WhatsApp मैसेज आखिर पहुंचता कैसे है? एक ‘Hello’ की पूरी डिजिटल यात्रा

WhatsApp Message Kaise Pahunchta Hai: Send बटन दबाने के बाद WhatsApp का एक मैसेज फोन से इंटरनेट, सर्वर और एन्क्रिप्शन की मदद से सामने वाले तक कैसे पहुंचता है? जानिए WhatsApp की पूरी डिजिटल यात्रा और 2009 से अब तक की कहानी।

Yogesh Mishra
Published on: 12 Aug 2026 4:26 PM IST
WhatsApp Message Delivery Process
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WhatsApp Message Delivery Process 

WhatsApp Message Kaise Pahunchta Hai: आज व्हाट्सएप पर किसी को ‘हेलो’ भेजना इतना सामान्य है कि हम शायद ही सोचते हैं कि यह संदेश आखिर सामने वाले फोन तक पहुँचता कैसे है। Send का बटन दबाते ही एक टिक, फिर दो टिक और कभी नीले टिक दिखाई देते हैं। कुछ सेकंड में काम पूरा हो जाता है। लेकिन इस छोटे-से संदेश के पीछे मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, सर्वर, कूटलेखन, डिजिटल पहचान और कई उपकरणों के बीच काम करने वाली जटिल तकनीक होती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सामान्य निजी व्हाट्सएप संदेश सीधे आपके फोन से सामने वाले के फोन तक नहीं जाता। वह इंटरनेट के रास्ते व्हाट्सएप की वितरण व्यवस्था तक पहुँचता है और फिर वहां से प्राप्तकर्ता के उपकरण तक भेजा जाता है।

व्हाट्सएप संदेश सीधे फोन से फोन नहीं जाता

मान लीजिए लखनऊ में ‘ए’ ने दिल्ली में ‘बी’ को लिखा – ‘मैं कल सुबह पहुँच रहा हूँ।‘

‘ए’ के फोन में संदेश लिखे जाने तक वह सामान्य टेक्स्ट है। जैसे ही वह Send दबाता है, व्हाट्सएप उसे सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू करता है। सामान्य निजी चैट में संदेश एंड-टू-एंड एन्क्रिप्ट होता है। इसका मतलब है कि संदेश इस तरह सुरक्षित किया जाता है कि उसकी वास्तविक सामग्री रास्ते में मौजूद व्हाट्सएप सर्वर के लिए भी पढ़ने योग्य नहीं रहती। संदेश को प्राप्तकर्ता के अधिकृत उपकरण तक पहुँचाने के लिए व्हाट्सएप की व्यवस्था काम करती है। इसके आधार में सिग्नल प्रोटोकॉल से विकसित कूटलेखन तकनीक का इस्तेमाल होता है। यानी ‘ए’ के फोन से निकलने वाला संदेश रास्ते में खुले वाक्य के रूप में नहीं जाता। वह encrypted डिजिटल डेटा में बदल जाता है।

मोबाइल से संदेश इंटरनेट तक कैसे पहुँचता है?

‘ए’ अगर मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल कर रहा है तो संदेश सबसे पहले उसके फोन और मोबाइल नेटवर्क के बीच रेडियो संपर्क के जरिए नजदीकी टावर तक जाता है। वहां से वह दूरसंचार कंपनी के नेटवर्क और इंटरनेट के रास्ते आगे बढ़ता है। अगर ‘ए’ वाई-फाई पर है तो रास्ता थोड़ा अलग होगा। संदेश पहले घर या कार्यालय के राउटर तक जाएगा, फिर इंटरनेट सेवा प्रदाता के नेटवर्क से होते हुए आगे बढ़ेगा।

यानी संदेश की शुरुआती यात्रा कुछ ऐसी है: फोन → मोबाइल नेटवर्क या वाई-फाई → इंटरनेट सेवा प्रदाता → इंटरनेट → व्हाट्सएप की सेवा व्यवस्था

इस पूरी यात्रा में संदेश की सामग्री कूटबद्ध यानी encrypted रहती है।

व्हाट्सएप सर्वर आखिर करता क्या है?

यहां एक आम गलतफहमी दूर करना जरूरी है। व्हाट्सएप सर्वर सामान्य निजी संदेश के भीतर लिखी बात को पढ़कर आगे नहीं भेजता। उसका मुख्य काम संदेश को सही खाते और सही अधिकृत उपकरण तक पहुँचाना है। इसे डाकघर की तरह समझ सकते हैं। डाकघर को यह पता होना जरूरी है कि पार्सल किस पते पर जाना है, लेकिन अगर पार्सल बंद है और उसकी चाबी डाकघर के पास नहीं है तो वह उसके भीतर रखी चिट्ठी नहीं पढ़ सकता। व्हाट्सएप की निजी चैट में एंड-टू-एंड कूटलेखन (एन्क्रिप्शन) का मूल उद्देश्य यही है, संदेश की सामग्री केवल बातचीत में शामिल अधिकृत उपकरणों पर पढ़ी जा सके।

अगर सामने वाला फोन बंद हो तो?

अगर ‘बी’ का फोन इंटरनेट से जुड़ा हुआ है तो संदेश लगभग तुरंत उसके उपकरण तक पहुंच सकता है। लेकिन अगर उसका फोन बंद है या इंटरनेट से जुड़ा नहीं है तो संदेश तुरंत नहीं पहुंच पाएगा। ऐसी स्थिति में कूटबद्ध संदेश कुछ समय के लिए व्हाट्सएप की व्यवस्था में वितरण की प्रतीक्षा कर सकता है। सीमा जैसे ही ऑनलाइन आती है, संदेश उसके अधिकृत उपकरण तक पहुंचाया जा सकता है। व्हाट्सएप की कानून-प्रवर्तन संबंधी जानकारी के अनुसार, जो संदेश डिलीवर नहीं हुए हैं, उनके कूटबद्ध रूप को सर्वर पर सीमित अवधि के लिए रखा जा सकता है और 30 दिनों के बाद हटाया जाता है।

एक टिक, दो टिक और नीले टिक का मतलब क्या है?

व्हाट्सएप के टिक वास्तव में संदेश की यात्रा की अलग-अलग अवस्थाओं का संकेत देते हैं। एक टिक आम तौर पर बताता है कि संदेश आपके फोन से निकलकर व्हाट्सएप की व्यवस्था तक पहुंच गया है। दो टिक बताते हैं कि संदेश प्राप्तकर्ता के किसी अधिकृत उपकरण तक पहुंच गया है। दो नीले टिक पढ़े जाने का संकेत देते हैं, बशर्ते पढ़ने की रसीद चालू हो। यानी स्क्रीन पर दिखाई देने वाले ये छोटे-से निशान वास्तव में संदेश की डिजिटल यात्रा की स्थिति बता रहे होते हैं।

क्या व्हाट्सएप सिर्फ एक फोन तक संदेश भेजता है?

व्हाट्सएप एक खाते को कई अधिकृत उपकरणों से जोड़ने की सुविधा देता है। कोई व्यक्ति अपने फोन के साथ कंप्यूटर या दूसरे उपकरण पर भी व्हाट्सएप इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में संदेश को अलग-अलग अधिकृत उपकरणों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की जरूरत होती है। मेटा की तकनीकी जानकारी के अनुसार, निजी बातचीत में प्रत्येक अधिकृत उपकरण के लिए अलग कूटबद्ध सत्र हो सकता है। यानी पाने वाले के पास फोन और लैपटॉप दोनों जुड़े हैं तो संदेश दोनों तक सुरक्षित तरीके से पहुंच सकता है।

ग्रुप में संदेश भेजना और मुश्किल क्यों है?

एक व्यक्ति को संदेश भेजना एक बात है। लेकिन अगर वही संदेश सैकड़ों लोगों के समूह में भेजना हो तो व्यवस्था ज्यादा जटिल हो जाती है। व्हाट्सएप समूहों के लिए सिग्नल प्रोटोकॉल से विकसित ‘सेंडर की’ (sender key) जैसी तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसका उद्देश्य यह है कि बड़े समूहों में भी एंड-टू-एंड कूटलेखन बना रहे और संदेश वितरण बहुत भारी न हो जाए। यानी समूह में भी मूल सिद्धांत वही है—संदेश की सामग्री को रास्ते में पढ़ने योग्य न बनाना।

फोटो, वीडियो और आवाज संदेश कैसे पहुँचते हैं?

टेक्स्ट संदेश छोटा होता है, लेकिन फोटो और वीडियो काफी बड़े हो सकते हैं। इसलिए उनकी यात्रा में अतिरिक्त भंडारण और वितरण व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। फोटो या वीडियो भेजते समय फोन उस मीडिया को डिजिटल डेटा में बदलता है, उसे सुरक्षित करता है और इंटरनेट के रास्ते भेजता है। प्राप्तकर्ता का फोन उस कूटबद्ध डेटा को प्राप्त करके उसे खोलता है और तस्वीर या वीडियो के रूप में दिखाता है। इसी वजह से कभी-कभी चैट में फोटो का संकेत तुरंत दिखाई देता है लेकिन तस्वीर खुलने में कुछ समय लगता है। आवाज संदेश में भी यही मूल सिद्धांत है। आपकी आवाज डिजिटल डेटा में बदलती है, सुरक्षित होती है, इंटरनेट से गुजरती है और सामने वाले फोन पर फिर सुनाई देने वाली आवाज बन जाती है।

व्हाट्सएप कॉल में आवाज कैसे जाती है?

व्हाट्सएप कॉल में आपकी आवाज पहले डिजिटल डेटा में बदलती है। फिर वह कूटबद्ध होकर नेटवर्क के जरिए दूसरे व्यक्ति के उपकरण तक पहुंचती है। कॉल का नेटवर्क मार्ग परिस्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। कुछ मामलों में उपकरण सीधे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं और कुछ स्थितियों में व्हाट्सएप की मध्यवर्ती व्यवस्था के जरिए कॉल को आगे बढ़ाया जा सकता है। व्हाट्सएप के अनुसार, कॉल को सर्वर के जरिए रिले किए जाने पर भी एंड-टू-एंड कूटलेखन बना रहता है। कंपनी ने आईपी पते को छिपाने के लिए कॉल को अपने सर्वर से रिले कराने का विकल्प भी दिया है।

इंटरनेट बंद हो तो क्या होगा?

अगर फोन में इंटरनेट ही नहीं है तो संदेश आगे नहीं जा सकता। आप Send दबा सकते हैं और संदेश आपकी चैट में दिखाई दे सकता है, लेकिन वह व्हाट्सएप की वितरण व्यवस्था तक नहीं पहुंचेगा। इंटरनेट वापस आते ही ऐप उसे भेजने की कोशिश कर सकता है। यानी व्हाट्सएप इंटरनेट आधारित सेवा है। मोबाइल नेटवर्क या वाई-फाई के बिना उसका संदेश रास्ते पर ही रुक जाता है।

क्या व्हाट्सएप हमारी पूरी चैट अपने सर्वर पर रखता है?

सामान्य निजी चैट के मामले में व्हाट्सएप का कहना है कि डिलीवर हो चुके संदेशों का पूरा चैट इतिहास वह अपने सर्वर पर स्थायी रूप से नहीं रखता। चैट इतिहास मुख्य रूप से उपयोगकर्ता के उपकरणों पर रहता है। इसी वजह से फोन बदलने पर पुराने संदेश अपने-आप वापस नहीं आ जाते। उन्हें वापस पाने के लिए बैकअप या चैट स्थानांतरण जैसी व्यवस्था जरूरी हो सकती है। चैट बैकअप की कहानी अलग है

और यहां एक जरूरी अंतर है - व्हाट्सएप पर संदेश भेजना और उसका बैकअप बनाना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। अगर यूजर गूगल खाते या आईक्लाउड में चैट का बैकअप रखता है तो बातचीत की प्रति क्लाउड में जा सकती है। व्हाट्सएप ने 2021 में एंड-टू-एंड कूटबद्ध बैकअप का विकल्प भी शुरू किया था। इसमें यूजर पासवर्ड या 64 अंकों की कूटलेखन कुंजी के जरिए बैकअप को सुरक्षित कर सकता है। इसलिए संदेश की यात्रा के दौरान सुरक्षा और वर्षों तक रखे गए बैकअप की सुरक्षा को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का मतलब यह नहीं कि व्हाट्सएप को आपके बारे में कुछ भी पता नहीं, यह एक बेहद महत्वपूर्ण अंतर है। एंड-टू-एंड कूटलेखन मुख्य रूप से संदेश की सामग्री को सुरक्षित करता है। लेकिन सेवा चलाने के लिए कुछ तकनीकी और गैर-सामग्री संबंधी जानकारी की जरूरत हो सकती है। मसलन संदेश किस खाते से किस खाते की ओर जा रहा है, वह पहुंचा या नहीं, कौन-से उपकरण जुड़े हैं और सेवा को चलाने के लिए कौन-सी तकनीकी जानकारी आवश्यक है—ये बातें संदेश की वास्तविक सामग्री से अलग हैं। इसलिए “व्हाट्सएप मेरे संदेश नहीं पढ़ सकता” और “व्हाट्सएप को मेरे इस्तेमाल के बारे में कुछ भी पता नहीं” एक ही बात नहीं है।

अगर फोन ही किसी और के हाथ लग जाए तो?

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नेटवर्क की यात्रा को सुरक्षित करता है। लेकिन अगर आपका फोन खुला हुआ किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में है तो संदेश उसकी स्क्रीन पर सामान्य रूप में पढ़ा जा सकता है। यही वजह है कि फोन का स्क्रीन लॉक, व्हाट्सएप का चैट लॉक, गुप्त कोड और उपकरण सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं। एन्क्रिप्शन यह सुनिश्चित नहीं कर सकता कि प्राप्तकर्ता या उसका उपकरण जानकारी का क्या करेगा।

व्हाट्सएप की शुरुआत कैसे हुई?

व्हाट्सएप की शुरुआत 2009 में जैन कूम और ब्रायन एक्टन ने की थी। दोनों पहले याहू में काम कर चुके थे। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में व्हाट्सएप आज की तरह संदेश भेजने वाली ऐप थी ही नहीं। कूम ने आईफोन और नए उभरते ऐप बाजार की संभावनाओं को देखते हुए ऐसी ऐप की कल्पना की जिसमें लोग अपनी स्थिति बता सकें, जैसे व्यस्त, उपलब्ध या बैठक में। ‘व्हाट्सएप’ नाम भी अंग्रेजी के सामान्य वाक्य “व्हाट्स अप?” से निकला था।

स्टेटस से मैसेजिंग ऐप बनने तक

शुरुआती व्हाट्सएप का काम था लोगों को यह बताना कि सामने वाला क्या कर रहा है। लेकिन फिर एप्पल की पुश नोटिफिकेशन सुविधा ने पूरी कहानी बदल दी। जब कोई उपयोगकर्ता अपनी स्थिति बदलता तो उसके संपर्कों को सूचना मिलने लगी। लोगों ने इस सुविधा का इस्तेमाल आपस में छोटे संदेश भेजने के लिए करना शुरू कर दिया। यहीं संस्थापकों को समझ आया कि लोगों को केवल स्टेटस बताने वाली ऐप नहीं, बल्कि इंटरनेट के जरिए सीधे संदेश भेजने वाली सेवा चाहिए। यहीं से व्हाट्सएप की असली दिशा तय हुई।

फोन नंबर बना पहचान का आधार

व्हाट्सएप की सबसे बड़ी सरलता थी कि यूजर को अलग यूजर नेम या नया सामाजिक नेटवर्क बनाने की जरूरत नहीं थी। फोन नंबर ही पहचान का आधार बन गया। अगर किसी व्यक्ति का नंबर आपके फोन में था और वह व्हाट्सएप इस्तेमाल करता था तो वह आपकी संपर्क सूची में दिखाई दे सकता था। इससे फोन की पुरानी संपर्क सूची ही डिजिटल सामाजिक नेटवर्क बन गई।

एसएमएस के मुकाबले व्हाट्सएप क्यों तेजी से बढ़ा?

उस समय एसएमएस का इस्तेमाल बहुत व्यापक था। लेकिन खासकर अंतरराष्ट्रीय संदेशों के लिए लागत बड़ी समस्या हो सकती थी। व्हाट्सएप ने इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल किया। इससे एक ही सेवा के जरिए पाठ, फोटो, वीडियो और बाद में आवाज तथा कॉल भेजना संभव हुआ। धीरे-धीरे व्हाट्सएप एसएमएस और पारंपरिक मोबाइल संदेश व्यवस्था का बड़ा विकल्प बन गया।

2014 में फेसबुक ने व्हाट्सएप को खरीदा

2014 की शुरुआत तक व्हाट्सएप तेजी से बढ़ चुका था। फरवरी 2014 में फेसबुक ने व्हाट्सएप को खरीदने की घोषणा की। सौदे का घोषित तत्काल मूल्य करीब 16 अरब डॉलर था। इसके अलावा संस्थापकों और कर्मचारियों के लिए करीब 3 अरब डॉलर के शेयर आधारित प्रोत्साहन थे। इसी वजह से इस अधिग्रहण को आम तौर पर करीब 19 अरब डॉलर का सौदा कहा गया। यह तकनीकी उद्योग के सबसे चर्चित अधिग्रहणों में से एक था।

2016 में आया सबसे बड़ा बदलाव - एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन

5 अप्रैल 2016 को व्हाट्सएप ने घोषणा की कि उसके निजी संदेश, समूह बातचीत, फोटो, वीडियो, फाइल, आवाज संदेश और कॉल एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होंगे। यहीं व्हाट्सएप की पहचान केवल ‘इंटरनेट मैसेजिंग ऐप’ से आगे बढ़कर ‘निजी सुरक्षित संदेश सेवा’ के रूप में मजबूत हुई। एक अरब से ज्यादा उपयोगकर्ताओं के स्तर पर डिफॉल्ट एंड-टू-एंड कूटलेखन लागू करना अपने आप में बहुत बड़ा तकनीकी कदम था।

व्हाट्सएप ने फिर जोड़े कॉल, स्टेटस और बिजनेस

समय के साथ व्हाट्सएप केवल टेक्स्ट मैसेजिंग तक सीमित नहीं रहा। आवाज और वीडियो कॉल आए। कंप्यूटर पर व्हाट्सएप चलाने की सुविधा आई। फिर आधुनिक स्टेटस आया, जिसमें फोटो और वीडियो 24 घंटे तक साझा किए जा सकते थे। 2018 में व्हाट्सएप बिजनेस भी शुरू हुआ। इससे छोटे कारोबारों को ग्राहकों से सीधे बातचीत करने का रास्ता मिला। आज कारोबार ग्राहक सेवा, खरीदारी, सूचना और दूसरी व्यावसायिक बातचीत के लिए भी व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं।

भारत में व्हाट्सएप इतना बड़ा क्यों बना?

भारत में स्मार्टफोन और सस्ते मोबाइल डेटा के विस्तार ने व्हाट्सएप को बहुत तेजी से आम लोगों तक पहुंचाया। परिवार, दोस्त, स्कूल, कार्यालय, दुकानदार, छोटे कारोबारी, राजनीतिक संगठन और स्थानीय समुदाय, लगभग हर स्तर पर इसका इस्तेमाल बढ़ता गया। 2018 में व्हाट्सएप ने जियोफोन जैसे इंटरनेट वाले साधारण फोन के लिए भी अपना संस्करण उपलब्ध कराया। इससे सेवा की पहुंच सिर्फ महंगे स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रही।

व्हाट्सएप के साथ अफवाहों की समस्या भी आई

जिस ऐप ने लोगों को तेजी से जोड़ने का काम किया, वही गलत सूचना फैलाने का माध्यम भी बनने लगी। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण व्हाट्सएप हर निजी संदेश को पढ़कर यह तय नहीं कर सकता कि उसमें सही जानकारी है या गलत। इसलिए कंपनी ने बार-बार भेजे गए संदेशों पर संकेत, अग्रेषण की सीमाएं और दूसरे उपाय शुरू किए। 2020 में कंपनी ने कहा था कि अग्रेषण की सीमा लगाने के बाद अत्यधिक अग्रेषित संदेशों में लगभग 25 प्रतिशत कमी आई थी।

दो अरब से तीन अरब से ज्यादा यूजर्स तक

2020 में व्हाट्सएप ने दो अरब यूजर्स का आंकड़ा पार करने की घोषणा की। इसके बाद Communities, Channels और कई अन्य सुविधाएं जुड़ती गईं। अब व्हाट्सएप सिर्फ व्यक्ति से व्यक्ति बातचीत का माध्यम नहीं है। यह निजी चैट, समूह बातचीत, समुदाय और बड़े पैमाने पर सूचना प्रसारण—इन सभी का मिश्रण बन चुका है। मेटा की 2026 की तकनीकी जानकारी के अनुसार व्हाट्सएप को तीन अरब से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं।

एक सामान्य संदेश की पूरी यात्रा

अब ‘ए’ और ‘बी’ वाले उदाहरण को एक बार फिर बहुत सरल रूप में समझिए।

पहला चरण: ‘ए’ फोन पर संदेश लिखता है।

दूसरा चरण: Send दबाने पर संदेश एन्क्रिप्ट होता है।

तीसरा चरण: संदेश मोबाइल नेटवर्क या वाई-फाई के जरिए इंटरनेट पर जाता है।

चौथा चरण: व्हाट्सएप की वितरण व्यवस्था उसे प्राप्तकर्ता के खाते और अधिकृत उपकरणों की ओर भेजती है।

पांचवां चरण: ‘बी’ का फोन ऑनलाइन है तो संदेश तुरंत पहुंचता है। ऑफलाइन है तो संदेश कुछ समय प्रतीक्षा कर सकता है।

छठा चरण: ‘बी’ का फोन संदेश को खोलता है।

सातवां चरण: ‘बी’ की स्क्रीन पर मैसेज लिखा दिखाई देता है।

आठवां चरण: ‘ए’ को डिलीवरी की स्थिति टिक के रूप में दिखाई देती है।

पूरी प्रक्रिया कुछ सेकंड या उससे भी कम समय में पूरी हो सकती है।

लेकिन समुद्र के नीचे की केबल का क्या?

अगर ‘ए’ और ‘बी’ अलग-अलग देशों या महाद्वीपों में हैं तो संदेश की यात्रा का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों से गुजर सकता है। इन केबलों में डेटा विद्युत संकेत की तरह नहीं, बल्कि प्रकाश संकेतों के रूप में बहुत तेज गति से यात्रा करता है। यानी आपके फोन पर लिखा छोटा-सा “हैलो” हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचने के लिए वैश्विक इंटरनेट ढांचे का इस्तेमाल कर सकता है।

क्या व्हाट्सएप सचमुच एक डिजिटल डाकघर जैसा है?

आपका फोन संदेश लिखने की जगह है। कूटलेखन उसे बंद लिफाफे में बदलता है। इंटरनेट सड़क का काम करता है। व्हाट्सएप की व्यवस्था वितरण केंद्र की तरह काम करती है और सामने वाला फोन वह जगह है जहां लिफाफा खुलता है। लेकिन डिजिटल दुनिया की खासियत यह है कि यह डाक व्यवस्था एक सेकंड के छोटे हिस्से में अरबों संदेशों को संभाल सकती है।

व्हाट्सएप की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

इसकी सबसे बड़ी ताकत शायद इसकी सरलता है। उपयोगकर्ता को यह नहीं पता होना चाहिए कि संदेश किस सर्वर से गुजर रहा है, कौन-सी कूटलेखन कुंजी इस्तेमाल हो रही है या डेटा किस समुद्री केबल से होकर जा रहा है। उसे सिर्फ संपर्क खोलना है, संदेश लिखना है और Send दबाना है। पर्दे के पीछे की पूरी जटिलता तकनीक संभाल लेती है।

2009 में व्हाट्सएप की शुरुआत एक छोटी-सी स्टेटस ऐप के रूप में हुई थी। फिर लोगों ने उसका इस्तेमाल संदेश भेजने के लिए करना शुरू किया। वहां से यह दुनिया की सबसे बड़ी निजी संदेश सेवाओं में से एक बन गई। फिर इसमें कॉल आए, फोटो और वीडियो आए, कंप्यूटर आया, बिजनेस आया, स्टेटस आया, कम्युनिटीज और चैनल आए। आज व्हाट्सएप निजी बातचीत के साथ कारोबार, सूचना प्रसारण और दूसरी डिजिटल सेवाओं का भी हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसकी मूल तकनीकी कहानी अब भी वही है—एक फोन से दूसरे अधिकृत उपकरण तक सुरक्षित डिजिटल जानकारी पहुंचाना।

यही आधुनिक इंटरनेट की सबसे बड़ी खूबसूरती है - पीछे दुनिया की सबसे जटिल तकनीक काम करती है, लेकिन सामने उपयोगकर्ता को सिर्फ एक Send बटन और दो छोटे टिक दिखाई देते हैं।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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