Electric Vehicle में कौन है दुनिया का बादशाह? भारत की रैंक देखकर हैरान रह जाएंगे

Electric Vehicle की ग्लोबल रेस में चीन सबसे आगे है। जानें अमेरिका, यूरोप और भारत की स्थिति और क्यों दोपहिया-थ्री-व्हीलर से बदल रहा बाजार।

Jyotsana Singh
Published on: 7 Oct 2026 10:27 AM IST
Electric Vehicle: Which Country Has the Most EVs? Check Indias Global Rank
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Electric Vehicle: Which Country Has the Most EVs? Check India's Global Rank


सड़कों पर पेट्रोल-डीजल से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां नजर आने लगें यह नज़ारा अब दुनिया के इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार में सिर्फ कल्पना नहीं रह गया है। इलेक्ट्रिक कारों, स्कूटरों और थ्री-व्हीलर की बिक्री जिस तेजी से बढ़ रही है जिसे देखते हुए इस दौड़ में कुछ देश बाकी दुनिया से काफी आगे निकल चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि दुनिया में सबसे ज्यादा EV किस देश में हैं और भारत इस रेस में किस पायदान पर खड़ा है?

चीन ने EV की रेस में बनाई सबसे बड़ी बढ़त

इलेक्ट्रिक वाहनों के वैश्विक बाजार में चीन का दबदबा सबसे ज्यादा है। चीन न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा EV बाजार है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में भी उसकी मजबूत पकड़ है। यहां घरेलू कंपनियों ने बैटरी, इलेक्ट्रिक कार और दूसरे वाहन बनाने में बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में दुनिया में बिकने वाली इलेक्ट्रिक कारों में चीन की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत रही। चीन में एक साल में एक करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई। इसके अलावा बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक दोपहिया और थ्री-व्हीलर भी सड़कों पर हैं। यही वजह है कि BYD, Geely और SAIC जैसी चीनी कंपनियां वैश्विक EV बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रही हैं। BYD तो वैश्विक प्लग-इन वाहन बिक्री के मामले में Tesla जैसी कंपनियों को कड़ी चुनौती दे रही है।

अमेरिका और यूरोप भी दौड़ में शामिल

चीन के बाद अमेरिका दुनिया के बड़े इलेक्ट्रिक कार बाजारों में शामिल है। यहां Tesla के साथ कई दूसरी कंपनियां भी EV बाजार में मौजूद हैं। हालांकि, अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की रफ्तार चीन की तुलना में अलग रही है और बाजार का आकार भी नीतियों तथा उपभोक्ता मांग के अनुसार बदलता रहा है।

यूरोप में नॉर्वे सबसे अलग उदाहरण है। वहां इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री का हिस्सा दुनिया के ज्यादातर देशों से काफी ज्यादा है। नॉर्वे में टैक्स छूट, EV के लिए सुविधाएं और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर अपेक्षाकृत ज्यादा लागत जैसी नीतियों ने इलेक्ट्रिक कारों को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

भारत किस नंबर पर है?

भारत की तस्वीर चीन या नॉर्वे से अलग है। भारत दुनिया के तेजी से बढ़ते EV बाजारों में जरूर शामिल है, लेकिन कुल इलेक्ट्रिक कारों की संख्या और बाजार हिस्सेदारी के मामले में अभी शीर्ष देशों से काफी पीछे है। भारत में EV का सफर केवल इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं है। यहां इलेक्ट्रिक स्कूटर, मोटरसाइकिल और खास तौर पर ई-रिक्शा तथा दूसरे थ्री-व्हीलर बाजार की बड़ी मजबूत पकड़ है।

उपलब्ध वैश्विक तुलनाओं में भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यापक बाजार के लिहाज से शीर्ष 10 देशों के आसपास रखा जाता है।

भारत में दोपहिया और थ्री-व्हीलर ने बदली तस्वीर

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का सबसे बड़ा बदलाव दोपहिया और थ्री-व्हीलर से आया है। शहरों में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की संख्या बढ़ी है, वहीं ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक ऑटो ने छोटे शहरों और कस्बों में भी अपनी जगह बनाई है। कारों की तुलना में इन वाहनों की कीमत अपेक्षाकृत कम होने, रोजाना कम दूरी तय करने और ईंधन खर्च बचाने की वजह से इनका इलेक्ट्रिक मॉडल ग्राहकों को आकर्षित करता है। यही कारण है कि भारत का EV बाजार केवल कार कंपनियों की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें दोपहिया और थ्री-व्हीलर कंपनियों की भी बड़ी भूमिका है।

उत्तर प्रदेश बना देश का बड़ा EV बाजार

भारत में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की तस्वीर हर राज्य में एक जैसी नहीं है। उत्तर प्रदेश इस मामले में प्रमुख राज्यों में शामिल है। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण की संख्या तेजी से बढ़ी है और बड़ी आबादी के कारण यहां इलेक्ट्रिक दोपहिया और थ्री-व्हीलर की मांग भी मजबूत है।

उत्तर प्रदेश के साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य भी EV अपनाने में आगे हैं। इन राज्यों में बड़े शहर, ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया है।

सरकार की नीतियों से मिल रहा बाजार को सहारा

भारत में EV को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग योजनाएं चला रही हैं। PM E-DRIVE योजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। भारत ने 2030 तक नए वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी रखा है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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