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Old WiFi Router: इंटरनेट धीमा होने की वजह सिर्फ आपका प्लान नहीं, पुराना राउटर भी हो सकता है
Old WiFi Router Security: पुराना Wi-Fi राउटर हैकिंग, धीमी इंटरनेट स्पीड और सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकता है। जानें राउटर कब बदलें और पुराने राउटर का दोबारा कैसे इस्तेमाल करें।
Old WiFi Router Security Hacking | Internet Security Explained in Hindi | Newstrack Hindi News
Old WiFi Router Security Hacking: फ़ोन हर दो-तीन साल में बदल जाता है, लैपटॉप के अपडेट आते रहते हैं, पर घर का राउटर किसी कोने में चुपचाप लाइट झपकाता रहता है, और कई बार सात-आठ साल तक कोई उसे छूता भी नहीं। सीधा जवाब यह है: पुराना राउटर सिर्फ़ धीमा नहीं पड़ता, वह असुरक्षित भी हो जाता है, क्योंकि निर्माता एक समय के बाद उसके सुरक्षा-अपडेट देना बंद कर देता है। और चूँकि घर के हर फ़ोन, टीवी, कैमरे और लैपटॉप का इंटरनेट इसी से होकर गुज़रता है, इसलिए इसकी कमज़ोरी पूरे घर की कमज़ोरी बन जाती है।
राउटर असल में है क्या?
राउटर कोई सादा डिब्बा नहीं, एक छोटा कंप्यूटर है, जिसमें प्रोसेसर, मेमोरी और अपना ऑपरेटिंग सिस्टम (जिसे फ़र्मवेयर कहते हैं) होता है। यह आपके घर और इंटरनेट के बीच दरवाज़े का काम करता है, यानी आपके डिवाइसों से आने-जाने वाला सारा ट्रैफ़िक इसी से गुज़रता है। अगर कोई इस पर कब्ज़ा कर ले, तो वह उस ट्रैफ़िक को देख सकता है, मोड़ सकता है या अपने काम में इस्तेमाल कर सकता है। ठीक इसी वजह से इसका सुरक्षित और अपडेटेड रहना इतना ज़रूरी है।
नुकसान नंबर 1: हैकिंग और बॉटनेट का ख़तरा
जब निर्माता किसी मॉडल का सपोर्ट बंद कर देता है, तो उसमें बाद में मिली ख़ामियाँ कभी ठीक नहीं होतीं। हैकर ऐसी ख़ामियों की सूची तैयार रखते हैं और इंटरनेट पर स्कैन करके ऐसे राउटर ढूँढ़ते रहते हैं। अमेरिकी जाँच एजेंसी FBI के इंटरनेट क्राइम सेंटर ने 7 मई 2025 को चेतावनी जारी की कि अपराधी उन पुराने राउटरों का फ़ायदा उठा रहे हैं जिन्हें अब सुरक्षा-पैच नहीं मिलते, और उनमें 'TheMoon' नाम के मैलवेयर के एक रूप से सेंध लगाई गई है। यह मैलवेयर 2014 में पहली बार सामने आया था, यानी एक दशक से ज़्यादा पुराना है, फिर भी असरदार बना हुआ है, क्योंकि पुराने राउटर उससे बचने लायक़ ही नहीं बचे। हमलावर ऐसे राउटरों को ढूँढ़ने के लिए स्कैन करते हैं और जानी-पहचानी ख़ामियों से पासवर्ड के बिना भी घुस जाते हैं।
ऐसे हैक हुए राउटरों का क्या किया जाता है? FBI के मुताबिक़ इन्हें '5Socks' और 'AnyProxy' जैसे बड़े प्रॉक्सी नेटवर्क में जोड़ दिया जाता है, जिनसे अपराधी अपनी असली पहचान और जगह छिपाते हैं या इन उपकरणों का एक्सेस बेचते हैं। मतलब आपके घर का इंटरनेट कनेक्शन किसी और के अपराध का मुखौटा बन जाता है, और आपको कभी पता नहीं चलता। इसके नतीजे कई हो सकते हैं: इंटरनेट अचानक धीमा हो जाना, आपके आईपी पते का ब्लैकलिस्ट हो जाना (जिससे कुछ वेबसाइटें आपको रोकने लगें), और बदतर मामलों में आपके नाम से हुए ग़लत काम की जाँच का झंझट। उतना ही गंभीर ख़तरा DNS हाईजैक का है, जिसमें राउटर की सेटिंग बदलकर आपको बैंक की नक़ली वेबसाइट पर भेजा जा सकता है।
इसके साथ पुरानी आदतें भी जोखिम बढ़ाती हैं: फ़ैक्टरी वाला डिफ़ॉल्ट पासवर्ड (जैसे 'admin'), रिमोट मैनेजमेंट चालू रहना, और बेहद पुराने वाई-फ़ाई एन्क्रिप्शन। डब्लूईपी एन्क्रिप्शन को तो सालों पहले मिनटों में तोड़ा जा सकने वाला साबित किया जा चुका है, और डब्लूपीए जैसे नए मानक 2018 के बाद आए, जो पुराने राउटरों में होते ही नहीं।
नुकसान नंबर 2: स्पीड और भरोसे की कमी
मान लीजिए आपने 300 Mbps या 1 Gbps का फ़ाइबर प्लान लिया, पर पुराने राउटर की लैन पोर्ट सिर्फ़ 100 Mbps (फ़ास्ट ईथरनेट) की हैं। तब आपकी स्पीड वहीं अटक जाएगी, चाहे प्लान कितना भी तेज़ हो, और असली गति राउटर की सबसे धीमी कड़ी तय करती है। वाई-फ़ाई की पीढ़ियाँ भी बदली हैं: Wi-Fi 4 (802.11n) लगभग 2009 में आया, Wi-Fi 5 (802.11ac) कुछ साल बाद, Wi-Fi 6 (802.11ax) लगभग 2019 में और Wi-Fi 7 हाल में। नए मानक एक साथ कई डिवाइस सँभालने में बेहतर हैं, जो आज के घर में बहुत मायने रखता है, जहाँ फ़ोन, टीवी, स्मार्ट स्पीकर, कैमरे और बल्ब सब जुड़े रहते हैं। पुराने सिंगल-बैंड (सिर्फ़ 2.4 गीगाहर्टज) राउटर में पड़ोसियों के वाई-फ़ाई के साथ भीड़ अलग से झेलनी पड़ती है।
नुकसान नंबर 3: हार्डवेयर की उम्र
राउटर दिन-रात चलता है, इसलिए उसके पुर्ज़े घिसते हैं। गर्मी, धूल, बिजली के उतार-चढ़ाव और पावर अडैप्टर की उम्र बढ़ने से अपने-आप रीस्टार्ट होना, बार-बार कनेक्शन टूटना और वाई-फ़ाई के सिग्नल का कमज़ोर होना आम बात है। नए राउटर में जो सुविधाएँ मिलती हैं, जैसे गेस्ट नेटवर्क, पैरेंटल कंट्रोल, ऑटोमैटिक अपडेट और मेश सपोर्ट, वे भी पुराने मॉडलों में नहीं होतीं।
कैसे जानें कि आपका राउटर पुराना हो चुका है?
सबसे पहले राउटर के पीछे या नीचे चिपके लेबल से मॉडल का नाम पढ़ें और इंटरनेट पर उस नाम के साथ 'firmware update' या 'end of life' खोजें। अगर निर्माता की साइट पर उसके लिए सालों से कोई अपडेट नहीं आया, तो वह संभवतः सपोर्ट से बाहर है। एक मोटा पैमाना यह माना जाता है कि पाँच से सात साल से पुराना राउटर जाँच के दायरे में आ जाता है। दूसरे संकेत ये हैं: उसमें सिर्फ़ 100 Mbps वाली पोर्ट हैं, सिर्फ़ 2.4 गीगाहर्टज बैंड है, या सुरक्षा-सेटिंग्स में सबसे नया विकल्प डब्लूपीए2 से आगे नहीं जाता। अगर राउटर आपके इंटरनेट प्रदाता (आईएसपी) ने दिया है, तो ध्यान रहे कि उसकी अपडेट-नीति प्रदाता तय करता है, इसलिए उसे बदलवाने के लिए प्रदाता से बात करना ज़्यादा काम का है। कई प्रदाता नया उपकरण लगाने की सुविधा देते हैं, पर शर्तें अलग-अलग होती हैं।
अगर तुरंत नहीं बदल सकते, तो ये करें
अगर राउटर को अब भी अपडेट मिल रहे हैं, तो सबसे पहले फ़र्मवेयर अपडेट कर लें। फिर एडमिन पासवर्ड को डिफ़ॉल्ट से बदलें, वाई-फ़ाई का पासवर्ड मज़बूत रखें, और एन्क्रिप्शन WPA2 (AES) या WPA3 पर रखें। रिमोट मैनेजमेंट, WPS और UPnP जैसी सुविधाएँ बंद कर दें, क्योंकि एफबीआई की सलाह भी यही रही है कि रिमोट एक्सेस बंद किया जाए और रीबूट किया जाए। पर रीबूट केवल अस्थायी राहत है क्योंकि पैच के बिना मैलवेयर वापस आ सकता है। यानी ये उपाय जोखिम घटाते हैं, ख़त्म नहीं करते। जिस राउटर का सपोर्ट पूरी तरह बंद है, उसके लिए असल इलाज बदलना ही है, क्योंकि फ़ैक्टरी रीसेट से भी बुनियादी ख़ामी नहीं जाती।
नया राउटर चुनते समय क्या देखें?
कम-से-कम Wi-Fi 6 वाला मॉडल लें, जिसमें गीगाबिट (1000 Mbps) पोर्ट हों और डब्लूपीए3 का सपोर्ट हो। निर्माता का सपोर्ट-पीरियड या अपडेट का इतिहास जाँचें, यानी देखें कि पिछले मॉडलों को कितने साल तक पैच मिले। ऑटोमैटिक अपडेट की सुविधा बहुत काम की है, क्योंकि अपडेट याद रखने पर ही टिके रहना ज़्यादातर लोगों के बस की बात नहीं। बड़े घर में अकेले शक्तिशाली राउटर के बजाय मेश सिस्टम बेहतर रहता है। बिना नाम वाले बेहद सस्ते मॉडलों से बचें, जिनका अपडेट-इतिहास कुछ नहीं होता।
बेकार पड़े पुराने राउटर के काम के इस्तेमाल
पहले एक ज़रूरी बात। अगर राउटर सपोर्ट से बाहर है और उसमें जानी-पहचानी ख़ामियाँ हैं, तो उसे मुख्य राउटर की तरह इंटरनेट से सीधे न जोड़ें। कई उपयोग इसी सिद्धांत पर चलते हैं कि पुराना उपकरण या तो इंटरनेट से कटा रहे, या मुख्य नेटवर्क के पीछे अलग-थलग रहे।
बिना इंटरनेट वाला लोकल नेटवर्क: राउटर को इंटरनेट से जोड़े बिना सिर्फ़ घर के भीतर का छोटा नेटवर्क बनाइए, जिसमें लैपटॉप आपस में फ़ाइलें साझा करें, बच्चे ऑफ़लाइन लैन गेम खेलें, या कंप्यूटर और प्रिंटर आपस में जुड़ें। अगर राउटर में यूएडबी पोर्ट है, तो उससे जुड़ी हार्ड-ड्राइव को सादा नेटवर्क स्टोरेज की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, और पुराना यूएसबी प्रिंटर एक वायरलेस प्रिंटर बन सकता है।
वायर्ड स्विच की तरह: अगर राउटर की पोर्ट गीगाबिट हैं, तो उसका DHCP बंद करके मुख्य राउटर की लैन पोर्ट से अपनी लैन पोर्ट जोड़ दें। इससे टीवी, गेमिंग कंसोल और डेस्कटॉप जैसे कई उपकरणों के लिए अतिरिक्त पोर्ट मिल जाएँगी। 100 Mbps वाली पोर्ट में यह कम काम का है।
एक्सेस पॉइंट या रेंज एक्सटेंडर: जहाँ वाई-फ़ाई सिग्नल कमज़ोर हो, जैसे छत, गैराज या दूर का कमरा, वहाँ पुराना राउटर एक्सेस पॉइंट के रूप में लगाया जा सकता है, जिसे केबल से मुख्य राउटर से जोड़ा जाता है। अगर वह सपोर्ट से बाहर है और रिमोट एक्सेस बंद है, तो यह जोखिम कम करता है, पर पूरी तरह ख़त्म नहीं करता। इसलिए इसे सबसे अच्छा विकल्प न मानें।
IoT और मेहमानों के लिए अलग नेटवर्क: पुराने राउटर के वैन पोर्ट को मुख्य राउटर की लैन पोर्ट से जोड़ दें। तब उस पर जुड़े स्मार्ट बल्ब, प्लग या अतिथियों के फ़ोन मुख्य नेटवर्क के निजी डिवाइसों (लैपटॉप, फ़ोन) से अलग रहते हैं। यह सस्ता तरीक़ा है, पर बहुत संवेदनशील कैमरे या डोर-लॉक को इस पर न डालें।
OpenWrt जैसे खुले फ़र्मवेयर: कई पुराने राउटर मॉडलों के लिए OpenWrt नाम का समुदाय-निर्मित फ़र्मवेयर मौजूद है, जिसे उसकी वेबसाइट पर सपोर्टेड-डिवाइस सूची में देखा जा सकता है। इससे कभी-कभी निर्माता से बाहर हो चुके हार्डवेयर को नई सुरक्षा-अपडेट के साथ दूसरी ज़िंदगी मिल जाती है। पर यह तकनीकी काम है, इसमें डिवाइस के बेकार हो जाने का जोखिम रहता है, और यह सिर्फ़ उन्हीं मॉडलों पर आज़माएँ जो सूची में साफ़ दर्ज हों।
सीखने का औज़ार: पुराना राउटर नेटवर्किंग सीखने के लिए बढ़िया खिलौना है। स्कूल-कॉलेज के बच्चे या नए इंजीनियर उसमें आईपी एड्रेस, पोर्ट फ़ॉरवर्डिंग, फ़ायरवॉल और वी लैन जैसी चीज़ें बिना किसी असली नुक़सान के आज़मा सकते हैं।
रीसायकल: अगर राउटर चल रहा है पर आपके काम का नहीं, तो उसे कबाड़ में देने से पहले फ़ैक्टरी रीसेट ज़रूर करें, क्योंकि उसमें आपका वाई-फ़ाई पासवर्ड और अक्सर आपके इंटरनेट प्रदाता का लॉगिन (जैसे यूज़रनेम-पासवर्ड) जमा रहता है। जो राउटर चलने लायक़ नहीं बचे, उन्हें कूड़े में न फेंकें। भारत में ई-वेस्ट के लिए अधिकृत रीसाइक्लर होते हैं, और आम कूड़े में डाली गई बैटरी-सर्किट वाली चीज़ें पर्यावरण के लिए नुक़सानदेह हैं।
एक आम ग़लती: मेरे पास छिपाने को क्या है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि उनके घर के इंटरनेट में हैकर को दिलचस्पी क्यों होगी। पर हमलावर आपके डेटा से ज़्यादा आपके कनेक्शन में रुचि रखते हैं। लाखों छोटे घरों के राउटर मिलकर उनके लिए सस्ता, गुमनाम और बेहद बड़ा नेटवर्क बन जाते हैं। इसीलिए सुरक्षा-शोधकर्ता घरेलू राउटर को इंटरनेट की सबसे कमज़ोर कड़ी कहते हैं।
पुराना राउटर बदलना कोई शौक़ या दिखावा नहीं, घर की डिजिटल सुरक्षा का हिस्सा है। जो राउटर सुरक्षा-अपडेट पाता रहता है और आपकी इंटरनेट स्पीड सँभाल लेता है, उसे बदलने की ज़रूरत नहीं। पर जिसे निर्माता छोड़ चुका है, उसे आसानी से मुख्य गेटवे की जगह न रखें। उसे बदलिए, और पुराने को या तो ऑफ़लाइन कामों में लगाइए, अलग-थलग नेटवर्क पर रखिए, या सीखने का औज़ार बना दीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राउटर को कितने साल में बदलना चाहिए?
- कोई तय अवधि नहीं है। एक मोटा पैमाना पाँच से सात साल है, पर असली कसौटी यह है कि निर्माता अब भी उसे सुरक्षा-अपडेट दे रहा है या नहीं।
क्या फ़ैक्टरी रीसेट से हैक हुआ राउटर ठीक हो जाता है?
- अगर राउटर सपोर्ट से बाहर है तो नहीं, क्योंकि जिस ख़ामी से मैलवेयर घुसा, वह फ़र्मवेयर में बनी रहती है और दोबारा काम कर सकती है।
क्या राउटर को रीबूट करना काफ़ी है?
- यह अस्थायी राहत दे सकता है, क्योंकि रीबूट से कुछ मैलवेयर मेमोरी से निकल जाते हैं, पर पैच के बिना वह लौट सकता है।
क्या ISP का दिया राउटर सुरक्षित होता है?
- ज़रूरी नहीं। इसकी अपडेट-नीति प्रदाता तय करता है, इसलिए उम्र, सपोर्ट और सेटिंग्स की जाँच कर लें, और ज़रूरत हो तो प्रदाता से बदलवाने को कहें।
पुराना राउटर एक्सटेंडर की तरह इस्तेमाल करना सुरक्षित है?
- ज़्यादा सुरक्षित तभी है जब वह मुख्य राउटर के पीछे हो, रिमोट एक्सेस बंद हो और वह किसी जानी-पहचानी ख़ामी से इंटरनेट पर सीधे उजागर न हो। फिर भी जोखिम शून्य नहीं है।
नया राउटर लेते ही हैक का ख़तरा ख़त्म हो जाता है?
- ऐसा नहीं है। उसे नियमित अपडेट, मज़बूत पासवर्ड और ज़रूरी सेटिंग्स की भी ज़रूरत है। बस नया सपोर्टेड राउटर पुरानी ख़ामियों से सुरक्षित रहता है।


