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Robotic Vacuum Cleaner: रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर घर का नक्शा कैसे बनाता है? जानिए पूरा विज्ञान
Robotic Vacuum Cleaner: रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर घर का नक्शा कैसे बनाता है? जानिए LiDAR, SLAM टेक्नोलॉजी, AI सेंसर, ऑटोमैटिक सफाई और क्या यह झाड़ू-पोछे की जगह ले सकता है।
Robotic Vacuum Cleaner | How Robotic Vacuum Cleaner Works | Newstrack Hindi News
Robotic Vacuum Cleaner: आजकल बाजार में ऐसे रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर उपलब्ध हैं जो बिना किसी व्यक्ति की मदद के घर में घूमकर फर्श की सफाई कर सकते हैं। आप मोबाइल ऐप से इन्हें चालू कर सकते हैं और ये अपने आप कमरे का नक्शा बनाकर सफाई शुरू कर देते हैं। कुछ मॉडल तो यह भी पहचान लेते हैं कि कौन सा कमरा बेडरूम है, कहां सोफा रखा है और किन जगहों पर इन्हें नहीं जाना चाहिए। लेकिन सवाल है कि एक छोटी-सी मशीन पूरे घर को समझती कैसे है? क्या यह सचमुच झाड़ू लगाने और पोछा लगाने जितनी अच्छी सफाई कर सकती है?
रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर घर का नक्शा कैसे बनाता है?
रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर में कई तरह के सेंसर लगे होते हैं, जो आसपास की जगह को लगातार स्कैन करते रहते हैं। आधुनिक और बेहतर मॉडल में LiDAR यानी लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मशीन के ऊपर लगा एक छोटा-सा लेजर सेंसर तेजी से घूमता है और आसपास की दीवारों तथा वस्तुओं की दूरी मापता है।
यह लेजर प्रकाश की किरणें भेजता है और उनके वापस लौटने में लगे समय के आधार पर मशीन दूरी का अनुमान लगाती है। जब रोबोट कमरे में आगे बढ़ता है, तो वह अलग-अलग दिशाओं से मिली दूरी की जानकारी इकट्ठा करता रहता है। कंप्यूटर इस डेटा को जोड़कर दीवारों, दरवाजों और फर्नीचर की स्थिति का एक डिजिटल नक्शा तैयार कर देता है। इसे आप मोबाइल ऐप पर भी देख सकते हैं।
मशीन को कैसे पता चलता है कि वह घर के किस हिस्से में है?
सिर्फ नक्शा बना लेना काफी नहीं है। रोबोट को यह भी पता होना चाहिए कि वह उस नक्शे में इस समय कहां मौजूद है। इसके लिए आधुनिक मशीनें SLAM तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। SLAM का पूरा नाम Simultaneous Localization and Mapping है।
इस तकनीक में रोबोट एक साथ दो काम करता है। पहला, वह आसपास की जगह का नक्शा बनाता है और दूसरा, उसी नक्शे में अपनी वर्तमान स्थिति का पता लगाता रहता है। उदाहरण के लिए, अगर रोबोट लिविंग रूम से बेडरूम की ओर जाता है, तो वह रास्ते में दीवारों और दूसरी वस्तुओं की स्थिति को पहचानकर समझता है कि वह कितनी दूर आ चुका है।
कुछ मॉडल LiDAR के बजाय कैमरे और दूसरे सेंसर की मदद से भी यह काम करते हैं। कैमरा आधारित सिस्टम को Visual SLAM कहा जाता है। वहीं सस्ते मॉडल में जाइरोस्कोप, टक्कर पहचानने वाले सेंसर और पहियों की गति मापने वाले सेंसर का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे मॉडल कई बार ज्यादा व्यवस्थित नक्शा नहीं बना पाते और सफाई का रास्ता भी कम सटीक हो सकता है।
यह घर की चीजों से टकराए बिना रास्ता कैसे बदलता है?
रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है कि वह घर में रखी चीजों के बीच से सुरक्षित रास्ता निकाले। इसके लिए इसमें इंफ्रारेड, अल्ट्रासोनिक, कैमरा और दूसरे ऑब्स्टेकल डिटेक्शन सेंसर लगाए जा सकते हैं।
जब मशीन के सामने कोई कुर्सी, दीवार या जूता आता है, तो सेंसर उसकी मौजूदगी का पता लगाते हैं। इसके बाद रोबोट अपना रास्ता बदलकर आगे बढ़ जाता है। कुछ महंगे मॉडल कैमरे और AI की मदद से जूते, तार, खिलौने और दूसरे छोटे सामान पहचानने की कोशिश भी करते हैं। हालांकि, हर मशीन हर वस्तु को सही ढंग से नहीं पहचान सकती। पतले तार, पारदर्शी चीजें और छोटे कपड़े कई बार इसके रास्ते में समस्या पैदा कर सकते हैं।
इसके अलावा, मशीन के नीचे लगे खास सेंसर सीढ़ियों या ऊंचाई से नीचे गिरने वाले किनारों को पहचानने में मदद करते हैं। इन्हें क्लिफ सेंसर कहा जाता है। इनकी मदद से रोबोट सीढ़ियों के किनारे पहुंचकर रुक जाता है या दिशा बदल लेता है।
रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर असल में सफाई कैसे करता है?
इसके नीचे एक या अधिक घूमने वाले ब्रश और एक सक्शन मोटर लगी होती है। किनारे पर लगा छोटा साइड ब्रश दीवारों और कोनों के पास मौजूद धूल को मुख्य ब्रश की तरफ खींचता है। मुख्य ब्रश फर्श पर मौजूद बाल, मिट्टी और छोटे कचरे को उठाने में मदद करता है। इसके बाद मोटर हवा के साथ धूल और कचरे को खींचकर एक छोटे डस्टबिन में जमा कर देती है।
कुछ मॉडल में HEPA या दूसरे प्रकार के फिल्टर भी होते हैं, जो खींची गई हवा में मौजूद महीन धूल के कणों को रोकने में मदद करते हैं। हालांकि, हर रोबोटिक वैक्यूम में HEPA फिल्टर नहीं होता। इसलिए खरीदते समय केवल वैक्यूम या स्मार्ट जैसे शब्दों पर भरोसा करने के बजाय उसके फिल्टर और सफाई तंत्र की जानकारी देखना जरूरी है।
क्या रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर पोछा भी लगा सकता है?
कई रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर में वैक्यूम के साथ मॉपिंग का विकल्प भी मिलता है। इनमें पानी की छोटी टंकी और नीचे माइक्रोफाइबर का कपड़ा लगा होता है। मशीन फर्श पर चलते समय इस कपड़े को हल्का गीला रखती है और वह फर्श पर मौजूद महीन धूल को पोंछता जाता है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए। सामान्य रोबोटिक मॉपिंग का मतलब हाथ से पोछा लगाने जैसा नहीं होता। ज्यादातर सामान्य मॉडल केवल गीले कपड़े को फर्श पर घसीटते हैं। वे सूखे या चिपके हुए दागों को रगड़कर साफ नहीं कर पाते। कुछ महंगे मॉडल में घूमने वाले मॉप पैड या कंपन करने वाली प्लेट होती है, जो बेहतर सफाई कर सकती है। फिर भी रसोई में गिरे सूखे दाल के दाग, तेल या जमी हुई गंदगी को हटाने के लिए कई बार हाथ से सफाई करनी पड़ती है।
क्या यह भारतीय घरों में सचमुच उपयोगी है?
भारत में रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर की उपयोगिता घर के फर्श, आकार और रोजमर्रा की सफाई की जरूरतों पर निर्भर करती है। ज्यादातर भारतीय घरों में टाइल्स, मार्बल या ग्रेनाइट जैसे कठोर फर्श होते हैं। इन पर रोज जमा होने वाली धूल, बाल और छोटे कचरे को साफ करने में रोबोटिक वैक्यूम काफी उपयोगी हो सकता है।
खासकर उन घरों में जहां रोज धूल आती है, पालतू जानवर हैं या परिवार के सदस्यों के बाल फर्श पर गिरते रहते हैं, वहां यह मशीन बार-बार सफाई करने का काम कम कर सकती है। आप इसे रोज सुबह या घर से बाहर रहने के दौरान चलाने के लिए सेट कर सकते हैं। इससे फर्श पर जमा होने वाली सामान्य धूल कम होती रहती है।
लेकिन भारतीय घरों में कुछ ऐसी परिस्थितियां भी हैं जहां इसे परेशानी हो सकती है। दरवाजों की ऊंची चौखट, फर्श पर बिछी मोटी दरी, तारों का जाल, छोटे स्टूल और फर्नीचर के नीचे कम जगह इसके रास्ते में बाधा बन सकते हैं। जिन घरों में रोज खाना पकाने के दौरान तेल, मसाले या गीली गंदगी फर्श पर गिरती है, वहां केवल रोबोटिक मॉपिंग पर्याप्त नहीं होगी।
क्या यह झाड़ू-पोछे की जगह पूरी तरह ले सकता है?
फिलहाल ज्यादातर घरों में इसका इस्तेमाल झाड़ू-पोछे के पूरक के रूप में करना ज्यादा व्यावहारिक है। यह रोजाना फर्श पर जमा होने वाली धूल, बाल और छोटे कचरे को साफ कर सकता है, लेकिन हर तरह की गंदगी नहीं हटा सकता।
घर के कोनों, सीढ़ियों, दीवारों के किनारों, ऊंची जगहों और फर्नीचर के बहुत संकरे हिस्सों की सफाई के लिए अब भी हाथ से सफाई करनी पड़ती है। इसी तरह फर्श पर गिरा पानी, चिपचिपे खाद्य पदार्थ या जमी हुई गंदगी सामान्य रोबोटिक वैक्यूम के लिए चुनौती होती है। इसलिए इसे ऐसा उपकरण समझना बेहतर है जो रोजमर्रा की सफाई को आसान बनाता है, न कि ऐसा रोबोट जो घर की पूरी सफाई का काम इंसान से छीन लेता है।
क्या रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर को बार-बार साफ करना पड़ता है?
हां, यह अपने आप सफाई करता है, लेकिन खुद पूरी तरह रखरखाव-मुक्त नहीं है। इसके डस्टबिन में जमा धूल और कचरे को समय-समय पर खाली करना पड़ता है। ब्रश में उलझे बाल निकालने होते हैं और मॉपिंग वाले मॉडल में कपड़े को धोना तथा पानी की टंकी साफ करनी पड़ती है।
कुछ महंगे मॉडल के साथ ऑटो-एम्प्टी डॉक मिलता है। सफाई पूरी होने के बाद रोबोट डॉक पर लौटता है और वहां मौजूद सिस्टम उसके छोटे डस्टबिन से कचरा बड़े बैग या कंटेनर में खींच लेता है। इससे बार-बार डस्टबिन खाली करने की जरूरत कम हो जाती है। हालांकि, फिल्टर, ब्रश और सेंसर की सफाई फिर भी जरूरी रहती है।
इसे खरीदते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
अगर आप रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर खरीदने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले उसकी नेविगेशन तकनीक देखें। LiDAR मैपिंग वाले मॉडल आमतौर पर व्यवस्थित तरीके से सफाई करते हैं और कमरे का नक्शा बेहतर बना सकते हैं। इसके बाद सक्शन क्षमता, बैटरी बैकअप, डस्टबिन का आकार और ब्रश में बाल उलझने की समस्या पर ध्यान दें।
अगर आपके घर में कई कमरे हैं, तो मल्टी-मैप सपोर्ट उपयोगी हो सकता है। इससे मशीन अलग-अलग मंजिलों के नक्शे याद रख सकती है। मॉपिंग वाला मॉडल लेते समय यह भी देखें कि वह पानी की मात्रा नियंत्रित कर सकता है या नहीं और कालीन पर जाने से पहले मॉप पैड ऊपर उठा सकता है या नहीं। एक और जरूरी बात है सर्विस और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता। मशीन में ब्रश, फिल्टर, बैटरी या सेंसर खराब होने पर उनकी मरम्मत और बदलाव संभव होना चाहिए। साथ ही, ऐप के जरिए घर का नक्शा सेव करने वाले मॉडल में डेटा और प्राइवेसी से जुड़ी शर्तें भी पढ़नी चाहिए।
रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर केवल घूमने वाली मशीन नहीं, बल्कि सेंसर, लेजर नेविगेशन, मैपिंग और ऑटोमेटेड सफाई तकनीक का मेल है। यह घर का डिजिटल नक्शा बनाकर अपनी स्थिति पहचानता है और तय रास्ते से सफाई करता है। भारतीय घरों में यह रोजाना जमा होने वाली धूल, बाल और छोटे कचरे को हटाने के लिए काफी उपयोगी हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो हर दिन झाड़ू लगाने में समय नहीं देना चाहते। लेकिन यह अभी पूरी तरह इंसानी सफाई का विकल्प नहीं है। जमी हुई गंदगी, चिपचिपे दाग, सीढ़ियां और कोनों की सफाई के लिए हाथ से काम करना पड़ सकता है। इसलिए इसे घर का सफाई सहायक समझना ज्यादा सही है, न कि ऐसा रोबोट जो घर की सफाई की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले लेता है।


