Green Commercial Vehicles: स्क्रैपिंग से पहले राहत, इन गाड़ियों की उम्र 5 साल बढ़ाने का ड्राफ्ट

Green Commercial Vehicles के लिए सरकार ने बड़ा प्रस्ताव रखा है। इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और CNG गुड्स कैरिज वाहनों की उम्र 5 साल बढ़ाने का ड्राफ्ट जारी हुआ है।

Jyotsana Singh
Published on: 20 Aug 2026 10:20 AM IST
Green Commercial Vehicles: Government Proposes 5-Year Age Extension
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Green Commercial Vehicles: Government Proposes 5-Year Age Extension

Government Proposes Vehicle Age Limit Extension: पुरानी गाड़ियों की स्क्रैपिंग को लेकर चल रही बहस के बीच कमर्शियल वाहन मालिकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने स्वच्छ ईंधन से चलने वाले कुछ कमर्शियल वाहनों की उम्र सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के मुताबिक इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और सीएनजी/नेचुरल गैस से चलने वाले चुनिंदा गुड्स कैरिज वाहनों को मौजूदा सीमा के मुकाबले 5 साल तक अतिरिक्त समय मिल सकता है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है तो जिन वाहनों के लिए अभी 12 या 15 साल की सीमा लागू है, उन्हें क्रमशः 17 और 20 साल तक नेशनल परमिट के साथ चलाने का रास्ता खुल सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह ड्राफ्ट प्रस्ताव है, अभी आधिकारिक रूप से अंतिम नियम नहीं जारी किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राफ्ट पर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों में भी साफ किया गया है कि ऐसे संशोधन अंतिम राजपत्र अधिसूचना के बाद ही प्रभावी होते हैं।

किन कमर्शियल गाड़ियों को मिलेगा फायदा?

प्रस्ताव का फोकस मुख्य रूप से नेशनल परमिट सिस्टम के तहत चलने वाले गुड्स कैरिज वाहनों पर है। मौजूदा व्यवस्था में वाहन की श्रेणी और निर्धारित उम्र सीमा के आधार पर नेशनल परमिट जारी या नवीनीकृत किया जाता है। नए प्रस्ताव में स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को सामान्य पेट्रोल-डीजल वाहनों से अलग ट्रीटमेंट देने की बात कही गई है।

यानी यह प्रस्ताव हर पुरानी कार या निजी वाहन को पांच साल अतिरिक्त सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं देता। इसका सीधा संबंध कमर्शियल गुड्स कैरिज वाहनों और नेशनल परमिट से है। इसलिए निजी कार मालिकों को इसे अपनी कार की उम्र सीमा बढ़ने के तौर पर नहीं देखना चाहिए।

12 साल की गाड़ी 17 साल, 15 साल वाली 20 साल तक?

प्रस्ताव का सबसे बड़ा आकर्षण यही है। जिन पात्र गुड्स कैरिज वाहनों की मौजूदा निर्धारित उम्र सीमा 12 साल है, उनके लिए पांच साल अतिरिक्त अवधि मिलने पर यह सीमा 17 साल हो सकती है। इसी तरह 15 साल वाली श्रेणी में अधिकतम सीमा 20 साल तक पहुंच सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि वाहन केवल उम्र पूरी होने तक बिना किसी जांच के सड़क पर चलता रहेगा। फिटनेस, परमिट, प्रदूषण नियंत्रण और दूसरे अनिवार्य नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा। सरकार का मकसद स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को अपेक्षाकृत लंबे समय तक उपयोग में बनाए रखते हुए ट्रांसपोर्ट सेक्टर को ज्यादा व्यावहारिक विकल्प देना है।

महंगी ग्रीन गाड़ियों की लागत निकालना होगा आसान

इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और गैस आधारित कमर्शियल वाहनों की शुरुआती कीमत पारंपरिक वाहनों की तुलना में कई मामलों में ज्यादा हो सकती है। खासकर भारी मालवाहक वाहनों में नई तकनीक अपनाने के लिए ट्रांसपोर्टर्स को बड़ा शुरुआती निवेश करना पड़ता है। ऐसे में वाहन को कुछ अतिरिक्त वर्षों तक व्यावसायिक इस्तेमाल करने का मौका मिलने से मालिकों को निवेश की लागत निकालने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है। लंबे समय में इससे ऑपरेटरों को फ्लीट बदलने की योजना बनाने और पुराने प्रदूषणकारी वाहनों की जगह क्लीनर टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद मिल सकती है।

यही वजह है कि प्रस्ताव को केवल वाहन की उम्र बढ़ाने के बजाय ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्र पहले भी सीएनजी, हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधन वाली तकनीकों के लिए वाहन नियमों में बदलाव करता रहा है। उदाहरण के लिए, सीएनजी, बायो-सीएनजी,एचसीएनजी वाहनों के लिए सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में शामिल किया जा चुका है।

पांच साल का इलेक्ट्रॉनिक नेशनल परमिट भी प्रस्ताव में

ड्राफ्ट में परमिट प्रक्रिया को ज्यादा डिजिटल बनाने की दिशा में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। वाहन मालिकों को एक साथ पांच साल के लिए इलेक्ट्रॉनिक नेशनल परमिट लेने का विकल्प देने की बात कही गई है। इसके लिए सालाना 16,500 रुपये की दर से पांच साल की कुल फीस 82,500 रुपये बैठती है।

आवेदन की प्रक्रिया में Form 46 और Form 47 का इलेक्ट्रॉनिक इस्तेमाल किया जाना प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य परमिट से जुड़े काम को ऑनलाइन करना और कागजी प्रक्रिया तथा आरटीओ कार्यालयों के चक्कर कम करना है।

Vahan Portal से जुड़ेगी जरूरी जानकारी

डिजिटल व्यवस्था में वाहन संबंधी जानकारी को Vahan Portal से जोड़ने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। वाहन या डीलर से संबंधित जानकारी दर्ज होने पर मालिक का विवरण, GST नंबर, PAN और लोन अकाउंट जैसी जानकारियां उपलब्ध डेटा के आधार पर प्राप्त की जा सकेंगी। नए चेसिस के मामले में, जिन पर अभी बॉडी नहीं बनी है, अस्थायी रजिस्ट्रेशन की वैधता को लेकर भी प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इसका मकसद वाहन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल बनाना है।

अभी लागू नहीं हुआ है प्रस्ताव

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि सरकार ने अभी अंतिम रूप से यह नियम लागू नहीं किया है। मंत्रालय के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम लोगों, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। तय अवधि में प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही सरकार अंतिम अधिसूचना जारी कर सकती है।अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से वाहन, किस श्रेणी और किन शर्तों के तहत इस अतिरिक्त अवधि का लाभ उठा पाएंगे।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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