EV में आग बुझाना क्यों है सबसे बड़ी चुनौती? पेट्रोल कार से कितना अलग है तरीका, जानिए पूरी वजह

EV Fire vs Petrol Car: EV में आग लगने पर क्यों बदल जाता है फायरफाइटिंग का तरीका? जानें पूरी वजह।

Jyotsana Singh
Published on: 8 July 2026 9:01 AM IST
EV Fire vs Petrol Car
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EV Fire vs Petrol Car 

EV Fire vs Petrol Car: भारत में अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस पेट्रोल डीजल के मुकाबले ईंधन के मामले में बजट फ्रेंडली साबित होने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और सरकार की ईवी को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण लोग बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक कारें खरीद रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही अक्सर इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लग जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। जिसकों लेकर EV वाहन निर्माताओं और सरकार द्वारा कई तरह की हिदायतें और सावधानियां बरतने को लेकर विज्ञापन और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के साथ यह जानकारी होना भी बेहद जरूरी है कि अगर इलेक्ट्रिक कार में आग लग जाए तो क्या उसे उसी तरह बुझाया जा सकता है जैसे पेट्रोल कार की आग बुझाई जाती है? विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन की आग सामान्य वाहन की आग से कहीं अधिक जटिल होती है। इसकी वजह लिथियम-आयन बैटरी में होने वाली एक खतरनाक प्रक्रिया है, जिसे थर्मल रनअवे (Thermal Runaway) कहा जाता है। यही कारण है कि ईवी में लगी आग बुझाने के लिए अलग रणनीति, ज्यादा समय और कई गुना अधिक पानी की जरूरत पड़ती है।

पेट्रोल कार और EV की आग में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कारों में आग लगने की सबसे आम वजह ईंधन का रिसाव, इंजन का अधिक गर्म होना या किसी दुर्घटना के बाद फ्यूल सिस्टम का क्षतिग्रस्त होना होती है। ऐसी स्थिति में आग मुख्य रूप से ईंधन और ऑक्सीजन के संपर्क से फैलती है। इसलिए फायर ब्रिगेड फोम, ड्राई केमिकल या पानी की मदद से आग पर जल्दी काबू पा सकती है।

इसके उलट इलेक्ट्रिक कार की आग का केंद्र उसकी लिथियम-आयन बैटरी होती है। यदि बैटरी को गंभीर झटका लगे, अंदर शॉर्ट सर्किट हो जाए या निर्माण संबंधी कोई खराबी हो, तो बैटरी के सेल तेजी से गर्म होने लगते हैं। यही स्थिति थर्मल रनअवे कहलाती है।

क्या होता है थर्मल रनअवे?

थर्मल रनअवे एक ऐसी रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें बैटरी का एक सेल अत्यधिक गर्म होकर आसपास के दूसरे सेल को भी गर्म कर देता है। देखते ही देखते पूरी बैटरी इस चेन रिएक्शन की चपेट में आ जाती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बैटरी के अंदर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया के दौरान ऑक्सीजन भी निकल सकती है। इसलिए केवल ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देने से आग नहीं बुझती। जब तक बैटरी का तापमान लगातार कम नहीं किया जाता, तब तक आग दोबारा भड़क सकती है।

बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है तापमान

एक सामान्य पेट्रोल कार में लगी आग का तापमान लगभग 600 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच सकता है। वहीं थर्मल रनअवे की स्थिति में इलेक्ट्रिक कार की बैटरी का तापमान 1200 से 2000 डिग्री फॉरेनहाइट या उससे भी अधिक हो सकता है। इतनी ज्यादा गर्मी के कारण बैटरी पैक फट सकता है और तेज लपटों के साथ छोटे-छोटे विस्फोट भी हो सकते हैं। यही वजह है कि राहत और बचाव कार्य करने वाले कर्मियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

ईवी की आग से निकलती हैं जहरीली गैसें

इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी जलने के दौरान केवल धुआं ही नहीं निकलता बल्कि हाइड्रोजन फ्लोराइड (Hydrogen Fluoride) जैसी जहरीली गैसें भी निकल सकती हैं। इन गैसों का अधिक संपर्क आंखों, त्वचा और फेफड़ों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी कारण फायर ब्रिगेड के जवान ईवी में लगी आग बुझाते समय विशेष सुरक्षा उपकरण और रेस्पिरेटर मास्क का इस्तेमाल करते हैं।

क्यों लग जाता है हजारों लीटर पानी?

पेट्रोल कार में लगी आग बुझाने के लिए आमतौर पर 1,000 से 2,000 लीटर पानी पर्याप्त माना जाता है। इलेक्ट्रिक कार की आग में लक्ष्य केवल लपटों को बुझाना नहीं, बल्कि पूरी बैटरी को ठंडा करना होता है। इसी वजह से कई मामलों में 10,000 से 40,000 लीटर तक पानी का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। फायरफाइटर्स घंटों तक लगातार बैटरी पैक पर पानी डालते रहते हैं ताकि उसका तापमान सुरक्षित स्तर तक आ सके।

आग बुझने के बाद भी बना रहता है खतरा

ईवी में लगी आग की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि खतरा आग बुझने के बाद भी खत्म नहीं होता।

बैटरी के अंदर बची हुई ऊर्जा की वजह से कई बार घंटों या कई दिनों बाद भी दोबारा धुआं या आग निकल सकती है। इसी कारण कई देशों में गंभीर रूप से जली हुई इलेक्ट्रिक कार को बड़े पानी के टैंक में डुबोकर रखा जाता है ताकि बैटरी पूरी तरह ठंडी हो जाए और दोबारा आग न लगे।

क्या इलेक्ट्रिक कारें ज्यादा खतरनाक हैं?

सिर्फ आग की घटनाओं के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल कारों से ज्यादा असुरक्षित हैं। कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पाया गया है कि कुल वाहनों की संख्या के मुकाबले पेट्रोल और डीजल वाहनों में आग लगने की घटनाएं अब भी अधिक होती हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यदि किसी इलेक्ट्रिक वाहन में आग लगती है तो उसे नियंत्रित करना पारंपरिक वाहन की तुलना में कहीं अधिक कठिन और समय लेने वाला हो सकता है।

अगर EV में आग लग जाए तो क्या करें?

यदि किसी इलेक्ट्रिक कार से धुआं निकलता दिखे या बैटरी में आग लग जाए तो सबसे पहले वाहन से सुरक्षित दूरी बना लें और सभी यात्रियों को तुरंत बाहर निकालें। आग बुझाने की कोशिश तभी करें जब शुरुआती स्तर पर सुरक्षित रूप से संभव हो। तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दें और उन्हें यह जरूर बताएं कि वाहन इलेक्ट्रिक है, ताकि वे उसी के अनुरूप उपकरण और रणनीति के साथ मौके पर पहुंच सकें। बैटरी में दोबारा आग लगने की आशंका को देखते हुए जली हुई ईवी के पास अनावश्यक रूप से जाने से भी बचना चाहिए।भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य लगातार मजबूत हो रहा है, लेकिन इनके साथ जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को समझना भी उतना ही जरूरी है। पेट्रोल कार और इलेक्ट्रिक कार की आग देखने में भले एक जैसी लगे, लेकिन दोनों की प्रकृति और उन्हें बुझाने का तरीका पूरी तरह अलग होता है। इसलिए किसी भी ईवी में आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय सही सुरक्षा उपाय अपनाना और प्रशिक्षित राहतकर्मियों की मदद लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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