ऑनलाइन खरीदारी करने वाले हो जाएं सावधान! क्या है 'डार्क पैटर्न', क्यों बढ़ी सरकार की सख्ती

Dark Pattern Explained: ऑनलाइन शॉपिंग में छिपे चार्ज, प्री-टिक्ड सब्सक्रिप्शन और फर्जी अर्जेंसी जैसे 'डार्क पैटर्न' पर सरकार की सख्ती, जानें कैसे बचें।

Jyotsana Singh
Published on: 6 Aug 2026 12:40 PM IST
Dark Pattern Explained
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Dark Pattern Explained

Dark Pattern Explained: डिजिटल दौर में स्मार्ट फोन हर किसी के लिए जीवन का जरूरी हिस्सा बन चुका है। फिर चाहे बैंकिंग से संबंधित काम हो या फिर ऑफिस मीट हो या ऑन लाईन शॉपिंग सब कुछ एक क्लिक के साथ बड़ा ही आसान बन चुका है। लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी है कि, आप 'डार्क पैटर्न' का शिकार हो रहे हैं। अक्सर ऑनलाइन शॉपिंग, फ्लाइट टिकट बुकिंग या किसी ऐप से खाना या किराना ऑर्डर करते समय कई बार ऐसा होता है कि अंतिम भुगतान के समय बिल में अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाता है या कोई सदस्यता और दान का विकल्प पहले से चुना हुआ मिलता है, जिसकी आपको भनक भी नहीं लगने पाती। ऑनलाईन सर्विस प्रोवाइडर कई ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जो 'सिर्फ 2 मिनट बाकी हैं' या 'अंतिम सीट बची है' जैसे संदेश दिखाकर ग्राहक पर तुरंत फैसला लेने का दबाव भी बनाते हैं। ऐसे ही भ्रामक तरीकों को 'डार्क पैटर्न' कहा जाता है। अब इन पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने इंडिगो, जेप्टो, फिजिक्स वाला, फर्स्टक्राई, स्पाइसजेट समेत 9 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया है। सरकार का कहना है कि ऑनलाइन उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली किसी भी डिजिटल प्रक्रिया को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या होता है डार्क पैटर्न?

डार्क पैटर्न ऐसे डिजिटल डिजाइन या ऑनलाइन तरीके होते हैं, जिनका उद्देश्य ग्राहक को बिना पूरी जानकारी दिए कोई ऐसा फैसला लेने के लिए प्रेरित करना होता है। जो वह सामान्य स्थिति में शायद नहीं लेता। वेबसाइट या ऐप को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ग्राहक अतिरिक्त पैसे खर्च कर दे, अनचाही सदस्यता ले ले या अपनी निजी जानकारी साझा कर दे। देखने में ये विकल्प सामान्य लगते हैं, लेकिन इनके पीछे कंपनियों का व्यावसायिक फायदा छिपा होता है।

किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई और क्यों लगा जुर्माना?

राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार CCPA ने अलग-अलग मामलों में कई कंपनियों पर कार्रवाई की है। जेप्टो पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। क्योंकि खरीदारी के दौरान बाद में हैंडलिंग चार्ज और मेंबरशिप शुल्क जोड़ने की शिकायत मिली थी। फिजिक्स वाला पर 5 लाख रुपये का जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि वहां 10 रुपये का दान पहले से चुना हुआ मिलता था और मुफ्त कोर्स से पहले व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा रही थी। इसके अलावा अनुज जिंदल पर 3 लाख रुपये, फर्स्टक्राई पर 2 लाख रुपये तथा फार्मईजी, मैकएफी और स्पाइसजेट पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इंडिगो को अपने ऐप में ग्राहकों पर दबाव बनाने वाले संदेश बदलने के निर्देश दिए गए, जबकि बुकमाईशो को टिकट बुकिंग के दौरान पहले से जुड़े 1 रुपये के दान विकल्प को हटाना पड़ा। संबंधित कंपनियों ने बाद में अपने प्लेटफॉर्म में बदलाव करने और नियमों का पालन करने का भरोसा भी दिया है।

किस तरह ग्राहकों को भ्रमित करती हैं कंपनियां?

डार्क पैटर्न का इस्तेमाल कई अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। कई बार ग्राहक को बिना बताए अंतिम बिल में अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिया जाता है। कुछ प्लेटफॉर्म बीमा, दान या सदस्यता का विकल्प पहले से चुनकर रखते हैं। जिससे ग्राहक अनजाने में उसका भुगतान कर देता है। कई वेबसाइट सीमित समय या सीमित स्टॉक का दावा करके जल्दबाजी का माहौल बनाती हैं, जबकि वास्तविक स्थिति अलग हो सकती है। कुछ ऐप्स में सदस्यता लेना तो आसान होता है, लेकिन उसे बंद करने की प्रक्रिया जानबूझकर कठिन बना दी जाती है। कई जगह मुफ्त सेवा देने के नाम पर जरूरत से ज्यादा व्यक्तिगत जानकारी भी मांगी जाती है।

सरकार ने बनाए हैं सख्त नियम

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने डार्क पैटर्न के 13 प्रकारों की पहचान कर उनके खिलाफ दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें फॉल्स अर्जेंसी, ड्रिप प्राइसिंग, बास्केट स्नीकिंग, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, कन्फर्म शेमिंग, फोर्स्ड एक्शन और इंटरफेस इंटरफेरेंस जैसे तरीके शामिल हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को हर शुल्क, हर विकल्प और हर शर्त की स्पष्ट जानकारी मिले और वह बिना किसी दबाव के फैसला ले सके।

उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यदि कंपनियां भ्रामक डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल करती हैं तो लाखों उपभोक्ता आर्थिक नुकसान उठा सकते हैं। सरकार का मानना है कि इस कार्रवाई से ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा और कंपनियां भी उपभोक्ता हितों का सम्मान करने के लिए मजबूर होंगी।

ऑनलाइन खरीदारी करते समय क्या रखें ध्यान?

ऑनलाइन खरीदारी करते समय भुगतान से पहले अंतिम बिल को ध्यान से देखना चाहिए। यह जरूर जांच लें कि कहीं कोई अतिरिक्त शुल्क, बीमा, दान या सदस्यता अपने आप तो नहीं जुड़ गई है। किसी भी ऑफर या सीमित समय वाले संदेश पर बिना जांचे-परखे भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि किसी प्लेटफॉर्म पर सदस्यता बंद करना मुश्किल बनाया गया हो या कोई भ्रामक विकल्प दिखाई दे तो उसकी शिकायत उपभोक्ता संरक्षण तंत्र के माध्यम से की जा सकती है।

सरकार का साफ संदेश

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को गुमराह करने वाली रणनीतियों के लिए अब कोई जगह नहीं है। सरकार का कहना है कि, CCPA आगे भी ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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