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Phone Battery Drain Explained: फोन की बैटरी 20% के बाद तेजी से क्यों गिरती है? Fast Charging का सच
Phone Battery Drain Explained: फोन की बैटरी 20 प्रतिशत के बाद तेजी से क्यों गिरती है? जानिए बैटरी प्रतिशत, वोल्टेज, तापमान, पुरानी बैटरी और आंतरिक प्रतिरोध का क्या असर होता है और क्या तेज चार्जिंग सच में बैटरी को जल्दी खराब करती है।
Phone Battery 20 Percent Fast Drain Explained in Hindi
Phone Battery Drain Explained: स्मार्टफोन की बैटरी को लेकर दो अनुभव लगभग हर उपयोगकर्ता ने कभी न कभी किए हैं। पहला, फोन 100 से 80 प्रतिशत तक काफी देर चलता है। 50 से 30 प्रतिशत तक भी सब ठीक लगता है। लेकिन जैसे ही बैटरी 20 प्रतिशत के आसपास पहुंचती है, प्रतिशत मानो अचानक तेजी से गिरने लगता है। 20 से 15, फिर 12, फिर 8 और कुछ ही देर में फोन बंद। दूसरा अनुभव ठीक उलटा है। चार्जर लगाते ही फोन बहुत तेजी से 50, 60 या 80 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, लेकिन अंतिम 20 प्रतिशत भरने में कहीं ज्यादा समय लगता है। इसी से तीसरा सवाल पैदा होता है, क्या तेज चार्जिंग की सुविधा वास्तव में बैटरी की उम्र कम करती है?
इसका जवाब सीधा हां या नहीं में नहीं दिया जा सकता। 20 प्रतिशत के बाद बैटरी वास्तव में हमेशा अचानक तेजी से खाली नहीं होती। कई बार उसकी रासायनिक स्थिति, वोल्टेज में गिरावट, फोन की ऊर्जा खपत और बैटरी प्रतिशत का अनुमान मिलकर ऐसा अनुभव पैदा करते हैं। इसी तरह तेज चार्जिंग अपने आप में बैटरी की दुश्मन नहीं है। लेकिन ज्यादा तापमान, अत्यधिक चार्जिंग धारा और लंबे समय तक बहुत अधिक चार्ज अवस्था बैटरी के क्षय को तेज कर सकती है। आधुनिक फोन इन्हीं जोखिमों को कम करने के लिए चार्जिंग की गति को लगातार नियंत्रित करते हैं।
फोन में दिखाई देने वाला बैटरी प्रतिशत आखिर है क्या?
सबसे पहले एक मूल बात समझना जरूरी है। फोन के ऊपर दिखाई देने वाला 67 प्रतिशत, 23 प्रतिशत या 4 प्रतिशत कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे बैटरी के अंदर लगा कोई मीटर सीधे नाप रहा हो।
बैटरी किसी पानी की बोतल की तरह पारदर्शी पात्र नहीं है, जिसमें कोई सेंसर देखकर बता दे कि कितना चार्ज बचा है। फोन का बैटरी प्रबंधन तंत्र बैटरी से बहने वाली विद्युत धारा, उसके वोल्टेज, तापमान, पिछले चार्ज और डिस्चार्ज के व्यवहार, बैटरी की उम्र और कई दूसरे कारकों के आधार पर यह अनुमान लगाता है कि कितना चार्ज बचा है।
आधुनिक बैटरी प्रबंधन में कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें बैटरी से अंदर-बाहर जाने वाली विद्युत मात्रा की गणना, बिना भार की स्थिति में उसके वोल्टेज को देखना और बैटरी के व्यवहार के गणितीय मॉडल के आधार पर अनुमान लगाना शामिल है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से साफ है कि लिथियम-आयन बैटरी में बचा हुआ चार्ज बिल्कुल सटीक तरीके से बताना स्वभाव से ही मुश्किल है। इसका व्यवहार सीधी रेखा की तरह नहीं होता। तापमान, बैटरी की उम्र और इस्तेमाल की परिस्थितियां बदलने पर उसका व्यवहार भी बदलता रहता है।
इसलिए पहला महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि स्क्रीन पर दिखाई देने वाला प्रतिशत सीधा माप नहीं, बल्कि एक परिष्कृत अनुमान है। यह अनुमान आम तौर पर काफी अच्छा होता है, लेकिन गणितीय रूप से बिल्कुल सटीक नहीं।
गूगल भी अपने पिक्सल फोन में बैटरी क्षमता को बैटरी मापक द्वारा अनुमानित बताता है। कुछ मॉडलों में समय-समय पर 100 प्रतिशत तक चार्ज करने को इसलिए उपयोगी माना जाता है ताकि बैटरी क्षमता का अनुमान ज्यादा सटीक बना रहे।
फिर 20 प्रतिशत के बाद बैटरी तेजी से गिरती हुई क्यों लगती है?
इसका पहला कारण लिथियम-आयन बैटरी का वोल्टेज व्यवहार है। बैटरी जैसे-जैसे खाली होती है, उसका वोल्टेज घटता जाता है। बीच की चार्ज सीमा में यह गिरावट अपेक्षाकृत नियंत्रित दिखाई दे सकती है। लेकिन कम चार्ज अवस्था में बैटरी की उपलब्ध ऊर्जा और वोल्टेज के बीच संबंध ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।
इसी समय फोन को प्रोसेसर, स्क्रीन, मोबाइल नेटवर्क, कैमरा और दूसरे हिस्सों को चलाने के लिए पर्याप्त वोल्टेज बनाए रखना पड़ता है।
मान लीजिए आपके फोन में 18 प्रतिशत बैटरी बची है और आपने उसी समय वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। साथ ही मोबाइल नेटवर्क कमजोर है और फोन लगातार ज्यादा शक्ति खींच रहा है। ऐसी स्थिति में बैटरी पर अचानक ज्यादा भार पड़ता है।
इस भार के कारण बैटरी का वास्तविक वोल्टेज कुछ समय के लिए और नीचे गिर सकता है। फोन का बैटरी प्रबंधन तंत्र इस नई स्थिति को देखकर अपना अनुमान बदल सकता है। उपयोगकर्ता को ऐसा लग सकता है कि बैटरी 17 से सीधे 13 प्रतिशत पर पहुंच गई।
यानी हर बार ऐसा नहीं होता कि बैटरी ने सचमुच चार प्रतिशत ऊर्जा एक झटके में खर्च कर दी। कई बार बैटरी प्रतिशत का अनुमान नई परिस्थितियों के अनुसार बदलता है।
बैटरी की आंतरिक रुकावट क्या होती है?
यहां बैटरी की आंतरिक प्रतिरोध क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है। नई लिथियम-आयन बैटरी अपेक्षाकृत आसानी से ज्यादा शक्ति दे सकती है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसके भीतर विद्युत प्रवाह का विरोध बढ़ने लगता है।
कम चार्ज अवस्था में यह प्रभाव ज्यादा साफ दिखाई दे सकता है। जब फोन अचानक ज्यादा शक्ति मांगता है तो पुरानी बैटरी का वोल्टेज अपेक्षाकृत तेजी से नीचे गिर सकता है।
अगर वोल्टेज उस न्यूनतम सुरक्षित सीमा से नीचे चला जाए जिस पर फोन ठीक से काम कर सकता है तो फोन खुद बंद हो सकता है, भले स्क्रीन पर कुछ प्रतिशत बैटरी बाकी दिखाई दे रही हो।
यही कारण है कि पुराने फोन में कभी-कभी 12 प्रतिशत पर सब ठीक चलता है, लेकिन कैमरा खोलते ही फोन बंद हो जाता है।
इसका अर्थ यह जरूरी नहीं कि बैटरी में बिल्कुल ऊर्जा नहीं बची थी। समस्या यह हो सकती है कि बैटरी उस क्षण फोन की अचानक बढ़ी हुई शक्ति की जरूरत पूरी करने में सक्षम नहीं रही।
क्या 20 प्रतिशत कोई जादुई सीमा है?
नहीं। 20 प्रतिशत कोई ऐसी रासायनिक दीवार नहीं है जिसके नीचे पहुंचते ही हर लिथियम-आयन बैटरी अचानक तेजी से गिरने लगे। कुछ फोन में यह अनुभव 15 प्रतिशत के बाद हो सकता है, कुछ में 10 प्रतिशत के बाद और नई तथा स्वस्थ बैटरी में शायद बिल्कुल महसूस न हो।
20 प्रतिशत की सीमा इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण लगती है क्योंकि बहुत से फोन इसी आसपास कम बैटरी या बैटरी बचत की चेतावनी देने लगते हैं। इसके बाद उपयोगकर्ता का ध्यान बैटरी प्रतिशत पर लगातार रहने लगता है। 78 से 71 प्रतिशत के बीच सात प्रतिशत की गिरावट शायद आपने नोट ही नहीं की। लेकिन 18 से 11 प्रतिशत की गिरावट की हर संख्या आपको दिखाई देती है, क्योंकि अब फोन बंद होने की चिंता शुरू हो चुकी होती है।
इसमें मनोवैज्ञानिक अनुभव भी जुड़ जाता है। हालांकि रासायनिक और विद्युत कारण भी वास्तविक हैं, खासकर पुरानी बैटरी, ठंडे वातावरण और ज्यादा भार की स्थिति में।
ठंड में बैटरी अचानक क्यों गिर जाती है?
ठंड लिथियम-आयन बैटरी के भीतर होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं को धीमा कर देती है और उसकी आंतरिक प्रतिरोध क्षमता बढ़ा सकती है।
नतीजा यह होता है कि बैटरी में ऊर्जा मौजूद होने के बावजूद वह तुरंत उतनी शक्ति नहीं दे पाती जितनी फोन मांग रहा है।
इसीलिए बहुत ठंडे वातावरण में फोन 15 प्रतिशत पर अचानक बंद हो सकता है। कमरे के सामान्य तापमान में आने के बाद वही फोन दोबारा चालू होकर 8 या 10 प्रतिशत बैटरी दिखा सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि ऊर्जा जादुई तरीके से वापस आ गई। तापमान सामान्य होने पर बैटरी की विद्युत क्षमता कुछ बेहतर हो गई और फोन को उपलब्ध ऊर्जा का अनुमान भी बदल गया।
पुरानी बैटरी में 20 से 0 इतनी तेजी से क्यों जाता है?
यहां उम्र से जुड़े दो अलग-अलग बदलाव होते हैं।
पहला है कुल क्षमता में कमी। बैटरी नई होने पर जितनी ऊर्जा जमा कर सकती थी, समय के साथ उतनी नहीं कर पाती। अगर नई बैटरी की क्षमता 5000 मिलीऐम्पियर-घंटा थी और उम्र के साथ उसकी वास्तविक क्षमता घटकर 4000 मिलीऐम्पियर-घंटा रह गई, तो स्क्रीन पर 100 प्रतिशत का अर्थ अब मूल 5000 मिलीऐम्पियर-घंटा नहीं है।
दूसरा बदलाव है अधिक शक्ति देने की क्षमता में कमी। पुरानी बैटरी तेज मांग के समय उतनी शक्ति नहीं दे पाती जितनी नई बैटरी दे सकती थी।
एप्पल के मुताबिक रासायनिक उम्र बढ़ने के साथ बैटरी की अधिकतम क्षमता घटती है और अचानक ज्यादा शक्ति देने की उसकी क्षमता भी कम हो सकती है। यही वजह है कि पुरानी बैटरी का आखिरी हिस्सा उपयोग में ज्यादा अस्थिर दिखाई दे सकता है। गूगल भी लिथियम-आयन बैटरियों को इस्तेमाल के साथ धीरे-धीरे घिसने वाला घटक मानता है। समय, तापमान, चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के कारण इसकी क्षमता कम होती रहती है। अलग-अलग पिक्सल मॉडलों को लगभग 800 से 1000 पूर्ण चार्ज चक्रों के बाद मूल क्षमता का करीब 80 प्रतिशत बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है, हालांकि वास्तविक परिणाम व्यक्ति के इस्तेमाल पर निर्भर करते हैं।
क्या बैटरी को बार-बार 0 प्रतिशत तक ले जाना चाहिए?
पुरानी निकेल-कैडमियम बैटरियों में जिसे याददाश्त प्रभाव या मेमोरी इफेक्ट कहा जाता था, उससे जुड़ी कई सलाह आज की लिथियम-आयन बैटरियों पर लागू नहीं होतीं।
आधुनिक फोन को रोज जानबूझकर 100 से 0 तक चलाने की जरूरत नहीं है। एप्पल भी कहता है कि लिथियम-आयन बैटरी को चार्ज करने से पहले पूरी तरह खाली करना जरूरी नहीं और आंशिक चार्जिंग से बैटरी को नुकसान नहीं होता। यहां एक दिलचस्प बात है। अगर आज आपने फोन को 100 से 60 प्रतिशत तक इस्तेमाल किया और फिर चार्ज किया, और अगले दिन 100 से 40 प्रतिशत तक इस्तेमाल किया, तो दोनों मिलकर लगभग एक पूर्ण चार्ज चक्र के बराबर इस्तेमाल माने जा सकते हैं। एक चार्ज चक्र का मतलब जरूरी नहीं कि एक बार 100 से 0 तक जाना ही हो। फोन का स्क्रीन पर दिखने वाला 0 प्रतिशत भी रासायनिक रूप से बिल्कुल शून्य ऊर्जा नहीं होता। बैटरी प्रबंधन तंत्र वास्तविक सेल को उस सीमा तक जाने से पहले फोन बंद कर देता है जहां स्थायी नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।
चार्जिंग में 0 से 80 इतनी तेज और 80 से 100 इतनी धीमी क्यों?
यह जानबूझकर किया जाता है। जब लिथियम-आयन बैटरी काफी खाली होती है तो वह अपेक्षाकृत ज्यादा चार्जिंग धारा स्वीकार कर सकती है। इसलिए आधुनिक फोन शुरुआती चरण में तेजी से चार्ज होते हैं।
जैसे-जैसे बैटरी ऊपरी चार्ज सीमा के करीब पहुंचती है, उसका वोल्टेज बढ़ता है और रासायनिक तनाव भी बढ़ सकता है। तब बैटरी प्रबंधन तंत्र चार्जिंग धारा धीरे-धीरे कम कर देता है। एप्पल के अनुसार उसकी लिथियम-आयन बैटरियां शुरुआती करीब 80 प्रतिशत तक तेज चार्जिंग करती हैं और उसके बाद धीमी चार्जिंग का चरण अपनाती हैं। इसका उद्देश्य बैटरी पर पड़ने वाले तनाव और तापमान को नियंत्रित करना है। इसलिए अगर आपका फोन पहले 30 मिनट में 0 से 55 या 60 प्रतिशत तक पहुंच जाए लेकिन अगले 40 मिनट में केवल 60 से 100 प्रतिशत तक जाए, तो इसका मतलब चार्जर खराब होना जरूरी नहीं। यह अक्सर चार्जिंग व्यवस्था का जानबूझकर बनाया गया हिस्सा होता है।
क्या तेज चार्जिंग सच में बैटरी खराब करती है?
सैद्धांतिक रूप से ज्यादा चार्जिंग धारा बैटरी पर ज्यादा तनाव डाल सकती है। वैज्ञानिक शोध में तेज चार्जिंग से जुड़े प्रमुख जोखिमों में ज्यादा तापमान, बैटरी के भीतर इलेक्ट्रोड का क्षय और कुछ परिस्थितियों में एनोड पर लिथियम के जमने जैसी समस्याएं शामिल हैं। खासकर बहुत ज्यादा चार्जिंग दर, ठंडा तापमान और बहुत ऊंची चार्ज अवस्था बैटरी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
लेकिन इसी तथ्य से इंटरनेट पर एक अधूरा निष्कर्ष निकाल लिया जाता है, "तेज चार्जिंग यानी बैटरी जल्दी खराब।"
यह सही नहीं है। आधुनिक फोन बैटरी को बिना नियंत्रण के अधिकतम शक्ति नहीं देते। फोन का बैटरी प्रबंधन तंत्र बैटरी की चार्ज अवस्था, तापमान और दूसरे कारकों के अनुसार चार्जिंग धारा लगातार बदलता रहता है।
अगर आपका चार्जर 65 वाट का है तो इसका अर्थ यह नहीं कि बैटरी हर समय 65 वाट की शक्ति ले रही है। फोन उतनी ही शक्ति लेता है जितनी उस समय सुरक्षित मानी जाती है। जैसे-जैसे बैटरी गर्म होती है या 80, 90 प्रतिशत की ओर बढ़ती है, चार्जिंग की गति कम हो सकती है।
इसलिए ज्यादा सटीक निष्कर्ष यह है कि बिना पर्याप्त नियंत्रण वाली तेज चार्जिंग बैटरी के क्षय को तेज कर सकती है, लेकिन आधुनिक नियंत्रित तेज चार्जिंग अपने आप में बैटरी को जल्दी नष्ट करने वाली तकनीक नहीं है।
बैटरी का सबसे बड़ा दुश्मन क्या है?
अगर एक शब्द में जवाब देना हो तो वह है गर्मी। तेज चार्जिंग इसलिए समस्या बन सकती है क्योंकि ज्यादा शक्ति से ज्यादा ताप पैदा हो सकता है। लेकिन वही ताप गेम खेलते समय, धूप में फोन छोड़ने, कार के डैशबोर्ड पर रखने, गर्म कमरे में चार्ज करने या चार्ज करते समय भारी गेम खेलने से भी पैदा हो सकता है। एप्पल 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान वाले वातावरण में फोन रखने या चार्ज करने से बचने की सलाह देता है। ज्यादा गर्मी बैटरी की क्षमता को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। फोन का सॉफ्टवेयर इसी कारण तापमान ज्यादा होने पर चार्जिंग को सीमित कर सकता है।
इसलिए केवल चार्जर की वाट संख्या देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह बैटरी के लिए कितना नुकसानदायक है। तापमान और चार्जिंग व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
क्या रात भर चार्जर में लगा छोड़ना गलत है?
आधुनिक फोन में 100 प्रतिशत पहुंचने के बाद चार्जिंग बिना नियंत्रण के जारी नहीं रहती। फोन का ऊर्जा प्रबंधन तंत्र चार्जिंग को रोकता है और जरूरत पड़ने पर फिर शुरू करता है। एप्पल के मुताबिक आईफोन को रात भर चार्जर से जोड़े रखना सामान्य रूप से सुरक्षित है। उसके अनुकूलित चार्जिंग जैसे फीचर इस बात को कम करने की कोशिश करते हैं कि फोन लंबे समय तक पूरी तरह चार्ज अवस्था में रहे। लेकिन यहां सुरक्षित और बैटरी के लिए आदर्श में अंतर है। लिथियम-आयन बैटरी को लंबे समय तक बहुत ज्यादा चार्ज अवस्था और ज्यादा तापमान पर रखना उसकी उम्र के लिए आदर्श नहीं। इसी वजह से आधुनिक फोन अनुकूलित चार्जिंग या 80 प्रतिशत चार्ज सीमा जैसी सुविधाएं देने लगे हैं।
इसलिए रात भर चार्जिंग से फोन सामान्य परिस्थितियों में कोई खतरनाक चीज नहीं बन जाएगा। लेकिन अगर बैटरी वर्षों तक हर रात गर्म वातावरण में कई घंटे 100 प्रतिशत पर रहती है तो उसका रासायनिक क्षय अपेक्षाकृत तेज हो सकता है।
क्या 80 प्रतिशत पर चार्ज रोकना सच में उपयोगी है?
हां, अगर आपको रोज 100 प्रतिशत की जरूरत नहीं है।
ऊंची चार्ज अवस्था में लिथियम-आयन सेल का वोल्टेज ज्यादा रहता है और रासायनिक तनाव भी बढ़ सकता है। इसी कारण एप्पल और गूगल दोनों ने ऐसी चार्जिंग सुविधाएं दी हैं जो करीब 80 प्रतिशत पर चार्जिंग सीमित कर सकती हैं या अंतिम 20 प्रतिशत को बाद में भरती हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फोन को कभी 100 प्रतिशत चार्ज करना गलत है। यात्रा पर जाना हो, दिन बहुत लंबा हो या चार्जर आसानी से उपलब्ध न हो तो 100 प्रतिशत चार्ज करना बिल्कुल सामान्य है।
बैटरी स्वास्थ्य का मतलब अपनी सुविधा खत्म कर देना नहीं है।
क्या 20 से 80 प्रतिशत वाला नियम अनिवार्य है?
"फोन को हमेशा 20 से 80 प्रतिशत के बीच ही रखो" एक उपयोगी सामान्य सलाह हो सकती है, लेकिन यह कोई कठोर वैज्ञानिक नियम नहीं है। लिथियम-आयन बैटरी को लंबे समय तक बहुत कम या बहुत अधिक चार्ज अवस्था में रखने से बचना दीर्घकालीन स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो सकता है। लेकिन रोज 19 प्रतिशत तक पहुंच जाना या कभी 100 प्रतिशत चार्ज कर लेना बैटरी को अचानक खराब नहीं करता। अगर चार्जर उपलब्ध है तो छोटी-छोटी आंशिक चार्जिंग बिल्कुल ठीक है। फोन को जानबूझकर 0 प्रतिशत तक ले जाने की जरूरत नहीं। और अगर आपको दीर्घकालीन बैटरी स्वास्थ्य ज्यादा महत्वपूर्ण लगता है तो फोन में उपलब्ध 80 प्रतिशत या 90 प्रतिशत चार्ज सीमा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या सस्ता या नकली तेज चार्जर ज्यादा नुकसान कर सकता है?
हां, लेकिन समस्या केवल तेज चार्जिंग होना नहीं है।
खराब गुणवत्ता वाले चार्जर में वोल्टेज नियंत्रण, ताप सुरक्षा या चार्जिंग मानकों का पालन कमजोर हो सकता है। आधुनिक चार्जिंग प्रणालियों में फोन और चार्जर आपस में तय करते हैं कि कितनी शक्ति दी जानी है।
इसलिए निर्माता द्वारा समर्थित या मान्य मानकों वाला अच्छी गुणवत्ता का चार्जर इस्तेमाल करना केवल ज्यादा वाट वाले चार्जर की तुलना में कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।
क्या वायरलेस चार्जिंग बैटरी को ज्यादा नुकसान करती है?
वायरलेस चार्जिंग में विद्युत ऊर्जा का कुछ हिस्सा गर्मी में बदलता है। अगर फोन और चार्जिंग पैड का मेल ठीक नहीं है तो ऊर्जा का नुकसान और ताप दोनों बढ़ सकते हैं।
इसलिए कुछ परिस्थितियों में वायरलेस चार्जिंग तार वाली चार्जिंग से ज्यादा गर्मी पैदा कर सकती है। बैटरी के लिए मुख्य चिंता फिर वही है, तापमान।
अगर वायरलेस चार्जर फोन को लगातार बहुत गर्म कर रहा है तो लंबे समय में बैटरी की सेहत पर असर पड़ सकता है। लेकिन केवल यह कहना कि "वायरलेस चार्जिंग खराब है" भी सही नहीं होगा। आधुनिक प्रमाणित प्रणालियों में तापमान नियंत्रित करने की व्यवस्था होती है।
चार्ज करते समय गेम खेलना क्यों अच्छा नहीं माना जाता?
क्योंकि उस समय फोन दो तरफ से गर्म हो सकता है। एक तरफ बैटरी चार्ज हो रही है और दूसरी तरफ प्रोसेसर तथा ग्राफिक्स चिप भारी काम कर रहे हैं। फोन एक साथ ऊर्जा ले भी रहा है और बड़ी मात्रा में ऊर्जा खर्च भी कर रहा है। इससे तापमान बढ़ सकता है और चार्जिंग की गति कम हो सकती है। अगर तापमान बहुत ज्यादा हो जाए तो फोन खुद चार्जिंग की शक्ति कम कर देता है।
इससे उपयोगकर्ता को लगता है कि उसका तेज चार्जर अचानक धीमा हो गया, जबकि वास्तव में फोन बैटरी की सुरक्षा कर रहा होता है। कभी-कभार चार्ज करते हुए वीडियो देखना कोई बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन गर्म कमरे में तेज चार्जिंग के दौरान रोज भारी गेम खेलना बैटरी के लिए आदर्श स्थिति नहीं है।
क्या बैटरी की सही रीडिंग के लिए महीने में एक बार 0 से 100 करना चाहिए?
लिथियम-आयन बैटरी को किसी मेमोरी प्रभाव को ठीक करने के लिए 0 से 100 प्रतिशत तक चलाने की जरूरत नहीं होती। हां, बैटरी प्रतिशत का अनुमान कभी-कभी थोड़ा भटक सकता है और कुछ निर्माता समय-समय पर पूर्ण चार्ज के जरिए बैटरी क्षमता के अनुमान को बेहतर करने की व्यवस्था रखते हैं। गूगल अपने कुछ पिक्सल फोन में 80 प्रतिशत की चार्ज सीमा के बावजूद हर दसवें चक्र के आसपास फोन को 100 प्रतिशत तक चार्ज करने की अनुमति देता है, ताकि बैटरी क्षमता का अनुमान सटीक बना रहे।
इसका मतलब यह नहीं कि उपयोगकर्ता को नियमित रूप से बैटरी 0 प्रतिशत तक गिरानी चाहिए। बैटरी का अनुमान सुधारना और बैटरी को पूरी तरह खाली करना एक ही चीज नहीं है। अगर फोन का प्रतिशत अचानक 40 से 15 पर गिरता है, 20 प्रतिशत पर बार-बार बंद हो जाता है या चार्ज की रीडिंग बहुत असंगत है तो यह केवल अनुमान की समस्या नहीं, बल्कि पुरानी या खराब बैटरी का संकेत भी हो सकता है।
कब समझें कि समस्या सॉफ्टवेयर की नहीं, बैटरी की है?
अगर फोन सामान्य इस्तेमाल में अचानक बहुत कम समय चलने लगा है, कम चार्ज पर बार-बार बंद हो जाता है, तापमान सामान्य होने के बावजूद प्रतिशत छलांग लगाता है या बैटरी की सेहत काफी गिर चुकी है तो बैटरी की वास्तविक क्षमता और उसकी आंतरिक प्रतिरोध क्षमता खराब हो सकती है। एप्पल के मुताबिक आईफोन 14 और उससे पुराने मॉडलों की बैटरियां आदर्श परिस्थितियों में 500 पूर्ण चार्ज चक्रों के बाद मूल क्षमता का करीब 80 प्रतिशत बनाए रखने के लिए डिजाइन की गई हैं। आईफोन 15 श्रृंखला के लिए यह संख्या करीब 1000 चक्र है। वास्तविक परिणाम उपयोग पर निर्भर करते हैं।
गूगल भी अलग-अलग पिक्सल मॉडलों के लिए करीब 800 या 1000 चार्ज चक्रों के बाद 80 प्रतिशत क्षमता को एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु मानता है। इसलिए अगर चार या पांच साल पुराने फोन की बैटरी 20 प्रतिशत के बाद तेजी से गिरती है तो केवल चार्जर को दोष देना सही नहीं होगा।
फोन में दिखाई देने वाला 100 प्रतिशत क्या सच में पूरी तरह भरा हुआ है?
जरूरी नहीं कि सेल की अधिकतम रासायनिक सीमा तक उसे चार्ज किया गया हो। निर्माता बैटरी की सुरक्षा के लिए ऊपरी और निचली सीमा में कुछ सुरक्षा मार्जिन रख सकते हैं। उपयोगकर्ता को 100 और 0 प्रतिशत दिखाने वाला सॉफ्टवेयर वास्तविक बैटरी सेल के सुरक्षित इस्तेमाल की सीमा के भीतर काम करता है। इसी कारण आधुनिक फोन और सही चार्जिंग व्यवस्था में "100 प्रतिशत के बाद बैटरी को ओवरचार्ज कर देगा" जैसी चिंता आम तौर पर उचित नहीं है। बैटरी प्रबंधन तंत्र ऊपरी वोल्टेज सीमा की निगरानी करता है और चार्जिंग को नियंत्रित करता है।
तो बैटरी बचाने का सबसे व्यावहारिक तरीका क्या है?
अगर पूरी चर्चा को रोजमर्रा की आदतों में समेटें तो बहुत कठिन नियमों की जरूरत नहीं है। फोन को अत्यधिक गर्म होने से बचाइए। अच्छी गुणवत्ता वाला और फोन के अनुकूल चार्जर इस्तेमाल कीजिए। रोज जानबूझकर बैटरी को 0 प्रतिशत तक मत ले जाइए। जरूरत न हो तो लंबे समय तक हर समय 100 प्रतिशत पर रखने से बचिए। अगर फोन में 80 प्रतिशत चार्ज सीमा या अनुकूलित चार्जिंग की सुविधा है तो जरूरत के मुताबिक उसका इस्तेमाल कीजिए। तेज चार्जिंग की सुविधा जब जरूरत हो तब इस्तेमाल की जा सकती है। केवल बैटरी खराब होने के डर से उसे हमेशा बंद रखने की जरूरत नहीं है।
बैटरी का क्षय वैसे भी पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लिथियम-आयन बैटरी एक ऐसा घटक है जिसकी क्षमता समय के साथ घटती है। हर चार्ज चक्र, हर साल और हर रासायनिक प्रक्रिया के साथ उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। लक्ष्य बैटरी को अमर बनाना नहीं, बल्कि अनावश्यक क्षय को कम करना है।
आखिर 20 प्रतिशत के बाद बैटरी तेजी से गिरने का सच क्या है?
मोबाइल की बैटरी का प्रतिशत हम पेट्रोल की टंकी के मीटर जैसा समझते हैं। लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। पेट्रोल की टंकी में 20 प्रतिशत ईंधन बचा है तो वह वास्तव में लगभग उतनी मात्रा में तरल है। लिथियम-आयन बैटरी में 20 प्रतिशत एक गणना किया हुआ अनुमान है। इस अनुमान की उपयोगी ऊर्जा इस बात पर भी निर्भर करती है कि बैटरी कितनी पुरानी है, कितनी गर्म या ठंडी है, फोन उस समय कितनी शक्ति मांग रहा है और बैटरी का वोल्टेज कितना नीचे जा रहा है।
इसी वजह से कभी 20 प्रतिशत बैटरी आधे घंटे चलती है और कभी दस मिनट भी नहीं।
तेज चार्जिंग का सच भी इसी तरह दो अतियों के बीच है। यह कहना गलत है कि तेज चार्जिंग से बैटरी पर कोई अतिरिक्त तनाव नहीं पड़ता। ज्यादा चार्जिंग दर और ज्यादा तापमान बैटरी के क्षय को बढ़ा सकते हैं। लेकिन यह कहना भी गलत है कि हर तेज चार्जर बैटरी को जल्दी नष्ट कर देता है। आधुनिक फोन वास्तव में नियंत्रित तेज चार्जिंग करते हैं। शुरुआत में ज्यादा शक्ति दी जाती है, तापमान बढ़ने पर शक्ति कम की जाती है और बैटरी के करीब 80 प्रतिशत या उससे आगे पहुंचने पर चार्जिंग की गति और घटाई जाती है।
इसलिए दोनों सवालों का सबसे सटीक जवाब यही है, 20 प्रतिशत के बाद बैटरी का तेजी से गिरना केवल भ्रम नहीं है, लेकिन यह कोई सार्वभौमिक 20 प्रतिशत नियम भी नहीं है। इसके पीछे कम चार्ज अवस्था में बढ़ता आंतरिक प्रतिरोध, वोल्टेज में गिरावट, बैटरी की उम्र, तापमान, उस समय फोन की ऊर्जा मांग और बैटरी प्रतिशत का अनुमान, सभी मिलकर काम कर सकते हैं।
और तेज चार्जिंग अपने आप में बैटरी की दुश्मन नहीं है। उसका खतरा तब ज्यादा बढ़ता है जब तेज चार्जिंग के साथ अत्यधिक गर्मी और लंबे समय तक बहुत ज्यादा चार्ज अवस्था जुड़ जाए।
अंततः बैटरी की उम्र बचाने वाली कोई रहस्यमयी 20-80 तरकीब नहीं है। सबसे आसान सिद्धांत यही है, बैटरी को अनावश्यक गर्मी और अनावश्यक तनाव से बचाइए। बाकी काम आधुनिक फोन का बैटरी प्रबंधन तंत्र काफी हद तक खुद करने के लिए बनाया गया है।


