E85 vs Petrol: टैंक फुल कराने में कम खर्च, लेकिन माइलेज में कितना नुकसान? पूरा हिसाब समझिए

E85 vs Petrol: E85 फ्यूल पेट्रोल से सस्ता है, लेकिन इसकी माइलेज कम होती है। जानिए प्रति किलोमीटर खर्च, बचत और E85 के असली फायदे।

Jyotsana Singh
Published on: 13 Jun 2026 4:28 PM IST
E85 vs Petrol mileage and running cost comparison for flex-fuel vehicles in India 2026
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E85 vs Petrol Comparison 2026

E85 vs Petrol: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के साथ इस समय पेट्रोल डीजल की उपलब्धता पर लगातार संकट मंडरा रहा है। यही वजह है कि ईंधनों की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच भारत तेजी से वैकल्पिक ईंधनों की ओर बढ़ रहा है। इसी कड़ी में E85 फ्लेक्स फ्यूल को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी, किसानों को फायदा मिलेगा और प्रदूषण भी कम होगा। लेकिन आम वाहन चालकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर E85 पेट्रोल से सस्ता है तो क्या इससे चलने वाली गाड़ी ज्यादा माइलेज देगी? और अगर माइलेज कम मिलेगा तो आखिर बचत कहां होगी? आइए जानते हैं E85 फ्यूल की पूरी कहानी और समझते हैं कि यह आपकी जेब पर कितना असर डालेगा।

क्या है E85 फ्लेक्स फ्यूल?

E85 एक प्रकार का फ्लेक्स फ्यूल है जिसमें करीब 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। यही वजह है कि इसे एक नवीकरणीय (Renewable) ईंधन माना जाता है। भारत सरकार लगातार पिछले कुछ वर्षों से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। वर्तमान में E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कई शहरों में उपलब्ध है, जबकि E85 और इससे आगे के फ्लेक्स फ्यूल को भविष्य की तकनीक के रूप में विकसित किया जा रहा है।

पेट्रोल की तुलना में कितना माइलेज देता है E85?

पेट्रोल और एथेनॉल के बीच माइलेज की गुणवत्ता को लेकर बहस छिड़ी हुई है। लोग इस नए विकल्प को लेकर अभी असमंजस भरी स्थिति में हैं। असल में एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है। तकनीकी रूप से देखें तो एक लीटर एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग 25 से 30 प्रतिशत कम ऊर्जा होती है। यही कारण है कि E85 पर चलने वाले वाहन आमतौर पर पेट्रोल की तुलना में कम माइलेज देते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई कार पेट्रोल पर 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है तो E85 पर उसका माइलेज लगभग 14 से 17 किलोमीटर प्रति लीटर के बीच रह सकता है। वास्तविक आंकड़े वाहन मॉडल, इंजन तकनीक और ड्राइविंग स्टाइल के अनुसार बदल सकते हैं।

इस विकल्प को अपनाने में फिर फायदा कहां है?

पहली नजर में कम माइलेज सुनकर E85 घाटे का सौदा लग सकता है, लेकिन हकीकत में इससे जुड़ी पूरी सच्चाई अलग है। मान लीजिए पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर है और आपकी कार 20 किमी प्रति लीटर चलती है। ऐसे में प्रति किलोमीटर खर्च 5 रुपये होगा। अब यदि E85 की कीमत 75 रुपये प्रति लीटर हो और माइलेज 15 किमी प्रति लीटर मिले तो प्रति किलोमीटर खर्च करीब 5 रुपये ही रहेगा। अगर भविष्य में E85 और सस्ता उपलब्ध होता है तो प्रति किलोमीटर लागत पेट्रोल से कम भी हो सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ केवल माइलेज नहीं बल्कि कॉस्ट पर किलोमीटर यानी प्रति किलोमीटर खर्च को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं।

पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर माना जा रहा है?

E85 का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण से जुड़ा है। एथेनॉल पौधों और कृषि उत्पादों से तैयार होता है, इसलिए इसे कार्बन न्यूट्रल ईंधन की श्रेणी में रखा जाता है। इसका उपयोग बढ़ने से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके अलावा सल्फर और कई हानिकारक प्रदूषकों का उत्सर्जन भी कम होता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों को भी होगा फायदा

E85 को केवल वाहन ईंधन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह कृषि अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ने पर किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और कृषि आधारित उद्योगों में निवेश भी बढ़ सकता है।

क्या हर कार में इस्तेमाल किया जा सकता है?

E85 केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। सामान्य पेट्रोल कारों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को इतनी अधिक एथेनॉल मात्रा के लिए डिजाइन नहीं किया जाता। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में विशेष सेंसर और इंजन मैनेजमेंट सिस्टम लगाए जाते हैं जो पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण के अनुसार इंजन को स्वतः एडजस्ट कर लेते हैं।

भारत में कई वाहन निर्माता कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं और आने वाले वर्षों में ऐसे वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

भविष्य का ईंधन बन सकता है E85

ऊर्जा सुरक्षा, कम प्रदूषण और किसानों की आय बढ़ाने जैसे कई कारणों से E85 को भारत के भविष्य के ईंधनों में गिना जा रहा है। हालांकि वाहन चालकों को यह समझना होगा कि E85 का सबसे बड़ा फायदा ज्यादा माइलेज नहीं, बल्कि कम ईंधन लागत, पर्यावरण संरक्षण और आयातित तेल पर निर्भरता कम करना है।

लेकिन साथ ही ये बात भी बहुत जरूरी है कि वाहन चालकों को फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाले वाहनों पर निर्भरता बनानी होगी।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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