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ई-चालान में यूपी टॉप पर, लेकिन करोड़ों की वसूली बाकी, जानें यूपी-दिल्ली समेत टॉप-5 राज्यों का हाल
E-Challan Report 2026: 2021 से 2026 के बीच यूपी में सबसे ज्यादा ई-चालान जारी हुए, दिल्ली दूसरे स्थान पर; सरकार ने सख्त नियमों की दी चेतावनी।
E-Challan Report 2026
E-Challan Report 2026: सड़क पर ट्रैफिक नियम तोड़ना अब सिर्फ चालान कटने तक की बात नहीं रह गई है। देशभर में करोड़ों ई-चालान जारी होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनका भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसका असर अब सरकारी आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, जनवरी 2021 से 30 जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में करीब 7.89 करोड़ ई-चालान जारी हुए और इनमें लगभग 11,331 करोड़ रुपये का जुर्माना अब भी बकाया है। वहीं दिल्ली में भी करीब 11,150 करोड़ रुपये के चालान लंबित हैं। यानी सिर्फ यूपी और दिल्ली में ही 22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रैफिक जुर्माना अटका हुआ है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा ई-चालान, 11,331 करोड़ रुपये बाकी
लंबित ट्रैफिक चालान के मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे ऊपर है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से 30 जुलाई 2026 के बीच यूपी में करीब 7.89 करोड़ ई-चालान जारी किए गए। यह किसी भी राज्य में जारी किए गए ई-चालानों की सबसे बड़ी संख्या है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में चालान जारी होने के बावजूद उनकी वसूली की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। राज्य में करीब 11,331 करोड़ रुपये का ट्रैफिक जुर्माना अब भी जमा नहीं हुआ है। यानी चालान काटने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन उसके बाद रकम की वसूली बड़ी चुनौती बनी हुई है। उत्तर प्रदेश में वाहनों की बड़ी संख्या, तेजी से बढ़ते शहर, लगातार बढ़ता ट्रैफिक और नियमों के उल्लंघन की घटनाएं ई-चालान की संख्या बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
दिल्ली में 4.71 करोड़ चालान, करीब 11,150 करोड़ रुपये का जुर्माना बकाया
बकाया ट्रैफिक जुर्माने के मामले में दिल्ली दूसरे नंबर पर है। राजधानी में इस अवधि के दौरान करीब 4.71 करोड़ ई-चालान जारी किए गए। इन चालानों पर लगभग 11,150 करोड़ रुपये की रकम अब तक बकाया है। दिल्ली में कैमरों और डिजिटल निगरानी के जरिए ट्रैफिक नियमों पर नजर रखने की व्यवस्था काफी व्यापक है। रेड लाइट जंप करने, ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट और दूसरे ट्रैफिक उल्लंघनों पर बड़ी संख्या में ई-चालान जारी होते हैं। दिल्ली में समस्या सिर्फ चालान की संख्या नहीं, बल्कि उसके भुगतान की दर भी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में जारी किए गए चालानों में करीब 94.3 प्रतिशत का भुगतान नहीं हुआ था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी में चालान काटे जाने के बाद उन्हें समय पर जमा कराना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
तमिलनाडु में चालान की संख्या यूपी के करीब, लेकिन बकाया काफी कम
तमिलनाडु इस सूची में तीसरे स्थान पर है। जनवरी 2021 से 30 जुलाई 2026 के बीच राज्य में करीब 6.37 करोड़ ई-चालान जारी किए गए। यह संख्या उत्तर प्रदेश के आंकड़े से बहुत दूर नहीं है। लेकिन दोनों राज्यों के बकाए की रकम में बड़ा अंतर है। तमिलनाडु में लंबित ट्रैफिक जुर्माने की कुल रकम करीब 2,122 करोड़ रुपये है। यानी लगभग उतनी ही बड़ी संख्या में चालान जारी होने के बावजूद तमिलनाडु का बकाया उत्तर प्रदेश की तुलना में काफी कम है।
मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में तेलंगाना समेत कई अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान लंबित होने की जानकारी सामने आई है। लेकिन अलग-अलग राज्यों में वाहनों की संख्या, ट्रैफिक नियमों की निगरानी और ई-चालान व्यवस्था का स्तर अलग है। जारी हुए इन आंकड़ों से यह जानकारी निकलकर सामने आई है कि ई-चालान व्यवस्था के विस्तार के साथ-साथ चालान की वसूली पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है।
आखिर लोग ट्रैफिक चालान क्यों नहीं भरते?
ट्रैफिक चालान का भुगतान न होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। कई बार वाहन मालिक तक चालान की सूचना समय पर नहीं पहुंचती। मोबाइल नंबर या पता अपडेट न होने, वाहन के स्वामित्व में बदलाव या पुराने रिकॉर्ड के कारण भी चालान लंबित रह सकता है। वहीं कुछ मामलों में वाहन मालिक को चालान की जानकारी होने के बावजूद वह उसका भुगतान नहीं करता। लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में कुछ लोगों में चालान को नजरअंदाज करने की आदत भी बन सकती है। यही छोटे-छोटे लंबित मामलों का बोझ समय के साथ हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इसलिए चालान काटने के साथ उसकी समय पर वसूली और वाहन मालिक तक सही सूचना पहुंचाना भी जरूरी है।
ई-चालान से कार्रवाई आसान हुई, अब वसूली बड़ी चुनौती
डिजिटल तकनीक ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को काफी आसान बना दिया है। कैमरे और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन जैसी तकनीक की मदद से कई मामलों में पुलिसकर्मी की मौजूदगी के बिना भी वाहन की पहचान कर ई-चालान जारी किया जा सकता है। इससे ट्रैफिक नियमों की निगरानी का दायरा बढ़ा है और चालान काटने की प्रक्रिया तेज हुई है। लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। बड़ी संख्या में चालान जारी होने के बाद अगर उनका भुगतान नहीं होता है तो लंबित मामलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जाता है। इसलिए अब सरकार के सामने सिर्फ ज्यादा चालान जारी करने की नहीं, बल्कि बकाया चालानों की वसूली तेज करने की चुनौती भी है।
नितिन गडकरी ने दी सख्ती की चेतावनी, लाइसेंस पर भी कार्रवाई
लंबित चालानों और बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने नियमों को और सख्त किया है। संसद में सांसद संजय सेठ के सवाल के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
सरकार ने Central Motor Vehicles (Third Amendment) Rules, 2026 लागू किए हैं। नए प्रावधानों के तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले या चालान लंबित रखने वाले वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। बताया गया है कि जनवरी 2026 से शुरू होने वाले वर्ष के दौरान अगर कोई चालक पांच या उससे ज्यादा बार ट्रैफिक नियम तोड़ता है या चालान लंबित रखता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान भी शामिल है।


