Cheap Electric Cars India 2026: अब सस्ती हो गई इलेक्ट्रिक कार...बैटरी का खर्च हटाकर ऐसे बचेंगे लाखों रुपये

Cheap Electric Cars India 2026: अब इलेक्ट्रिक कार खरीदना हो सकता है आसान। Battery-as-a-Service मॉडल में बैटरी की लागत अलग होने से EV की शुरुआती कीमत लाखों रुपये तक कम हो सकती है

Jyotsana Singh
Published on: 1 Jun 2026 2:59 PM IST (Updated on: 1 Jun 2026 3:00 PM IST)
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Cheap Electric Cars India 2026

Cheap Electric Cars India 2026: पर्यावरण संरक्षण और सस्ते ईंधन विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट ने अपनी मजबूत पकड़ बनाने में सफल रहे हैं। यही वजह है कि, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ऊंची कीमतें अब भी लाखों ग्राहकों को EV खरीदने से रोक रही हैं। खासकर बैटरी की कीमत किसी भी इलेक्ट्रिक कार की कुल लागत का बड़ा हिस्सा होती है। इसी चुनौती का समाधान लेकर आया है Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल। इस नई व्यवस्था में ग्राहक को कार खरीदते समय बैटरी की पूरी कीमत नहीं चुकानी पड़ती, जिससे शुरुआती लागत लाखों रुपये तक कम हो सकती है। यही वजह है कि अब कई ऑटो कंपनियां इस मॉडल को अपनाकर इलेक्ट्रिक कारों को ज्यादा लोगों की पहुंच में लाने की कोशिश कर रही हैं।

क्या है Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल?

Battery-as-a-Service यानी BaaS एक ऐसा बिजनेस मॉडल है जिसमें वाहन और बैटरी को अलग-अलग माना जाता है। ग्राहक केवल इलेक्ट्रिक कार खरीदता है, जबकि बैटरी को किराए या सब्सक्रिप्शन के आधार पर इस्तेमाल करता है।

इस मॉडल में बैटरी की कीमत वाहन की एक्स-शोरूम कीमत में शामिल नहीं होती। इसके बदले ग्राहक को हर महीने या प्रति किलोमीटर तय शुल्क देना पड़ता है। इससे कार खरीदने के लिए शुरुआती निवेश काफी कम हो जाता है और EV का मालिक बनना आसान हो जाता है।

कैसे बच सकते हैं लाखों रुपये?

विशेषज्ञों के अनुसार किसी इलेक्ट्रिक कार की कुल कीमत में बैटरी का हिस्सा लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है। ऐसे में जब बैटरी की लागत अलग कर दी जाती है तो कार की शुरुआती कीमत कई लाख रुपये तक कम दिखाई देती है। यानी किसी EV की कीमत 12 से 15 लाख रुपये है, तो BaaS मॉडल में वही कार ग्राहकों को काफी कम शुरुआती कीमत पर उपलब्ध हो सकती है।

यानी BaaS (Battery as a Service) मॉडल में कार की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि बैटरी की लागत कुल कीमत का कितना हिस्सा है। बैटरी का हिस्सा आमतौर पर 30% से 40% तक होता है।अगर किसी EV की कुल कीमत 15 लाख रुपये है तक BaaS मॉडल में कार की एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹7.2 लाख से ₹8.4 लाख के बीच हो सकती है।

अगर किसी EV की कुल कीमत 15 लाख रुपये है:

30% बैटरी लागत ₹4.5 लाख और 40% बैटरी लागत ₹6 लाख। BaaS मॉडल में कार की कीमत लगभग ₹9 लाख से ₹10.5 लाख रह सकती है।

इस तरह, 12-15 लाख रुपये की EV BaaS मॉडल में करीब 7.2 लाख से 10.5 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध हो सकती है, जबकि बैटरी के लिए ग्राहक को अलग से मासिक सब्सक्रिप्शन, प्रति किलोमीटर शुल्क या बैटरी लीज चार्ज देना पड़ता है। हालांकि, इसके बदले ग्राहकों को बैटरी उपयोग के लिए अलग से मासिक या प्रति किलोमीटर शुल्क चुकाना होगा।

इससे उन लोगों को राहत मिलती है जो एकमुश्त बड़ी रकम खर्च नहीं करना चाहते।

एमजी कॉमेट EV और विन्सडर EV जैसी कारों में मिल रहा फायदा

भारतीय बाजार में कुछ कंपनियां पहले से BaaS मॉडल की पेशकश कर रही हैं। इनमें MG कॉमेट EV सबसे चर्चित नामों में शामिल है। यह देश की सबसे किफायती इलेक्ट्रिक कारों में गिनी जाती है और BaaS विकल्प के साथ इसकी शुरुआती कीमत और भी कम हो जाती है।

यह कार खासतौर पर शहरों में रोजाना सफर करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसकी कॉम्पैक्ट डिजाइन, आसान पार्किंग और कम रनिंग कॉस्ट इसे पहली बार EV खरीदने वालों के लिए आकर्षक विकल्प बनाती है। इसके अलावा विंडसर EV जैसे मॉडल भी BaaS विकल्प के साथ उपलब्ध हैं। इससे ग्राहक कम बजट में अपेक्षाकृत बड़ी और फीचर-लोडेड इलेक्ट्रिक कार खरीद सकते हैं।

बैटरी खराब होने की चिंता भी होती है कम

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले कई लोगों की सबसे बड़ी चिंता बैटरी की लाइफ और उसके रिप्लेसमेंट की लागत होती है। नई बैटरी बदलवाने का खर्च कई बार लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। BaaS मॉडल में बैटरी आमतौर पर सेवा प्रदाता कंपनी की जिम्मेदारी होती है। यदि बैटरी की क्षमता कम होती है या किसी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो उसकी देखभाल और कई मामलों में रिप्लेसमेंट की जिम्मेदारी भी कंपनी की होती है। इससे ग्राहकों का जोखिम कम हो जाता है।

ज्यादा चलाने वालों के लिए बढ़ सकता है खर्च

हालांकि BaaS मॉडल हर ग्राहक के लिए फायदेमंद साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति अपनी कार का इस्तेमाल बहुत ज्यादा करता है, तो प्रति किलोमीटर या मासिक बैटरी शुल्क लंबे समय में काफी बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में कई वर्षों तक भुगतान करने के बाद कुल खर्च उस रकम के बराबर या उससे ज्यादा भी हो सकता है, जो बैटरी सहित वाहन खरीदने पर आता। इसलिए EV खरीदने से पहले अपनी ड्राइविंग जरूरतों और वार्षिक माइलेज का आकलन करना जरूरी है।

भारत में तेजी से बढ़ सकता है BaaS का चलन

ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में BaaS मॉडल भारतीय EV बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकता है। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी लगातार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और EV इकोसिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रही है।

जैसे-जैसे बैटरी तकनीक बेहतर होगी और अधिक कंपनियां इस मॉडल को अपनाएंगी, वैसे-वैसे ग्राहकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना और भी आसान हो सकता है।

Battery-as-a-Service मॉडल इलेक्ट्रिक वाहनों को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह उन ग्राहकों के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है जो कम शुरुआती लागत में EV खरीदना चाहते हैं और बैटरी की देखभाल की जिम्मेदारी खुद नहीं उठाना चाहते। इस विकल्प के चुनाव को लेकर अंतिम फैसला लेने से पहले बैटरी शुल्क, वाहन उपयोग और कुल स्वामित्व लागत का सही आकलन करना जरूरी है। यदि सही तरीके से चुना जाए तो BaaS मॉडल लाखों रुपये की शुरुआती बचत के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने का रास्ता और अधीन आसान बनाने के साथ ग्राहकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।


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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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