टेंशन में जुकरबर्ग! Meta पर लगा इतिहास का सबसे बड़ा जुर्माना, ₹23000000... गिनते रह जाएंगे शुन्य

अमेरिका के न्यू मैक्सिको की अदालत ने यूजर्स के डेटा और प्राइवेसी से जुड़े मामले में Meta पर करीब 2.30 लाख करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।

Sachin Singh
Published on: 22 Oct 2026 4:19 PM IST
टेंशन में जुकरबर्ग! Meta पर लगा इतिहास का सबसे बड़ा जुर्माना, ₹23000000... गिनते रह जाएंगे शुन्य
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Mark Zuckerberg, Meta: सोशल मीडिया कंपनी Meta और उसके प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को प्राइवेसी से जुड़े मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने कंपनी पर करीब 2.30 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। यह मामला फेसबुक यूजर्स के निजी डेटा की सुरक्षा और लोगों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के कंपनी के दावों से जुड़ा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने माना कि फेसबुक के काम करने के तरीकों से न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन हुआ। हालांकि, Meta ने इस फैसले का विरोध किया है और कहा है कि वह इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेगी।

Meta पर क्यों लगा इतना भारी जुर्माना?

यह मामला फेसबुक के डेटा जुटाने के तरीकों और यूजर्स की सुरक्षा को लेकर किए गए दावों से जुड़ा है। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी पर आरोप था कि उसने अपने यूजर्स को डेटा के इस्तेमाल और नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने की व्यवस्था के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी। अदालत ने माना कि कंपनी की इन गतिविधियों से न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन हुआ।

यह आदेश सितंबर में जूरी के उस फैसले के बाद आया, जिसमें Meta को न्यू मैक्सिको के अनुचित कारोबारी व्यवहार से जुड़े कानून के 4.3 करोड़ से अधिक उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाया गया था। इस कानून के तहत हर उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है।

पहले और अब के जुर्माने में क्या है अंतर?

शुरुआती अदालती दस्तावेजों में जुर्माने की राशि करीब 219.5 अरब डॉलर तक बताई गई थी। हालांकि, अंतिम आदेश में इसे घटाकर करीब 2.30 लाख करोड़ रुपये तय किया गया। अदालत के फैसले में कंपनी के काम करने के तरीके, उल्लंघनों की संख्या और राज्य के लोगों पर पड़े असर को ध्यान में रखा गया।

न्यू मैक्सिको जिला अदालत के न्यायाधीश फ्रांसिस मैथ्यू ने कहा कि फेसबुक की ओर से बार-बार कानून का उल्लंघन किया गया। उनके मुताबिक, कंपनी के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका और राज्य के नागरिकों पर पड़े व्यापक असर को देखते हुए कानून के तहत अधिकतम जुर्माना लगाना उचित है।

जज ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी राशि चुकाए जाने तक उस पर हर साल 15 प्रतिशत की दर से ब्याज जुड़ता रहेगा। यानी भुगतान में देरी होने पर कंपनी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने फैसले का स्वागत किया

न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज़ ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां अपने आकार और प्रभाव के कारण खुद को कानून की पहुंच से ऊपर समझती रही हैं। उनके मुताबिक, यह फैसला दिखाता है कि कानून का उल्लंघन करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

राज्य की ओर से इस मामले में फेसबुक के डेटा कलेक्शन और यूजर्स की सुरक्षा से जुड़े दावों को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत का आदेश इन्हीं आरोपों और कानूनी कार्यवाही के बाद आया है।

Meta ने फैसले पर क्या कहा?

Meta के चीफ लीगल ऑफिसर सी.जे. महोनी ने अदालत के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कंपनी को भरोसा है कि वह अपील में इस मामले में जीत हासिल करेगी।

Meta का तर्क है कि यह फैसला न्यू मैक्सिको में कारोबार करने के माहौल को मुश्किल बना सकता है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि यह मुकदमा इंटरनेट पर लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा है। कंपनी के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई इंटरनेट पर लोगों के बोलने के तरीके को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल Meta ने फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है। ऐसे में इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

क्या है कैंब्रिज एनालिटिका स्कैम?

इस पूरे विवाद की जड़ साल 2018 में सामने आया कैंब्रिज एनालिटिका मामला है। उस समय आरोप लगा था कि राजनीतिक कंसल्टिंग कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने करीब 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा उनकी अनुमति के बिना हासिल किया और उसका गलत इस्तेमाल किया।

इस खुलासे के बाद फेसबुक की डेटा प्राइवेसी और यूजर्स की जानकारी को सुरक्षित रखने के तरीकों पर गंभीर सवाल उठे थे। विवाद के बाद कंपनी ने प्राइवेसी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने की बात कही थी।

न्यू मैक्सिको के मामले में न्यायाधीश मैथ्यू ने कहा कि फेसबुक इस घोटाले के बाद प्राइवेसी और सुरक्षा बेहतर करने के अपने वादों को पूरा करने में विफल रहा। अदालत की कार्यवाही में कंपनी के डेटा से जुड़े तरीकों और उपभोक्ताओं को दी गई जानकारी पर ध्यान दिया गया।

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Sachin Singh is a media professional with 4 years of experience in the field of journalism and digital media. After completing his education at Jamia Millia Islamia Central University, he has worked with reputed media organizations such as Editor ji, ABP News and Doordarshan. Currently, Sachin Singh is working as a Content Writer with News Track, where he contributes to fast-paced digital news coverage and content creation. His areas of interest include politics, national and international affairs, and food. With experience across different formats of journalism, he focuses on producing informative, accurate, and engaging content for digital audiences.

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