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Bit और Byte में क्या फर्क है? 100 Mbps की डाउनलोड स्पीड 12.5 MB/s क्यों?
Bit और Byte में क्या फर्क है? 100 Mbps इंटरनेट पर डाउनलोड स्पीड 100 MB/s क्यों नहीं होती? जानिए 1 Byte में 8 Bit का हिसाब और असली इंटरनेट स्पीड कैसे समझें।
Bit and Byte Difference Explained: आपने 100 एमबीपीएस का इंटरनेट कनेक्शन लिया। स्पीड टेस्ट किया तो नतीजा भी करीब 100 एमबीपीएस आया। खुश होकर 1 जीबी की बड़ी फाइल डाउनलोड करने बैठे, पर फोन या कंप्यूटर पर स्पीड सिर्फ 10-12 एमबी प्रति सेकंड दिखी। पहला शक यही होता है कि कंपनी पैसे 100 के ले रही है और दे सिर्फ 12 रही है।
ज़्यादातर मामलों में कंपनी कोई गड़बड़ी नहीं कर रही होती। असली चक्कर दो छोटे अक्षरों का है: छोटा b और बड़ा B।
छोटा b = बिट (bit)
बड़ा B = बाइट (byte)
1 बाइट = 8 बिट
इंटरनेट कंपनियां नेटवर्क की स्पीड आम तौर पर एमबीपीएस (Mbps, यानी मेगाबिट प्रति सेकंड) में बताती हैं। वहीं आपका ब्राउज़र या डाउनलोड ऐप फाइल की स्पीड अक्सर एमबी/एस (MB/s, यानी मेगाबाइट प्रति सेकंड) में दिखाता है। इसलिए 100 को 8 से भाग दें तो ज़्यादा से ज़्यादा करीब 12.5 एमबी/एस निकलता है। यही छोटा-सा फर्क इंटरनेट स्पीड का सबसे आम भ्रम पैदा करता है।
पहले बिट को समझिए
कंप्यूटर की दुनिया दो ही हालतों पर टिकी है: 0 और 1। इनमें से हर एक को बिट कहते हैं। यह शब्द "बाइनरी डिजिट" (binary digit) का छोटा रूप है।
एक बिट में सिर्फ दो संभावनाएं होती हैं। दो बिट से चार मेल बनते हैं, तीन से आठ, और आठ बिट मिलकर 256 अलग-अलग मेल बना सकते हैं। इसीलिए बिट को डिजिटल जानकारी की सबसे छोटी इकाई माना जाता है।
नेटवर्क पर डेटा भेजने की रफ्तार बतानी हो, तो यह गिना जाता है कि एक सेकंड में कितने बिट इधर से उधर पहुंचे। इसी से एमबीपीएस जैसी इकाई बनी: मेगाबिट प्रति सेकंड।
फिर बाइट क्या है?
आज के कंप्यूटरों में 8 बिट मिलकर 1 बाइट बनाते हैं। यह एक रिश्ता याद रख लें तो स्पीड का लगभग सारा भ्रम खत्म हो जाता है: 8 बिट = 1 बाइट।
इसलिए अगर कोई नेटवर्क एक सेकंड में 80 मेगाबिट भेज रहा है, तो वह मोटे तौर पर 10 मेगाबाइट के बराबर है। फाइलों का साइज़ आम तौर पर बाइट वाली इकाइयों में दिखता है: केबी (KB), एमबी, जीबी, टीबी (TB)। जैसे फोटो 5 एमबी की, फिल्म 2 जीबी की और एसएसडी (SSD) 1 टीबी का। पर नेटवर्क की स्पीड बिट वाली इकाइयों में बताई जाती है: केबीपीएस (Kbps), एमबीपीएस, जीबीपीएस (Gbps)। यहीं दोनों दुनियाएं टकरा जाती हैं।
सबसे ज़रूरी फर्क: छोटा b और बड़ा B
एमबीपीएस (Mbps) = मेगाबिट प्रति सेकंड
एमबी/एस (MB/s) = मेगाबाइट प्रति सेकंड
दोनों देखने में लगभग एक जैसे हैं, पर इनके बीच आठ गुना का फर्क है। इसलिए विज्ञापन में "100 एमबीपीएस" लिखा हो तो उसे 100 एमबी/एस समझना सबसे बड़ी गलती है।
100 एमबीपीएस की असली डाउनलोड स्पीड कितनी होगी?
हिसाब सीधा है: 100 ÷ 8 = 12.5 एमबी/एस। यानी सबसे अच्छी हालत में 100 एमबीपीएस की लाइन से करीब 12.5 एमबी प्रति सेकंड डाउनलोड हो सकता है। इसी तरह:
50 एमबीपीएस → करीब 6.25 एमबी/एस
200 एमबीपीएस → करीब 25 एमबी/एस
500 एमबीपीएस → करीब 62.5 एमबी/एस
1 जीबीपीएस → करीब 125 एमबी/एस
ध्यान रहे, ये आंकड़े गणित के हिसाब से अधिकतम हैं। असली डाउनलोड इनसे थोड़ा कम हो सकता है।
तो 100 एमबीपीएस पर 10-11 एमबी/एस मिलना सामान्य है?
बिल्कुल। 12.5 एमबी/एस गणित का अधिकतम है। असली इंटरनेट में सिर्फ आपकी फाइल के बिट नहीं चलते। डेटा छोटे-छोटे पैकेटों में भेजा जाता है और हर पैकेट के साथ नेटवर्क चलाने के लिए ज़रूरी अतिरिक्त जानकारी भी जाती है। इसे प्रोटोकॉल ओवरहेड कहते हैं।
इसके अलावा ये चीज़ें भी असर डालती हैं: वाई-फाई की क्वालिटी, राउटर, सर्वर की अपनी स्पीड, घर के बाकी डिवाइसों का इस्तेमाल, दूरी, रेडियो में रुकावट, नेटवर्क की भीड़ और आपके डिवाइस की क्षमता।
इसलिए 100 एमबीपीएस की लाइन पर 10-12 एमबी/एस आ रहा हो, तो यह कहना गलत होगा कि कंपनी सिर्फ दस प्रतिशत स्पीड दे रही है।
1 जीबी की फिल्म 100 एमबीपीएस पर कितनी देर में उतरनी चाहिए?
सुविधा के लिए 1 जीबी को 1,000 एमबी मान लें।
1,000 एमबी × 8 = 8,000 मेगाबिट
8,000 ÷ 100 = 80 सेकंड
यानी सबसे अच्छी हालत में करीब 1 मिनट 20 सेकंड। असल में थोड़ा ज़्यादा लग सकता है। अब जिसने गलती से 100 एमबीपीएस को 100 एमबी/एस समझ लिया, वह सोचेगा कि फाइल 10 सेकंड में आ जानी चाहिए। जब 80-100 सेकंड लगते हैं, तो उसे लगता है कि कंपनी ठग रही है। असल में उसने बिट को बाइट समझ लिया था।
कंपनियां स्पीड एमबीपीएस में ही क्यों बताती हैं?
सिर्फ यह कहना अधूरा है कि वे आंकड़ा बड़ा दिखाना चाहती हैं। दूरसंचार और डेटा संचार में डेटा भेजने की रफ्तार को शुरू से बिट प्रति सेकंड में नापने की परंपरा है। नेटवर्क सचमुच बिटों की धारा के रूप में ही जानकारी भेजता है, इसलिए बीपीएस (bps), केबीपीएस, एमबीपीएस और जीबीपीएस वहां की स्वाभाविक इकाइयां बन गईं।
हां, ग्राहक पर इसका मनोवैज्ञानिक असर ज़रूर पड़ता है। "100 एमबीपीएस" सुनने में "12.5 एमबी/एस" से कहीं बड़ा लगता है। इसलिए विज्ञापन देखते समय यह ज़रूर देखें कि बड़ा आंकड़ा किस इकाई में दिया गया है।
1 जीबीपीएस फाइबर का मतलब 1 जीबी प्रति सेकंड नहीं है
गीगाबिट इंटरनेट के साथ यह गलती अब बहुत होती है। मान लीजिए आपके घर में 1 जीबीपीएस का फाइबर कनेक्शन है।
1 जीबीपीएस = 1,000 एमबीपीएस
1,000 ÷ 8 = 125 एमबी/एस
यानी इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 125 मेगाबाइट प्रति सेकंड है, 1 गीगाबाइट नहीं। असली डाउनलोड इससे भी कम हो सकता है। सचमुच 1 जीबी प्रति सेकंड चाहिए तो मोटे तौर पर 8 जीबीपीएस की रफ्तार चाहिए होगी, और वह भी बाकी व्यावहारिक सीमाओं को छोड़कर।
एमबी और एमआईबी (MiB) भी अलग हो सकते हैं
यहां पुराना हिसाब एक और उलझन पैदा करता है। दशमलव प्रणाली में:
1 केबी = 1,000 बाइट
1 एमबी = 10,00,000 बाइट
1 जीबी = 100 करोड़ बाइट
पर कंप्यूटर की मेमोरी में लंबे समय तक 1,024 के गुणकों का इस्तेमाल होता रहा। इन्हें साफ अलग दिखाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों में अलग नाम हैं:
1 किबीबी (KiB) = 1,024 बाइट
1 एमआईबी (MiB) = 1,024 केआईबी
1 जीआईबी (GiB) = 1,024 एमआईबी
मगर कई ऑपरेटिंग सिस्टम (operating system) और ऐप 1,024 वाला हिसाब करके भी स्क्रीन पर केबी, एमबी या जीबी ही लिख देते हैं। इसीलिए स्टोरेज और डाउनलोड के आंकड़ों में थोड़ा अतिरिक्त फर्क दिखता है। खरीदी हुई 1 टीबी की ड्राइव कंप्यूटर में करीब 931 "जीबी" की दिखती है। ड्राइव का कोई हिस्सा गायब नहीं हुआ, बस गिनने का तरीका बदल गया।
स्पीड टेस्ट एमबीपीएस में और डाउनलोड एमबी/एस में क्यों?
मान लीजिए स्पीड टेस्ट में नतीजा आया 300 एमबीपीएस। उसी वक्त आपने बड़ी फाइल डाउनलोड की और ब्राउज़र ने दिखाया 35 एमबी/एस। पहली नज़र में 300 और 35 का फर्क बहुत बड़ा लगता है। लेकिन 300 ÷ 8 = 37.5 एमबी/एस। यानी 35 एमबी/एस बिल्कुल सही दिशा में है और 37.5 के काफी करीब है।
इसलिए इंटरनेट स्पीड की शिकायत करने से पहले दोनों आंकड़ों की इकाई ज़रूर देखिए।
पर 300 एमबीपीएस के टेस्ट के बाद डाउनलोड सिर्फ 5 एमबी/एस आए तो?
तब सिर्फ बिट-बाइट का मामला नहीं है। 300 एमबीपीएस की लाइन की अधिकतम रफ्तार करीब 37.5 एमबी/एस है। अगर तेज़ सर्वर से भी फाइल लगातार 5 एमबी/एस पर ही आ रही है, तो कोई और रुकावट है।
सबसे अहम बात यह है कि आपकी लाइन जितनी तेज़ है, हर वेबसाइट उतनी तेज़ नहीं होती। मान लीजिए आपकी सड़क छह लेन की है, पर आगे टोल प्लाजा पर सिर्फ एक लेन खुली है। सड़क कितनी भी चौड़ी हो, गाड़ियां उतनी ही तेज़ निकलेंगी जितनी वह एक लेन निकलने दे। इसी तरह अगर डाउनलोड सर्वर आपको सिर्फ 40 एमबीपीएस दे रहा है, तो 1 जीबीपीएस की लाइन भी उस फाइल को 1 जीबीपीएस पर नहीं खींच सकती।
बाकी वजहें ये हो सकती हैं: वाई-फाई कमज़ोर हो, 2.4 गीगाहर्ट्ज़ (GHz) बैंड पर भीड़ हो, राउटर पुराना हो, वीपीएन (VPN) स्पीड घटा रहा हो, घर के दूसरे डिवाइस इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हों या कंप्यूटर का नेटवर्क पोर्ट ही सीमा बन रहा हो
राउटर पर 1200 एमबीपीएस लिखा हो, तो भी इंटरनेट उतना नहीं चलता
राउटर कंपनियों के आंकड़े भी भ्रम पैदा करते हैं। डिब्बे पर AX1800 या 3000 एमबीपीएस जैसी बड़ी संख्या लिखी हो सकती है। ज़रूरी नहीं कि एक डिवाइस को असली डाउनलोड में उतनी रफ्तार मिले। राउटर की बताई वायरलेस क्षमता में अलग-अलग फ्रीक्वेंसी बैंड की अधिकतम रफ्तारें जोड़ दी जाती हैं। असली रफ्तार दूरी, दीवारों, चैनल की चौड़ाई, डिवाइस के वाई-फाई चिप, रुकावट और एक साथ जुड़े डिवाइसों पर निर्भर करती है।
इसलिए तीन अलग चीज़ों को कभी एक न समझें:आपके इंटरनेट प्लान की स्पीड, आपके राउटर की वाई-फाई क्षमता, किसी एक फाइल की असली डाउनलोड स्पीड।
मोबाइल नेटवर्क में भी यही नियम है
अगर 5जी फोन पर स्पीड टेस्ट 800 एमबीपीएस दिखाए, तो इसका मतलब 800 एमबी/एस नहीं है। 800 ÷ 8 = 100 एमबी/एस अधिकतम। असली डाउनलोड फिर सर्वर, नेटवर्क, सिग्नल की हालत और दूसरी चीज़ों पर निर्भर करेगा। उलटी तरफ से देखें तो अगर कोई ऐप 20 एमबी/एस डाउनलोड दिखा रहा है, तो नेटवर्क की रफ्तार करीब 160 एमबीपीएस के बराबर है।
याद रखने का आसान सूत्र: एमबी/एस दिख रहा हो तो 8 से गुणा करके एमबीपीएस समझिए। एमबीपीएस दिया हो तो 8 से भाग देकर एमबी/एस समझिए।
अपलोड में भी यही नियम लागू होता है
मान लीजिए प्लान में लिखा है: 300 एमबीपीएस डाउनलोड और 100 एमबीपीएस अपलोड। तो अधिकतम फाइल रफ्तार करीब ये होगी: डाउनलोड: 37.5 एमबी/एस। अपलोड: 12.5 एमबी/एस
यानी 1 जीबी का वीडियो क्लाउड पर चढ़ाने में 100 एमबीपीएस की अपलोड लाइन को सबसे अच्छी हालत में भी करीब 80 सेकंड लगेंगे, और असल में कुछ ज़्यादा। वीडियो पत्रकारिता, क्लाउड बैकअप या बड़ी फाइलें भेजने वालों के लिए अपलोड स्पीड उतनी ही अहम हो सकती है जितनी डाउनलोड स्पीड।
वीडियो में एमबीपीएस का तीसरा मतलब
कैमरे और वीडियो फाइलों में आपने शायद "बिटरेट (bitrate) 50 एमबीपीएस" या "100 एमबीपीएस" लिखा देखा होगा। यहां भी एमबीपीएस का मतलब मेगाबिट प्रति सेकंड ही है, पर यह इंटरनेट की स्पीड नहीं है। यह बताता है कि वीडियो के हर सेकंड में कितना डेटा लगता है।
मान लीजिए कैमरा 100 एमबीपीएस बिटरेट पर रिकॉर्ड कर रहा है:
100 ÷ 8 = 12.5 एमबी प्रति सेकंड
12.5 × 60 = करीब 750 एमबी प्रति मिनट
यानी इस वीडियो का एक मिनट करीब 750 एमबी जगह लेगा (ऑडियो वगैरह की बारीकियां छोड़कर)। इसी से अंदाज़ा लगता है कि मेमोरी कार्ड कितनी जल्दी भरेगा और इसे बिना अटके ऑनलाइन भेजने के लिए कितनी अपलोड स्पीड चाहिए।
लाइव वीडियो के लिए यह हिसाब और काम का है
मान लीजिए किसी लाइव प्रसारण का बिटरेट 8 एमबीपीएस है। तकनीकी तौर पर कम से कम 8 एमबीपीएस अपलोड चाहिए, पर बिल्कुल सीमा पर चलना ठीक नहीं। नेटवर्क में उतार-चढ़ाव होता रहता है, इसलिए कुछ अतिरिक्त गुंजाइश रखनी पड़ती है। यानी स्पीड टेस्ट में 10 एमबीपीएस अपलोड दिखे और आप 8 एमबीपीएस पर लाइव जाएं, तो कागज़ पर ठीक लगता है, पर असल में प्रसारण अटक सकता है। यहां बिट और बाइट का फर्क सीधे काम आता है।
याद रखने का आसान नियम
फाइल कितनी तेज़ उतरेगी, इसका अंदाज़ा लगाने के लिए एमबीपीएस को 8 से भाग दें:
100 एमबीपीएस → करीब 12.5 एमबी/एस
200 एमबीपीएस → करीब 25 एमबी/एस
500 एमबीपीएस → करीब 62.5 एमबी/एस
1 जीबीपीएस → करीब 125 एमबी/एस
और अगर डाउनलोड ऐप एमबी/एस दिखा रहा है और आपको जानना है कि यह कितने एमबीपीएस के बराबर है, तो 8 से गुणा करें:
10 एमबी/एस → करीब 80 एमबीपीएस
25 एमबी/एस → करीब 200 एमबीपीएस
50 एमबी/एस → करीब 400 एमबीपीएस
100 एमबी/एस → करीब 800 एमबीपीएस
ये गणित के हिसाब से अधिकतम आंकड़े हैं। असली नेटवर्क में थोड़ी कमी सामान्य है।
100 एमबीपीएस लेकर 12 एमबी/एस मिलना "आठ गुना कम इंटरनेट" नहीं है
इस भ्रम की जड़ दो अलग परंपराएं हैं। नेटवर्क की रफ्तार बिट में नापी जाती है, जबकि फाइल का साइज़ और डाउनलोड ऐप की रफ्तार अक्सर बाइट में दिखती है। छोटा b और बड़ा B देखने में मामूली फर्क है, पर इनके बीच आठ गुना का हिसाब छिपा है।
इसलिए अगली बार कंपनी 100 एमबीपीएस का प्लान दे और लैपटॉप 11-12 एमबी/एस दिखाए, तो तुरंत यह न मान लें कि 88 प्रतिशत इंटरनेट गायब हो गया। पहले 12 को 8 से गुणा कीजिए: 12 एमबी/एस करीब 96 एमबीपीएस के बराबर है।
इंटरनेट की दुनिया में अक्सर स्पीड गायब नहीं होती, बस उसकी इकाई बदल जाती है। और एमबीपीएस व एमबी/एस के बीच छिपा यह "8" ही पूरे भ्रम की चाबी है।


