Gaming Consoles महंगे क्यों हो रहे हैं? AI, RAM-GPU संकट और PS5-Xbox की कीमत

PlayStation, Xbox और Steam Deck की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानिए AI Boom, RAM, GPU, SSD, चिप संकट, लॉजिस्टिक्स और टैरिफ का गेमिंग कंसोल पर असर।

Yogesh Mishra
Published on: 10 Aug 2026 7:20 PM IST
Gaming Console Price Hike
X

Gaming Console Price Hike

Gaming Console Price Hike: कंसोल गेमिंग के इतिहास में एक पुराना नियम लगभग उलट गया है। पहले नया PlayStation, Xbox या Nintendo कंसोल जब बाजार में आता था तो शुरुआती वर्षों में वह महँगा होता था, लेकिन जैसे-जैसे उसकी निर्माण तकनीक पुरानी होती, चिप का आकार छोटा होता, उत्पादन बढ़ता और कंपनियाँ लागत घटाना सीखतीं, उसी हार्डवेयर की कीमत धीरे-धीरे कम होने लगती थी। कभी Slim मॉडल आता, कभी बंडल में गेम मिलते और कभी त्योहारों पर भारी छूट। आज स्थिति ऐसी है कि छह साल पुराना PlayStation 5 पहले से महँगा हो रहा है, Xbox Series X|S की कीमत लॉन्च के वर्षों बाद तेजी से बढ़ रही है, Nintendo ने केवल एक वर्ष पुराने Switch 2 की कीमत बढ़ाने की घोषणा कर दी है और Valve ने Steam Deck OLED की कीमतों में बहुत बड़ी छलांग लगा दी है। यानी तकनीक पुरानी हो रही है, लेकिन हार्डवेयर सस्ता होने के बजाय महँगा हो रहा है। यह केवल गेम कंपनियों की लालच की सरल कहानी नहीं है; इसके पीछे AI क्रांति, मेमोरी बाजार, SSD की लागत, चिप निर्माण, मुद्रा विनिमय, लॉजिस्टिक्स, टैरिफ और कंसोल उद्योग का अनोखा व्यापार मॉडल एक साथ काम कर रहे हैं।

Sony ने दाम बढ़ाने के पीछे लगातार बने वैश्विक आर्थिक दबाव को कारण बताया है। Microsoft के अनुसार कंसोल में इस्तेमाल होने वाले स्टोरेज और मेमोरी घटकों की लागत 2.5 गुना से अधिक बढ़ चुकी है। उसने यह भी कहा कि पूरी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पुरके के संकट से जूझ रही है और कंसोल पर इसका असर विशेष रूप से गंभीर है।

Nintendo ने दाम बढ़ाने के पीछे बाजार परिस्थितियों में विभिन्न बदलावों का हवाला दिया है। नई कीमतें उद्योग भर में घटकों की वर्तमान लागत और वैश्विक लॉजिस्टिक चुनौतियों को दर्शाती हैं। यानी ग्राहक अधिक पैसे देकर बेहतर नया Deck नहीं खरीद रहा—वही मशीन बनाने की लागत महँगी हो गई है।

गेम कंसोल होता क्या है?

सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि गेम कंसोल वास्तव में होता क्या है। बाहर से PlayStation या Xbox एक प्लास्टिक बॉक्स दिखाई देता है, लेकिन भीतर वह अत्यधिक एकीकृत कंप्यूटर है। उसमें CPU, GPU, RAM, SSD या फ्लैश स्टोरेज, मदरबोर्ड, पावर सप्लाई, वायरलेस चिप, कूलिंग सिस्टम और अनेक नियंत्रक होते हैं। PlayStation 5 और Xbox Series X|S में AMD की तकनीक पर आधारित कस्टम semi-custom SoC इस्तेमाल होता है, जिसमें CPU और GPU कार्य एक ही मुख्य चिप डिजाइन में बहुत गहराई से एकीकृत हैं। AMD स्वयं अपने semi-custom व्यवसाय को गेम कंसोल जैसे उत्पादों के लिए विशेष SoC समाधान के रूप में संचालित करता है। इसलिए PC की तरह इसमें “अलग GPU कार्ड निकालकर सस्ता कार्ड लगा दें” वाला विकल्प नहीं होता। पूरी मशीन को निश्चित प्रदर्शन लक्ष्य पर डिजाइन किया जाता है और लाखों इकाइयों के उत्पादन अनुबंध वर्षों पहले तय होते हैं।

रैम की किलात

अब रैम (RAM) की किल्लत’ समझिए। RAM वह तेज मेमोरी है जिसमें गेम चलाते समय CPU और GPU के लिए तत्काल आवश्यक डेटा रखा जाता है। आधुनिक गेम में विशाल texture, geometry, physics state और दूसरे अस्थायी डेटा लगातार RAM से आते-जाते रहते हैं। PlayStation और Xbox जैसे कंसोल विशेष उच्च-बैंडविड्थ वाली ग्राफिक्स मेमोरी का उपयोग करते हैं। Steam Deck जैसे handheld में LPDDR श्रेणी की तेज मेमोरी होती है। उसी समय पूरी दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए विशाल डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं और उनमें सामान्य सर्वर RAM के साथ HBM यानी High Bandwidth Memory की मांग विस्फोटक रूप से बढ़ी है। HBM वही मेमोरी नहीं है जो PS5 में सीधे लगी है, लेकिन उसे बनाने वाली प्रमुख कंपनियाँ Samsung, SK hynix और Micron जैसी कंपनियाँ अपनी पूँजी, उत्पादन क्षमता और उन्नत विनिर्माण संसाधनों का अधिक बड़ा हिस्सा AI और सर्वर उत्पादों की ओर लगा रही हैं। इसका परिणाम यह है कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपलब्ध पारंपरिक DRAM की आपूर्ति भी तंग पड़ती है।

यहीं AI का कंसोल की कीमत से वास्तविक संबंध बनता है। यह कहना गलत होगा कि Nvidia की AI GPU बनाने के लिए PlayStation की GPU उठा ली गई। PlayStation की कस्टम AMD चिप और Nvidia का डेटा सेंटर GPU एक ही उत्पाद नहीं हैं। वास्तविक संबंध आपूर्ति श्रृंखला के स्तर पर है। AI उद्योग अधिक HBM, अधिक DDR5, अधिक enterprise NAND, अधिक उन्नत पैकेजिंग और अधिक चिप उत्पादन क्षमता खरीद रहा है। मेमोरी निर्माता स्वाभाविक रूप से उस बाजार को प्राथमिकता देते हैं जहाँ मांग और लाभ दोनों अधिक हैं।

यह सब किसी षड्यंत्र का परिणाम नहीं, बल्कि बाजार अर्थशास्त्र है। यदि एक AI डेटा सेंटर ग्राहक बहुत बड़ी मात्रा में उच्च लाभ वाली मेमोरी खरीदने को तैयार है, तो निर्माता सीमित उत्पादन क्षमता उसी दिशा में लगाना चाहेगा। नतीजे में कंसोल कंपनी को अपनी मेमोरी के लिए अधिक कीमत देनी पड़ सकती है।

एसएसडी का भी संकट

और केवल रैम (RAM ) नहीं बल्कि एसएसडी (SSD) भी समस्या है। आज के PlayStation और Xbox पुराने युग की धीमी हार्ड डिस्क पर आधारित नहीं हैं। PS5 और Xbox Series मशीनों का पूरा गेम डिजाइन ही तेज solid-state storage पर निर्भर है। गेम सीधे SSD से विशाल मात्रा में डेटा पढ़ते हैं। SSD की मूल स्मृति NAND Flash से बनती है। AI और क्लाउड डेटा सेंटर केवल HBM और DRAM ही नहीं खरीदते; उन्हें enormous storage यानी विशाल SSD क्षमता भी चाहिए। TrendForce ने 2026 में बताया कि NAND उत्पादन क्षमता का अधिक हिस्सा enterprise SSD की ओर जा रहा है और consumer applications लागत दबाव के कारण पीछे हट रहे हैं। गेम कंसोल उद्योग के सामने समस्या केवल अस्थायी “चिप शॉर्टेज” नहीं, बल्कि उसके पूरे लागत मॉडल के टूटने की है।

जीपीयू का सनकत कहाँ से आया?

जीपीयू (GPU) का संकट फिर कहाँ आता है? गेमिंग GPU और AI accelerator दोनों semiconductor foundries, advanced packaging, substrates और memory supply chain पर निर्भर हैं। Nvidia और AMD के अत्याधुनिक AI chips की मांग ने semiconductor उद्योग में उच्च प्रदर्शन वाले उत्पादों के लिए निवेश को आकर्षित किया है। इसका सीधा अर्थ यह नहीं कि PS5 का AMD GPU बनना बंद हो गया, लेकिन जब पूरी semiconductor supply chain में सबसे अधिक पूँजी और उत्पादन वृद्धि AI की ओर जा रही हो तो consumer gaming कंपनियों की bargaining power प्रभावित हो सकती है। इसके साथ TSMC जैसी foundry में advanced nodes की लागत, पैकेजिंग और wafer costs भी महत्वपूर्ण हैं। कंसोल मूल्य संकट का अधिक ठोस और प्रत्यक्ष कारण मेमोरी तथा स्टोरेज है, जबकि व्यापक semiconductor और AI GPU boom उसका बड़ा पृष्ठभूमि दबाव है।

बिजनेस मॉडल भी कम जिम्मेदार नहीं

कंसोल उद्योग की दूसरी बड़ी समस्या उसका व्यापार मॉडल है। Smartphone निर्माता अक्सर फोन हार्डवेयर पर अच्छा gross margin रखता है। लेकिन game console लंबे समय से “razor and blades” जैसा व्यवसाय रहा है—मशीन कम margin या कभी शुरुआती वर्षों में लागत के आसपास या उससे नीचे बेची जाती है, क्योंकि असली कमाई बाद में games, digital store commission, subscription और accessories से आती है। Microsoft ने अपने जून 2026 मूल्यवृद्धि वक्तव्य में असाधारण रूप से स्पष्ट कहा कि phones, computers और speakers के विपरीत consoles सामान्यतः profit पर नहीं, बल्कि अक्सर उन्हें बनाने की लागत से नीचे बेचे जाते हैं। इसलिए यदि एक स्मार्टफोन की component cost 40 डॉलर बढ़ती है तो निर्माता अपने margin से कुछ हिस्सा सह सकता है; यदि किसी console पर hardware margin पहले ही बहुत छोटा है तो वही 40 डॉलर सीधे business model बिगाड़ सकता है।

Sony भी इसी दिशा में सोचता है। फरवरी 2026 में उसने कहा कि PS5 अपने lifecycle के छठे वर्ष में है और अब उसके gaming business की अधिकांश आय software sales और network services से आती है, जिन्हें memory prices सीधे प्रभावित नहीं करतीं। इसका अर्थ यह है कि Sony के लिए PS5 स्वयं केवल उत्पाद नहीं, PlayStation Store, PlayStation Plus और games खरीदने वाले ग्राहक तक पहुँचने का प्रवेश-द्वार है। इसलिए कंपनी hardware margin और installed base के बीच संतुलन बनाती है। वह console बहुत महँगा करेगी तो नए ग्राहक कम आएँगे; बहुत सस्ता रखेगी तो memory cost का नुकसान बढ़ेगा। 2026 की कीमत वृद्धि इसी कठिन संतुलन का परिणाम है।

Nintendo का मॉडल कुछ अलग रहा है। कंपनी ऐतिहासिक रूप से console hardware को भारी subsidy पर बेचने से बचती रही है और hardware से भी उचित लाभ चाहती है। इसलिए Switch 2 के components महँगे होने, मुद्राओं में बदलाव और वैश्विक बाजार परिस्थितियों के बिगड़ने का असर उसके retail price पर अपेक्षाकृत जल्दी आ सकता है। Nintendo ने जापान और अन्य क्षेत्रों में भी price revisions की घोषणा की और साथ ही Nintendo Switch Online सदस्यता की जापानी कीमतें भी बदलने की योजना बनाई। इसका अर्थ यह है कि hardware inflation अब केवल silicon तक सीमित मुद्दा नहीं है; कंपनियाँ अपनी पूरी gaming economics दोबारा निर्धारित कर रही हैं।

Steam Deck का संकट इस कहानी को PC gaming से जोड़ देता है। Steam Deck कोई पारंपरिक बंद console नहीं, बल्कि Valve द्वारा बनाया गया handheld PC है। इसमें AMD processor, RAM, SSD, OLED display और दूसरे laptop-जैसे घटक हैं। इसलिए वह consumer PC component market के बदलावों से और सीधे प्रभावित होता है।

एचबीएम क्या है?

HBM इस संकट का केंद्र क्यों है, इसे थोड़ा तकनीकी रूप से समझना जरूरी है। सामान्य RAM चिपें circuit board पर साथ-साथ लगी होती हैं। HBM में कई memory dies को एक-दूसरे के ऊपर stack किया जाता है और बेहद चौड़े data interface के माध्यम से processor से जोड़ा जाता है। इससे AI accelerator को प्रति सेकंड बहुत अधिक डेटा मिल सकता है। AI model training में गणना की गति अक्सर memory bandwidth से सीमित होती है, इसलिए HBM अत्यंत मूल्यवान है। Samsung की HBM4 जैसी 2026 की नई memory खास तौर पर AI computing के लिए बनाई गई है। AI कंपनियाँ इसके लिए premium कीमत देने को तैयार हैं। परिणामस्वरूप memory manufacturers के लिए पुराने consumer DRAM की तुलना में HBM और server products अधिक आकर्षक बन जाते हैं।

लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि PS5 में लगी GDDR memory को निकालकर Nvidia AI server में लगाया जा रहा है। दोनों उत्पाद अलग हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि DRAM fabrication की upstream क्षमता, निवेश बजट, engineering resources और semiconductor ecosystem सीमित हैं। जब एक बाजार अचानक अत्यधिक लाभदायक हो जाता है तो नए निवेश उसी दिशा में प्राथमिकता प्राप्त करते हैं। TrendForce ने ठीक इसी कारण conventional DRAM की तंग आपूर्ति को manufacturers द्वारा server-related applications को प्राथमिकता देने से जोड़ा। इसलिए AI का प्रभाव प्रत्यक्ष प्रतिस्थापन से नहीं, उत्पादन प्राथमिकता बदलने से आता है।

SSD की कहानी भी लगभग यही है। AI inference और cloud computing के लिए data center को केवल GPU memory नहीं, enormous datasets रखने के लिए enterprise SSD भी चाहिए। NAND निर्माता high-capacity enterprise products पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। यदि console manufacturer को एक करोड़ मशीनों के लिए 1 TB storage चाहिए तो वह एक अरब gigabyte storage खरीद रहा है। प्रति unit NAND cost में केवल 20 या 30 डॉलर की वृद्धि भी दस लाख मशीनों पर करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त खर्च बन जाती है। Console manufacturers इसलिए storage size के साथ बहुत सावधानी बरतते हैं और कभी digital-only, 512 GB, 1 TB तथा अलग premium variants बनाते हैं।

मनी एक्सचेंज का भी हाथ

कंसोल महँगा होने का एक बड़ा कारण मुद्रा विनिमय है। Sony और Nintendo जापानी कंपनियाँ हैं, Microsoft अमेरिकी है, लेकिन इनके consoles दर्जनों मुद्राओं में बिकते हैं और components अलग-अलग देशों में बनते हैं। Semiconductor contract डॉलर में हो सकता है, assembly एशिया में, बिक्री यूरो या पाउंड में और corporate accounts yen में। यदि स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है तो वही machine स्थानीय बाजार में अधिक महँगी पड़ सकती है। यही कारण है कि price hikes हमेशा सभी देशों में समान प्रतिशत की नहीं होतीं। Sony ने 2025 में Europe, UK, Australia और New Zealand में अलग-अलग मूल्यवृद्धि की थी और 2026 में अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन और जापान में अलग नई कीमतें तय कीं।

टैरिफ और व्यापार नीति

चौथा कारण टैरिफ और व्यापार नीति है। गेम console का supply chain बहुत अंतरराष्ट्रीय है—चिप Taiwan या Korea से, memory दूसरे देश से, assembly China या Vietnam में और बिक्री अमेरिका या यूरोप में हो सकती है। किसी भी आयात शुल्क, व्यापार विवाद या सीमा शुल्क बदलाव का असर retail price पर पड़ सकता है। Sony ने अपनी 2026 कीमत घोषणा में किसी एक कारण को नहीं चुना, बल्कि व्यापक वैश्विक आर्थिक दबाव का उल्लेख किया। इसका कारण यही है कि console की final cost केवल एक RAM chip की कीमत नहीं होती; semiconductor, shipping, assembly, currency, tariffs और retail distribution सभी उसमें जुड़ते हैं।

ज्यादा स्टोरेज और जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स

पाँचवाँ कारण यह है कि आज का console पहले से अधिक storage और complex electronics मांगता है। PlayStation 2 या पुराने Nintendo युग में पूरा game optical disc से चल सकता था और internal storage बहुत छोटा था। आधुनिक AAA games 100 GB, 150 GB या उससे भी अधिक स्थान ले सकते हैं। तेज loading और विशाल open worlds के कारण SSD अब optional luxury नहीं, system architecture का हिस्सा है। इसलिए NAND की कीमत बढ़ने का 2026 के console पर प्रभाव बीस साल पहले के console से कई गुना अधिक है।

इसके साथ games स्वयं भी महँगे हो रहे हैं। Rockstar ने GTA VI जैसी बड़ी AAA release के लिए अमेरिका में 79.99 डॉलर standard price निर्धारित किया है, जबकि Nintendo भी Switch 2 generation में अलग physical और digital game pricing संरचनाओं का प्रयोग कर रहा है। Hardware महँगा होने के साथ यदि premium games 70–80 डॉलर की ओर जाएँ, online subscription, अतिरिक्त storage और accessories भी खरीदने पड़ें, तो “console gaming की कीमत” केवल console box की कीमत नहीं रहती। परिवार के लिए वास्तविक प्रवेश लागत hardware + games + subscription + storage + controller का योग बन जाती है। इसीलिए उपभोक्ता को 100 डॉलर का hardware hike कहीं अधिक महसूस होता है।

लेकिन यह भी सही नहीं होगा कि “PlayStation, Xbox, Nintendo और Steam सभी एक ही कारण से कीमतें बढ़ा रहे हैं।” Microsoft ने सीधे memory और storage crisis को मुख्य कारण बताया है। Valve ने component costs और global logistics की बात कही। Sony ने व्यापक global economic pressures कहा, जबकि उसकी वित्तीय बैठकों में memory cost को अलग से गंभीर जोखिम माना गया। Nintendo ने market conditions का व्यापक उल्लेख किया। इसलिए चारों में memory संकट एक महत्वपूर्ण साझा पृष्ठभूमि है, लेकिन प्रत्येक कंपनी की pricing decision में मुद्रा, supply contracts, margin, logistics और regional strategy का वजन अलग है।

इस पूरे संकट का सबसे दिलचस्प परिणाम console generations पर पड़ सकता है। यदि PS6 या अगली Xbox पीढ़ी को अधिक RAM, अधिक SSD और अधिक शक्तिशाली GPU चाहिए, लेकिन memory और semiconductor लागत पुराने console से भी अधिक है, तो कंपनियों के सामने तीन विकल्प हैं—नई machine बहुत महँगी लॉन्च करें, specifications में समझौता करें या launch timing और उत्पादन मात्रा को बेहद सावधानी से नियंत्रित करें। Sony पहले ही कह चुका है कि वह next-generation platform में निवेश बढ़ा रहा है। उसके FY2026 अनुमान में इस अगली पीढ़ी पर बढ़े निवेश को बाकायदा शामिल किया गया है। (Sony⁠)

AI का एक विचित्र विरोधाभास भी यहाँ सामने आता है। वही AI technology भविष्य में games बनाने की लागत के कुछ हिस्से घटा सकती है—Sony स्वयं कहता है कि AI game development की प्रक्रिया बदल सकता है—लेकिन फिलहाल AI infrastructure बनाने की भूख gaming hardware के components महँगे कर रही है। यानी AI software development को सस्ता कर सकता है, जबकि उसी समय AI data centers RAM, HBM, SSD और semiconductor capacity के लिए competition बढ़ाकर gamer की machine महँगी कर रहे हैं।

क्या होगा पीसी गेमिंग पर असर?

क्या इससे PC gaming भी महँगी होगी? उसका असर पहले से दिख रहा है। PC में console की तुलना में उपयोगकर्ता component अलग-अलग खरीदता है, इसलिए RAM, SSD या GPU price increase तुरंत दिखाई देती है। Console company कभी कुछ महीने कीमत रोक सकती है क्योंकि उसने bulk contract पहले कर रखा है, लेकिन PC retail market में spot और distributor pricing अपेक्षाकृत जल्दी बदल सकती है। Steam Deck इसी PC और console दुनिया के बीच का उदाहरण है—fixed hardware platform है, लेकिन components laptop/PC supply chain से आते हैं। इसलिए Valve को वही unit price बढ़ानी पड़ी।

क्या cloud gaming इसका विकल्प बन सकता है? सिद्धांततः हाँ। यदि expensive GPU आपके घर में रखने के बजाय data center में हो और game video stream की तरह आपके साधारण screen पर आए, तो upfront hardware cost कम हो सकती है। Xbox, GeForce Now और दूसरे platforms इसी दिशा में काम कर रहे हैं। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि वही cloud gaming भी data centers, GPUs और memory पर निर्भर है—यानी AI से competition वहाँ भी मौजूद है। इसके अलावा तेज broadband, latency और recurring subscription cost की समस्या है। इसलिए निकट भविष्य में cloud gaming console को पूरी तरह समाप्त कर देगा, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।

इतिहास में कई बार भारी shortage के बाद कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाया, demand धीमी हुई और अचानक DRAM तथा NAND कीमतें गिर गईं। इसलिए यह भी संभव है कि नए fabs और capacity आने तथा AI demand growth कुछ स्थिर होने पर consumer electronics को राहत मिले।

गेमर के लिए इसका अर्थ यह भी है कि console खरीदने का पुराना नियम—“दो-तीन साल रुको, यही मशीन सस्ती मिल जाएगी”—अब विश्वसनीय नहीं

कंपनियों के सामने इसलिए केवल यह सवाल नहीं है कि वे कितनी लागत ग्राहक पर डाल सकती हैं। उन्हें यह भी देखना होगा कि किस बिंदु पर ग्राहक console खरीदना ही छोड़ देगा। 100 डॉलर की अतिरिक्त कीमत कंपनी के hardware margin को बचा सकती है, लेकिन यदि उससे दस लाख संभावित नए ग्राहक ecosystem में ही नहीं आते, तो भविष्य के games, subscriptions और digital store revenue का नुकसान कहीं बड़ा हो सकता है। Console pricing इसलिए साधारण “cost + profit” गणित नहीं है; यह लंबे समय तक ग्राहक को platform में जोड़ने का अर्थशास्त्र है।

असली कहानी - एआई और गेमिंग की लड़ाई

असली कहानी यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया और गेमिंग की दुनिया अब एक ही semiconductor संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। दोनों को तेज मेमोरी चाहिए, दोनों को विशाल storage चाहिए, दोनों को advanced chips चाहिए और दोनों को सीमित manufacturing ecosystem से माल लेना है। फर्क यह है कि AI data centers के पास खर्च करने के लिए कहीं अधिक पूँजी है। जब मेमोरी निर्माता को यह चुनाव करना हो कि सीमित उत्पादन से सामान्य consumer DRAM बनाए या ऊँचे लाभ वाला HBM और server memory, तो बाजार स्वाभाविक रूप से AI की तरफ झुकता है। उसका अप्रत्यक्ष बिल अंततः gamer के हाथ में पहुँच रहा है।

इसलिए कंसोल गेमिंग महँगी होने का सबसे सटीक निष्कर्ष “GPU नहीं मिल रहे” नहीं, बल्कि यह है—AI boom ने वैश्विक memory और semiconductor अर्थव्यवस्था की प्राथमिकताएँ बदल दी हैं; RAM और SSD की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, supply contracts महँगे हुए हैं, मुद्रा और लॉजिस्टिक्स का दबाव अलग है और console कंपनियों के कम-margin hardware model में इस बढ़ी लागत को लंबे समय तक छिपाने की गुंजाइश समाप्त हो रही है। इसी कारण छह साल पुराना PS5, पुराना Xbox Series hardware और लगभग वही Steam Deck आज पहले से ज्यादा महँगे हो सकते हैं। तकनीक के इतिहास में यह उलटी चाल असामान्य है। लेकिन 2026 के AI युग में फिलहाल यही नया सामान्य बनता दिखाई दे रहा है।

Yogesh Mishra
ABOUT THE AUTHOR

Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

Next Story