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क्या मैनुअल गियर वाली कार चलाने से कम होता है डिमेंशिया का खतरा? जापानी रिसर्च में हुआ बड़ा दावा
Manual Car Driving and Dementia Risk: जानिए जापानी रिसर्च में मैनुअल गियर वाली कार और डिमेंशिया के खतरे को लेकर क्या दावा किया गया है।
Manual Car Driving and Dementia Risk
Manual Car Driving and Dementia Risk: ऑटो बाजार में अब नई नवेली तकनीक से लैस कारों का बड़ा ग्राहक वर्ग मौजूद है। आज ज्यादातर कार खरीदार ऑटोमैटिक कारों को उनकी सुविधा की वजह से पसंद कर रहे हैं। जबकि जापान के वैज्ञानिकों की एक रिसर्च ने मैनुअल गियर वाली कारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। शोध में दावा किया गया है कि मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कार चलाने के दौरान दिमाग के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं, जिससे संज्ञानात्मक (Cognitive) क्षमता बेहतर बनी रह सकती है और उम्र बढ़ने के साथ होने वाले डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
मैनुअल कार चलाने से क्यों सक्रिय होता है दिमाग?
जापान के तोहोकू विश्वविद्यालय के तंत्रिका वैज्ञानिक प्रोफेसर रयुता कावाशिमा के अनुसार, मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कार चलाते समय चालक को एक साथ कई काम करने पड़ते हैं। उसे क्लच दबाना, सही समय पर गियर बदलना, एक्सीलरेटर और ब्रेक का संतुलन बनाए रखना और सड़क की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होती है।
इन सभी गतिविधियों के दौरान मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स अधिक सक्रिय रहता है। यही हिस्सा निर्णय लेने, ध्यान केंद्रित रखने, याददाश्त और व्यवहार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की लगातार मानसिक सक्रियता दिमाग के लिए एक तरह की कॉग्निटिव एक्सरसाइज का काम करती है।
ऑटोमैटिक कारों से कैसे अलग है मैनुअल ड्राइविंग?
ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कारों में गियर बदलने का काम वाहन खुद करता है। इससे ड्राइवर का मानसिक और शारीरिक कार्यभार काफी कम हो जाता है। वहीं मैनुअल कार में हर मोड़, चढ़ाई, ट्रैफिक या स्पीड के हिसाब से चालक को खुद सही गियर चुनना पड़ता है। यह लगातार निर्णय लेने की प्रक्रिया दिमाग को अधिक सक्रिय बनाए रखती है। प्रोफेसर कावाशिमा का कहना है कि यही अतिरिक्त मानसिक मेहनत लंबे समय तक संज्ञानात्मक क्षमता को बनाए रखने में मददगार हो सकती है।
क्या सचमुच डिमेंशिया का खतरा कम हो सकता है?
रिसर्च में यह संकेत जरूर मिला है कि नियमित रूप से गियर वाले वाहन चलाने वाले लोगों का मानसिक स्वास्थ्य कहीं ज्यादा बेहतर रह सकता है। हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल मैनुअल कार चलाने से डिमेंशिया पूरी तरह रोका जा सकता है, इस पर अभी रिसर्च चल रही है। असल में डिमेंशिया एक जटिल बीमारी है, जिसके पीछे बढ़ती उम्र, आनुवंशिक कारण, जीवनशैली, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारक जिम्मेदार होते हैं। इसलिए इस बीमारी से रोकथाम में मैनुअल ड्राइविंग को केवल संभावित सहायक गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है, न कि इलाज या गारंटी के तौर पर।
डिमेंशिया क्या है?
डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई लक्षणों का समूह है। इसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और दैनिक काम करने की योग्यता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी, नई चीजें सीखना और दिमाग को लगातार सक्रिय रखना डिमेंशिया के खतरे को कम करने में मददगार माना जाता है।
दुनिया में तेजी से कम हो रही हैं मैनुअल कारें
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में मैनुअल ट्रांसमिशन का इस्तेमाल लगातार घट रहा है। Motor1 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में अमेरिका में बिकी नई कारों में केवल 1.7 प्रतिशत कारें ही मैनुअल ट्रांसमिशन वाली थीं। वहीं CarMax के आंकड़ों के अनुसार 2020 में मैनुअल कारों की बिक्री 2.4 प्रतिशत थी, जो 2021 में 2.8 प्रतिशत और 2022 में 2.9 प्रतिशत तक पहुंची। इसके बावजूद कुल बाजार में इनकी हिस्सेदारी अब भी बेहद सीमित है। जबकि BMW, Chevrolet, Ford, Honda और Toyota जैसी कुछ कंपनियां अब भी चुनिंदा मॉडलों में मैनुअल ट्रांसमिशन का विकल्प उपलब्ध करा रही हैं। इन कारों की मांग मुख्य रूप से उन लोगों के बीच है जो ड्राइविंग का वास्तविक अनुभव और वाहन पर बेहतर नियंत्रण पसंद करते हैं।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मस्तिष्क को सक्रिय रखने वाली हर गतिविधि फायदेमंद हो सकती है। नई भाषा सीखना, संगीत बजाना, शतरंज खेलना, पहेलियां हल करना या मैनुअल वाहन चलाना ये सभी दिमाग को चुनौती देते हैं। लेकिन किसी एक गतिविधि को डिमेंशिया से बचाव का पक्का उपाय नहीं माना जा सकता। इसलिए अगर कोई व्यक्ति केवल मानसिक स्वास्थ्य के लिए मैनुअल कार खरीदने का सोच रहा है, तो उसे यह समझना चाहिए कि अभी इस विषय पर और बड़े वैज्ञानिक अध्ययनों की जरूरत है।


