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Electronic Tattoo Works: न सुई, न शरीर में चिप! त्वचा पर लगा इलेक्ट्रॉनिक टैटू बताएगा सेहत का हाल
How Electronic Tattoo Works: इलेक्ट्रॉनिक टैटू क्या है और त्वचा पर चिपककर यह दिल की धड़कन, दिमाग की तरंगें और मांसपेशियों के संकेत कैसे पढ़ता है? जानिए ग्राफीन सेंसर, ब्लड शुगर मॉनिटरिंग और इस नई मेडिकल टेक्नोलॉजी का भविष्य।
How Electronic Tattoo Works | Electronic Tattoo Health Monitoring | Newstrack Hindi
How Electronic Tattoo Works: मनुष्य के शरीर पर बना टैटू अब केवल सजावट या पहचान का माध्यम नहीं रह गया है। वैज्ञानिकों ने ऐसे बेहद पतले इलेक्ट्रॉनिक टैटू विकसित किए हैं, जिन्हें अस्थायी टैटू की तरह त्वचा पर लगाया जा सकता है। ये दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि, मस्तिष्क की तरंगें, मांसपेशियों के संकेत, त्वचा का तापमान और पसीने में मौजूद कुछ रसायनों की निगरानी कर सकते हैं।
कुछ इलेक्ट्रॉनिक टैटू इतने पतले होते हैं कि नंगी आँखों से देखना भी कठिन है। वे त्वचा के साथ मुड़ और खिंच सकते हैं। अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ग्राफीन से बने ऐसे टैटू विकसित किए हैं जिनकी मोटाई लगभग 463 नैनोमीटर थी। दिसंबर 2024 में विशेष इलेक्ट्रॉनिक स्याही से सिर की त्वचा पर सेंसर बनाने की तकनीक सामने आई। मई 2025 में माथे पर लगाए जाने वाले ऐसे टैटू का अध्ययन प्रकाशित हुआ, जो मस्तिष्क और आँखों के विद्युत संकेतों से मानसिक कार्यभार का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है।
सवाल है कि बिना त्वचा काटे या शरीर में चिप लगाए ये टैटू संकेत कैसे पढ़ते हैं? क्या ये रक्तचाप और शुगर भी माप सकते हैं? और क्या भविष्य में अस्पतालों के बड़े उपकरणों की जरूरत कम हो जाएगी?
इलेक्ट्रॉनिक टैटू आखिर है क्या?
इलेक्ट्रॉनिक टैटू को अंग्रेजी में 'ई-टैटू' या 'एपिडर्मल इलेक्ट्रॉनिक्स' कहा जाता है। एपिडर्मिस त्वचा की सबसे बाहरी परत है। ये उपकरण इसी सतह पर लगाए जाते हैं और शरीर से निकलने वाले संकेतों को मापते हैं।
साधारण टैटू में सुई से रंगद्रव्य (पिगमेंट) त्वचा के भीतर पहुँचाया जाता है, जबकि अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक टैटू त्वचा के ऊपर चिपकाई जाने वाली बेहद पतली इलेक्ट्रॉनिक फिल्म होते हैं। जरूरत समाप्त होने पर इन्हें हटाया जा सकता है।
इनमें महीन विद्युत चालक रेखाएँ, छोटे इलेक्ट्रोड और विभिन्न प्रकार के सेंसर होते हैं। कुछ प्रणालियाँ तार से बाहरी उपकरण से जुड़ती हैं, जबकि कुछ में वायरलेस संचार की सुविधा होती है। कई प्रयोगों में त्वचा पर लगा हिस्सा केवल संकेत ग्रहण करता है। उन्हें रिकॉर्ड करने और विश्लेषण करने का काम अलग उपकरण करता है।
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अस्पताल के ईसीजी इलेक्ट्रोड को इतना पतला और लचीला बना दिया जाए कि वह त्वचा का ही हिस्सा महसूस होने लगे।
दिल की धड़कन को त्वचा के ऊपर से कैसे मापते हैं?
हृदय की प्रत्येक धड़कन से पहले उसमें विद्युत संकेत उत्पन्न होते हैं। ये संकेत हृदय की मांसपेशियों को एक निश्चित क्रम में संकुचित और शिथिल होने का निर्देश देते हैं। इस गतिविधि से शरीर की सतह पर भी बहुत छोटे विद्युत विभव उत्पन्न होते हैं।
अस्पताल में ईसीजी मशीन त्वचा पर लगाए गए इलेक्ट्रोड की मदद से इन्हीं संकेतों को रिकॉर्ड करती है। इलेक्ट्रॉनिक टैटू भी इसी सिद्धांत पर काम करता है। उसके महीन चालक इलेक्ट्रोड त्वचा के संपर्क में रहकर विद्युत संकेत ग्रहण करते हैं। फिर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट उनकी रिकॉर्डिंग और विश्लेषण करता है। इस तकनीक का लाभ यह है कि सेंसर हल्के और लचीले हो सकते हैं। वे त्वचा के साथ बेहतर संपर्क बनाए रखते हुए लंबे समय तक निगरानी को अधिक आरामदायक बना सकते हैं।
2018 में 'एनपीजे फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स' में प्रकाशित एक अध्ययन में लगभग 1.5 माइक्रोमीटर मोटे इलेक्ट्रॉनिक टैटू से ईसीजी, त्वचा का तापमान और नमी मापने का प्रदर्शन किया गया था। शोधकर्ताओं ने ईसीजी संकेतों से हृदय गति और श्वसन गति जैसी जानकारी भी प्राप्त की।
क्या इलेक्ट्रॉनिक टैटू दिमाग की गतिविधियाँ पढ़ सकता है?
मस्तिष्क की अरबों तंत्रिका कोशिकाएँ (नर्व सेल्स) विद्युत और रासायनिक संकेतों के माध्यम से एक-दूसरे से संवाद करती हैं। इनकी सामूहिक गतिविधि से उत्पन्न कुछ विद्युत परिवर्तन सिर की सतह पर मापे जा सकते हैं। इस जाँच को इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राम यानी ईईजी कहा जाता है।
पारंपरिक ईईजी में सिर पर कई इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक टैटू भी इसी तरह मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि रिकॉर्ड कर सकता है।
दिसंबर 2024 में टेक्सास यूनिवर्सिटी ऑस्टिन और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी लॉस एंजिलिस के शोधकर्ताओं ने विशेष चालक स्याही से सिर की त्वचा पर सेंसर बनाने की तकनीक प्रस्तुत की। इसकी एक बड़ी चुनौती बालों के बीच इलेक्ट्रोड का त्वचा से संपर्क बनाए रखना था। नई तकनीक ने इस दिशा में संभावनाएँ दिखाईं।
क्या मानसिक तनाव और थकान का पता चल सकता है?
वैज्ञानिक मस्तिष्क और आँखों के संकेतों के माध्यम से मानसिक कार्यभार का अनुमान लगाने पर भी शोध कर रहे हैं। लगातार कठिन गणना करना, एक साथ कई सूचनाओं पर ध्यान देना या लंबे समय तक जटिल काम करना मानसिक प्रयास की माँग करता है। ऐसी परिस्थितियों में मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि और आँखों की गति में बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
मई 2025 में 'नेचर' में प्रकाशित एक अध्ययन में माथे पर लगाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक टैटू की चर्चा हुई। यह मस्तिष्क और आँखों से संबंधित विद्युत संकेत रिकॉर्ड करके मानसिक कार्यभार का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। भविष्य में ऐसी तकनीक विमान संचालन, जटिल मशीनों के नियंत्रण और अन्य ऐसे कामों में उपयोगी हो सकती है जहाँ लगातार सतर्क रहना जरूरी है।
क्या ये मांसपेशियों की गतिविधियाँ भी माप सकते हैं?
मनुष्य जब हाथ उठाता है, चलता है या चेहरे की मांसपेशियाँ सक्रिय करता है, तो मांसपेशियों में विद्युत गतिविधि होती है। इसे इलेक्ट्रोमायोग्राफी यानी ईएमजी से रिकॉर्ड किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक टैटू के लचीले इलेक्ट्रोड त्वचा के ऊपर से इन संकेतों को ग्रहण कर सकते हैं। इससे मांसपेशियों की सक्रियता का अध्ययन और कृत्रिम अंगों के नियंत्रण जैसी तकनीकें विकसित की जा सकती हैं।
उदाहरण के लिए, हाथ की किसी मांसपेशी के विशेष विद्युत पैटर्न को पहचानकर कंप्यूटर को आदेश दिया जा सकता है। इससे ऐसे सहायक उपकरण बनाने की संभावना है जो शारीरिक रूप से सीमित लोगों को मशीनों से संवाद करने में मदद करें।
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में तरल धातु आधारित इलेक्ट्रॉनिक टैटू से ईसीजी, ईईजी, ईएमजी और आँखों की गतिविधियों से संबंधित संकेत दर्ज करने का प्रदर्शन किया गया। शोधकर्ताओं ने आँखों की आठ प्रकार की गतियों को पहचानकर कंप्यूटर गेम नियंत्रित करने का प्रयोग भी किया। हालाँकि प्रयोगशाला में मिली सफलता को हर परिस्थिति में समान प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जा सकता।
पसीने से शरीर की रासायनिक स्थिति का पता कैसे चलता है?
इलेक्ट्रॉनिक टैटू का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र जैवरासायनिक सेंसर हैं। ये पसीने में मौजूद कुछ पदार्थों की मात्रा का अनुमान लगा सकते हैं। पसीने में सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड जैसे इलेक्ट्रोलाइट के अलावा लैक्टेट, यूरिया, ग्लूकोज और कुछ अन्य जैविक पदार्थ भी पाए जाते हैं। वैज्ञानिक ऐसे सेंसर बना रहे हैं जो इन पदार्थों के संपर्क में आने पर अपनी विद्युत या रासायनिक प्रतिक्रिया बदलते हैं। इस बदलाव को मापकर संबंधित पदार्थ की सांद्रता का अनुमान लगाया जा सकता है।
कुछ सेंसरों में एंजाइम का इस्तेमाल होता है, जो किसी विशेष पदार्थ के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। कुछ में विशेष पॉलिमर और अन्य संवेदनशील सामग्री उपयोग की जाती हैं। सितंबर 2025 में 'एसीएस मैटेरियल्स लेटर्स' में प्रकाशित समीक्षा में पसीने के इलेक्ट्रोलाइट, लैक्टेट, ग्लूकोज और कॉर्टिसोल जैसे जैविक संकेतकों को मापने वाले सेंसरों की चर्चा की गई।
क्या बिना सुई के ब्लड शुगर माप सकता है?
मधुमेह से प्रभावित लोगों के लिए बिना बार-बार उँगली में सुई चुभाए शुगर की निगरानी बेहद उपयोगी होगी। वैज्ञानिक पसीने और त्वचा के आसपास मौजूद दूसरे शारीरिक द्रवों में ग्लूकोज मापने वाले सेंसर विकसित कर रहे हैं। लेकिन रक्त और पसीने में ग्लूकोज की मात्रा समान नहीं होती। पसीने की मात्रा, उसके बनने की गति और त्वचा की स्थिति जैसे कारक परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पसीने में ग्लूकोज मापने वाला सेंसर अपने आप मधुमेह के उपचार संबंधी निर्णयों के लिए विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
मई 2026 में 'नेचर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग' में प्रकाशित एक अध्ययन में वायरलेस त्वचा-सेंसर से कॉर्टिसोल, यूरिया, लैक्टेट और ग्लूकोज की एक साथ निगरानी का प्रदर्शन किया गया। निर्धारित परीक्षण परिस्थितियों में इसे 21 दिनों तक उपयोग करने की क्षमता भी दिखाई गई।
क्या इलेक्ट्रॉनिक टैटू रक्तचाप माप सकता है?
कुछ प्रयोगात्मक सेंसर रक्तवाहिकाओं की धड़कन और त्वचा के नीचे के ऊतकों में होने वाले बदलाव दर्ज कर सकते हैं। इन संकेतों से रक्तचाप का अनुमान लगाने पर भी शोध हो रहा है। लेकिन रक्तचाप मापना केवल दिल की धड़कन गिनना नहीं है। इसके लिए रक्तवाहिकाओं के दबाव से संबंधित विश्वसनीय जानकारी जरूरी है। शरीर की स्थिति, तापमान और व्यक्ति विशेष की शारीरिक बनावट भी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए कोई टैटू धड़कन की तरंगें माप ले, तो इससे यह साबित नहीं होता कि वह अस्पताल के प्रमाणित रक्तचाप उपकरण जितना सटीक है। फिलहाल अप्रमाणित टैटू-सेंसर के आँकड़ों के आधार पर उच्च रक्तचाप का निदान या दवा की खुराक तय करना उचित नहीं होगा।
इलेक्ट्रॉनिक टैटू किन पदार्थों से बनते हैं?
इस तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती ऐसी सामग्री विकसित करना है जो विद्युत संकेतों को अच्छी तरह संचालित करे और त्वचा की तरह लचीली भी हो।
इसके लिए वैज्ञानिक ग्राफीन, सोने की बेहद पतली परतों, विशेष पॉलिमर, तरल धातुओं और चालक स्याही का उपयोग कर रहे हैं।
ग्राफीन कार्बन परमाणुओं की एक अत्यंत पतली परत है। इसके विद्युत और यांत्रिक गुण इसे इलेक्ट्रॉनिक टैटू के लिए उपयोगी बनाते हैं। सोना अच्छा विद्युत चालक है और अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। इसके अलावा पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट यानी पीईटी तथा पॉलीयूरीथेन जैसे लचीले पॉलिमर भी उपयोग किए जाते हैं।
सामग्री चुनते समय केवल विद्युत चालकता नहीं देखी जाती। त्वचा के साथ अनुकूलता, खिंचाव सहने की क्षमता, नमी और हवा को गुजरने देने की विशेषता तथा लंबे समय तक स्थिरता भी महत्त्वपूर्ण हैं।
प्रयोगशाला में इलेक्ट्रॉनिक टैटू कैसे बनता है?
सबसे पहले वैज्ञानिक तय करते हैं कि टैटू से कौन-सा संकेत मापना है। दिल की गतिविधि के लिए इलेक्ट्रोड, तापमान के लिए संवेदनशील परत और पसीने के रसायनों के लिए जैवरासायनिक सेंसर की जरूरत होती है।
इसके बाद कंप्यूटर पर सर्किट का डिजाइन बनाया जाता है। कई बार चालक रेखाएँ सीधी रखने के बजाय घुमावदार बनाई जाती हैं। इन्हें 'सर्पेंटाइन पैटर्न' कहते हैं। त्वचा खिंचने पर ये रेखाएँ कुछ हद तक फैल सकती हैं, जिससे सर्किट टूटने का खतरा घटता है।
फिर चुनी हुई सामग्री की बेहद पतली परत किसी अस्थायी आधार पर तैयार की जाती है। धातु जमा करके, ग्राफीन की परत स्थानांतरित करके या चालक स्याही से डिजाइन छापकर सर्किट बनाया जा सकता है। इसके बाद इसे विशेष ट्रांसफर पेपर या लचीले आधार की मदद से त्वचा पर लगाया जाता है। 2018 के एक शोध में वैज्ञानिकों ने टैटू पेपर, लगभग 1.4 माइक्रोमीटर मोटी पारदर्शी पीईटी फिल्म और सोने-क्रोमियम की पतली परतों से लगभग 1.5 माइक्रोमीटर मोटा इलेक्ट्रॉनिक टैटू बनाया था।
ग्राफीन का टैटू त्वचा से कैसे चिपकता है?
टेक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ग्राफीन आधारित ऐसे इलेक्ट्रॉनिक टैटू विकसित किए जिन्हें अस्थायी टैटू की तरह त्वचा पर लगाया जा सकता है। 2017 में 'एसीएस नैनो' में प्रकाशित शोध के अनुसार, उस समय विकसित ग्राफीन टैटू की मोटाई लगभग 463 नैनोमीटर थी और उसमें करीब 85 प्रतिशत प्रकाश पारदर्शिता थी। इसे 40 प्रतिशत से अधिक खिंचाव सहने के लिए डिजाइन किया गया था।
इतनी पतली फिल्म त्वचा की सूक्ष्म असमानताओं के अनुरूप बैठ सकती है। कुछ स्थितियों में सतहों के बीच काम करने वाले वान डर वाल्स बल भी इसे चिपके रहने में मदद करते हैं। अन्य डिजाइनों में विशेष चिपकने वाले पदार्थ या पॉलिमर का इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि त्वचा स्थिर सतह नहीं है। वह पसीना छोड़ती है, खिंचती है और उसकी बाहरी कोशिकाएँ लगातार बदलती रहती हैं। इसलिए लंबे समय तक टिके रहना इस तकनीक की बड़ी चुनौती है।
क्या इलेक्ट्रॉनिक टैटू सीधे त्वचा पर छापा जा सकता है?
कुछ वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिसमें पहले से तैयार फिल्म चिपकाने के बजाय विशेष चालक स्याही से सीधे त्वचा पर सेंसर बनाया जाता है।
दिसंबर 2024 में टेक्सास यूनिवर्सिटी ऑस्टिन के शोधकर्ताओं ने सिर की त्वचा पर विशेष इलेक्ट्रॉनिक स्याही छापकर ईईजी संकेत रिकॉर्ड करने की तकनीक प्रस्तुत की। इससे बालों के बीच सेंसर का संपर्क बनाए रखने की समस्या से निपटने की संभावना दिखाई गई।
सितंबर 2026 में प्रकाशित एक अन्य शोध में स्प्रे की मदद से त्वचा पर चालक नेटवर्क तैयार करने की तकनीक सामने आई। इसमें लिपोइक एसिड, टैनिक एसिड और चाँदी के महीन कणों से संबंधित सामग्री का उपयोग किया गया। निर्धारित प्रक्रिया में लगभग तीन मिनट में त्वचा के अनुरूप चालक परत बनाने का प्रदर्शन किया गया।
टैटू मोबाइल फोन तक जानकारी कैसे पहुँचाता है?
त्वचा से संकेत प्राप्त करना पहला चरण है। उन्हें उपयोगी जानकारी में बदलने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की मदद ली जाती है। यह संकेतों को बढ़ाता है, अनावश्यक विद्युत शोर घटाता है और उन्हें डिजिटल रूप में बदलता है।
इसके बाद जानकारी किसी बाहरी मॉड्यूल के जरिए मोबाइल या कंप्यूटर तक पहुँचाई जा सकती है। इसमें ब्लूटूथ जैसी वायरलेस संचार तकनीक का इस्तेमाल संभव है। कुछ शोधों में बैटरी के बिना काम करने वाली प्रणालियों पर भी प्रयोग हुए हैं, जो बाहरी रेडियो ऊर्जा या दूसरी प्रक्रियाओं से ऊर्जा प्राप्त कर सकती हैं। हालाँकि अत्यंत पतले टैटू में बड़ी बैटरी, शक्तिशाली प्रोसेसर और संचार उपकरण लगाना कठिन है। इसलिए कई प्रणालियों में त्वचा पर लगा हिस्सा केवल सेंसर होता है, जबकि बाकी इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था अलग रहती है।
क्या यह स्मार्टवॉच से अधिक उपयोगी होगा?
स्मार्टवॉच में बैटरी, प्रोसेसर, स्क्रीन और सेंसर एक ही उपकरण में होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक टैटू का उद्देश्य त्वचा के साथ अधिक निकट संपर्क बनाना है। इससे ईसीजी, ईईजी और ईएमजी जैसे संकेतों की रिकॉर्डिंग में कुछ लाभ मिल सकते हैं। त्वचा के साथ बेहतर संपर्क होने पर शरीर की गति से पैदा होने वाली बाधाएँ कम हो सकती हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर इलेक्ट्रॉनिक टैटू स्मार्टवॉच से अधिक सटीक होगा। स्मार्टवॉच के कई मॉडल व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं और उनका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इसके विपरीत अनेक इलेक्ट्रॉनिक टैटू अभी प्रयोगात्मक हैं। भविष्य में दोनों एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। उदाहरण के लिए त्वचा पर लगा सेंसर स्मार्टफोन या स्मार्टवॉच को अतिरिक्त स्वास्थ्य-संबंधी जानकारी दे सकता है।
क्या इलेक्ट्रॉनिक टैटू कई दिनों तक काम कर सकता है?
यह उसकी सामग्री, ऊर्जा स्रोत और त्वचा से संपर्क की व्यवस्था पर निर्भर करता है। कुछ शुरुआती टैटू केवल कुछ घंटों तक स्थिर रूप से काम कर पाते थे। बाद के शोधों में उनकी उपयोग अवधि बढ़ाने के प्रयास हुए हैं।
पसीना, शरीर की लगातार गति और त्वचा की बाहरी कोशिकाओं का प्राकृतिक रूप से निकलना इनके लिए चुनौती हैं। सेंसर का संपर्क बदलने से उसके संकेतों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में तरल धातु आधारित टैटू को त्वचा की गति और पसीने के बीच अधिक स्थिर रखने की तकनीक दिखाई गई। लेकिन प्रयोगशाला में बार-बार मुड़ने के बाद भी काम करना और वास्तविक त्वचा पर महीनों तक सुरक्षित रहना अलग बातें हैं। लंबे समय तक उपयोग के लिए अधिक परीक्षण जरूरी हैं।
क्या इलेक्ट्रॉनिक टैटू शरीर के भीतर भी लगाया जाता है?
यहाँ दो तकनीकों में अंतर समझना जरूरी है। अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक टैटू त्वचा की बाहरी सतह पर लगाए जाते हैं। इन्हें एपिडर्मल इलेक्ट्रॉनिक्स कहते हैं।
दूसरी ओर, कुछ शोधों में त्वचा की गहरी परतों में ऐसे पदार्थों का अध्ययन किया जा रहा है जो किसी जैविक रसायन के संपर्क में आने पर रंग या प्रकाश संबंधी प्रतिक्रिया बदल सकते हैं। इन्हें कुछ संदर्भों में डर्मल टैटू कहा जाता है।
ये दोनों अलग तकनीकें हैं। त्वचा के भीतर लगाए जाने वाले जैविक सेंसर अभी शुरुआती अनुसंधान के स्तर पर हैं। व्यापक मानव उपयोग के लिए उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता सिद्ध होना बाकी है। इसलिए सभी इलेक्ट्रॉनिक टैटू को शरीर के भीतर लगाई जाने वाली चिप बताना गलत होगा।
क्या इनसे एलर्जी या जलन हो सकती है?
लंबे समय तक त्वचा के संपर्क में रहने वाले किसी भी पदार्थ से कुछ लोगों को जलन या एलर्जी हो सकती है। चिपकने वाले पदार्थ, धातुएँ और पॉलिमर इसके कारण बन सकते हैं। यदि टैटू त्वचा से नमी के सामान्य वाष्पीकरण में बाधा डाले, तो भी असुविधा हो सकती है।
इसलिए वैज्ञानिक ऐसे पतले और छिद्रयुक्त आधार विकसित कर रहे हैं जिनसे त्वचा का सामान्य वातावरण कम प्रभावित हो। चिकित्सकीय उपयोग से पहले सामग्री की जैविक सुरक्षा, संक्रमण का जोखिम, सफाई और सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया का परीक्षण भी जरूरी है।
क्या इलेक्ट्रॉनिक टैटू से निजी जानकारी चोरी हो सकती है?
यह तकनीक का एक गंभीर सामाजिक पक्ष है। उन्नत इलेक्ट्रॉनिक टैटू हृदय, मस्तिष्क और मांसपेशियों की गतिविधियों के विस्तृत संकेत रिकॉर्ड कर सकते हैं। यदि ये आँकड़े डिजिटल रूप में संग्रहीत या इंटरनेट के जरिए भेजे जाएँ, तो उनकी सुरक्षा का सवाल उठेगा।
इनसे व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि, थकान और कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है। भविष्य में ऐसे डेटा का उपयोग बीमा, कार्यस्थलों या अन्य संस्थागत व्यवस्थाओं में होने लगे, तो स्पष्ट सहमति और निजता की सुरक्षा जरूरी होगी। यहाँ वास्तविक चिंता संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा के दुरुपयोग की है। ईईजी रिकॉर्ड करने वाला टैटू किसी व्यक्ति के मन में छिपे सारे विचार पढ़ सकता है, ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
क्या अस्पतालों में इनका इस्तेमाल शुरू हो गया है?
त्वचा से जुड़े इलेक्ट्रोड और पहनने योग्य मेडिकल सेंसर पहले से उपयोग में हैं। ईसीजी पैच और हृदय की निरंतर निगरानी करने वाले उपकरण इसके उदाहरण हैं। लेकिन हर मेडिकल पैच को इलेक्ट्रॉनिक टैटू नहीं कहा जा सकता। अत्यंत पतली ग्राफीन फिल्म और सामान्य चिपकने वाले पैच तकनीकी रूप से अलग हैं।
अध्ययनों के अनुसार, अत्यंत पतले, छापे जाने वाले और ग्राफीन आधारित अनेक इलेक्ट्रॉनिक टैटू अभी अनुसंधान तथा सीमित मानव परीक्षणों के स्तर पर हैं। कुछ प्रणालियाँ वास्तविक मानव संकेत रिकॉर्ड कर चुकी हैं, लेकिन प्रयोग में सफलता और नियमित चिकित्सकीय उपयोग की मंजूरी एक समान नहीं हैं।
भविष्य में कहाँ उपयोगी हो सकते हैं?
इलेक्ट्रॉनिक टैटू की सबसे बड़ी संभावना शरीर की लगातार और कम असुविधा वाली निगरानी में है। हृदय रोगियों की गतिविधियों के दौरान हृदय संबंधी संकेत रिकॉर्ड करना, पुनर्वास के दौरान मांसपेशियों की सक्रियता मापना और कुछ तंत्रिका संबंधी स्थितियों में मस्तिष्क की गतिविधि पर नजर रखना इसके संभावित उपयोग हैं।
खेल विज्ञान में मांसपेशियों की गतिविधि, त्वचा का तापमान और पसीने के कुछ घटकों की निगरानी भी उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा, आँखों और मांसपेशियों के संकेतों को कंप्यूटर के आदेशों में बदलकर विशेष जरूरत वाले लोगों के लिए सहायक उपकरण विकसित किए जा सकते हैं। हालाँकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कौन-सी प्रयोगात्मक तकनीक कितने समय में सस्ती, विश्वसनीय और आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी।
त्वचा : भविष्य का इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस
इलेक्ट्रॉनिक टैटू विज्ञान और चिकित्सा के बीच उभरती ऐसी तकनीक है जो मानव त्वचा को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जोड़ने का नया तरीका प्रस्तुत करती है। इसमें ग्राफीन, सोने की पतली परतों, लचीले पॉलिमर और चालक स्याही से बने सेंसर शरीर की विद्युत, यांत्रिक, तापीय और कुछ रासायनिक गतिविधियों को माप सकते हैं।
इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि केवल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को छोटा बनाना नहीं, बल्कि उन्हें त्वचा की तरह लचीला और शरीर की गतिविधियों के अनुरूप बनाना है।
फिर भी इसकी सीमाएँ स्पष्ट हैं। हर इलेक्ट्रॉनिक टैटू रक्तचाप या रक्त शर्करा का प्रमाणित मापन नहीं कर सकता। यह किसी व्यक्ति के विचार नहीं पढ़ सकता और न ही अभी अस्पतालों की सभी जाँच मशीनों का विकल्प है। चिकित्सकीय उपयोग से पहले इसकी सटीकता, सुरक्षा और दीर्घकालिक विश्वसनीयता साबित करनी होगी।
इस तकनीक का वास्तविक उद्देश्य डॉक्टरों और अस्पतालों को अप्रासंगिक बनाना नहीं, बल्कि उन्हें मरीज के स्वास्थ्य की अधिक निरंतर और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। संभव है कि भविष्य में शरीर की निगरानी करने वाले कुछ उपकरण कलाई पर पहनने के बजाय त्वचा पर अस्थायी टैटू की तरह लगाए जाएँ।
विज्ञान उस दिशा में बढ़ रहा है जहाँ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शरीर से अधिक सहजता से जुड़ सकेंगे। इस बदलाव में इलेक्ट्रॉनिक टैटू की महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। लेकिन इसकी सफलता का पैमाना इसका चमत्कारिक दिखना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा और निजता के क्षेत्र में इससे मिलने वाला प्रमाणित लाभ होगा।


