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PM E-DRIVE 2028: 31 मार्च 2028 तक बढ़ी PM E-DRIVE योजना
PM E-DRIVE 2028: 31 मार्च 2028 तक बढ़ गई है, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पर इंसेंटिव 31 जुलाई 2026 को खत्म हो चुका है। जानें पूरी वजह।
PM E-DRIVE 2028: Why E-Scooter Subsidy Is Over
PM E-DRIVE 2028: भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने वाली PM E-DRIVE योजना की अवधि भले ही 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई हो, लेकिन इसका फायदा हर इलेक्ट्रिक वाहन को इस तारीख तक नहीं मिलेगा। खासकर इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक खरीदने वालों के लिए यह फैक्ट जानना बेहद जरूरी है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाला PM E-DRIVE इंसेंटिव 31 जुलाई 2026 तक ही उपलब्ध था। यानी अगस्त 2026 में नया इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने पर इस योजना के तहत केंद्र सरकार की सब्सिडी नहीं मिलेगी।
31 मार्च 2028 तक बढ़ी PM E-DRIVE योजना
PM E-DRIVE यानी PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement योजना केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2024 में शुरू की थी। इसका मकसद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने के साथ-साथ चार्जिंग नेटवर्क, EV मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। शुरुआत में यह योजना 31 मार्च 2026 तक लागू होनी थी और इसके लिए 10,900 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। बाद में सरकार ने इसकी अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2028 कर दी। इस योजना की अवधि बढ़ने के साथ सभी वाहन कैटेगरी की सब्सिडी की अवधि नहीं बढ़ाई गई। यही वजह है कि PM E-DRIVE 2028 तक चलने के बावजूद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाला इंसेंटिव पहले ही खत्म हो चुका है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर कितनी सब्सिडी मिलती थी?
1 अप्रैल 2025 से PM E-DRIVE के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर इंसेंटिव की दर घटाकर 2,500 रुपये प्रति kWh कर दी गई थी। इसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपये प्रति वाहन रखी गई थी। इसके अलावा इस योजना का फायदा केवल उन्हीं इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को मिलना था जिनकी एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये तक थी।
इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार 5,000 रुपये प्रति kWh की दर से इंसेंटिव देती थी और अधिकतम 10,000 रुपये प्रति वाहन तक का लाभ मिलता था। यानी 1 अप्रैल 2025 से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाला इंसेंटिव पहले के मुकाबले आधा कर दिया गया था।
31 जुलाई 2026 के बाद नहीं मिलेगी टू-व्हीलर सब्सिडी
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदारों के लिए सबसे अहम तारीख 31 जुलाई 2026 है। सरकार ने मार्च 2026 में इस कैटेगरी के लिए इंसेंटिव की अवधि 31 मार्च 2026 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 की थी। इस दौरान पात्र इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पर 2,500 रुपये प्रति kWh की दर से अधिकतम 5,000 रुपये का इंसेंटिव मिलता रहा। अब 31 जुलाई 2026 की समयसीमा समाप्त हो चुकी है। इसलिए 12 अगस्त 2026 की स्थिति में नया इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहक को PM E-DRIVE के तहत यह सब्सिडी नहीं मिलेगी। सिर्फ योजना के 31 मार्च 2028 तक जारी रहने की जानकारी देखकर इलेक्ट्रिक स्कूटर पर सब्सिडी मिलने की उम्मीद करना सही नहीं होगा।
2028 तक योजना में क्या-क्या जारी रहेगा?
PM E-DRIVE का विस्तार मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक बसों, ट्रकों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और EV टेस्टिंग सुविधाओं जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों के लिए 4,391 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके तहत 14,028 इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और तैनाती एक साथ नहीं होती। अलग-अलग राज्यों और शहरों में इनकी खरीद, सप्लाई और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है। इसलिए योजना के इस हिस्से को 2028 तक जारी रखने की जरूरत बताई गई है।
चार्जिंग नेटवर्क पर भी सरकार का जोर
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक चार्जिंग नेटवर्क की कमी है। लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार खरीदने से पहले यह भी देखते हैं कि लंबी दूरी के दौरान उन्हें आसानी से चार्जिंग स्टेशन मिलेगा या नहीं। इसी चिंता को कम करने के लिए PM E-DRIVE में पब्लिक EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पैसा खर्च किया जा रहा है। सरकार ने सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने से शहरों के साथ-साथ हाईवे और दूसरे प्रमुख मार्गों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ई-रिक्शा और ई-कार्ट को भी मिलेगा फायदा
PM E-DRIVE में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स को भी शामिल किया गया है। ई-रिक्शा और ई-कार्ट जैसे वाहनों के लिए योजना की अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ाई गई है। इन वाहनों का इस्तेमाल शहरों और छोटे कस्बों में बड़ी संख्या में होता है, इसलिए इनके इलेक्ट्रिफिकेशन से कमर्शियल ट्रांसपोर्ट में ईंधन खर्च और प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की अलग-अलग कैटेगरी के लिए नियम और इंसेंटिव की अवधि अलग है। इसलिए हर इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर को 2028 तक सब्सिडी मिलने की बात भी सही नहीं होगी।
10,900 करोड़ रुपये की पूरी योजना
PM E-DRIVE के लिए सरकार ने कुल 10,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि केवल इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की सब्सिडी के लिए नहीं है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों, ट्रकों, एंबुलेंस, चार्जिंग स्टेशन और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों को कवर किया गया है। सरकार की कोशिश है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केवल खरीद के समय छूट न दी जाए, बल्कि देश में ऐसा पूरा सिस्टम तैयार किया जाए जिसमें EV बनाना, खरीदना, चलाना और चार्ज करना आसान हो।
EV खरीदारों को अब क्या समझना चाहिए?
अगर आप अगस्त 2026 में इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो PM E-DRIVE की 2028 वाली तारीख को देखकर भ्रमित न हों। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए इस योजना का इंसेंटिव 31 जुलाई 2026 को समाप्त हो चुका है। इसलिए अब वाहन की कीमत की तुलना करते समय PM E-DRIVE सब्सिडी को अपनी गणना में शामिल नहीं करना चाहिए। वहीं राज्य सरकारों की अपनी EV नीतियों के तहत अलग-अलग जगहों पर मिलने वाले लाभ अलग हो सकते हैं। इसलिए वाहन खरीदने से पहले केंद्र की योजना के साथ अपने राज्य में लागू EV नीति और डीलर की मौजूदा कीमत की भी जांच करना जरूरी है। PM E-DRIVE का फोकस अब केवल इलेक्ट्रिक स्कूटर की शुरुआती कीमत घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में मजबूत और भरोसेमंद इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम तैयार करने पर है।


