेंगे।

एक्शन कैमरे की पहली पहचान उसके आकार से नहीं, उसके इस्तेमाल के तरीके से होती है। फोन भी 4K या उससे अधिक क्वालिटी में वीडियो बना सकता है, लेकिन आप फोन को मोटरसाइकिल के हेलमेट के ऊपर लगाकर बारिश में घंटों चलाना नहीं चाहेंगे। बड़ा कैमरा बहुत सुंदर वीडियो दे सकता है, लेकिन उसे स्कीइंग करते समय सिर पर बाँधना व्यावहारिक नहीं। एक्शन कैमरा इसी खाली जगह को भरता है।

GoPro की कहानी कहाँ से शुरू हुई?

गो प्रो (GoPro) दरअसल एक कंपनी का नाम है। जिसने एक्शन कैमरे को लोकप्रिय बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। इसके संस्थापक निकोलस वुडमैन खुद खेल और सर्फिंग के शौकीन थे। GoPro के इतिहास के अनुसार 2001 में एक अंतरराष्ट्रीय सर्फिंग यात्रा की तैयारी करते समय वुडमैन को ऐसा कैमरा बनाने का विचार आया जिसे कलाई पर बाँधा जा सके और सर्फिंग करते समय तस्वीरें ली जा सकें। शुरुआती HERO कैमरा 35 मिमी फिल्म वाला कलाई कैमरा था और कंपनी ने 2004 में GoPro नाम से कारोबार शुरू किया। यानी GoPro का जन्म स्टूडियो फोटोग्राफी से नहीं बल्कि एक बहुत व्यावहारिक प्रश्न से हुआ था कि खेलते हुए अपनी ही नजर से दृश्य कैसे रिकॉर्ड किया जाए? यही विचार आगे जाकर पूरी एक्शन कैमरा श्रेणी की पहचान बन गया।

GoPro का सबसे बड़ा अंतर क्या है?

GoPro की सबसे बड़ी विशेषता केवल कैमरे की तस्वीर की गुणवत्ता नहीं है। उसकी असली ताकत कैमरा + स्थिरीकरण + चौड़ा दृश्य + मजबूती + माउंटिंग तंत्र के पूरे संयोजन में रही है। मान लीजिए कोई साइकिल सवार पहाड़ी रास्ते से नीचे उतर रहा है। कैमरा उसके हेलमेट पर लगा है। हर सेकंड झटके हैं, शरीर हिल रहा है, रास्ता असमान है और कैमरा लगातार दिशा बदल रहा है। यदि सामान्य कैमरा वहाँ लगाया जाए तो वीडियो इतना हिल सकता है कि देखना कठिन हो जाए।

GoPro ने इस समस्या पर अपने HyperSmooth स्थिरीकरण तंत्र (Stabilization mechanism )के जरिए बहुत काम किया। यह कैमरे के सेंसर और गति-सूचना का उपयोग करके वीडियो के भीतर होने वाले झटकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से बैलेंस करता है। इस तकनीक को 2022 में इंजीनियरिंग उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित Emmy पुरस्कार भी मिला था। इसलिए GoPro का प्रसिद्ध वीडियो अक्सर ऐसा लगता है जैसे कैमरा हवा में किसी अदृश्य स्थिर मंच पर लगा हो, जबकि असल में व्यक्ति दौड़ रहा होता है या बाइक उछल रही होती है।

इसका लेंस इतना चौड़ा क्यों होता है?

एक्शन कैमरे में बहुत चौड़ा दृश्य जानबूझकर रखा जाता है। इसके दो फायदे हैं। पहला, कैमरा यदि आपके सिर या छाती पर लगा है तो आप व्यूफाइंडर देखकर फ्रेम नहीं बना सकते। चौड़ा लेंस सुनिश्चित करता है कि महत्वपूर्ण दृश्य फ्रेम से बाहर न निकल जाए।

दूसरा, चौड़ा दृश्य गति को अधिक नाटकीय बनाता है। बाइक चलाते समय सड़क, हैंडल, हाथ और दोनों ओर का वातावरण एक साथ दिखाई दे तो दर्शक को ऐसा लगता है जैसे वह स्वयं बाइक चला रहा है। इसी को POV (point of view) यानी प्रथम-व्यक्ति दृष्टिकोण कहा जाता है। एक्शन कैमरे की लोकप्रियता का बड़ा कारण यही अनुभव है।

GoPro ने अपने कैमरों में बहुत चौड़े दृश्य को लगातार प्रमुख विशेषता रखा है। उदाहरण के लिए HERO12 के साथ Max Lens Mod 2.0 से 177 डिग्री तक का दृश्य उपलब्ध कराया गया था।

GoPro को कहीं भी कैसे लगाया जा सकता है?

यही शायद वह हिस्सा है जिसे सामान्य कैमरे से तुलना करते समय सबसे कम महत्व दिया जाता है। GoPro ने कैमरा बनाने के साथ-साथ माउंटिंग प्रणाली को लगभग एक अलग उद्योग बना दिया। कंपनी स्वयं सिर, शरीर, बोर्ड और दूसरे उपकरणों के लिए अनेक प्रकार के माउंट बेचती है। इसे हेलमेट पर लगाया जा सकता है। छाती पर बाँधा जा सकता है। मोटरसाइकिल के हैंडल पर लगाया जा सकता है। कार की बाहरी सतह पर लगाया जा सकता है। सर्फबोर्ड पर लगाया जा सकता है। सेल्फी स्टिक पर लगाया जा सकता है। पानी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए GoPro की ताकत केवल ‘एक छोटा कैमरा’ होना नहीं है। उसका पूरा तंत्र कैमरे को ऐसी जगह पहुँचाता है जहाँ सामान्य कैमरा पहुँच ही नहीं सकता।

पानी में यह कैसे चलता है?

एक्शन कैमरा श्रेणी में पानी से सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। पुराने समय में GoPro को पानी में ले जाने के लिए अलग पारदर्शी कवर काफी सामान्य था। बाद की पीढ़ियों में कैमरे स्वयं भी निर्धारित गहराई तक जलरोधक बने। प्रतिद्वंद्वी कंपनियाँ भी अब इसी दिशा में बहुत आगे जा चुकी हैं। उदाहरण के लिए DJI का Osmo Action 5 Pro बिना अतिरिक्त कवर के 20 मीटर तक और विशेष कवर के साथ 60 मीटर तक पानी के भीतर इस्तेमाल के लिए प्रमाणित है।

इससे एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट होती है कि GoPro अब अकेला नहीं है। DJI, Insta360 और अन्य कंपनियों ने एक्शन कैमरा बाजार को काफी प्रतिस्पर्धी बना दिया है। फिर भी ‘GoPro’सनाम कई लोगों के लिए एक्शन कैमरा का लगभग सामान्य नाम बन गया, जैसे कई उत्पाद श्रेणियों में किसी शुरुआती सफल ब्रांड का नाम पूरे उत्पाद के लिए इस्तेमाल होने लगता है।

फोन से आखिर यह बेहतर कहाँ है?

ये जानना जरूरी है कि हर मामले में GoPro फोन से बेहतर नहीं है। आज का अच्छा स्मार्टफोन कम रोशनी में कई एक्शन कैमरों से बेहतर तस्वीर दे सकता है। चेहरे, पोर्ट्रेट और सामान्य यात्रा फोटोग्राफी में फोन अधिक सुविधाजनक हो सकता है। फोन पर वीडियो तुरंत एडिट और शेयर भी किया जा सकता है।

लेकिन कल्पना कीजिए कि आप राफ्टिंग कर रहे हैं। दोनों हाथ चप्पू पर हैं। पानी लगातार ऊपर आ रहा है। ऐसी स्थिति में फोन लगभग बेकार है, जबकि हेलमेट पर लगा एक्शन कैमरा पूरे अनुभव को रिकॉर्ड कर रहा होगा। इसी प्रकार मोटरसाइकिल पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलते समय फोन पकड़ना खतरनाक है। GoPro को बाइक या हेलमेट पर स्थायी रूप से लगाया जा सकता है। यानी फोन बेहतर जेब का कैमरा है। एक्शन कैमरा बेहतर शरीर या मशीन के साथ चलने वाला कैमरा है।

बड़ा DSLR या मिररलेस कैमरा इससे बेहतर नहीं होता?

तस्वीर की शुद्ध गुणवत्ता में बड़ा कैमरा अक्सर बेहतर होगा। उसका सेंसर बड़ा, लेंस बेहतर और कम रोशनी की क्षमता अधिक हो सकती है। लेकिन एक्शन कैमरा उस मुकाबले में उतरता ही नहीं है। अगर कोई व्यक्ति पहाड़ की चोटी पर खड़ा होकर सुंदर सूर्यास्त का चित्र लेना चाहता है तो मिररलेस कैमरा बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर वही व्यक्ति पहाड़ से माउंटेन बाइक पर नीचे उतरते हुए अपना अनुभव रिकॉर्ड करना चाहता है तो एक्शन कैमरा उपयोगी है। इसलिए सवाल ‘कौन-सा कैमरा बेहतर है?’ नहीं, बल्कि ‘किस काम के लिए?’ होना चाहिए।

GoPro की वीडियो इतनी ‘एक्शन वाली’ क्यों दिखाई देती है?

इसमें केवल गतिविधि कारण नहीं है। कैमरे की दृश्य शैली भी योगदान देती है। बहुत चौड़ा लेंस पास की वस्तु को बड़ा और दूर की वस्तु को अपेक्षाकृत छोटा दिखाता है। परिणामस्वरूप गति अधिक तेज महसूस होती है। यदि मोटरसाइकिल का कैमरा जमीन के पास लगाया जाए तो सड़क बहुत तेजी से पीछे भागती दिखाई देती है। वही गति दूर से शूट करने पर उतनी नाटकीय नहीं लगेगी। इसलिए GoPro की प्रसिद्ध “एडवेंचर लुक” में कैमरे की स्थिति, चौड़ा लेंस और स्थिरीकरण तीनों योगदान करते हैं।

क्या GoPro सिर्फ खिलाड़ियों के लिए है?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस कैमरे की शुरुआती पहचान चरम खेलों से बनी थी, लेकिन उपयोग का दायरा बहुत बड़ा हो गया है। मोटरसाइकिल चलाने वाले इसे हेलमेट कैमरे की तरह इस्तेमाल करते हैं। साइकिल चालक अपनी यात्रा रिकॉर्ड करते हैं। स्कूबा गोताखोर और तैराक पानी के भीतर वीडियो बनाते हैं। पर्वतारोही और ट्रेकर इसे शरीर पर लगाते हैं। स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग, सर्फिंग और पैराग्लाइडिंग में इसका बहुत इस्तेमाल होता है। यात्रा करने वाले लोग भी इसे खरीदते हैं क्योंकि बड़ा कैमरा साथ रखने की तुलना में छोटा एक्शन कैमरा सुविधाजनक है।

वीडियो निर्माता इसे दूसरे कैमरे के रूप में बहुत इस्तेमाल करते हैं। मुख्य कैमरा सामने से व्यक्ति को रिकॉर्ड कर रहा हो और GoPro कार के अंदर, डैशबोर्ड पर या किसी विचित्र कोण से वीडियो ले रहा हो। फिल्म और टेलीविजन निर्माण में भी एक्शन कैमरे उन स्थानों पर लगाए जाते हैं जहाँ बड़े कैमरे लगाना मुश्किल या जोखिमपूर्ण हो।

GoPro ने स्वयं अपने कैमरों के उपयोग को स्काईडाइविंग से लेकर पेशेवर फिल्म निर्माण तक व्यापक रूप में प्रस्तुत किया है। कंपनी 2024 तक 50 मिलियन से अधिक डिजिटल GoPro कैमरे बेच चुकी थी।

पत्रकारिता में इसका उपयोग कहाँ होता है?

पत्रकारों और डाक्यूमेंट्री निर्माताओं के लिए भी यह काफी उपयोगी हो सकता है। किसी प्रदर्शन, बाढ़, आपदा क्षेत्र या कठिन यात्रा में पत्रकार मुख्य कैमरे के साथ एक छोटा एक्शन कैमरा शरीर पर लगा सकता है। इससे हाथ खाली रहते हैं और लगातार एक अतिरिक्त दृष्टिकोण रिकॉर्ड होता रहता है।

युद्ध और संघर्ष क्षेत्रों में भी छोटे मजबूत कैमरों का इस्तेमाल किया जाता रहा है, हालांकि वहाँ सुरक्षा और रिकॉर्डिंग से जुड़े अलग गंभीर विचार होते हैं। कई वाहन चालकों के लिए एक्शन कैमरा दुर्घटना का प्रमाण रिकॉर्ड करने वाला उपकरण भी बन जाता है, हालांकि नियमित डैशकैम और एक्शन कैमरा तकनीकी रूप से अलग उत्पाद हैं।

व्लॉगर इसे क्यों खरीदते हैं?

व्लॉगर के लिए सबसे बड़ा फायदा छोटा आकार और चौड़ा फ्रेम है। कैमरा हाथ की दूरी पर रखने के बावजूद चेहरा और काफी पृष्ठभूमि दोनों आ जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति घूमते हुए बात कर रहा है तो स्थिरीकरण वीडियो को देखने योग्य बनाए रखता है। लेकिन पारंपरिक व्लॉगिंग में फोन या बड़े सेंसर वाले कॉम्पैक्ट कैमरे कई बार बेहतर हो सकते हैं, विशेष रूप से रात में। इसलिए हर व्लॉगर को GoPro की जरूरत नहीं है। गोप्रो तब अधिक उपयोगी है जब व्लॉग में गतिविधि महत्वपूर्ण हो, बाइक, ट्रेकिंग, नदी, कार, समुद्र, खेल या कोई सक्रिय यात्रा।

इसे किसे नहीं खरीदना चाहिए?

अगर आपकी फोटोग्राफी मुख्यतः परिवार, बच्चों, भोजन, सामान्य यात्रा और रात की तस्वीरों तक सीमित है, तो संभव है कि अच्छे स्मार्टफोन से आपको ज्यादा लाभ मिले। अगर आप मुख्यतः पोर्ट्रेट या सिनेमाई वीडियो बनाते हैं, जिसमें धुंधली पृष्ठभूमि और लेंस बदलने की जरूरत होती है, तो मिररलेस कैमरा बेहतर विकल्प है। अगर कैमरा कभी पानी में नहीं जाएगा, शरीर पर नहीं लगेगा और आपके वीडियो में तेज गतिविधि नहीं होगी, तो एक्शन कैमरे की सबसे बड़ी क्षमताओं का इस्तेमाल ही नहीं होगा। इसलिए केवल इसलिए GoPro खरीदना कि ‘यह अच्छा कैमरा है’, पर्याप्त कारण नहीं है। GoPro तब सार्थक है जब आपका कैमरा आपके साथ किसी गतिविधि में भाग लेने वाला हो।

इसकी कमियाँ क्या हैं?

एक्शन कैमरा बहुत छोटा है, इसलिए सेंसर भी सामान्यतः बड़े कैमरों से छोटा होता है। इसका असर विशेष रूप से कम रोशनी में पड़ सकता है। बहुत अंधेरे में वीडियो में शोर बढ़ सकता है और स्थिरीकरण भी कठिन हो जाता है क्योंकि कैमरे को तेज शटर और पर्याप्त रोशनी के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। दूसरी समस्या बैटरी है। छोटा शरीर, उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो, लगातार इलेक्ट्रॉनिक स्थिरीकरण और स्क्रीन – ये सब बैटरी पर दबाव डालते हैं। लंबी रिकॉर्डिंग में गर्मी भी चुनौती हो सकती है, खासकर अधिक रिजॉल्यूशन और फ्रेम दर पर। चौड़ा लेंस भी हर स्थिति में अच्छा नहीं है। व्यक्ति का चेहरा बहुत करीब से शूट किया जाए तो किनारों पर आकृति थोड़ी विकृत दिखाई दे सकती है। और एक्शन कैमरा में बड़ा ऑप्टिकल ज़ूम सामान्यतः नहीं मिलता।

GoPro इतना महँगा क्यों रहा?

इसके पीछे केवल ब्रांड नहीं है। छोटे साइज़ में मजबूत कवर, हाई रिजॉल्यूशन वीडियो, तेज प्रोसेसर, इलेक्ट्रॉनिक स्थिरीकरण, वाटर प्रूफ डिजाइन, कई माइक्रोफोन, स्क्रीन, वायरलेस संपर्क और लगातार सॉफ्टवेयर प्रप्रोसेसिंग समेटना तकनीकी रूप से जटिल है। इसके ऊपर GoPro का बड़ा माउंट और सहायक उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र भी है। लेकिन अब प्रतियोगिता इतनी बढ़ चुकी है कि GoPro की कीमत और तकनीकी बढ़त को प्रत्येक पीढ़ी में DJI और Insta360 जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले देखना पड़ता है।

यानी आज ‘सबसे अच्छा एक्शन कैमरा = अपने-आप GoPro’ कहना सही नहीं है।

आज GoPro कहाँ खड़ा है?

यहाँ एक रोचक बदलाव आया है। GoPro अब केवल पारंपरिक HERO शैली के एक्शन कैमरों तक सीमित रहने की कोशिश नहीं कर रहा। मई 2026 में कंपनी ने नई MISSION 1 श्रृंखला बाजार में उतारी, जिसमें 8K और 4K Open Gate वीडियो पर केंद्रित छोटे मजबूत कैमरे तथा उनके लिए अलग माउंट और सहायक उपकरण का पूरा तंत्र शामिल है। इससे पता चलता है कि GoPro स्वयं भी एक्शन कैमरे की पारंपरिक सीमा को आगे बढ़ाकर छोटे “सिनेमाई” कैमरे की दिशा में जाना चाहता है। दूसरी ओर DJI के Osmo Action और Insta360 की विभिन्न कैमरा श्रेणियाँ इस बाजार को लगातार बदल रही हैं। इसलिए GoPro की वर्तमान विशिष्टता केवल हार्डवेयर नहीं, उसकी लगभग दो दशक पुरानी एक्शन वीडियो संस्कृति और विशाल माउंटिंग पारिस्थितिकी भी है।

क्या 360-डिग्री कैमरा और एक्शन कैमरा एक ही चीज हैं?

नहीं, लेकिन दोनों करीब आ रहे हैं। पारंपरिक GoPro एक दिशा में बहुत चौड़ा वीडियो रिकॉर्ड करता है। 360 कैमरा दो या अधिक लेंसों से अपने चारों ओर लगभग पूरा दृश्य रिकॉर्ड कर सकता है। इसका बड़ा फायदा यह है कि शूटिंग के बाद तय किया जा सकता है कि कैमरा किस तरफ देख रहा था। मसलन मोटरसाइकिल पर 360 कैमरा लगा है। यात्रा के बाद आप उसी रिकॉर्डिंग से आगे की सड़क, पीछे आती कार या स्वयं चालक, तीनों के अलग वीडियो निकाल सकते हैं। GoPro ने MAX जैसे 360 कैमरे भी बनाए हैं और कंपनी को 2025 में अपनी 360 तकनीक के लिए Emmy सम्मान मिला था।

GoPro की सबसे बड़ी खोज क्या थी?

इसकी सबसे बड़ी खोज शायद कैमरा नहीं बल्कि दृष्टिकोण थी।इसने वीडियो बनाने वाले को दृश्य के बाहर खड़ा दर्शक रहने के बजाय दृश्य के भीतर ला दिया। पुरानी स्कीइंग वीडियो में कैमरा पहाड़ के नीचे खड़ा होता था और खिलाड़ी दूर से आता दिखाई देता था। GoPro ने कैमरा खिलाड़ी के हेलमेट पर लगा दिया। अब दर्शक खिलाड़ी की आँखों से ढलान देख रहा था।

पुरानी सर्फिंग फिल्म समुद्र किनारे से बनती थी। GoPro सर्फबोर्ड पर चला गया।कार रेस में कैमरा दर्शक दीर्घा से शूट करता था। एक्शन कैमरा कार के बोनट, बम्पर या चालक के हेलमेट पर पहुँच गया।यही कारण है कि इसका प्रभाव केवल कैमरा उद्योग पर नहीं, दर्शक की दृश्य भाषा पर भी पड़ा।

आज सोशल मीडिया पर हमें हेलमेट से, बाइक से, शरीर से या किसी मशीन से जुड़े जिन दृष्टिकोणों की आदत हो चुकी है, उन्हें लोकप्रिय बनाने में GoPro का बहुत बड़ा योगदान रहा।इसलिए एक्शन कैमरे को सबसे सरल भाषा में कहें तो यह “ऐसा कैमरा है जिसे आप पकड़ते कम हैं, अपने साथ बाँधते ज्यादा हैं।”

और GoPro की खासियत यह रही कि उसने इस विचार को बहुत जल्दी समझा - छोटा कैमरा, अत्यंत चौड़ा दृश्य, मजबूत शरीर, पानी और झटकों से सुरक्षा, शक्तिशाली स्थिरीकरण और दर्जनों माउंट। इसीलिए इसे मुख्यतः वे लोग खरीदते हैं जिनके लिए कैमरा सिर्फ सामने रखकर रिकॉर्ड करने की वस्तु नहीं बल्कि उनकी गतिविधि का हिस्सा है - मोटरसाइकिल चालक, साइकिल चालक, पर्वतारोही, यात्री, गोताखोर, खिलाड़ी, व्लॉगर, फिल्म निर्माता और ऐसे लोग जो दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि उन्होंने कोई दृश्य बाहर से कैसा देखा नहीं, बल्कि उसके भीतर रहते हुए कैसा अनुभव किया।

Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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