Barrier Free Toll System: देश में पहली बार शुरू हुआ बैरियर-फ्री टोल सिस्टम, जानिए कैसे करेगा काम

Barrier Free Toll System India 2026: हरियाणा में देश के पहले बैरियर-फ्री टोल सिस्टम का ट्रायल शुरू हो गया है, जिससे वाहन बिना रुके टोल पॉइंट पार कर सकेंगे।

Jyotsana Singh
Published on: 23 Jun 2026 6:45 PM IST
Haryana Starts Indias First Barrier-Free Toll System MLFF Toll System in India Explained
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Barrier Free Toll System India 2026

Barrier Free Toll System India 2026: हाईवे पर सफर करते वक्त बार-बार टोल प्लाजा पर रुककर अपनी बारी आने का इंतजार करना बड़ा ही बोझिल साबित होता है, लेकिन अब बड़ी राहत की खबर आई है। अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़े रहने और बैरियर खुलने का इंतजार करने की जरूरत खत्म होने वाली है। हरियाणा में देश के पहले बैरियर-फ्री टोल सिस्टम का ट्रायल शुरू हो गया है, जिसमें वाहन बिना रुके टोल पॉइंट पार कर सकेंगे और टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में देशभर के टोल प्लाजा की तस्वीर बदल सकती है।

आने वाले समय में बदल सकती है हाईवे यात्रा की तस्वीर

भारत तेजी से स्मार्ट और डिजिटल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में FASTag ने टोल भुगतान को आसान बनाया है और अब बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। हरियाणा में चल रहा यह ट्रायल अगर सफल साबित होता है तो भविष्य में देशभर के टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यात्रियों को तेज, सुगम और बिना बाधा वाला सफर का अनुभव मिलेगा वहीं सरकार को अधिक कुशल और आधुनिक टोल संग्रह व्यवस्था का लाभ हासिल होगा । ऐसे में यह तकनीक भारतीय हाईवे नेटवर्क के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

टोल प्लाजा पर रुकने का झंझट होगा खत्म

अब तक देश में टोल वसूली के लिए FASTag सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इससे नकद भुगतान की जरूरत काफी हद तक खत्म हुई है, लेकिन वाहनों को फिर भी टोल प्लाजा पर धीमा होना या कुछ सेकंड के लिए रुकना पड़ता है। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टोल प्लाजा पर लंबी कतारें लग जाती हैं। नई बैरियर-फ्री तकनीक इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने का दावा कर रही है। इसमें किसी बैरियर की जरूरत नहीं होगी और वाहन सामान्य गति से टोल पॉइंट पार कर सकेंगे।

क्या है MLFF तकनीक, जिससे बदलेगा टोल वसूली का तरीका?

इस नई व्यवस्था को मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम कहा जाता है। यह दुनिया के कई विकसित देशों में पहले से इस्तेमाल हो रही तकनीक है। इसके तहत सड़क पर लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर गुजरने वाले वाहनों की पहचान करते हैं।

जैसे ही कोई वाहन टोल क्षेत्र से गुजरता है, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे उसकी नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं। साथ ही RFID तकनीक वाहन के FASTag को स्कैन कर लेती है। इसके बाद सिस्टम वाहन की जानकारी मिलान करके टोल शुल्क स्वतः काट देता है। पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाती है और ड्राइवर को किसी तरह की कार्रवाई नहीं करनी पड़ती।

हरियाणा में क्यों शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस तकनीक का परीक्षण हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि भारतीय सड़क परिस्थितियों और ट्रैफिक के बीच यह तकनीक कितनी प्रभावी साबित होती है। यदि ट्रायल सफल रहता है तो आने वाले समय में देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इसे लागू किया जा सकता है। इससे टोल प्लाजा की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

समय और ईंधन दोनों की होगी बचत

टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम की वजह से हर दिन लाखों लीटर ईंधन की खपत होती है। वाहन रुकते हैं, फिर दोबारा गति पकड़ते हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की अतिरिक्त खपत होती है। बैरियर-फ्री सिस्टम में वाहन बिना रुके आगे बढ़ेंगे, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और ईंधन की खपत भी कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता

टोल वसूली के दौरान कई बार तकनीकी गड़बड़ी, नकद भुगतान या अन्य कारणों से विवाद की स्थिति बन जाती है। पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था होने से इन समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है। सभी लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में दर्ज होंगे, जिससे टोल संग्रह की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक बन सकेगी। साथ ही प्रशासन को भी ट्रैफिक और वाहन आवागमन का बेहतर डेटा मिलेगा।

वाहन मालिकों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?

नई व्यवस्था का लाभ लेने के लिए वाहन मालिकों को कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FASTag सक्रिय होना चाहिए और उसमें पर्याप्त बैलेंस मौजूद होना चाहिए।

इसके अलावा वाहन की नंबर प्लेट साफ, स्पष्ट और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। कैमरे नंबर प्लेट के आधार पर ही वाहन की पहचान करेंगे। यदि नंबर प्लेट पढ़ने में समस्या आती है या FASTag निष्क्रिय मिलता है तो वाहन मालिक पर अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना लगाया जा सकता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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