IMEI Number Kya Hai: IMEI नंबर क्या होता है? फोन चोरी होने पर कैसे आता है काम, जानिए पूरा सच

IMEI Number Kya Hai: IMEI नंबर क्या है और फोन चोरी होने पर इसका क्या काम होता है? जानिए 15 अंकों वाले IMEI की पहचान, CEIR में फोन ब्लॉक करने की प्रक्रिया, सिम बदलने के बाद इसका असर और IMEI से जुड़ी जरूरी जानकारी।

Neel Mani Lal
Published on: 21 Sept 2026 5:59 PM IST
IMEI Number Kya Hai Explained in Hindi
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IMEI Number Kya Hai Explained in Hindi 

IMEI Number Kya Hai: हमारे मोबाइल फोन में एक ऐसा नंबर होता है, जिस पर हम सामान्य दिनों में शायद ही कभी ध्यान देते हैं। यह नंबर न तो हमारा मोबाइल नंबर है, न सिम का नंबर और न ही फोन का पासवर्ड। फिर भी अगर आपका फोन खो जाए या चोरी हो जाए तो यही नंबर अचानक बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इसे IMEI कहते हैं। यह आम तौर पर 15 अंकों का एक खास नंबर होता है, जो मोबाइल फोन की पहचान करता है।

दिलचस्प बात यह है कि आपका सिम कार्ड बदल जाने के बाद भी फोन की यह पहचान नहीं बदलती। यानी फोन में किसी दूसरे व्यक्ति का सिम डाल दिया जाए, तब भी मोबाइल नेटवर्क उस उपकरण की पहचान उसके IMEI से कर सकता है। भारत में इसी व्यवस्था का इस्तेमाल चोरी या गुम हुए मोबाइल को मोबाइल नेटवर्क पर चलने से रोकने के लिए किया जाता है।

लेकिन यहां एक बड़ा भ्रम भी है। बहुत से लोग मानते हैं कि IMEI नंबर डालते ही पुलिस या कोई भी व्यक्ति चोरी हुए फोन की बिल्कुल सही जगह देख सकता है। ऐसा नहीं है। IMEI अपने आप कोई जीपीएस ट्रैकर नहीं है। इसकी असली ताकत कुछ और है। यह बताता है कि नेटवर्क से जुड़ने वाला उपकरण कौन-सा है और चोरी या गुम होने की शिकायत के बाद उसी उपकरण को नेटवर्क से रोका जा सकता है।

IMEI आखिर है क्या?

IMEI का पूरा नाम International Mobile Equipment Identity है। आसान भाषा में इसे मोबाइल फोन की एक खास पहचान संख्या समझ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उद्योग संस्था 'जीएसएमए' के अनुसार, यह 15 अंकों की संख्या होती है और हर अलग मोबाइल उपकरण की अपनी पहचान होती है। इसके शुरुआती आठ अंक उस फोन के मॉडल या उपकरण के प्रकार से जुड़े होते हैं। बाकी हिस्से किसी खास उपकरण की पहचान में मदद करते हैं।

इसे समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि मोबाइल नंबर आपकी सिम या मोबाइल कनेक्शन की पहचान से जुड़ा है, जबकि IMEI मोबाइल उपकरण की पहचान से जुड़ा है। इसलिए आप एक फोन में सिम बदलते रहें, लेकिन फोन वही रहता है तो उसका IMEI भी वही रहेगा।

यही अंतर चोरी के मामले में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। चोर आपके फोन से सिम निकाल सकता है और अपना सिम डाल सकता है, लेकिन इससे फोन का IMEI सामान्य तौर पर नहीं बदलता। नेटवर्क के स्तर पर उपकरण की पहचान फिर भी उसी IMEI से होती है।

फोन में IMEI नंबर कहां से आया?

यह नंबर आप खुद नहीं बनाते। मोबाइल फोन बनाते समय उसके उपकरण की पहचान से जुड़ी जानकारी के आधार पर IMEI निर्धारित किया जाता है। जीएसएमए के अनुसार, IMEI की व्यवस्था में फोन के मॉडल की पहचान करने वाला हिस्सा और उस खास उपकरण की पहचान से जुड़े हिस्से होते हैं।

आप अपने फोन में IMEI देखने के लिए सबसे आसान तरीका अपना सकते हैं। फोन के डायलर में *#06# लिखकर कॉल बटन दबाने की जरूरत नहीं होती। आम तौर पर स्क्रीन पर IMEI नंबर दिखाई देता है। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल पर भी यही तरीका बताया गया है।

IMEI फोन के डिब्बे और खरीद की रसीद पर भी मिल सकता है। इसलिए नया फोन खरीदने के बाद केवल बिल संभालकर रखना ही पर्याप्त नहीं है, उसके IMEI नंबर को भी कहीं सुरक्षित लिखकर रखना समझदारी है।

एक और जरूरी बात है। अगर फोन में दो सिम चलती हैं तो उसमें अक्सर दो IMEI नंबर होते हैं। भारत सरकार के सीईआईआर सिस्टम में भी दो सिम वाले फोन के लिए IMEI 1 और IMEI 2 अलग-अलग दर्ज करने की व्यवस्था है।

IMEI और मोबाइल नंबर में क्या अंतर है?

मान लीजिए आपका मोबाइल नंबर 98XXXXXXXX है। यह नंबर आपके सिम कनेक्शन से जुड़ा है। अब वही सिम किसी दूसरे फोन में डाल दीजिए। मोबाइल नंबर वही रहेगा, लेकिन फोन का IMEI बदल जाएगा।

इसके उलट अगर आपका फोन चोरी हो जाए और उसमें चोर अपना सिम डाल दे तो सिम का मोबाइल नंबर बदल जाएगा, लेकिन फोन का IMEI वही उपकरण पहचानने में मदद करेगा।

यानी इसे बहुत आसान तरीके से ऐसे समझिए:

मोबाइल नंबर बताता है कि कनेक्शन किसका है, जबकि IMEI बताता है कि मोबाइल उपकरण कौन-सा है। इसीलिए चोरी हुए फोन के मामले में केवल अपना मोबाइल नंबर बताना पर्याप्त नहीं होता। फोन की पहचान के लिए IMEI बहुत महत्वपूर्ण जानकारी बन जाता है।

चोरी होने के बाद IMEI सबसे ज्यादा काम क्यों आता है?

मान लीजिए आपका फोन बाजार में चोरी हो गया। चोर उसमें से आपकी सिम निकालकर दूसरी सिम डाल देता है। अगर मोबाइल नेटवर्क केवल सिम की पहचान देखता, तो फोन को रोकना बहुत मुश्किल होता। लेकिन मोबाइल नेटवर्क उपकरण की पहचान के लिए IMEI जैसी जानकारी का भी इस्तेमाल करता है।

भारत में केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) इसी काम के लिए बनाया गया है। इसमें चोरी या गुम हुए मोबाइल के IMEI को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इसके बाद उस फोन को भारत के मोबाइल नेटवर्क पर इस्तेमाल करने से रोका जा सकता है। संचार साथी के अनुसार, सफल ब्लॉक अनुरोध के बाद फोन को 24 घंटे के भीतर भारत के किसी भी नेटवर्क पर इस्तेमाल करने से रोका जाता है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिम बदलने से ब्लॉक किया गया फोन फिर सामान्य रूप से काम करने नहीं लगता। सीईआईआर का उद्देश्य ही यह है कि ब्लैकलिस्ट किए गए उपकरण को दूसरे नेटवर्क पर या नई सिम लगाकर इस्तेमाल न किया जा सके। CEIR

यही कारण है कि फोन चोरी होने पर IMEI नंबर संभालकर रखना केवल औपचारिकता नहीं है।

क्या IMEI से चोरी हुए फोन की लोकेशन पता चल जाती है?

सिर्फ IMEI नंबर डालकर आप गूगल मैप पर अपने फोन की लाइव लोकेशन नहीं देख सकते। IMEI कोई जीपीएस लोकेEI ब्लॉक करने के साथ कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए ट्रेसिंग की व्यवस्था भी जुड़ी हुई है। भारत सरकार के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति चोरी हुए उपकरण का इस्तेमाल करने की कोशिश करताशन नंबर नहीं है।

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि IMEI चोरी के फोन को खोजने में बेकार है। भारत के सीईआईआर सिस्टम में चोरी हुए फोन का IMEI ब्लॉक करने के साथ कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए ट्रेसिंग की व्यवस्था भी जुड़ी हुई है। भारत सरकार के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति चोरी हुए उपकरण का इस्तेमाल करने की कोशिश करता है तो सिस्टम कानून लागू करने वाली एजेंसियों को उसे ट्रेस करने में मदद कर सकता है।

इसलिए सही बात यह है कि IMEI खुद लोकेशन नहीं बताता, लेकिन नेटवर्क और सरकारी व्यवस्था में उपकरण की पहचान बनाए रखने के कारण चोरी हुए फोन की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह अंतर समझना बहुत जरूरी है। IMEI को किसी वेबसाइट में डालकर तुरंत फोन की लाइव लोकेशन दिखाने का दावा करने वाली अनजान सेवाओं से सावधान रहना चाहिए।

फोन चोरी हो जाए तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

फोन चोरी होने के बाद केवल सिम बंद करवाकर बैठ जाना पर्याप्त नहीं है। जितनी जल्दी संभव हो, फोन की सुरक्षा और उसकी पहचान से जुड़े कदम उठाने चाहिए।

भारत सरकार के सीईआईआर सिस्टम के अनुसार, चोरी या गुम हुए फोन को ब्लॉक करने के लिए पुलिस शिकायत की प्रति, दोबारा जारी की गई सिम, पहचान पत्र और उपलब्ध होने पर फोन की खरीद रसीद रखनी होती है। इसके बाद संचार साथी के सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

दोबारा जारी की गई सिम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्लॉक करने की प्रक्रिया में आपके मोबाइल नंबर पर सत्यापन के लिए ओटीपी आता है। अगर फोन दो सिम वाला है तो संबंधित दोनों IMEI नंबर उपलब्ध रखना बेहतर है।

ब्लॉक करने के बाद आपको एक अनुरोध संख्या मिलती है। इसे संभालकर रखना चाहिए, क्योंकि इसी से बाद में अनुरोध की स्थिति देखी जा सकती है और फोन मिलने पर उसे दोबारा अनब्लॉक करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

अगर चोर सिम बदल दे तो क्या होगा?

यह सवाल सबसे स्वाभाविक है। आखिर चोरी करने वाला व्यक्ति आपकी सिम तो निकाल ही सकता है।

लेकिन IMEI का पूरा उद्देश्य ही इस समस्या को कम करना है। फोन की पहचान सिम से अलग होती है। इसलिए चोर अपनी सिम लगाकर फोन को इस्तेमाल करने की कोशिश करता है तो नेटवर्क के स्तर पर उपकरण का IMEI फिर भी सामने आ सकता है।

अगर उस IMEI को सीईआईआर में ब्लॉक कर दिया गया है तो फोन भारत के मोबाइल नेटवर्क पर काम नहीं कर पाएगा। सरकार के अनुसार, यह रोक केवल उस सिम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अलग-अलग भारतीय नेटवर्क पर भी लागू होती है। CEIR

इसका मतलब यह नहीं है कि चोरी हुआ फोन दुनिया में कहीं भी हमेशा के लिए बेकार हो जाता है। अलग-अलग देशों में नेटवर्क और उपकरण ब्लॉक करने की व्यवस्थाएं अलग हो सकती हैं। जीएसएमए भी चोरी हुए मोबाइल उपकरणों के IMEI के आधार पर साझा ब्लॉक सूची की व्यवस्था का उल्लेख करता है, जिसका उद्देश्य दूसरे देशों में भी चोरी हुए उपकरणों को नेटवर्क पहुंच से रोकना है।

IMEI ब्लॉक करने के बाद फोन मिल जाए तो?

कई बार चोरी हुआ या खोया फोन बाद में मिल जाता है। ऐसी स्थिति में उसे हमेशा के लिए ब्लॉक रहने देने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार के सीईआईआर सिस्टम में बरामद फोन के IMEI को अनब्लॉक करने की व्यवस्था है। इसके लिए पहले पुलिस को फोन मिलने की जानकारी देनी होती है और फिर निर्धारित प्रक्रिया से अनब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

इससे एक महत्वपूर्ण बात समझ आती है। IMEI ब्लॉक करना फोन को नष्ट करना नहीं है। यह मुख्य रूप से उसे मोबाइल नेटवर्क पर इस्तेमाल होने से रोकने की व्यवस्था है।

क्या हर फोन का IMEI अलग होता है?

व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि हर अलग मोबाइल उपकरण की एक अलग पहचान हो। जीएसएमए IMEI को किसी व्यक्तिगत मोबाइल उपकरण से जुड़ी विशिष्ट 15 अंकों की पहचान संख्या बताता है। GSMA

लेकिन यहां एक जरूरी सावधानी है। बाजार में कभी-कभी नकली, डुप्लीकेट या गलत IMEI वाले फोन भी सामने आते हैं। भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल पर खरीदारों को फोन खरीदने से पहले IMEI की सत्यता जांचने की सुविधा दी गई है। अगर कोई IMEI ब्लैकलिस्ट, डुप्लीकेट या पहले से इस्तेमाल में दिखता है तो ऐसे फोन से बचने की सलाह दी जाती है।

आप KYM, यानी "Know Your Mobile", सेवा का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। सरकार के अनुसार, 15 अंकों के IMEI के साथ KYM लिखकर 14422 पर एसएमएस भेजकर फोन की जानकारी जांची जा सकती है। CEIR

IMEI के साथ छेड़छाड़ क्यों गंभीर मामला है?

अगर IMEI सिर्फ एक नंबर है तो कोई उसे बदल क्यों नहीं सकता? क्योंकि अगर चोरी हुए फोन का IMEI आसानी से बदल दिया जाए तो पूरा ब्लॉक करने वाला सिस्टम कमजोर पड़ जाएगा। इसी वजह से मोबाइल उपकरण की पहचान से छेड़छाड़ को गंभीरता से लिया जाता है। भारत सरकार के सीईआईआर के अनुसार, निर्माता के अलावा किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर मोबाइल उपकरण की पहचान संख्या को हटाना, मिटाना या बदलना गैरकानूनी है।

इसलिए चोरी हुए फोन को किसी अनधिकृत दुकान पर ले जाकर IMEI बदलवाने की कोशिश करना केवल तकनीकी छेड़छाड़ नहीं है, बल्कि कानूनी परेशानी भी पैदा कर सकता है।

फोन खरीदते समय भी IMEI काम आता है

IMEI की उपयोगिता केवल फोन चोरी होने के बाद शुरू नहीं होती। नया या पुराना फोन खरीदते समय भी यह नंबर काफी महत्वपूर्ण है।

मान लीजिए आपको कोई महंगा फोन बहुत कम कीमत में मिल रहा है। फोन देखने में बिल्कुल नया है, लेकिन उसका IMEI किसी चोरी हुए या ब्लैकलिस्ट किए गए उपकरण से जुड़ा है। ऐसी स्थिति में बाद में परेशानी हो सकती है।

इसीलिए इस्तेमाल किया हुआ फोन खरीदते समय IMEI को फोन में देखकर उसे डिब्बे और बिल पर लिखे नंबर से मिलाना चाहिए। संचार साथी पर उपलब्ध व्यवस्था से IMEI की सत्यता और उपकरण की स्थिति भी जांची जा सकती है।

एक छोटी सी गलती बाद में भारी पड़ सकती है

लोग नया फोन खरीदते समय उसका डिब्बा संभालकर नहीं रखते। कुछ लोग बिल भी खो देते हैं और IMEI नंबर कभी लिखकर नहीं रखते। फोन चोरी होने के बाद उन्हें अचानक पता चलता है कि पुलिस शिकायत या सरकारी पोर्टल पर फोन की पहचान से जुड़ी जानकारी चाहिए।

इसलिए नया फोन खरीदने के दिन ही उसका IMEI नंबर सुरक्षित जगह लिख लेना चाहिए। अगर दो सिम वाला फोन है तो दोनों IMEI नंबर सुरक्षित रखना बेहतर है। डिब्बे और बिल की तस्वीर भी अपने किसी सुरक्षित डिजिटल खाते में रख सकते हैं। यह छोटी सी तैयारी फोन चोरी होने की स्थिति में बहुत काम आ सकती है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात फिर दोहराने लायक है: IMEI कोई जादुई लोकेशन नंबर नहीं है। यह अकेले आपके फोन की लाइव जगह नहीं दिखाता। इसकी असली ताकत यह है कि मोबाइल नेटवर्क को यह पहचानने में मदद करता है कि नेटवर्क से जुड़ने वाला उपकरण कौन-सा है। भारत में सीईआईआर जैसी व्यवस्था इसी पहचान का इस्तेमाल करके चोरी या गुम हुए फोन को नेटवर्क से रोकती है और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए आगे की जांच में मदद करती है।

अगली बार जब आप नया फोन खरीदें तो उसके 15 अंकों वाले इस छोटे से नंबर को नजरअंदाज मत कीजिए। सामान्य दिनों में यह नंबर बेकार-सा लग सकता है, लेकिन फोन चोरी होने पर यही नंबर आपके मोबाइल की पहचान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

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