न SIM, न इंटरनेट... फिर भी भेज सकते हैं मैसेज, जानिए Jack Dorsey के इस ऐप की पूरी कहानी

Bitchat: Bitchat इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के बिना Bluetooth Mesh के जरिए मैसेजिंग की सुविधा देता है। भारत में इसके बढ़ते इस्तेमाल और ऐप पर कार्रवाई के बाद इसकी तकनीक चर्चा में है।

Shalni Kumari
Published on: 8 Oct 2026 2:48 PM IST
Jack Dorsey Bitchat
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 Bitchat App

Bitchat: आपके फोन में इंटरनेट नहीं है, मोबाइल नेटवर्क बंद है, कोई SIM या फोन नंबर भी नहीं चाहिए और फिर भी आप आसपास मौजूद लोगों को मैसेज भेज पा रहे हैं। पहली नजर में यह किसी साइंस-फिक्शन तकनीक जैसा लग सकता है, लेकिन Jack Dorsey का Bitchat इसी विचार पर बना है। यह ऐप सामान्य मैसेजिंग ऐप्स की तरह किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि आसपास के फोन को ही एक-दूसरे से जोड़कर मैसेज पहुंचाता है। यही खूबी इसे इंटरनेट बंद होने, नेटवर्क बाधित होने या भीड़भाड़ वाली जगहों में उपयोगी बनाती है और यही वजह है कि भारत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसके इस्तेमाल ने इसे सरकार और डिजिटल अधिकार संगठनों के बीच बहस का विषय बना दिया।

क्या है Bitchat?

Bitchat एक decentralized peer-to-peer messaging app है, जिसे Twitter के सह-संस्थापक Jack Dorsey ने बनाया। इसका शुरुआती प्रोजेक्ट जुलाई 2025 में सामने आया था। Dorsey ने बताया था कि उन्होंने इसके शुरुआती आधार पर एक वीकेंड में काम किया था। ऐप का कोड 10 जुलाई 2025 को GitHub पर प्रकाशित किया गया था। शुरुआत में इसे प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया गया था।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि सामान्य मैसेजिंग ऐप की तरह इसमें बातचीत के लिए जरूरी नहीं कि इंटरनेट, मोबाइल डेटा या कोई केंद्रीय सर्वर मौजूद हो। Bitchat Bluetooth Low Energy यानी BLE के जरिए आसपास के डिवाइसों का mesh network बनाता है। एक फोन दूसरे फोन से जुड़ता है और जरूरत पड़ने पर संदेश आसपास के दूसरे डिवाइसों के जरिए आगे पहुंच सकता है। इस तरह कई फोन मिलकर एक स्थानीय नेटवर्क तैयार कर सकते हैं।

इंटरनेट बंद हो जाए तो भी कैसे चलता है?

WhatsApp या Telegram जैसे ऐप में मैसेज भेजने के लिए इंटरनेट और केंद्रीय सर्वर की जरूरत होती है। Bitchat का Bluetooth mesh मॉडल इससे अलग है।

जब आसपास Bitchat इस्तेमाल करने वाले कई फोन मौजूद होते हैं तो डिवाइस आपस में जुड़कर संदेशों को आगे relay कर सकते हैं। मौजूदा तकनीकी दस्तावेज के अनुसार इसका Bluetooth mesh अधिकतम कई hops के जरिए संदेश आगे पहुंचा सकता है। यानी संदेश केवल सीधे पास खड़े व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बीच के डिवाइसों के जरिए आगे जा सकता है।

बाद के संस्करणों में Bitchat ने इंटरनेट उपलब्ध होने पर Nostr protocol का विकल्प भी जोड़ा है। यानी ऐप का मौजूदा architecture केवल Bluetooth तक सीमित नहीं है; यह offline mesh और internet-based decentralized communication दोनों को जोड़ता है।

भारत में कब आया और कब बढ़े यूजर्स?

Bitchat भारत में पहली बार 2025 में सामने आया, लेकिन देश में इसकी असली चर्चा 2026 में बढ़ी। जुलाई 2026 में दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और कुछ इलाकों में इंटरनेट प्रतिबंध के बीच offline communication apps पर ध्यान गया। Bitchat का नाम भी इसी दौरान सामने आया।

भारत में इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा उछाल जुलाई 2026 में दर्ज हुआ। एक आंकड़ों के मुताबिक 17 से 23 जुलाई के बीच Bitchat के वैश्विक downloads में भारत की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत थी, जबकि उससे पहले के 30 दिनों में यह करीब 1 प्रतिशत थी।

इसी अवधि में भारत में पांच दिनों के भीतर 91 हजार से ज्यादा downloads दर्ज किए गए। 19 जुलाई को एक दिन में downloads पिछले दिन के मुकाबले करीब 32 गुना बढ़ गए। भारत में Bitchat के daily active users भी 23 जुलाई को 3.30 लाख से ज्यादा पहुंच गए, जो उस समय देश में ऐप का सबसे ऊंचा स्तर था।

प्रदर्शन के दौरान Bitchat का इस्तेमाल क्यों हुआ?

Bitchat के भारत में तेजी से लोकप्रिय होने की सबसे बड़ी वजह इसकी offline communication क्षमता बनी। जुलाई 2026 में दिल्ली के Jantar Mantar इलाके में छात्रों का आंदोलन चल रहा था और मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसी दौरान रिपोर्टों में सामने आया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने Bitchat और Briar जैसे ऐप्स का इस्तेमाल आपस में संपर्क बनाए रखने के लिए किया।

यहां Bitchat का फायदा साफ समझ आता है। अगर मोबाइल डेटा बंद है तो WhatsApp, Telegram या Instagram जैसे इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म सामान्य तरीके से काम नहीं कर सकते। लेकिन अगर आसपास पर्याप्त Bitchat users हैं तो Bluetooth mesh के जरिए स्थानीय स्तर पर बातचीत जारी रखी जा सकती है।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे प्रदर्शन में कितने लोग Bitchat पर थे, इसका कोई आधिकारिक या विश्वसनीय आंकड़ा उपलब्ध है। उपलब्ध एक आंकड़े ऐप के downloads और daily active users बताते हैं, किसी खास प्रदर्शन में सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या नहीं। जुलाई के प्रदर्शन के संदर्भ में भी रिपोर्टों में इसके इस्तेमाल की बात सामने आई, लेकिन protest-specific user count सार्वजनिक नहीं किया गया है।

अक्टूबर 2026 में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी Bitchat फिर चर्चा में आया। 2 अक्टूबर को Jantar Mantar के आसपास इंटरनेट सेवाओं को कुछ घंटों के लिए निलंबित किए जाने की रिपोर्टों के बीच decentralized messaging tools को लेकर ध्यान बढ़ा।

Bitchat के क्या फायदे हैं?

1. इंटरनेट के बिना बातचीत:

Bluetooth mesh की वजह से स्थानीय स्तर पर इंटरनेट या मोबाइल डेटा के बिना संदेश भेजना संभव है।

2. फोन नंबर की जरूरत नहीं:

Bitchat में पारंपरिक account system नहीं है और फोन नंबर या ईमेल से पहचान बनाने की जरूरत नहीं होती।

3. केंद्रीय सर्वर पर निर्भरता कम:

Bluetooth mesh communication peer-to-peer है। प्रोजेक्ट के अनुसार उसका अपना कोई messaging server नहीं है।

4. Privacy पर जोर:

प्रोजेक्ट के अनुसार private messages end-to-end encrypted हैं और ऐप में advertising, analytics या tracking SDK नहीं हैं। इसका source code भी open source है।

5. आपदा और नेटवर्क बंद होने की स्थिति में उपयोग:

इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क बाधित होने पर स्थानीय communication बनाए रखना इसका महत्वपूर्ण संभावित इस्तेमाल है। आधिकारिक दस्तावेज इसे disaster और low-connectivity परिस्थितियों के लिए भी उपयोगी बताते हैं।

लेकिन Bitchat के नुकसान भी कम नहीं

इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी सबसे बड़ी सीमा भी है। Bluetooth mesh तभी ज्यादा उपयोगी है जब आसपास पर्याप्त संख्या में दूसरे Bitchat devices मौजूद हों। अकेले फोन में Bitchat होने से कोई बड़ा नेटवर्क अपने आप नहीं बन जाता।

दूसरी समस्या range की है। शुरुआती विवरणों में सामान्य Bluetooth communication की सीमा करीब 100 मीटर बताई गई थी और Dorsey ने peer-to-peer relay के जरिए इसे करीब 300 मीटर तक बढ़ाने की बात कही थी। यानी यह सामान्य cellular network का सीधा विकल्प नहीं है।

Privacy का मतलब पूरी तरह अदृश्य होना भी नहीं है। मौजूदा privacy assessment के अनुसार Bluetooth device की मौजूदगी radio range में पता चल सकती है और कुछ public mesh या geohash-based communication में metadata तथा public information दिखाई दे सकती है।

इसके अलावा security को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठे हैं। जुलाई 2025 में एक सुरक्षा समीक्षा में संभावित vulnerabilities की रिपोर्ट की गई थी और बाद में Android version के एक audit में replay attack से जुड़ी समस्या दर्ज हुई। प्रोजेक्ट की security policy के अनुसार security reports को fix करने की प्रक्रिया जारी रहती है। इसलिए Bitchat को इस्तेमाल करते समय यह मानना सही नहीं होगा कि इसमें जोखिम बिल्कुल नहीं हैं।

भारत में Bitchat पर कार्रवाई क्यों हुई?

भारत में Bitchat को लेकर सरकारी चिंता अचानक अक्टूबर में शुरू नहीं हुई। जुलाई 2026 में ही Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C की ओर से GitHub पर मौजूद Bitchat repositories को लेकर कार्रवाई की कोशिश सामने आई थी।

उस समय सरकारी नोटिस में इस बात पर चिंता जताई गई थी कि ऐप internet shutdown के दौरान भी communication की सुविधा देता है और इसकी decentralized architecture की वजह से lawful interception, attribution और traceability मुश्किल हो सकती है।

इसके बाद अक्टूबर 2026 में भारत में Bitchat को App Store और Google Play से हटा दिया गया। Apple के संबंध में सामने आई जानकारी के मुताबिक MeitY ने Information Technology Act की Section 69A के तहत takedown demand भेजी थी। Apple ने भारत में Bitchat की App Store listing हटाई और TestFlight access भी बंद किया। Google Play पर भी ऐप भारत में उपलब्ध नहीं रहा।

सरकारी सूत्रों ने इसे law-and-order concern बताया। दूसरी ओर Internet Freedom Foundation ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि Section 69A के तहत unlawful information को block करने की व्यवस्था है, किसी messenger को केवल इसलिए हटाने का सवाल उठता है क्योंकि वह internet shutdown के दौरान काम कर सकता है। संगठन ने blocking order को सार्वजनिक करने की मांग भी की।

इसलिए भारत में कार्रवाई की वजह को केवल “प्रदर्शन में इस्तेमाल” कहना पूरी तस्वीर नहीं होगी। सरकारी चिंता का एक प्रमुख हिस्सा इसकी तकनीकी क्षमता—यानी internet shutdown के बावजूद communication, decentralized architecture और interception/traceability की कठिनाई—रही है।

क्या ऐप फोन से भी खत्म हो गया?

App Store या Play Store से हटाने और किसी डिवाइस से ऐप को पूरी तरह मिटा देने में अंतर है। यदि किसी फोन में Bitchat पहले से मौजूद है तो केवल app-store listing हटने से वह अपने आप फोन से delete नहीं हो जाता। यही decentralized software के मामले में सरकारों के लिए बड़ी चुनौती है। इसके अलावा open-source code होने की वजह से copies और forks बन सकते हैं। Bitchat के GitHub repository पर भी इस बात का उल्लेख है कि takedown demands के बाद mirrors सामने आ सकते हैं।

दुनिया में कहां इस्तेमाल होता है?

Bitchat किसी एक देश तक सीमित ऐप नहीं है। इसका architecture उन जगहों के लिए खास तौर पर आकर्षक है जहां इंटरनेट कमजोर हो, नेटवर्क बंद किया गया हो या लोग centralized communication infrastructure पर निर्भर नहीं रहना चाहते।

2026 में Bitchat को ईरान, मेडागास्कर, युगांडा, नेपाल और इंडोनेशिया जैसे देशों में विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्टें सामने आईं। इन मामलों में इसकी उपयोगिता मुख्य रूप से internet restrictions या communication बाधित होने के बीच संपर्क बनाए रखने से जुड़ी रही।

हालांकि, किसी देश में इसका इस्तेमाल होना और वहां सरकार की ओर से इसे आधिकारिक रूप से “free” या unrestricted घोषित किया जाना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए दुनिया के हर देश की उपलब्धता की कोई स्थायी सूची देना मुश्किल है। App Store और स्थानीय नियामक आदेशों के कारण availability बदल सकती है।

चीन में क्यों हटाया गया?

चीन ने भी Bitchat के खिलाफ कार्रवाई की। अप्रैल 2026 में Apple ने इसे China App Store से हटाया। सामने आई जानकारी के अनुसार चीन के cyberspace regulator ने Bitchat को ऐसे online services से जुड़े नियमों के दायरे में माना जिनमें public opinion या social mobilization की क्षमता होती है और जिनके लिए security assessment की जरूरत होती है।

चीन के मामले में भी ऐप की decentralized और internet-independent प्रकृति महत्वपूर्ण रही। क्योंकि Bitchat सामान्य internet infrastructure के बिना स्थानीय Bluetooth mesh के जरिए communication कर सकता है, इसलिए conventional internet filtering या firewall-based blocking से इसे रोकना अधिक जटिल हो सकता है।

Jack Dorsey ने Bitchat क्यों बनाया?

Bitchat के पीछे Jack Dorsey का मूल विचार centralized communication infrastructure पर निर्भरता कम करना था। Dorsey के white paper में इसे resilient और private communication की जरूरत से जोड़ा गया है—ऐसी communication जो centralized infrastructure पर निर्भर न हो और network outage या censorship जैसी परिस्थितियों में भी काम कर सके।

यानी Bitchat को केवल “एक और chatting app” के रूप में समझना इसके उद्देश्य को छोटा करके देखना होगा। इसका मूल विचार यह है कि communication network का नियंत्रण किसी एक server, company या telecom infrastructure के हाथ में न रहे।

यही सोच Dorsey के technology decentralization में लंबे समय से दिखने वाले रुझान से भी जुड़ती है। Bitchat का open-source मॉडल इसी दिशा में एक प्रयोग के रूप में सामने आया।

आगे Bitchat की राह क्या है?

भारत में App Store और Google Play से हटाए जाने के बावजूद Bitchat का विकास पूरी तरह रुकता हुआ नहीं दिख रहा। इसका source code open source है, GitHub repository पर लगातार development जारी है और project के मौजूदा architecture में Bluetooth के साथ Nostr-based internet communication भी शामिल है।

भविष्य में इसका सबसे बड़ा सवाल तकनीक नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, सुरक्षा और regulation होगा। एक तरफ decentralized communication आपदा, censorship या network shutdown के समय लोगों के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है। दूसरी तरफ वही anonymity और traceability की कमी कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा करती है।

यही वजह है कि Bitchat की कहानी केवल एक ऐप के भारत में बंद होने की कहानी नहीं है। यह उस बड़े सवाल का हिस्सा बन चुकी है कि अगर इंटरनेट बंद कर दिया जाए तो क्या लोगों के पास फिर भी आपस में संवाद करने का तकनीकी अधिकार और साधन होना चाहिए? सरकारें इसे law-and-order और lawful interception के नजरिए से देखती हैं, जबकि digital-rights groups इसे privacy, free expression और resilient communication के नजरिए से देखते हैं।

आने वाले समय में Bitchat की दिशा इसी टकराव के बीच तय होगी—एक तरफ ज्यादा मजबूत, सुरक्षित और decentralized communication का तकनीकी विकास और दूसरी तरफ अलग-अलग देशों के कानून, regulatory controls और सुरक्षा संबंधी चिंताएं। भारत और चीन में हुई कार्रवाई ने यह जरूर दिखा दिया है कि internet-independent communication अब केवल तकनीकी प्रयोग नहीं रहा, बल्कि यह सरकार, नागरिक अधिकार और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच बहस का हिस्सा बन चुका है।

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