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Car Mileage Kam Kyu Ho Raha: कार में पेट्रोल कम होने पर माइलेज क्यों बदलता है? टंकी का पूरा Science
Car Mileage Kam Kyu Ho Raha: कार में पेट्रोल कम होने पर माइलेज क्यों बदल सकता है? जानिए Fuel Tank, वजन, Fuel Pump, पेट्रोल की गंदगी, गर्मी, ढलान और Driving Habits का Mileage पर असली असर।
Petrol Kam Hone Car Mileage Kam Kyu Ho Raha Explained
Car Mileage Kam Kyu Ho Raha: बहुत से लोग यह मानते हैं कि जब कार की टंकी में पेट्रोल कम बचता है, तो गाड़ी का माइलेज घट जाता है। यही नहीं, इंजन कमजोर पड़ने लगता है या फिर टंकी की तली में जमा गंदगी इंजन तक पहुंचकर नुकसान पहुंचाती है। यह सारी बातें दशकों से मैकेनिकों, रिश्तेदारों और सड़क किनारे की चाय की दुकानों पर सुनी जाती रही हैं, लेकिन असल में इनमें से कुछ बातें पूरी तरह सच हैं, कुछ आधी अधूरी हैं और कुछ पूरी तरह गलत साबित हो चुकी हैं। समझते हैं कि टंकी में पेट्रोल कम होने पर असल में गाड़ी के भीतर क्या होता है, और इसका माइलेज पर सच में कितना असर पड़ता है।
सबसे पहला और असली कारण है वजन
इस पूरे विषय में जो एक बात पूरी तरह वैज्ञानिक और सही साबित होती है, वह है वजन का असर। पेट्रोल का वजन हल्का नहीं होता, एक पूरी भरी हुई टंकी गाड़ी में करीब चालीस किलोग्राम तक अतिरिक्त वजन जोड़ सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि टंकी की क्षमता कितनी है। जितना ज्यादा वजन गाड़ी को ढोना पड़ता है, इंजन को उतनी ही ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है, खासकर तेज करते वक्त। मोटर वाहन इंजीनियरिंग से जुड़े अध्ययन बताते हैं कि अगर गाड़ी का वजन करीब पैंतालीस किलोग्राम कम कर दिया जाए, तो माइलेज में करीब दो प्रतिशत तक का सुधार देखा जा सकता है। इसका मतलब है कि जब टंकी में पेट्रोल कम होता है, तो गाड़ी हल्की हो जाती है, और इसी वजह से माइलेज में एक बेहद मामूली लेकिन असली सुधार आ सकता है। हालांकि यह फर्क इतना छोटा होता है कि रोजमर्रा की ड्राइविंग में इसे महसूस कर पाना लगभग नामुमकिन है।
क्या टंकी की तली से गंदगी इंजन तक पहुंचती है
यह वह सवाल है जिसे लेकर सबसे ज्यादा भ्रम फैला हुआ है। पुरानी धारणा यह है कि जैसे किसी बर्तन में रखी चाय या कॉफी की तली में तलछट जमा हो जाती है, उसी तरह पेट्रोल टंकी की तली में भी धूल, जंग और गंदगी जमा हो जाती है, और जब टंकी लगभग खाली होने वाली होती है, तो यही गंदगी ईंधन के साथ खिंचकर इंजन तक पहुंच जाती है। असल में आधुनिक गाड़ियों में यह डर काफी हद तक बेबुनियाद है। आजकल ज्यादातर गाड़ियों में पेट्रोल टंकी प्लास्टिक की बनी होती है, जो धातु की तरह जंग नहीं पकड़ती, और टंकी के भीतर लगा फ्यूल पंप एक खास डिजाइन के साथ आता है जो हमेशा टंकी की सबसे निचली और सबसे साफ जगह से ही पेट्रोल खींचता है। इसके अलावा फ्यूल फिल्टर भी लगातार पेट्रोल को छानने का काम करता रहता है। इसलिए आधुनिक गाड़ियों में टंकी कम होने पर पेट्रोल की गुणवत्ता में कोई खास बदलाव नहीं आता। हालांकि बहुत पुरानी गाड़ियों में, खासकर जिनमें धातु की टंकी हो और जिनकी नियमित सफाई और रखरखाव न हुआ हो, वहां यह खतरा पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि पुरानी टंकियों में नमी और जंग जमा होने की संभावना ज्यादा रहती है।
असली चिंता की बात है फ्यूल पंप का गर्म होना
अगर टंकी में पेट्रोल बहुत कम रखने की आदत डाल ली जाए, तो जो सच में नुकसान होता है वह माइलेज से जुड़ा नहीं बल्कि फ्यूल पंप की उम्र से जुड़ा होता है। ज्यादातर आधुनिक गाड़ियों में फ्यूल पंप टंकी के भीतर ही लगा होता है, और यह पंप हमेशा पेट्रोल में डूबा रहकर ही ठंडा और चिकना बना रहता है। जब टंकी में पेट्रोल का स्तर बहुत नीचे चला जाता है, तो पंप का कुछ हिस्सा हवा के संपर्क में आने लगता है, जिससे उसे ठंडा रखने वाला माध्यम कम पड़ जाता है और पंप ज्यादा गर्म होने लगता है। लगातार ऐसा होते रहने से पंप जल्दी खराब हो सकता है, और अगर पंप कमजोर पड़ जाए तो इंजन तक पेट्रोल का दबाव सही तरीके से नहीं पहुंच पाता, जिससे गाड़ी की परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है और तभी माइलेज में भी गिरावट महसूस हो सकती है। यानी यहां माइलेज सीधे पेट्रोल कम होने से नहीं बल्कि पेट्रोल कम रखने की लंबी आदत से खराब हुए पंप की वजह से घटता है।
हवा वाली जगह बढ़ने से क्या होता है
टंकी में जितना कम पेट्रोल बचता है, उतनी ही ज्यादा खाली जगह टंकी के भीतर हवा से भर जाती है। पेट्रोल में कुछ बेहद हल्के और जल्दी उड़ने वाले रसायन होते हैं, और जब टंकी में हवा वाली जगह ज्यादा होती है, खासकर गर्मी के मौसम में, तो यह हल्के रसायन कुछ ज्यादा मात्रा में भाप बनकर उड़ सकते हैं। इससे पेट्रोल की छोटी सी मात्रा असल में बिना इस्तेमाल हुए ही उड़ जाती है, जिससे टंकी में मौजूद ईंधन उतना असरदार नहीं रहता जितना भरी हुई टंकी में होता। हालांकि आधुनिक गाड़ियों में इस भाप को रोकने और वापस टंकी में भेजने के लिए खास वाष्प रोकने वाला सिस्टम लगा होता है, इसलिए यह असर बेहद मामूली रहता है और सामान्य ड्राइविंग में इसका कोई बड़ा फर्क महसूस नहीं होता।
ढलान और मोड़ पर पेट्रोल का हिलना
जब टंकी में पेट्रोल बहुत कम बचा हो, तो किसी तीखे ढलान पर चढ़ते उतरते वक्त या तेज मोड़ लेते वक्त बचा हुआ पेट्रोल टंकी के भीतर एक तरफ खिसक सकता है, जिससे कुछ पलों के लिए फ्यूल पिकअप वाली जगह से पेट्रोल हट सकता है। ऐसे में इंजन को कुछ पलों के लिए पर्याप्त पेट्रोल नहीं मिल पाता, जिससे गाड़ी हल्का सा झटका खा सकती है या इंजन थोड़ी देर के लिए लड़खड़ा सकता है। यह कोई स्थायी नुकसान नहीं है और न ही यह माइलेज को लंबे समय तक प्रभावित करता है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में या घुमावदार सड़कों पर टंकी बहुत ज्यादा खाली रखना असुविधा और हल्के खतरे की वजह जरूर बन सकता है।
असली माइलेज घटने के पीछे ड्राइविंग की आदत भी एक वजह है
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जब पेट्रोल कम बचता है, तो कई ड्राइवर अनजाने में अपनी ड्राइविंग शैली बदल देते हैं। कुछ लोग यह सोचकर तेज गति से गाड़ी चलाने लगते हैं कि जल्दी पेट्रोल पंप तक पहुंच जाएं, जबकि कुछ लोग बार बार पेट्रोल गेज देखने और चिंता में गाड़ी को झटके से चलाने लगते हैं। यह दोनों ही आदतें ईंधन की खपत को बढ़ा सकती हैं। इसलिए कई बार जो माइलेज कम होता हुआ महसूस होता है, उसका असली कारण टंकी में पेट्रोल कम होना नहीं बल्कि उस वक्त की गई ड्राइविंग की आदत होती है, जिसे हम आसानी से पेट्रोल की मात्रा से जोड़ देते हैं।
क्या टंकी हमेशा भरी रखनी चाहिए?
सबसे व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि टंकी को हमेशा एकदम भरा रखना भी जरूरी नहीं और हमेशा एकदम खाली होने तक चलाना भी सही आदत नहीं। ज्यादातर वाहन विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि टंकी को लगभग एक चौथाई या उससे ऊपर बनाए रखना एक अच्छा संतुलन है। इससे न तो अतिरिक्त वजन का बोझ ज्यादा बढ़ता है और न ही फ्यूल पंप को हवा में उघड़े रहने का खतरा होता है। इसके अलावा टंकी को बहुत ज्यादा खाली होने देने से बचने का एक और फायदा यह भी है कि अचानक किसी सुनसान जगह पर पेट्रोल खत्म होने का जोखिम भी कम हो जाता है।
क्या टाइमिंग भी रखती है मायने?
पेट्रोल पंप से जुड़ी एक और मशहूर धारणा यह है कि सुबह के वक्त पेट्रोल भरवाना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि माना जाता है कि ठंडे तापमान में पेट्रोल का घनत्व ज्यादा होता है, इसलिए सुबह के वक्त उतने ही पैसे में ज्यादा पेट्रोल मिल जाता है। असल में यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि पेट्रोल पंपों की टंकियां जमीन के काफी नीचे दबी होती हैं, जहां का तापमान दिन भर लगभग एक जैसा और स्थिर बना रहता है, इसलिए दिन के किसी भी समय पेट्रोल भरवाने से घनत्व में कोई खास फर्क नहीं पड़ता। एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के इंजीनियर अपनी टेस्टिंग के दौरान जानबूझकर गाड़ियों को बार बार पूरी तरह पेट्रोल खत्म होने की स्थिति तक ले जाते हैं, ताकि वे यह पता लगा सकें कि पेट्रोल गेज और चेतावनी लाइट कितनी सटीक तरीके से काम कर रही है, और यही वजह है कि आजकल ज्यादातर आधुनिक गाड़ियों का पेट्रोल गेज पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा भरोसेमंद हो गया है।


