Car Tyre Upgrade: कार में बड़े अलॉय व्हील लगाना पड़ सकता है भारी, माइलेज से लेकर वारंटी तक होगा असर

Car Tyre Upgrade Tips: कार में बड़े अलॉय व्हील लगवाने से पहले जान लें ये नुकसान, माइलेज, सस्पेंशन और वारंटी पर पड़ सकता है असर

Jyotsana Singh
Published on: 13 July 2026 8:30 AM IST
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Car Tyre Upgrade Tips: नई कार खरीदते ही उसे मॉडिफाई कराने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग अपनी कार को मोडिफाई करवाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। यही वजह है कि ऑटो मोबिल एसेसरीज का बाजार आज कल तेजी से विस्तार लेता जा रहा है। लोग अपनी कारों के लुक को भोकाली बनाने के लिए तरह तरह की एसेसरीज को लगवाना पसंद कर रहे हैं। जिनमें गाड़ी के टायर भी शामिल हैं।

बड़े अलॉय व्हील और चौड़े टायर कार की लुक्स को जरूर बेहतर बनाते हैं, लेकिन यह बदलाव हमेशा फायदे का सौदा नहीं होता। कई लोग सिर्फ स्टाइल के लिए कंपनी द्वारा दिए गए टायरों की जगह बड़े साइज के टायर लगवा लेते हैं, बिना यह जाने कि इसका असर कार के माइलेज, राइड क्वालिटी, सस्पेंशन, ब्रेकिंग और यहां तक कि वारंटी पर भी पड़ सकता है। अगर आप भी अपनी कार के टायर बदलने की योजना बना रहे हैं, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि सही टायर साइज क्या होना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

बड़े टायर लगाने से क्यों घट जाता है माइलेज?

हर कार के लिए कंपनी इंजन, वजन, सस्पेंशन और ट्रांसमिशन को ध्यान में रखकर एक तय टायर साइज देती है। जब इस साइज से बड़े या ज्यादा चौड़े टायर लगाए जाते हैं तो उनका वजन बढ़ जाता है और सड़क से उनका संपर्क क्षेत्र भी ज्यादा हो जाता है। इससे रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ता है, यानी इंजन को कार को आगे बढ़ाने के लिए अधिक ताकत लगानी पड़ती है। इसका सीधा असर ईंधन की खपत पर पड़ता है और कई मामलों में माइलेज 10 से 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है। खासकर शहर की ट्रैफिक में यह अंतर अधिक महसूस होता है।

राइडिंग कंफर्ट और सस्पेंशन पर भी पड़ता है असर

टायर का साइज केवल कार की लुक्स नहीं बदलता, बल्कि ड्राइविंग का अनुभव भी बदल देता है। 16 इंच के टायरों में साइडवॉल मोटी होती है, जिससे वे गड्ढों और खराब रास्तों के झटकों को बेहतर तरीके से सोख लेते हैं। इसके विपरीत 18 इंच के बड़े व्हील्स में लो-प्रोफाइल टायर लगाए जाते हैं, जिनकी साइडवॉल पतली होती है। इससे हाईवे पर हैंडलिंग और कॉर्नरिंग बेहतर हो सकती है, लेकिन खराब सड़क पर झटके ज्यादा महसूस होते हैं और सस्पेंशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय में इससे सस्पेंशन के पार्ट्स जल्दी घिस सकते हैं।

स्पीडोमीटर और ओडोमीटर की रीडिंग भी हो सकती है प्रभावित

बहुत कम लोग जानते हैं कि टायर का साइज बदलने से स्पीडोमीटर और ओडोमीटर की रीडिंग भी प्रभावित हो सकती है। यदि नए टायर का कुल व्यास कंपनी के तय मानक से ज्यादा बदल जाता है, तो स्पीड और तय की गई दूरी की रीडिंग वास्तविक आंकड़ों से अलग दिखाई दे सकती है। इसलिए ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टायर का कुल व्यास मूल साइज के काफी करीब ही रखा जाए।

ब्रेकिंग और पिकअप पर भी दिख सकता है असर

बड़े और भारी टायरों को घुमाने के लिए इंजन को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसका असर कार की शुरुआती पिकअप पर दिखाई देता है और एक्सेलेरेशन थोड़ा धीमा महसूस हो सकता है। इसके अलावा भारी व्हील्स के कारण ब्रेकिंग दूरी भी बढ़ सकती है। अगर कार के ब्रेकिंग सिस्टम को उसी हिसाब से अपग्रेड नहीं किया गया है, तो इमरजेंसी ब्रेकिंग के दौरान यह फर्क और ज्यादा महसूस हो सकता है।

गलत टायर साइज से वारंटी भी हो सकती है प्रभावित

कार निर्माता वाहन में ऐसे बदलावों को पसंद नहीं करते जो उनकी तकनीकी सिफारिशों से बाहर हों। अगर निर्धारित सीमा से ज्यादा बड़े टायर लगाने के बाद सस्पेंशन, स्टीयरिंग या ट्रांसमिशन में कोई खराबी आती है, तो वारंटी क्लेम पर असर पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टायर का कुल व्यास कंपनी के ओरिजिनल साइज से 2 से 3 प्रतिशत से ज्यादा नहीं बदलना चाहिए।

अगर टायर अपग्रेड करना चाहते हैं तो क्या करें?

यदि आपकी कार के बेस वेरिएंट में 16 इंच के टायर आते हैं और उसी मॉडल के टॉप वेरिएंट में 17 इंच के टायर दिए जाते हैं, तो 17 इंच पर अपग्रेड करना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इससे कार का लुक बेहतर हो जाता है और माइलेज व कंफर्ट पर बहुत ज्यादा असर भी नहीं पड़ता। हालांकि 16 इंच से सीधे 18 इंच या उससे बड़े टायर लगाने से पहले अधिकृत सर्विस सेंटर या अनुभवी टायर विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

टायर बदलते समय किन बातों का रखें ध्यान?

ऑटो एक्सपर्ट्स की राय के अनुसार टायर बदलते समय केवल डिजाइन या लुक्स पर ध्यान देना सही नहीं है। हमेशा कंपनी द्वारा सुझाए गए साइज के आसपास ही टायर चुनें। अच्छी गुणवत्ता वाले ब्रांडेड टायर लगवाएं, व्हील एलाइनमेंट और व्हील बैलेंसिंग जरूर कराएं तथा टायर प्रेशर हमेशा कंपनी के निर्देशानुसार रखें। गलत एयर प्रेशर भी माइलेज कम करने और टायर जल्दी घिसने का बड़ा कारण बनता है। यदि आपकी कार का उपयोग अधिकतर शहर में होता है, तो जरूरत से ज्यादा चौड़े टायर लगाने से बचना बेहतर रहेगा।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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